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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

ब्रह्माण्ड में लिथियम वृद्धि

13th July, 2020

(G.S. Paper-III)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ में प्रकाशित एक अध्ययन में सूर्य जैसे कम द्रव्यमान वाले तारों के कोर हीलियम (He) ज्वलन चरण के दौरान लिथियम उत्पति की परिघटना के विषय में ठोस पर्यवेक्षण साक्ष्य प्रस्तुत किये गए।

प्रमुख बिंदु –

  • गौरलतब है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थानइंडियन इंस्टीट्यूट  ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (Indian Institute of Astrophysics- IIA) के वैज्ञानिकों ने अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ये साक्ष्य प्रस्तुत किये है।
  • वैज्ञानिकों ने ‘आकाशगंगा पुरातत्त्व परियोजना, एंग्लो-ऑस्ट्रेलियाई टेलीस्कोप, ऑस्ट्रेलिया’ (Galactic Archaeology project, Anglo-Australian Telescope, Australia- GALAH) के बड़े सर्वेक्षणों और यूरोपीय अंतरिक्ष मिशन (GAIA) से एकत्र हज़ारों तारों के  स्पेक्ट्रा का उपयोग किया।
    • GAIA यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की एक अंतरिक्ष वेधशाला है, जिसे 2013 में लॉन्च किया गया था।

लिथियम की उत्पत्ति- 

  • हल्की ज्वलनशील, धातु लिथियम (Li) ने आधुनिक संचार उपकरणों और परिवहन क्षेत्र में कई परिवर्तन किये हैं। वर्तमान समय में तकनीक का एक बड़ा हिस्सा लिथियम व इसके विभिन्न  प्रकारों द्वारा संचालित है किंतु लिथियम के विषय में प्रश्न यह है कि यह तत्व आता कहाँ से है? लिथियम के अधिकांश भाग की उत्पत्ति का पता एक ही घटना से लगाया जा सकता है- वह है बिग-बैंग, जो लगभग7 अरब साल पहले घटित हुआ था जिसके द्वारा वर्तमान ब्रह्मांड का भी   निर्माण हुआ था।
  • समय के साथ, भौतिक ब्रह्मांड में लिथियम की मात्रा में चार गुनी वृद्धि हुई है, जिसे कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आयरन, निकेल और अन्य तत्त्वों की तुलना में काफी कम कहा जा सकता है क्योंकि इन तत्त्वों की मात्रा में एक मिलियन गुनी वृद्धि हुई है। लिथियम में अपेक्षाकृत बहुत कम मात्रा में वृद्धि हुई है।
  • लिथियम की इतनी कम मात्रा का स्रोत वैज्ञानिकों के बीच बहस का विषय है। माना जाता है कि उच्चऊर्जा वाली ब्रह्मांडीय किरणों से इंटरस्टेलर स्पेस में कार्बन और ऑक्सीजन जैसे भारी तत्वों के टूटने से लिथियम का निर्माण हुआ।
  • तारों द्वारा बड़े पैमाने पर उत्क्षेपण और तारकीय विस्फोट भारी तत्त्वों की इस महत्त्वपूर्ण वृद्धि में प्राथमिक योगदानकर्त्ता हैं। हालाँकि लिथियम को एक अपवाद माना जाता है।

बिग बैंग संकल्पना और लिथियम-

  • लिथियम (Lithium- Li) बिग बैंग न्यूक्लियोसिंथेसिस (Big Bang Nucleosynthesis- BBN) से उत्पन्न तीन मौलिक तत्वों  में से एक है। अन्य दो तत्त्व हाइड्रोजन (H) और हीलियम (He) हैं।

