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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के अंतर्गत 27 शीत-शृंखला परियोजनाओं को स्वीकृति

7th September, 2020

G.S. Paper-II (National)

मुख्य बिंदु

  • इन परियोजनाओं को PMKSY की एकीकृत शीत शृंखला एवं मूल्यवर्धन अवसंरचना (Integrated Cold Chain and Value Addition Infrastructure) योजना के तहत अनुमोदन प्रदान किया गया है.
  • इससे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए आधुनिक, नवीन अवसंरचनात्मक और प्रभावी शीत शृंखला सुविधाओं के निर्माण में सहायता प्राप्त होगी.
  • PMSY का उद्देश्य खेत से लेकर खुदरा बिक्री केंद्रों (retail outlet) तक कुशल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन से युक्त एक आधुनिक अवसंरचना का निर्माण करना है.

आवश्यकता

देश में शीत शृंखला अवसंरचना अपर्याप्त होने के साथ-साथ इसके वितरण की स्थिति भी निम्नस्तरीय बनी हुई है, जिसके चलते देश में खाद्य पदार्थों की अत्यधिक बर्बादी होती है. उदाहरण के लिए: शीत शृंखला के अभाव के कारण 4.6-15.9% फल और सब्जियों तथा लगभग 2.7% माँस आदि का व्यर्थ व्यय हो जाता है.

परियोजनाओं के लाभ

इनसे कृषि आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार के अवसर सृजित करने, किसानों एवं अंतिम उपयोगकर्ताओं को बेहतर मूल्य प्रदान करने तथा संबद्ध क्षेत्रों को लाभ पहुंचाने में सहायता प्राप्त होगी.

शीत श्रंखला एवं मूल्यवर्धन तथा परिरक्षण अवसंरचना योजना (Cold Chain, Value Addition and Preservation Infrastructure Scheme)-

  • इसका उद्देश्य खेत से लेकर उपभोक्ता तक बिना किसी अवरोध के एकीकृत शीत शृंखला और परिरक्षण अवसंरचना सुविधाएं प्रदान करना है.
  • इसमें संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला के साथ-साथ अवसंरचना सुविधाओं का निर्माण भी शामिल है, जैसे: पूर्व-शीतलन, भार मापन, पृथक्ककरण, श्रेणीकरण आदि.
  • इस योजना का कार्यान्वयनखाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा किया जाएगा.

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना

  • प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की शुरुआत अगस्त 2017 में की गई थी. यह योजना पूरी तरह से कृषि केंद्रित योजना है.
  • प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना का उद्देश्‍य कृषि न्यूनता पूर्ण करना, प्रसंस्करण का आधुनिकीकरण करना और कृषि के दौरान संसाधनों के होने वाले अनावश्यक नुकसान को कम करना है.

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के कार्यान्वयन से उत्पादों की आपूर्ति प्रबंधन को सुधारा जा सकता है और एक आधुनिक अवसंरचना का का विकास किया जा सकता है. यह देश में न केवल खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिये एक बेहतर प्रयास होगा बल्कि यह किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने मे भी सहायक होगा. साथ ही यह किसानों की आय को दुगुना करने की दिशा में भी एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन

(North Atlantic Treaty Organization)

G.S. Paper-II (International)

चर्चा का कारण

हाल ही में ग्रीस द्वारा नाटो द्वारा मध्यस्थता के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। ग्रीस का कहना है, कि उसके देश की जलीय सीमा से तुर्की जहाजों के वापस जाने के पश्चात ही ‘युद्ध की तीव्रता में कमी’ (de-escalation) होगी।

विवाद का कारण

हाल के कुछ हफ्तों से, पूर्वी भूमध्यसागरीय जल क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। इसका कारण, प्रथमदृष्ट्या ऊर्जा संसाधनों पर एक सामान्य प्रतिस्पर्धा प्रतीत होता है।

