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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

भागीदारी गारंटी योजना

25thseptember 2019

समाचार में क्यों?

भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक प्रमुख ने यह आशा व्यक्त की है कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय की भागीदारी गारंटी योजना (Participatory Guarantee Scheme-PGS) अधिक-से-अधिक किसानों को जैविक फसल उगाने के लिये प्रोत्साहित करेगी।

भागीदारी गारंटी योजना (PGS ) क्या है?

  • यह जैविक उत्पादों को प्रमाणित करने की एक प्रक्रिया है, जो सुनिश्चित करती है कि उनका उत्पादन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार किया गया है अथवा नहीं।
  • यह प्रमाणन, प्रलेखित लोगो (Documented Logo) या वचन (Statement) के रूप में होता है।
  • PGS अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लागू एक जैविक गुणवत्ता आश्वासन पहल (Quality Assurance Initiative) है, जो उत्पादकों और उपभोक्ताओं सहित हितधारकों की भागीदारी पर जोर देती है।
  • यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें लोग समान स्थितियों में एक दूसरे के उत्पादन कार्यों का मूल्यांकन, निरीक्षण और सत्यापन करते हैं तथा जैविक प्रमाणीकरण पर निर्णय लेते हैं।
  • यह योजना कृषि और सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा क्रियान्वित की जाती है।

उद्देश्यः

  • भारतीय जैविक बाजार के विकास को बढ़ावा देना।
  • छोटे और सीमांत किसानों को आसानी से जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त करने में मदद करना।
  • जैविक उत्पादों की घरेलू मांग को बढ़ाना।

PGS के चार स्तम्भः

सरकार का PGS मैनुअल 2015, रेखांकित करता है कि भारत में यह प्रणाली ‘ भागीदारी, सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण, पारदर्शिता तथा विश्वास’ पर आधारित हैः

भागीदारीः

  • प्रमाणीकरण प्रणाली में हितधारकों की सक्रिय भागीदारी होती है जिसमें न केवल किसान, बल्कि व्यापारी और उपभोक्ता भी शामिल हैं।
  • यह प्रमाणन निर्णयों को लागू करने में हितधारकों की प्रत्यक्ष भागीदारी को सक्षम बनाता है।

सहभागितापूर्ण दृष्टिकोणः

  • कार्यान्वयन और निर्णय लेने के लिये सामूहिक रूप से जिम्मेदारी ली जाती है, जो एक साझे दृष्टिकोण पर आधारित होती है।
  • प्रत्येक हितधारक संगठन या च्ळै समूह , PGS इंडिया कार्यक्रम के समग्र दृष्टिकोण और मानकों के अनुरूप अपनी योजना को बना सकता है।

पारदर्शिताः

  • जैविक गारंटी प्रक्रिया में उत्पादकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पारदर्शिता बनाए रखी जाती है।
  • प्रत्यक्ष संवाद, हितधारकों को पारदर्शिता के साथ निर्णय लेने में मदद करता है।
  • बैठकों में सूचना साझाकरण व निर्णय में भागीदारी के माध्यम से पारदर्शिता स्थापित की जाती है।

विश्वासः

  • PGS का मूल विचार इस बात पर आधारित है कि उत्पादकों पर भरोसा किया जा सकता है तथा PGS प्रणाली इस विश्वास को जाँच के द्वारा सही सिद्ध करेगी ।

लाभः

  • योजना से संबंधित प्रक्रियायें सरल हैं व दस्तावेज बुनियादी हैं।
  • किसान स्थानीय भाषा का इस्तेमाल कर सकतें हैं।
  • सभी सदस्य एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं और एक दूसरे की सहायता करते हैं।
  • किसान अभ्यास के माध्यम से जैविक प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझते हैं।
  • मूल्यांकनकर्त्ता किसानों के साथ रहते हैं जिससे बेहतर निगरानी संभव हो पाती है, इसके साथ ही तीसरे पक्ष की निगरानी की लागत भी कम होती है।
  • क्षेत्रीय PGS समूहों के मध्य पारस्परिक पहचान तथा सहायता, प्रसंस्करण और विपणन के लिये बेहतर नेटवर्किंग सुनिश्चित करता है।
  • उत्पादक समूह प्रमाणन प्रणाली के विपरीत PGS हर किसान को व्यक्तिगत प्रमाण पत्र प्रदान करता है जिसमें किसान, समूह से स्वतंत्र अपनी उपज का विपणन करने के लिये स्वतंत्र होता है।
  • यह किसानों को दस्तावेजों के प्रबंधन और प्रमाणीकरण प्रक्रिया के लिये महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये प्रशिक्षण भी प्रदान करता है।