लिथियम से संबंधित कुछ अवधारणाएँ-

  • आज के सर्वश्रेष्ठ मॉडलों पर आधारित वर्तमान समझ के अनुसार, हमारे सूर्य जैसे तारों में लिथियम उनके जीवनकाल में ही नष्ट हो जाता है।
  • तथ्य के रूप में, सूर्य और पृथ्वी में सभी तत्त्वों की संरचना समान है। लेकिन, सूर्य में लिथियम की मात्रा पृथ्वी की तुलना में 100 गुनी कम है, हालाँकि दोनों का निर्माण एक साथ हुआ था।
  • यह खोज लंबे समय से चली आ रही इस धारणा को चुनौती देती है कि तारे अपने जीवनकाल में ही लिथियम को नष्ट कर देते हैं, जिसका अर्थ है कि सूर्य स्वयं भविष्य में लिथियम का निर्माण            करेगा, जिसकी भविष्यवाणी मॉडल द्वारा नहीं की जाती है, जो दर्शाता है कि तारा-सिद्धांत में कुछ   भौतिक प्रक्रिया छूटी हुई है।

अध्ययन से संबंधित कुछ अन्य तथ्य- 

  • इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने तारे के मुख्य हाइड्रोजन-ज्वलन चरण के अंत में लिथियम उत्पादन के स्रोत के रूप में “He फ्लैश” (विस्फोट के माध्यम से तारे में HE-प्रज्वलन की शुरुआत) की भी            पहचान की। यहाँ यह जानना बेहद ज़रूरी है कि हमारा सूर्य लगभग 6-7 अरब वर्षों के बाद इस           चरण में पहुँचेगा।
  • इस अध्ययन में तारों को लिथियम-संपन्न के रूप में वर्गीकृत करने के लिये नई सीमा(A(Li) > –      9~dex) का भी सुझाव दिया गया है, जो अब तक इस्तेमाल की गई सीमा  (A(Li) > 1.5~dex) से             250 गुना कम है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारे लिये अगला महत्त्वपूर्ण कदम He-फ्लैश और मिक्सिंग मैकेनिज़्म के दौरान लिथियम के न्यूक्लियोसिंथेसिस को समझना है, जो अभी तक अनजान है। इसके साथ      ही यह जानना भी ज़रूरी है कि क्या बिग-बैंग में इसके निर्माण के बाद से इसकी मात्रा में वृद्धि हुई है     और क्या केवल तारों ने इस वृद्धि में योगदान दिया है?

कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल को पूरा करने वाला रूस पहला देश बना

(G.S. Paper-II)

  • कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल को पूरा करने वाला विश्व का पहला देश रूस बना. रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय का दावा है कि उसने कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन तैयार कर लिया है. यदि यह दावा सच निकला तो यह कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन होगी.
  • विश्वभर में कोरोना वायरस (Corona virus) से कोहराम मचा हुआ है. अब तक पूरे विश्व में कोरोना से करीब 1 करोड़ 25 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं. हर देश को कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) का इंतजार है और लगभग हर बड़ा देश इस तरफ अपनी पूरी ताकत से वैक्सीन बनाने में लगा हुआ है.
  • रूस ने कोरोना वैक्सीन पर बाजी मार ली है. रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय का दावा है कि उसने कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन तैयार कर लिया है. विश्वविद्यालय का कहना है कि वैक्सीन के सभी परीक्षणों को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है. परीक्षण 18 जून को शुरू हुआ था
  • इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक वदिम तरासोव ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 18 जून 2020 को रूस के गेमली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा निर्मित टीके के ​​परीक्षण प्रारंभ किए थे. वदिम तारासोव ने कहा कि सेचेनोव विश्वविद्यालय ने कोरोनोवायरस के खिलाफ विश्व के पहले टीके के स्वयं सेवकों पर सफलतापूर्वक परीक्षण पूरे कर लिये है.

यह कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन होगी-

  • रूस का यह दावा सच निकला तो यह कोरोना वायरस की पहली वैक्‍सीन होगी. इसके साथ ही दुनिया को कोरोना वायरस से निजात दिलाने का रास्ता भी रूस ने खोज निकाला है. हालांकि, अमेरिका समेत दुनिया के तमाम विकसित मुल्‍क कोरोना पर वैक्‍सीन तैयार करने में जुटे हैं. कई तो ट्रायल के स्‍तर पर असफल भी हो चुके हैं, लेकिन रूस ने पहली वैक्‍सीन को सफल करार देकर बाजी मार ली है.