  1. तुर्की इस क्षेत्र में आक्रामक रूप से गैस अन्वेषण में लगा हुआ है, तथा इसके अनुसंधान पोत की सुरक्षा में तुर्की नौसेना के युद्धपोत तैनात है।
  2. इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी ग्रीक जहाजों तथा नाटो (NATO) समूह के देश, फ्रांस के साथ तुर्की की मुठभेड़ हो चुकी है। फ्रांस ने प्रतिस्पर्धा में ग्रीस का पक्ष लिया है।
  3. इस क्षेत्र में उत्पन्न हुए तनाव से एक और परिवर्तन उजागर हुआ हैं – अमेरिकी वर्चस्व में कमी।

इस तनाव के कारण

तुर्की तथा ग्रीस के मध्य तनाव बढ़ता जा रहा है, इसका कारण तुर्की द्वारा भूमध्यसागर में स्थित द्वीपीय देशसाइप्रसके नजदीक की जा रहीड्रिलिंग गतिविधियाँ है।

  1. ‘साइप्रस’, ग्रीस की भांति यूरोपीय संघ का सदस्य है।
  2. तुर्की, साइप्रस के विभाजित द्वीप को एक राज्य के रूप में मान्यता नहीं देताहै तथा साइप्रस के अनन्य आर्थिक क्षेत्र के 44 प्रतिशत पर अपने अधिकार का दावा करता है।
  3. वर्ष 1974 में साइप्रस के ग्रीस में सम्मिलित होने के समर्थकों द्वारा तख्तापलट को रोकने हेतु तुर्की द्वारा आक्रमण किया गया तथासाइप्रस जातीय आधार पर विभाजित हो गया था।

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के बारे में

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization– NATO) एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है।

  1. इसकी स्थापना 4 अप्रैल, 1949 कोवाशिंगटन संधि द्वारा की गयी थी।
  2. मुख्यालयब्रुसेल्स, बेल्जियम।
  3. अलाइड कमांड संचालन मुख्यालय– मॉन्स (Mons), बेल्जियम।

नाटो का महत्व

नाटो, सामूहिक रक्षा प्रणाली का गठन करता है, जिसके तहत इसके स्वतंत्र सदस्य देश किसी भी बाहरी आक्रमण की स्थिति में सामूहिक रक्षा प्रदान करने के लिए तैयार होते हैं।

संरचना

  1. उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना 12 संस्थापक सदस्यों द्वारा की गयी थी, वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या बढ़कर 30 हो गयी है।मैसेडोनिया इस समूह में सम्मिलित होने वाला सबसे नवीनतम देश है, इसे नाटो में 27 मार्च 2020 को सम्मिलित किया गया।
  2. नाटो की सदस्यता ‘इस संधि के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने तथा उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा में योगदान देने में सक्षम किसी भी अन्य यूरोपीय देश’ के लिए खुली है।

उद्देश्य

राजनीतिक नाटो लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देता है तथा सदस्य देशों को समस्याओं को हल करने, परस्पर विश्वास बनाने और संघर्ष रोकने हेतु रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर परामर्श और सहयोग करने में सक्षम बनाता है।

सैन्य नाटो विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो इसके पास संकट-प्रबंधन कार्यवाही करने की सैन्य शक्ति है। इन कार्यवाहियों को ‘NATO’ की संस्थापक संधि (वाशिंगटन संधि) के सामूहिक रक्षा परिच्छेद (अनुच्छेद 5) के तहत कार्यान्वित किया जाता है।

स्मार्ट मीटर

G.S. Paper-III (S & T)

संदर्भ

विद्युत‌ की बढ़ती मांग के परिप्रेक्ष्य में समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (aggregate technical and commercial : AT&C) हानियों के समाधान के लिए स्मार्ट मीटरों का सुझाव दिया गया है. ज्ञातव्य है कि वर्ष 2030 तक विद्युत्‌ की मांग के लगभग दोगुना होने की संभावना व्यक्त की गई है.

