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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

प्रवर समितियों की भूमिकाएँ और सीमाएँ

23rd September, 2020

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ

हाल ही में, सरकार द्वारा विपक्ष की मांगों को खारिज करते हुए राज्यसभा में दो महत्वपूर्ण कृषि विधेयकों को पारित करा दिया गया। विपक्ष कृषि विधेयकों को राज्यसभा की एक प्रवर समिति (Select Committee) को भेजने की मांग कर रहा था।

विपक्ष द्वारा, विधेयक की संसदीय समिति द्वारा जांच नहीं कराये जाने का विरोध किया जा रहा था, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

प्रवर समिति क्या होती है?

  • प्रवर समिति(Select Committee) का गठन किसी विधेयक विशेष की जांच के लिए किया जाता है और संबंधित सदन के सांसद ही प्रवर समिति के सदस्य हो सकते है।
  • प्रवर समिति की अध्यक्षता सत्ताधारी दल के सांसद द्वारा की जाती है।
  • चूंकि प्रवर समितियों का गठन एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जाता है, अतः इन्हें, इनकी रिपोर्ट आने के पश्चात भंग कर दिया जाता है।

पृष्ठभूमि-

संसद, दो तरीकों से विधायी प्रस्तावों (विधेयकों) की जांच करती है:

  1. दोनों सदनों में विधेयकों पर चर्चा करके:यह एक विधायी अनिवार्यता होती है; सभी विधेयकों को बहस के लिए दोनों सदनों में लाया जाता है।
  2. विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजकर:
  • चूंकि, संसद, वर्ष में 70 से 80 दिनों तक बैठक करती है, इसलिए सदन के पटल पर प्रत्येक विधेयक पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है। ऐसे स्थिति में, विधेयक को एक संसदीय समिति के पास भेजा जाता है।
  • विधेयकों को संसदीय समितियों के पास भेजना अनिवार्य नहीं होता है।

समिति द्वारा विधेयक की जांच कब की जाती है?

विधेयकों को परीक्षण हेतु स्वचालित रूप से समितियों के पास नहीं भेजा जाता है।

इसे तीन विधियों से एक समिति के लिए संदर्भित किया जाता है। ये विधियां निम्नलिखित हैं:

  1. जब विधेयक को पेश करने वाले मंत्री के द्वारा सदन को सलाह दी जाती है, कि इसकी जांच सदन की प्रवर समिति या दोनों सदनों की संयुक्त समिति द्वारा की जानी चाहिए।
  2. यदि मंत्री इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं करता है, तो यह सदन के पीठासीन अधिकारी पर निर्भर करता है कि विधेयक को विभाग से संबंधित स्थायी समिति के लिए भेजे अथवा नहीं।
  3. इसके अतिरिक्त, एक सदन द्वारा पारित किसी विधेयक को दूसरे सदन द्वारा अपनी प्रवर समिति को भेजा जा सकता है।

विधेयक को एक समिति के पास भेजने के बाद की प्रक्रिया-

  1. समिति, विधेयक का विस्तृत परीक्षण करती है।
  2. यह विशेषज्ञों, हितधारकों और नागरिकों से टिप्पणियों और सुझावों को आमंत्रित करती है।
  3. सरकार भी अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित होती है।
  4. इस सब को सम्मिलित करते हुए एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) में विधेयक को मजबूत बनाने संबंधी सुझाव दिए जाते है।
  5. समिति की रिपोर्ट एक अनुशंसात्मक प्रकृति की होती है।

प्रतिवेदन  हेतु समय सीमा-

समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट पेश करने के बाद ही विधेयक पर संसद में प्रगति हो सकती है। आमतौर पर, संसदीय समितियों को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होती है, लेकिन कभी-कभी इसमें अधिक समय लग सकता है।

इंस्टा फैक्ट्स-

वर्तमान लोकसभा में, 17 विधेयकों को समितियों के लिए भेजा गया है।

16 वीं लोकसभा (2014-19) में, 25% विधेयकों को समितियों को संदर्भित किया गया था, जो कि क्रमशः 15 वीं और 14 वीं लोकसभा के 71% और 60% विधेयकों से काफी कम थे।

DRDO ने किया स्वदेशी हाई-स्पीड ड्रोन ‘ABHYAS’ का सफल परीक्षण

G.S. Paper-III (S & T)

चर्चा में क्यों-

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 22 सितम्बर 2020 को स्वदेशी हाईस्पीड टार्गेट ड्रोनअभ्यास (ABHYAS) का सफल परीक्षण किया। डीआरडीओ की तरफ से अभ्यास का फ्लाइट टेस्ट किया गया। इस दौरान इसे विभिन्न प्रकार के रडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम से ट्रैक किया गया।

  • अभ्यास हाईस्पीड ड्रोन है जिसे हथियार प्रणालियों के अभ्यास के दौरान मिसाइलों द्वारा टार्गेट किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु-

  • यह परीक्षण ओडिशा के बालासोर टेस्ट रेंज में किया गया। परीक्षण में विभिन्न रडारों और इलेक्ट्रो ऑप्टिक प्रणाली के जरिये इसकी निगरानी की गई।
  • अभ्यास के टेस्ट को कई रडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम की मदद से चेक किया गया।
  • अभ्यास एक छोटे गैस टरबाइन इंजन पर काम करता है और यह एमईएमएस नेविगेशन सिस्टम पर काम करता है।
  • डीआरडीओ के अनुसार यह एक बेहतरीन एयरक्राफ्ट है,जो नवीन तकनीक का उदाहरण है और देश की रक्षा प्रणाली को मजबूती देगा।
  • इसका उपयोग विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के मूल्यांकन के लिए एक लक्ष्य के रूप में किया जा सकता है।
  • परीक्षण के दौरान यान ने पांच किलोमीटर उड़ान ऊंचाई, 0.05 मैक की गति आदि जरूरतों को सफलतापूर्वक हासिल किया।

अभ्यास कैसे काम करता है?