जल्द ही बाजार में आएगी वैक्‍सीन-

  • सेचनोव यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल पैरासिटोलॉजी, ट्रॉपिकल एंड वेक्टर-बॉर्न डिजीज के निदेशक अलेक्जेंडर लुकाशेव के अनुसार सुरक्षा के लिहाज से वैक्सीन के सभी पहलुओं की जांच कर ली गई है. उन्‍होंने कहा कि लोगों के सुरक्षा के लिए यह जल्द बाजार में सुलभ होगा. उन्होंने कहा कि इस पूरे अध्ययन का मकसद मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कोविड 19 के वैक्सीन को सफलतापूर्वक तैयार करना था.

रूस कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित-

  • रूस कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की सूची में है. यदि रूस का दावा सही हुआ तो यह पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी कामयाबी है. विश्व के कई ताकत वर देश कोरोना वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं लेकिन अभी तक किसी भी देश को ह्यूमन ट्रायल पर पूरी तरह से सफलता नहीं मिली है.

लघु जोतधारक तथा कृषि विपणन

(G.S. Paper-III)

चर्चा में क्यों?

COVID-19 महामारी के तहत लगाए गए लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है, ऐसे में कृषि को पुन: आर्थिक विकास के इंजन और महत्त्वपूर्ण उपशामक के रूप में चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

प्रमुख बिंदु

  • वित्त मंत्री द्वारा COVID-19 महामारी आर्थिक पैकेज के रूप में कृषि, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण के लिये कृषि अवसंरचना को मज़बूत करने तथा कृषि शासन संबंधी सुधारों के लिये         अहम उपायों की घोषणा की गई थी।
  • इस आर्थिक पैकेज के एक भाग के रूप में कृषि क्षेत्र में शासन एवं प्रशासन से संबंधित भी अनेक सुधारों की घोषणा की गई थी।

कृषि संबंधी सुधारों की घोषणा-

  • हाल ही में कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित व्यापक परिवर्तनकारी सुधारों को लागू किया है:
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम‘-1955 में संशोधन;
  • कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) अध्यादेश‘, (Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance)- 2020;
  • कृषि उपज मूल्य निर्धारण और गुणवत्ता का आश्वासन;
  • कृषि विपणनसुधार। 

कृषि सुधारों का उद्देश्य-

  • कृषि सुधारों के माध्यम किसान प्रथम (Farmer First) अर्थात किसान को नीतियों के केंद्र में रखकर कार्य किया जाएगा जिनके निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
    • कृषि-सेवाओं में रोज़गार उत्पन्न करना;
    • विपणन चैनलों में विकल्पों को बढ़ावा देना;
    • एक राष्ट्र एक बाज़ार की दिशा में कार्य करना;
    • अवसंरचना का विकास;
    • मार्केट लिंकेज;
    • फिनटेक और एगटेक में निवेश आकर्षित करना;
    • खाद्य फसलों के स्टॉक प्रबंधन में पूर्वानुमान पद्धति को अपनाना।

लघु जोतधारकों की स्थिति-

  • सामान्यत: 2 हेक्टेयर से कम भूमि धारण करने वाले किसानों को लघु जोतधारक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
क्र. सं. समूह  भूमि धारण (हेक्टेयर में)
1 सीमांत < 1.0 हेक्टेयर
2 लघु 1.0 < 2.0 हेक्टेयर
3 अर्द्ध-मध्यम 2.0 < 4.0 हेक्टेयर
4 मध्यम 4.0 < 10.0 हेक्टेयर
5 वृहद 10.0 हेक्टेयर से अधिक
  • लगभग 85% किसान लघु तथा सीमांत जोतधारक हैं।

लघु जोतधारकों की समस्याएँ-

  • किसानों के लिये अपनाई जाने सार्वजनिक नीति के प्रभाव तथा खेत के आकार में व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है, अर्थात इन नीतियों का छोटे जोतधारक किसानों पर विपरीत प्रभाव होता है।

