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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

ब्रू शरणार्थी संकट

समाचार में क्यों?

ब्रू शरणार्थी संकट (Bru Refugee Crisis) को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार तथा त्रिपुरा सरकार, मिज़ोरम सरकार तथा ब्रू जनजाति के प्रतिनिधियों के बीच 16 जनवरी 2020 को समझौता किये जाने की उम्मीद है।

प्रमुख बिंदु:

  • संभावित नए समझौते के ड्राफ्ट के अनुसार, लगभग 35,000 ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा इनके पुनर्वास में मदद करने के लिये सहायता दी जाएगी।
  • नवंबर 2019 में त्रिपुरा सरकार ने ब्रू शरणार्थियों के पुनर्वास के लिये स्वीकृति प्रदान की थी।
  • वर्ष 2018 में हुए समझौते के अनुसार, ब्रू शरणार्थियों को मिज़ोरम में बसाया गया जबकि नए समझौते के ड्राफ्ट के अनुसार अब इन्हें त्रिपुरा में बसाया जाएगा।
  • संभावित नए समझौते के ड्राफ्ट के अनुसार, ब्रू समुदाय के प्रत्येक परिवार को कृषि भूमि के पट्टों के अलावा व्यक्तिगत भू-खंड भी आवंटित किये जाएंगे।
  • प्रत्येक व्यक्तिगत भू-खंड 2,500 वर्ग फीट का होगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक परिवार को आजीविका हेतु प्रतिमाह 5,000 रुपए की आर्थिक मदद तथा अगले दो वर्षों तक निशुल्क राशन प्रदान किया जाएगा।
  • ब्रू समुदाय को त्रिपुरा की मतदाता सूची में भी सम्मिलित किया जाएगा।

ब्रू समुदाय (Bru Community) :

  • ब्रू समुदाय पूर्वोत्तर भारत तथा बांग्लादेश के चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाला एक जनजातीय समूह है।
  • मिज़ोरम में ब्रू समुदाय को अनुसूचित जनजाति का एक समूह तथा त्रिपुरा में एक अलग जाति समूह माना जाता है।
  • ब्रू समुदाय को त्रिपुरा में रिआंग (Reang) नाम से जाना जाता है।
  • इस समुदाय के लोग ब्रू भाषा बोलते हैं।

पृष्ठभूमि:

  • ब्रू समुदाय का आवासीय क्षेत्र भारत में मिज़ोरम, त्रिपुरा और बांग्लादेश में चटगाँव पहाड़ी के कुछ क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
  • वर्ष 1995 में मिज़ोरम राज्य के चुनावों में भागीदारी को लेकर ब्रू समुदाय और मिज़ो समुदाय के लोगों के मध्य तनाव उत्त्पन्न हो गया। मिज़ो समुदाय के लोगों का कहना था कि ब्रू समुदाय के लोग राज्य के निवासी नहीं हैं।
  • ब्रू और बहुसंख्यक मिज़ो समुदाय के लोगों के बीच वर्ष 1996 में हुआ सांप्रदायिक दंगा इनके पलायन का कारण बना।
  • वर्ष 1997 में ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (Bru National Liberation Front-BNLF) ने एक मिज़ो अधिकारी की हत्या कर दी जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच विवाद के चलते दंगे भड़क गए और अल्पसंख्यक होने के कारण ब्रू समुदाय को अपना घर-बार छोड़कर त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में आश्रय लेना पड़ा।

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट, 2019

समाचार में क्यों?

हाल ही में शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट, 2019 (Annual Status of Education Report-ASER, 2019) जारी की गई। यह रिपोर्ट भारत की शिक्षा प्रणाली के परिणामों के मद्देनज़र पेश की जाती है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट, 2019 मुख्यतः 0-8 वर्ष आयु वर्ग (Early Years) के छोटे बच्चों पर केंद्रित है। यह इस शृंखला की 14वीं रिपोर्ट है।
  • असर (ASER), 2019 में भारत के 24 राज्यों के 26 ज़िलों में आयोजित सर्वेक्षण में कुल 1,514 गाँवों; 30,425 घरों और 4-8 वर्ष आयु वर्ग के 36,930 बच्चों को शामिल किया गया है।
  • इस रिपोर्ट के अंतर्गत शामिल/चिंहित बच्चों के पूर्व प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय में नामांकन तथा कुछ महत्त्वपूर्ण विकासात्मक संकेतकों जैसे- संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक भाषा और गणित एवं सामाजिक और भावनात्मक विकास से संबंधित जानकारियाँ एकत्रित की गई हैं।
  • वर्ष 2005 से प्रतिवर्ष ग्रामीण भारत के 3-16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के विद्यालयों में नामांकन की स्थिति और 5-16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की बुनियादी पढ़ने और गणित के प्रश्नों को हल करने की क्षमता पर ASER रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार, 4 और 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में होना चाहिये। इस आयु के बच्चों में विभिन्न प्रकार के कौशल जैसे- संज्ञानात्मक कौशल, सामाजिक और भावनात्मक कौशल तथा साथ ही औपचारिक स्कूली शिक्षा के लिये आवश्यक वैचारिक आधार (Conceptual Foundation) विकसित करने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2010 के बाद इस सर्वेक्षण में उन माप योग्य मानकों को भी शामिल किया गया, जो इस कानून के तहत देश के किसी भी विद्यालय के लिये बाध्यकारी हैं।

ASER, 2019 के मुख्य निष्कर्ष:

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट, 2019 के अनुसार 4-8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का किसी भी प्रकार के शैक्षणिक संस्थान (शासकीय या अशासकीय) में नामांकन 90% से अधिक है।

  • नामांकन में बच्चों की उम्र में वृद्धि के साथ बढ़ोतरी देखी गई है। रिपोर्ट के अंतर्गत शामिल/चिंहित ज़िलों में 4 वर्ष के 91.3% बच्चे और 8 वर्ष के 99.5% बच्चे नामांकित हैं।

बच्चों की उम्र और नामांकन पैटर्न में यह विविधता भी देखी गई कि एक ही उम्र के बच्चे विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों में नामांकित हैं।

  • उदाहरण के लिये 5 वर्ष की आयु के 70% बच्चे आँगनवाड़ियों या पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में नामांकित हैं, जबकि 6% बच्चे अभी से ही विद्यालय में कक्षा 1 में नामांकित हैं। 6 वर्ष की आयु के 32.8% बच्चे आँगनवाड़ियों या पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में हैं तथा 46.4% बच्चे कक्षा 1 और 18.7% कक्षा 2 या उससे आगे की कक्षाओं में हैं।

इन छोटे बच्चों के बीच भी लड़कों और लड़कियों के नामांकन पैटर्न अलग-अलग देखे गए जिसमें लड़के निजी संस्थाओं और लड़कियाँ सरकारी संस्थाओं में ज्यादा नामांकित हैं।

  • उम्र के साथ यह अंतराल और बढ़ता जाता है, उदाहरण के लिये 4 और 5 वर्ष के बच्चों में से 56.8% लड़कियाँ तथा 50.4% लड़के सरकारी पूर्व-प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालय में नामांकित हैं।
  • जबकि 43.2% लड़कियाँ एवं 49.6% लड़के निजी पूर्व-प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालय में नामांकित हैं।
  • 6-8 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों में सभी लड़कियों में से 61.1% लड़कियाँ और सभी लड़कों में से 52.1% लड़के सरकारी पूर्व-प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालय में नामांकित हैं।

ASER, 2019 से निकलने वाले नीति निहितार्थ

  • आँगनवाड़ियाँ बहुत बड़े अनुपात में छोटे बच्चों को पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में जाने से पहले विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध कराती हैं। अतः इन आँगनवाड़ियों को सभी बच्चों को शामिल करने और 3 तथा 4 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिये उपयुक्त स्कूल रेडीनेस गतिविधियों जैसे कार्यक्रम का संचालन करने के लिये और सशक्त बनाया जाना चाहिये।
  • ASER, 2019 के आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक भाषा और गणित एवं सामाजिक व भावनात्मक विकास संबंधी बच्चों के प्रदर्शन पर उनकी आयु का भी प्रभाव है, इसलिये बड़े बच्चे छोटे बच्चों की तुलना में अधिक सवाल सही हल कर पाते हैं। कम आयु के बच्चों को विद्यालय में नामांकित कर प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने से उन्हें नुकसान पहुँचता है जिसे दूर करना अत्यंत मुश्किल होता है।
  • ASER, 2019 के आँकड़ों से बच्चों की प्रारंभिक भाषा और गणित के प्रदर्शन पर उनके संज्ञानात्मक कौशल का प्रभाव दिखाई देता है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों को सिखाने में संज्ञानात्मक कौशल के विकास पर ध्यान देना चाहिये न कि किताबी या विषय आधारित ज्ञान पर। इससे बच्चों को भविष्य में भरपूर लाभ प्राप्त हो सकेगा।
  • 4-8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एक साथ सतत् क्रम में देखना चाहिये और कक्षा व पाठ्यक्रम का निर्माण इसको ध्यान में रखकर करना चाहिये तथा एक प्रभावी और लागू करने योग्य पाठ्यक्रम के लिये, डिज़ाइनिंग, प्लानिंग, पायलटिंग और अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को ज़मीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाना चाहिये।

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (ASER) क्या है?

  • असर (Annual Status of Education Report-ASER) एक वार्षिक सर्वेक्षण है जिसका उद्देश्य भारत में प्रत्येक राज्य और ग्रामीण ज़िले के बच्चों की स्कूली शिक्षा की स्थिति और बुनियादी शिक्षा के स्तर का विश्वसनीय वार्षिक अनुमान प्रदान करना है।
  • यह आम लोगों द्वारा किया जाने वाला देश का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है, साथ ही यह देश में बच्चों की शिक्षा के परिणामों के बारे में जानकारी का एकमात्र उपलब्ध वार्षिक स्रोत भी है।
  • इस सर्वेक्षण की शुरुआत 2005 में की गई थी।
  • यह सर्वेक्षण शिक्षा क्षेत्र की शीर्षस्थ गैर-व्यवसायिक संस्था (NGO) ‘प्रथम’ द्वारा कराया जाता है।
  • 2016 में अपने दूसरे दशक के अस्तित्व की शुरुआत करते हुए असर एक वैकल्पिक-वर्ष चक्र में बदल गया, जहाँ यह ‘बुनियादी’ असर हर दूसरे वर्ष (2016, 2018 और 2020 में अगला) आयोजित किया जाता है और वैकल्पिक वर्षों में असर बच्चों के स्कूली शिक्षा और सीखने के एक अलग पहलू पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • 2017 में असर ‘बियॉन्ड बेसिक्स’ ने देश के 28 जिलों में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की क्षमताओं, गतिविधियों, जागरूकता और आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया था।

 

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