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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

फसल बीमा योजना

समाचार में क्यों?

हाल ही में महाराष्ट्र अपने भूमि रिकॉर्ड को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana- PMFBY) के वेब पोर्टल से एकीकृत करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

मुख्य बिंदु:

  • इसके माध्यम से ओवर इंश्योरेंस (Over-Insurance) (धारित भूमि से अधिक भूमि का बीमा) तथा अपात्र व्यक्तियों द्वारा उपयोग किये गए बीमा की जाँच में मदद मिलेगी।
  • महाराष्ट्र को PMFBY के तहत दावों के भुगतान के मामले में देश के शीर्ष पाँच राज्यों में गिना जाता है।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान महाराष्ट्र के 1.39 करोड़ किसानों ने इस योजना को अपनाया तथा कुल 4,778.30 करोड़ रुपए की प्रीमियम राशि एकत्रित की गई।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना वर्ष 2016 में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare) के अंतर्गत प्रारंभ की गई थी।
  • यह फसल के नष्ट होने की दशा में किसानों को व्यापक बीमा कवर प्रदान करती है तथा किसानों की आय को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।
  • इसके तहत सभी खाद्यान्न, तिलहन, वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों को शामिल किया गया है।
  • इसके तहत किसानों द्वारा भुगतान की जाने वाली प्रीमियम राशि खरीफ फसलों के लिये 2%, रबी की फसलों के लिये 1.5% निर्धारित की गई है। इसके अलावा वार्षिक वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों पर प्रीमियम राशि 5% है।
  • यह योजना उन किसानों के लिये अनिवार्य है जिन्होंने अधिसूचित फसलों के लिये फसल ऋण या किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card- KCC) के तहत ऋण लिया है, जबकि अन्य के लिये ये ऐच्छिक है।
  • इस योजना का क्रियान्वयन सूचीबद्ध सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा किया जाता है। क्रियान्वयन एजेंसी का चयन संबंधित राज्य सरकार द्वारा नीलामी द्वारा किया जाता है।
  • इसमें न सिर्फ खड़ी फसल बल्कि फसल पूर्व बुवाई तथा फसल कटाई के पश्‍चात् जोखिमों को भी शामिल किया गया है।
  • इस योजना के तहत स्‍थानीय आपदाओं की क्षति का भी आकलन किया जाएगा तथा संभावित दावों के 25 प्रतिशत का तत्‍काल भुगतान ऑनलाइन माध्यम से ही कर दिया जाएगा।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

बीबी का मकबरा:

  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण 17वीं सदी के मुगलकालीन स्मारक ‘बीबी का मकबरा के गुंबद और संगमरमर से निर्मित अन्य हिस्सों का वैज्ञानिक संरक्षण करेगा।

मुख्य बिंदु:

  • यह मकबरा वर्ष 1660 में औरंगजेब की बेगम दिलरास बानो बेगम या रबिया-उद्-दौरानी की याद में बनवाया गया था।
  • इसे ‘दक्कनी ताज या ‘बीबी का मकबरा भी कहते हैं।
  • यह महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद में स्थित है।
  • इसके वास्तुकार अताउल्लाह (उस्ताद अहमद लाहौरी के पुत्र) और हंसपत राय थे।
  • इसके निर्माण में भी संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है तथा मकबरे के कक्ष की दीवारों और छतों में सुंदर नक्काशी की गई है, किंतु इसके ह्रास के लक्षण स्पष्ट दिखते हैं।
  • औरंगजेब काल और उसके बाद के मुगल शासकों के दौर में बनी इमारतें स्थापत्य की दृष्टि से महत्त्वहीन रहीं (सफदरजंग के मकबरे को छोड़कर)। अतः औरंगजेब का काल मुगल स्थापत्य कला का अंतिम पड़ाव साबित हुआ।

 

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