खाद्य सुरक्षा प्रभावित-

  • कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अपनाई गई नीतियों यथा- कृषि आगतों को आपूर्ति, कृषि विस्तार सेवाएँ आदि लघु जोतधारकों की प्रतिस्पर्द्धा क्षमता तथा खुद को बाज़ार में बनाए रखने की             क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। जिससे देश की खाद्य प्रणाली भी प्रभावित होती है।

कम आय की प्राप्ति-

  • लघु जोतधारकों की आय राष्ट्रीय औसत आय से बहुत कम है। लघु जोतधारकों की प्रति व्यक्ति आय 15,000 रुपए प्रति वर्ष है। यह राष्ट्रीय औसत आय के पाँचवे हिस्से के बराबर है।

औपचारिक बाज़ार तक पहुँच का अभाव-

  • भारत में लगभग लगभग 220 बिलियन डॉलर के वार्षिक कृषि उत्पाद सीमांत खेतों पर उगाया जाता है तथा इसे लगभग 50 किमी. के दायरे में अनौपचारिक बाज़ारों में बेच दिया जाता है।
  • औपचारिक (सार्वजनिक खरीद सहित) और अनौपचारिक बाज़ारों के सह-अस्तित्त्व के कारण कृषि उत्पादों तक पहुँच और मूल्य स्थिरता दोनों प्रभावित होती है।
  • लघु जोतधारक किसानों को फसलों का अच्छा बाज़ार मूल्य तथा खरीददारों के विकल्प नहीं मिल पाते हैं।

अवसंरचना का अभाव

  • ‘बाज़ार तक फसल उत्पादों को लाने के लिये पर्याप्त लॉजिस्टिक संरचना का अभाव है। बड़े बाज़ारों और नगरों से भौतिक दूरी अधिक होने पर लघु जोतधारकों की आय में कमी होती है।

सुधारों की आवश्यकता– 

विपणन प्रणाली तथा अवसंरचना में सुधार:

  • अच्छी तरह से विनियमित बाज़ार की दिशा में निम्नलिखित सुधारों को लागू करने की आवश्यकता है.

सुरक्षित और सस्ती भंडारण सुविधा

  • भंडारण सुविधाओं में वृद्धि, बड़े कृषि प्रसंस्करण उद्यमियों, खुदरा विक्रेताओं को आकर्षित करेगी।

गुणवत्ता प्रबंधन प्रौद्योगिकी– 

  • कार्यशील पूंजी;
  • कृषि उत्पादन तथा जलवायु परिवर्तन के साथ जुड़े जोखिमों से सुरक्षा की व्यवस्था ।
  • उदाहरण के लिये इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफ़ॉर्म आधारित कृषि प्रबंधन प्रणाली सूचना संबंधी बाधाओं को दूर करते हैं। ये प्लेटफ़ॉर्म ऋण पहुँच , जोखिम प्रबंधन, मौसम जानकारी, फसल प्रबंधन सेवाएँ   प्रदान करते हैं।
  • 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organisations- FPOs) की स्थापना जैसे मिशन लघु जोतधारकों को ‘बाज़ार आधारित कृषि’ उत्पादन की दिशा में प्रोत्साहन प्रदान करते हैं।

मार्केटप्लेस जैसी पहलों की आवश्यकता

  • ज़िला प्रशासन पर वाणिज्यिक विवाद निपटानों का समाधान करने के लिये पर्याप्त संसाधनों का अभाव है।
  • प्रतिपक्ष जोखिम प्रबंधन के लिये एक उचित समाशोधन और निपटान तंत्र की आवश्यकता है। इस दिशा में ई-मार्केटप्लेस जैसी पहल को लागू किया जाना चाहिये।