सीमाएं:

  • PGS प्रमाणीकरण केवल उन किसानों या समुदायों के लिये है जो एक समूह के रूप में संगठित हो सकते हैं और प्रदर्शन कर सकते हैं।
  • यह PGS किसानों द्वारा उत्पादित उन प्रत्यक्ष उत्पादों पर लागू होता है, जिसमें केवल कृषि गतिविधियाँ जैसे कि फसल उत्पादन, प्रसंस्करण, पशु पालन और ऑफ-फार्म प्रसंस्करण वाले उत्पाद शामिल होते हैं।
  • PGS के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों या पाँच सदस्यों से कम किसानों वाले समूहों को शामिल नहीं किया जाता है। कृषकों को या तो तीसरे पक्ष के प्रमाणीकरण का विकल्प चुनना होगा या मौजूदा स्थानीय PGS समूह में शामिल होना होगा।

 

प्रोजेक्ट नेत्र

समाचार में क्यों?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) ने भारतीय उपग्रहों को मलबे (Debris) और अन्य खतरों से सुरक्षित रखने के लिये अंतरिक्ष में एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System)  प्रोजेक्ट नेत्र (Project NETRA) शुरू किया है।

प्रोजेक्ट का महत्त्वः

  • मानव के 50 वर्षों के अंतरिक्ष इतिहास में पृथ्वी की कक्षा के चारों तरफ घूमने वाली कचरे की एक खतरनाक पट्टी बन गई है। वर्तमान में ISRO के भूस्थैतिक कक्षा (36,000 किमी.) में 15 कार्यात्मक भारतीय संचार उपग्रह हैंय निम्न भू कक्षा (2,000 किमी.) में 13 रिमोट सेंसिंग उपग्रह तथा पृथ्वी की मध्यम कक्षा में आठ नेविगेशन उपग्रह स्थापित हैं।
  • अंतरिक्ष में लगभग 17,000 मानव निर्मित वस्तुएँ मॉनीटर की जाती हैं जिनमें से 7% वस्तुएँ क्रियाशील हैं।
  • एक समयावधि के बाद ये वस्तुएँ अक्रियाशील हो जाती हैं और अंतरिक्ष में घूर्णन करने के दौरान एक-दूसरे से टकराती रहती हैं। प्रत्येक वर्ष इन वस्तुओं के टकराने से लगभग 250 विस्फोट होते हैं जिसके फलस्वरूप मलबों (Debris) के छोटे-छोटे टुकड़े अत्यंत तीव्र गति से घूर्णन करते रहते हैं।
  • अंतरिक्ष में उपस्थित निष्क्रिय उपग्रहों और रॉकेट के मलबे पृथ्वी की कक्षा में कई वर्षों तक विद्यमान रहते हैं और ये मलबे किसी सक्रिय उपग्रहों को क्षति पहुँचा सकते हैं।
  • लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत वाली यह परियोजना, अन्य अंतरिक्ष शक्तियों वाले देशों की तरह भारत की अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (Space Situational Awareness) क्षमता को बढ़ाएगी।
  • इसका उपयोग मलबे से भारतीय उपग्रहों को होने वाले खतरों का अनुमान लगाने के साथ-साथ देश को मिसाइल या अंतरिक्ष हमले के खिलाफ एक चेतावनी देने के रूप में भी किया जा सकेगा।
  • इसकी स्थापना पहले पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में की जाएगी जिसमें रिमोट सेंसिंग स्पेसक्राफ्ट (Remote Sensing Spacecraft) भी शामिल होगा।

 

प्रीलिम्स के लिए तथ्य:

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार:

  • वर्ष 2018 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के लिये फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन को चुना गया।
  • यह पुरस्कार फिल्म व सिनेमा जगत का सर्वोच्च सम्मान है। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिये प्रदान किया जाता है।
  • यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा ‘भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादा साहेब फाल्के की स्मृति में वर्ष 1969 में शुरू किया गया।
  • वर्ष 1969 में पहली बार देविका रानी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • अमिताभ बच्चन को वर्ष 1984 में पद्मश्री, वर्ष 2001 में पद्म भूषण और वर्ष 2015 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

 

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