  • अभ्यास को उड़ान भरने के लिए किसी बाहरी चीज के मदद की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रणाली को सिमुलेशन के अनुसार प्रदर्शित किया गया है और लागत को ध्यान में रखते हुए मिशन की जरूरत को पूरा करने के लिए अभ्यास की क्षमता को दिखाया गया है। अभ्‍यास ड्रोन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह ऑटोपायलट की मदद से अपने टारगेट पर आसानी से निशाना लगा सकता है।

भारत द्वारा अनुमोदित कोविड-19 हेतु ‘फेलूदा’ परीक्षण

G.S. Paper-III (S & T)

फेलूदा, FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay (Feluda) का संक्षिप्त रूप है।

  • यह30 मिनट से भी कम समय में कोविड-19 का सटीकता से पता लगाने हेतु एक कम लागत वाला पेपर स्ट्रिप टेस्ट (Paper Strip Test) है।
  • हाल ही में, इसे भारतीय औषधि महानियंत्रक (Drug Controller General of India– DCGI) द्वारा वाणिज्यिक रूप से शुरू करने के लिए अनुमोदित किया गया है।
  • फेलुदा टेस्ट कोवैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और टाटा समूह द्वारा विकसित किया गया है।

क्रियाविधि-

यह कोविड-19 के मूल वायरस SARS-CoV2 की आनुवंशिक पदार्थों को पहचानने और से लक्षित करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित CRISPR जीन-एडिटिंग तकनीक का उपयोग करता है।

महत्व-

  • CSIR के अनुसार, इस परीक्षण के परिणाम सटीकता मेंRT-PCR परीक्षणों के समान है।
  • इस परीक्षण का प्रतिवर्तन काल (Turnaround Time) काफी तीव्र है और इसके लिए कम खर्चीले उपकरण की आवश्यकता होती है।
  • फेलूदा’ परीक्षण कोTATA CRISPER परीक्षण भी कहा जाता है, और यह कोविड-19 के जनक वायरस का सफलतापूर्वक पता लगाने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित Ca9 प्रोटीन को तैनात करने वाला विश्व का पहला नैदानिक ​​परीक्षण भी है।

CRISPR तकनीक क्या है?

क्लस्टर्ड रेगुलेटरी इंटरसेप्टर शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats– CRISPR) एक जीन एडिटिंग तकनीक है, इसका उपयोग आनुवांशिक दोषों को ठीक करने और रोगों के प्रसार को रोकने और उपचार करने में किया जाता है।

  • इस तकनीक से किसी जीन के भीतर DNA के विशिष्ट अनुक्रमों का पता लगाया जा सकता है और इन्हें अलग करने के लिए, इस तकनीक में, आणविक कैंची के रूप में कार्य करने वाले एंजाइम का उपयोग किया जाता है।
  • यह तकनीक शोधकर्ताओं को DNA अनुक्रमों को आसानी से बदलने और जीन फ़ंक्शन को संशोधित करने में सक्षम बनाती है।
  • इस प्रौद्योगिकी को भविष्य में कई अन्य रोगजनकों का पता लगाने के लिए भी समनुरूप बनाया (Configured) जा सकता है।

चेंदमंगलम साड़ी

(Chendamangalam saree)

चर्चा का कारण-

केरल में बुनकरों के लिए काम करने वाले केयर 4 चेंदमंगलम (Care 4 Chendamangalam– C4C) द्वारा बेंगलुरू में अनुदान संचय समारोह (fund-raiser) प्रदर्शनी के लिए भौगोलिक संकेतक (GI-tag) प्राप्त चेंदमंगलम साड़ी का प्रदर्शन किया गया है।

प्रमुख तथ्य-

  1. चेंदमंगलम, केरल के एर्नाकुलम के पास एक छोटा सा शहर है, यह तीन नदियों के संगम पर स्थित है।
  2. यह शहर प्राचीन बंदरगाह मुज़िरिस (Muziris) का हिस्सा था तथा यह कर्नाटक के बुनकरोंदेवांग चेट्टियारों (Devanga Chettiars) द्वारा महीन सूत कटाई के लिये जाना जाता है।
  3. GI-tag प्राप्त ये चेंदमंगलम साड़ी अपनीपुलियिलाकारा बॉर्डर (Puliyilakara Border) से पहचानी जा सकती है जो पतली काली रेखाएँ हैं और ये साड़ी के किनारों के साथ डिज़ाइन की जाती है।

 

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