उत्पादों की गुणवत्ता का निर्धारण

  • ऑनलाइन बिक्री की दिशा में छोटे जोतधारकों को मानक ग्रेड और गुणवत्ता-आधारित संदर्भ मूल्य अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिये कृषि विपणन विस्तार सेवाओं का उपयोग किया       जाना चाहिये।
  • सभी खाद्य मानक कानूनों और विभिन्न व्यापार मानकों को अच्छे उत्पादों की आपूर्ति की समझ के साथ संरेखित किया जाना चाहिये।

गैरअनाज फसलों संबंधी पहल

  • गैर-अनाज फसलों के साथ जुड़े जोखिमों और ऋण का प्रबंधन करने के लिये नवाचारी उपायों को अपनाना चाहिये ताकि इसका लाभ लघु जोत धारकों को मिल सके।

पशुधन को महत्व

  • पशुधन का भारत की कृषि जीडीपी में 30% योगदान है, अत: बाज़ार तथा पशुधन के मध्य भी बेहतर समन्वय बनाने की आवश्यकता है।

अंतर-राज्य समन्वय- 

  • कृषि राज्य सूची का विषय है, अत: कृषि क्षेत्र में बेहतर अंतर-राज्य समन्वय को लागू किया जाना चाहिये।

निष्कर्ष

कृषि क्षेत्र में नवीन सुधारों को लागू करने से कृषि उत्पादकों, मध्यस्थों तथा उपभोक्ताओं के         मध्य बेहतर समन्वय हो पाएगा तथा लघु जोतधारकों को भी अपने उत्पादों पर बेहतर रिटर्न मिल             सकेगी तथा इससे भूगोल द्वारा उत्पन्न सीमाएँ महत्त्वहीन हो जायेगी।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

रीवा सौर परियोजना

प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के रीवा में स्थापित 750 मेगावाट कीरीवा सौर परियोजना (Rewa Solar Project) को राष्ट्र को समर्पित किया।

प्रमुख बिंदु

  • इस परियोजना में एक सौर पार्क जिसका कुल क्षेत्रफल 1500 हेक्टेयर है, के अंदर स्थित 500 हेक्टेयर भूमि पर 250-250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं।
    • इस सौर पार्क के विकास के लिये भारत सरकार की ओर से ‘रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड’  को 138 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद प्रदान की गई थी।
  • इस सौर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (Rewa Ultra Mega Solar Limited- RUMSL) ने विकसित किया है जो मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड (Madhya Pradesh          UrjaVikas Nigam Limited- MPUVN) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई सोलर एनर्जी      कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (Solar Energy Corporation of India- SECI) की संयुक्त उद्यम         कंपनी है।
  • यह सौर परियोजना ‘ग्रिड समता अवरोध’ (Grid Parity Barrier) को तोड़ने वाली देश की पहली सौर परियोजना थी।
    • ग्रिड समता(Grid Parity) तब होती है जब एक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत विद्युत की कीमत के स्तर        पर बिजली उत्पन्न कर सकता है जो इलेक्ट्रीसिटी ग्रिड से मिलने वाली बिजली की कीमत से कम      या बराबर होती है।
  • यह परियोजना वार्षिक तौर पर लगभग 15 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगी।
  • रीवा परियोजना को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी ठोस संरचना एवं नवाचारों के लिये जाना जाता है।
    • नवाचार एवं उत्कृष्टता के लिये इसेवर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेंट अवॉर्ड (World Bank Group         President’s Award) भी मिला है।
    • इसके अतिरिक्त इसे प्रधानमंत्री की ‘A Book of Innovation: New Beginnings’पुस्तक में भी      शामिल किया गया है।
  • यह परियोजना राज्य के बाहर एक संस्थागत ग्राहक को बिजली आपूर्ति करने वाली देश की पहली अक्षय ऊर्जा परियोजना भी है।
    • अर्थात् यह परियोजना अपने कुल बिजली उत्पादन का 24% बिजली दिल्ली मेट्रो को देगी जबकि शेष 76% बिजली मध्य प्रदेश की राज्य बिजली वितरण कंपनियों को आपूर्ति की जाएगी।

 

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