मुख्य बिंदु

  • AT&C हानियों के कारण, वितरण निकायों को उनके द्वारा क्रय की गई विद्युत्‌ की प्रति यूनिट लगभग 72 पैसे की क्षति हो रही है.
  • भारत का लक्ष्य AT&C हानियों को वर्ष 2022 तक 12 प्रतिशत और वर्ष 2027 तक 10 प्रतिशत तक कम करना है. वर्तमान में यह क्षति 20 प्रतिशत तक आंकलित की गई है.
  • स्मार्ट मीटर दिन के भिन्न-भिन्न समय में उपभोक्ताओं के विद्युत्‌ के उपयोग का मापन एवं उसको रिकॉर्ड करते हैं और इस सूचना को ओवर-द-एयर (आभासी) संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऊर्जा आपूर्तिकर्ता को प्रेषित करते हैं.

स्मार्ट मीटर क्या है?

स्मार्ट मीटर विद्युत मीटर का एक उन्नत रूप है. अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित स्मार्ट मीटर की कार्य-प्रणाली एक छोटे से कंप्यूटर के जैसा ही है. जिस उपभोक्ता के यहाँ स्मार्ट मीटर लगाया जाएगा उसे मीटर से संबंधित पूरी जानकारी मीटर स्क्रीन पर हर समय मिलती रहेगी. नई व्यवस्था के अनुसार, स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता को अपना बिल जानने, बिल भुगतान करने या फिर किसी अन्य जानकारी के लिये इधर- उधर नहीं भटकना होगा. यह सारी जानकारी उपभोक्ता स्मार्ट मीटर की स्क्रीन पर आराम से पढ़ सकता है.

स्मार्ट मीटर के लाभ

  • DISCOMs के लिए:AT&C घाटे को कम करना, वित्त व्यवस्था में सुधार करना, ऊर्जा संरक्षण को प्रोत्साहित करना, बिल भुगतान में सुगमता को बढ़ाना और बिलिंग की सटीकता सुनिश्चित करना.
  • उपभोक्ताओं के लिए:उपयोग की निगरानी और बिलों के भुगतान में सुगमता प्रदान करना तथा उपभोक्ता संतुष्टि, प्रणाली की स्थिरता, विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता में वृद्धि करना.

चुनौतियाँ

  • उच्च अग्रिम लागत, साइबर सुरक्षा से संबंधित चुनौतियां, नई प्रणालियों के साथ सॉफ्टवेयर एकीकरण आदि.

एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) द्वारा प्रारंम किए गए स्मार्ट मीटर नेशनल प्रोग्राम का उद्देश्य भारत में 25 करोड़ पारंपरिक मीटरों को स्मार्ट मीटरों से प्रतिस्थापित करना है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ओणम

Onam

प्रमुख बिंदु

  • केरल के महान शासक राजा महाबली (King Mahabali) की स्मृति के सम्मान में ओणम (Onam) का त्योहार मनाया जाता है।
  • केरल का सबसे लोकप्रिय पर्व ओणम प्रायः सितंबर माह के पहले पखवाड़े में मनाया जाता है। यह राज्य काकृषि पर्व कहलाता है तथा इसे मुख्य तौर पर मलयाली हिंदू मनाते हैं।
  • ओणममलयालम कैलेंडर के पहले महीने ‘चिंगम’ से शुरू होता है, इसलिये इसे मलयाली हिंदुओं का नववर्ष भी कहा जाता है।
  • लगभग 10-12 दिन तक चलने वाले इस उत्सव का पहला और आखिरी दिन सबसे महत्त्वपूर्ण होता है।
  • यह त्यौहार असुरराजा महाबलि के पुनः घर आगमन का भी प्रतीक है। ओणम पर 26 पकवानों वाले सद्या (Sadya) को केले के पत्ते पर खास तरीके व क्रम में परोसा जाता है, जिसे सद्या थाली कहते हैं तथा इस भव्य महाभोज को ‘ओणासद्या (Onasadya) कहा जाता है। यह ओणम का सबसे महत्त्वपूर्ण आयोजन होता है।
  • ओणम के दिन पारंपरिक खेलों, संगीत और नृत्य का आयोजन होता है।

 

 

 

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