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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

बैड बैंक

G.S. Paper-III

संदर्भ:

इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) द्वारा ख़राब ऋणों को चिह्नित करना शुरू कर दिया गया है। इन ख़राब ऋणों को केंद्र द्वारा प्रस्तावित बैड बैंक में स्थानांतरित किया जा सकता है।

इंडियन बैंक एसोसिएशन ने, 500 करोड़ रुपये तथा उससे अधिक राशि के सभी ख़राब ऋणों की सूची बनाने तथा ‘समस्या की भयावहता की पहचान करने’ और ‘संस्था के लिए आवश्यक प्रारंभिक पूंजी के संबंध स्पष्टता जाहिर करने’ के लिए सभी बैंकों को पत्र लिखा है।

पृष्ठभूमि:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने केंद्रीय बजट 2021 के भाषण के दौरान एक बैड बैंक की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा, कि प्रस्तावित इकाई, बैंकों से तनावग्रस्त ऋणों को, एक वैकल्पिक निवेश कोष (alternative investment funds- AIF) के लिए बेचने के लिए अपने अधिकार में लेगी।

बैड बैंक अवधारणा:

  1. बैड बैंक, दूसरे वित्तीय संस्थानों के खराब ऋण और अन्य अवैध परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए स्थापित किया जाने वाला बैंक होता है।
  2. बड़ी मात्रा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां रखने वाली संस्थाओं द्वारा इन परिसंपत्तियों को बाजार मूल्य पर बैड बैंक को बेंचा जाएगा।
  3. इस तरह की परिसंपत्तियों को बैड बैंक में स्थानांतरित करने से, मूल संस्थाओं द्वारा अपनी बैलेंस शीट को सही किया जा सकता है – हालांकि इन्हें परिसंपत्तियों के अनुमानित मूल्य में कटौती करना होगा।

ख़राब ऋणों के बारे में चिंता का विषय:

  1. भारतीय बैंकों के ख़राब ऋणों का ढेर अर्थव्यवस्था पर एक बहुत बड़ा दबाव है।
  2. यह बैंकों के मुनाफे को हानि पहुंचाता है। क्योंकि मुनाफा खत्म हो जाने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB), जिनमे ख़राब ऋणों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, विकास दर में वृद्धि हेतु पर्याप्त पूंजी नहीं जुटा पाते हैं।
  3. क्रेडिट वृद्धि का अभाव में, अर्थव्यवस्था के 8% विकास दर प्राप्त करने के मार्ग में बाधक बनता है। अतः, ख़राब ऋणों की समस्या का प्रभावी समाधान शीघ्र किए जाने की आवश्यकता है।

बैड बैंक से लाभ:

  1. इससे बैंकों या वित्तीय संस्थाओं को बैड लोन ट्रांसफर करके अपनी बैलेंस शीट सही करने में मदद मिलती है और ये मूल व्यवसायिक ऋण गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
  2. बड़े देनदारों के पास कई लेनदार होते हैं। चूंकि, इस उपाय से ऋण एक ही संस्था में केंद्रीकृत हो जाएंगे जिससे बैड बैंक समन्वय की समस्या को हल कर सकते हैं।
  3. विभिन्न बैंकों को अलग करके, बैड बैंक कर्जदारों के साथ तेजी से समझौता कर सकता है।
  4. यह ऋणकर्ताओं के साथ बेहतर सौदेबाजी कर सकता है और उनके खिलाफ अधिक कठोर प्रवर्तन कार्रवाई कर सकते हैं।
  5. केवल सरकार ओर देखने के बजाय बैड बैंक खुद ही संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटा सकते हैं।

बैड बैंक से संबधित चिंताएं:

उदाहरण के लिए मान लीजिए, कोई बैंक अपने ख़राब ऋणों की बिक्री करता है। तब इसे कुछ केश कर्तन करना पड़ता है, क्योंकि जब 100 रुपये खराब होते हैं, तब वास्तविक राशि में 100 रुपये से कम होने का अनुमान होता है। ऐसी स्थिति में बैंक की लाभ और हानि (P&L) प्रभावित होती है।

इसलिए, जब तक कि इस विशेष पहलू का समाधान नहीं किया जाता है, तब तक एक नई संरचना का निर्माण, समस्या को हल करने में पूर्णतयः सक्षम नहीं होगा।

आगे की राह:

के वी कामथ समिति के अनुसार, खुदरा व्यापार, थोक व्यापार, सड़क और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में कंपनियों को तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

कोविड महामारी से पहले तनाव का सामना कर रहे क्षेत्रों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs), विद्युत्, इस्पात, रियल एस्टेट और विनिर्माण सम्मिलित हैं। इस पृष्ठभूमि में बैड बैंक की स्थापना काफी महत्वपूर्ण है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

चीन में ‘क्रय शक्ति समता’

(China’s purchasing power parity– PPP)

  1. चीन में सकल निर्धनता उन्मूलन, सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा के अनुसार परिभाषित किया गया है। चीन में गरीबी रेखा, प्रति दिन प्रति व्यक्ति क्रय शक्ति समता (PPP) के पदों में 2.30 डॉलर निर्धारित की गयी है, और यह अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा $ 1.90 की क्रय शक्ति समता (PPP) से अधिक है।
  2. विश्व बैंक द्वारा निम्न मध्यम आय वाले देशों के लिए $ 3.20की क्रय शक्ति समता (PPP) पर और ऊपरी मध्यम आय वाले देशों, जैसे कि चीन, के लिए $ 5.50 की क्रय शक्ति समता (PPP) पर गरीबी रेखा को परिभाषित किया है।

 

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