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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

फ्रांस में अभिव्यक्ति की आजादी बनाम इस्लामी चरमपंथ

G.S. Paper-II

चर्चा में क्यों?

  • फ्रांसीसी अधिकारियों ने चार पाकिस्तानियों कोचार्ली हेब्दो साप्ताहिक के पुराने कार्यालयों के बाहर धारदार हथियार से दो लोगों पर किए गए हमले में शामिल होने के आरोप लगाये हैं और उन्हें हिरासत में लिया है।
  • इन लोगो पर हमलावर की साजिश से जानकारी होने और हमलावर घटना को अंजाम देने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।
  • गिरफ्तार सभी व्यक्ति समान विचारधारा साझा करते हैं और उनमें से एक ने घटना से कुछ दिन पहले फ्रांस के प्रति घृणा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त भी किया था।
  • इससे पहले अभी पेरिस अदालत ने जनवरी 2015 में चार्ली हेब्दो कर्मचारियों का नरसंहार करने के आरोप में बंदूकधारियों के 13 सहयोगियों को दोषी ठहराया था।

फ्रांस में अभिव्यक्ति की आजादी और इससे उत्पन्न मुद्दों की पृष्ठभूमि-

  • फ्रांस हमेशा से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रबल समर्थन रहा है। फ्रांस में मोहम्मद पैगंबर पर बने कार्टूनों के प्रकाशन के बाद से लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और हमलों के बाद अभी फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए प्रकाशन से सहमति दिखाई है।
  • हालांकि इस विषय पर फ्रांस और मुस्लिम देशों के अपने-अपने तर्क हैं- अभिव्यक्ति की आज़ादी का और धार्मिक भावनाएँ आहत होने का।
  • क़रीब 9 साल पहले 2011 में चार्ली हेब्दो ने मुहम्मद साहब के कार्टून छापे थे, यह विवाद दोबारा तब बढ़ा जब इतिहास के एक अध्यापक समुएल पैटी ने अपने छात्रों को चार्ली हेब्डो के कार्टून दिखाए और इसके बाद उस अध्यापक की हत्या कर दी गई।
  • इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि देश में हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी तरह के कार्टून और डिज़ाइन पर रोक नहीं लगाएँगे, यह देश का क़ानूनी अधिकार है।
  • इसके पहले निकोलस सारकोजी और फ्रांस्वा ओलांद जैसे फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपतियों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी का समर्थन किया और कहा कि हम चाहते हैं कि हर किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पूरी छूट मिले।
  • ‘धर्म विहीन राज्य’ ही फ़्रांस का सरकारी धर्म है। फ्रांस की क्रांति का नारा है- स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा। यहाँ के संविधान के अनुसार किसी भी सार्वजनिक और सरकारी जगह पर धार्मिक चिह्न का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। इसी के तहत यहाँ बुर्का पहनने और पगड़ी पहनने जैसी धार्मिक प्रथाओं पर रोक लगाई गयी है।
  • फ्रांस के संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि समानता को बनाए रखने के लिए धर्म को देश से अलग रखना होगा।
  • लैसिते (Laicite) सार्वजनिक मामलों में फ़्रांस की धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत है, जिसका उद्देश्य धर्म से मुक्त समाज को बढ़ावा देना है। Laicite फ़्रांसीसी शब्द laity से बना है, जिसका अर्थ है- आम आदमी या ऐसा व्यक्ति, जो पादरी नहीं है।

फ्रांस में इस्लामी चरमपंथ के खिलाफ नया कानून-

  • फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की कैबिनेट ने “इस्लामी चरमपंथ” के विरुद्ध एक कानून के मसौदे हो पारित किया है। मूल रूप इस कानून के मसौदे का शीर्षक अलगाववाद विरोधी विधेयक” (Anti-Separatism Bill) रखा गया था, जिसेके बाद, अब इसेगणतन्त्र के मूल्यों को मजबूत करने के लिए मसौदा कानून” (Draft Law To Strengthen Republican Values) कर दिया गया है।
  • इस कानून का उद्देश “कट्टरपंथी इस्लामवाद की नापाक विचारधारा” (The Nefarious Ideology Of Radical Islamism) को फैलने से रोकना है। प्रस्तावित कानून में मस्जिदों के विदेशी वित्तपोषण विनियमित करने और उन्हे अनधिकृत चंदा प्राप्त करने के रोकने के लिए कठोर प्रावधान किए गए है।
  • इसके अलावा चरमपंथी उग्रवादियों से खतरे की आशंका को देखते हुए, उदारवादी समुदाय के नेताओं को सुरक्षा प्रदान करने के भी प्रावधान किए गए हैं। मसौदा कानून में तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों की होमस्कूलिंग को अधिकृत करने के लिए कड़े मानदंड प्रस्तावित किए गए हैं ताकि माता-पिता अपने बच्चों को सार्वजनिक स्कूलों से बाहर ले जाकर उन्हें इस्लामी मदरसों में दाखिला न दिला सकें।
  • इस कानून में मुस्लिम महिलाओं के कौमार्य परीक्षण को अपराध बनाया गया है और ऐसा करने वाले डॉक्टरों को जुर्माना या जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। बहुविवाह पहले से ही फ्रांस में गैरकानूनी है, लेकिन नया कानून अधिकारियों को बहुविवाह करने वाले आवेदकों को फ्रांस में निवास पत्र जारी न करने की अनुमति प्रदान करता है।

क्या है भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थिति?

  • फ़्रांस में जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को धार्मिक कट्टरपंथ से खतरा बना हुआ है, उसके विपरीत भारत में सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता को सीमित करने के आरोप लगते हैं।
  • भारत के संविधान में अनुच्छेद 19 (1) के तहत हर नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है, संविधान ने धारा 19 (2) के तहत कुछ मर्यादाएँ तय की हुई हैं। जिसमें यह कहा गया है कि सरकार राष्ट्रीय संप्रभुता पर आँच आने, कानून-व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न होने, भिन्न समुदायों के बीच वैमनस्यता पैदा करने की स्थितियों को उत्पन्न करने से संबंधित सामग्री को लेकर उचित प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर सकती है।
  • इसी के आलोक में सरकार पर अभिव्यक्ति की सवतंत्रता को प्रतिबंधित करने में आईपीसी की राजद्रोह से संबंधित धारा 124A के दुरुपयोग का आरोप लगाया जाता है।
  • हालांकि समय-समय पर न्यायलय के हस्तक्षेप से अभियक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा को सुनिश्चित करने के अभी प्रयास किए जाते है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को आधारभूत मूल्य घोषित करते हुए सूचना तकनीक कानून की धारा 66-ए (IT ACT Section 66 A) को समाप्त करने के निर्देश दिये थे।

भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कभी भी निरपेक्ष नहीं रही है। हालांकि लोकतंत्र का आधार है, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा (बंधुत्व) के लिए यह आवश्यक है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी के धार्मिक मान्यताओं और गरिमापूर्ण जीवन को बाधित न करे जो कि संविधान के अनुच्छेद 25-28 (धार्मिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (गरिमा पूर्ण जीवन का अधिकार) के अनुरूप है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारत-इंडोनेशिया कॉरपैट

  • हाल ही में, भारत-इंडोनेशिया समन्वित गश्त (IND-INDO ​​CORPAT) के 35 वें संस्करण का आयोजन किया गया।
  • इंड-इंडो कॉरपैट का आयोजन प्रतिवर्ष भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाओं के बीच किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य क्षेत्र में शिपिंग और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

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