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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

21st September, 2020

G.S. Paper-II (National)

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana-PMGSY) के बारे में जानकारी दी।

प्रमुख बिंदु-

योजना का परिचय-

  • एकमुश्त विशेष हस्तक्षेप के रूप में PMGSY के पहले चरण की शुरुआत वर्ष 2000 में की गई। PMGSY का प्रमुख उद्देश्य निर्धारित जनसंख्या वाली असंबद्ध बस्तियों को ग्रामीण संपर्क नेटवर्क प्रदान कर ग्रामीण क्षेत्रों का सामाजिकआर्थिक सशक्तीकरण करना है। योजना के अंतर्गत जनसंख्या का आकार मैदानी क्षेत्रों में 500+ और उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों, मरुस्थलीय और जनजातीय क्षेत्रों में 250+ निर्धारित किया गया है।
  • इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य निर्धारित मानकों को पूरा करने करने वाली असंबद्ध बस्तियों को सड़क नेटवर्क प्रदान करना है। प्रारंभ में राज्यों के लिये सड़कों की लंबाई/वित्तीय लक्ष्य/आवंटन के संदर्भ में कोई भौतिक लक्ष्य निर्धारित नहीं किये गए थे। स्वीकृत परियोजनाओं के मूल्यों के अनुरूप राज्यों को निधि का आवंटन बाद के वर्षों में किया गया है।
  • भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में समग्र दक्षता में सुधार हेतु ग्रामीण सड़क नेटवर्क में 50,000 किमी. के उन्नयन के लिये PMGSY-II की शुरुआत की गई।
  • ग्रामीण कृषि बाज़ार(GrAMs), उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों को प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों से जोड़ने हेतु वर्ष 2019 में 1,25,000 किमी. के समेकन के लिये  PMGSY-III को प्रारंभ किया गया।
  • PMGSY के तहत ग्रामीण सड़कों का निर्माण और विकास ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में प्रस्तावित ज्यामितीय डिज़ाइन और भारतीय सड़क कांग्रेस (Indian Road Congress-IRC) के मैनुअल और अन्य प्रासंगिक IRC कोड और मैनुअल के अनुसार किया जाता है।
  • मंत्रालय द्वारा योजना के अंतर्गत कार्य संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report-DPR) के आधार पर स्वीकृत किये जाते हैं।
  • राज्यों द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जारी करते समय लागत को प्रभावित करने वाले भौतिक और पर्यावरणीय कारकों, जैसे- स्थलाकृति, मिट्टी के प्रकार, जलवायु, यातायात घनत्व, वर्षा और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित तकनीकी विशिष्टताओं, जैसे- आवश्यक जल निकासी, नालियों और संरक्षण कार्यों की आवश्यकताओं पर विचार किया जाता है।
  • सड़क निर्माण कार्यों के लिये लागत अनुमान तैयार करते समय भौगोलिक और संबंधित कारकों को ध्यान में रखा जाता हैं। PMGSY-I के अंतर्गत पात्र बस्तियों के आधार पर और PMGSY-II तथा III के मामले में सड़कों की लंबाई के आधार पर लक्ष्य आवंटित किये जाते हैं।
  • योजना में विशेष वितरण के उपाय के रूप में केंद्र सरकार पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में परियोजना लागत का 90% वहन करती है, जबकि अन्य राज्यों में केंद्र सरकार लागत का 60% वहन करती है।

योजना के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ-

  • PMGSY के अंतर्गत निर्मित ग्रामीण सड़क नेटवर्क को वर्तमान में मरम्मत की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन राज्य इन सड़कों के रखरखाव के लिये पर्याप्त मात्रा में व्यय नहीं कर रहे हैं। योजना क्रियान्वयन के नोडल मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिये यह एक चिंता का विषय है।
  • मंत्रालय के एक अनुमान के अनुसार, योजना के अंतर्गत निर्मित सड़कों के रखरखाव के लिये वर्ष 2020-21 से प्रारंभ होकर अगले पाँच वर्षों की अवधि के दौरान 75,000-80,000 करोड़ रुपए खर्च करने की आवश्यकता होगी। राज्यों द्वारा चालू वित्त वर्ष में 11,500 करोड़ रुपए खर्च किये जाने की आवश्यकता है और वर्ष 2024-25 तक आवश्यक राशि बढ़कर 19,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
  • योजना के प्रारंभ होने के पश्चात् से अब तक लगभग5 लाख बस्तियों को आपस में जोड़ने के लिये 6.2 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन सड़कों में से लगभग 2.27 लाख किमी. से अधिक लंबाई की सड़कें 10 वर्ष से अधिक और लगभग 1.79 लाख किमी. लंबी सड़कें 5 से 10 वर्ष तक पुरानी है। इन सभी को मिलाकर लगभग 67% सड़कों के उचित रखरखाव की आवश्यकता है।
  • राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियों में प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों का बार-बार स्थानांतरण योजना निगरानी की प्रभावशीलता को बाधित करता है। कुछ राज्यों द्वारा ऑनलाइन निगरानी प्रबंधन और लेखा प्रणाली पर नियमित रूप से योजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति को अद्यतन नहीं करना भी चिंता का विषय है।
  • अपर्याप्त परियोजना निष्पादन और अनुबंध क्षमता, भूमि तथा वन मंज़ूरी में देरी होना, आदि भी योजना की भौतिक प्रगति में आने वाली कुछ प्रमुख बाधाएँ हैं। PMGSY के कैग ऑडिट में देखा गया कि बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित नौ राज्य सड़कों के निर्माण में पिछड़े हुए थे।

आगे की राह-

  • योजना में भ्रष्ट और संदिग्ध ठेकेदारों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिये, जिससे भविष्य में उन्हें टेंडर देने से बचा जा सके।
  • वर्तमान में विद्यमान मुद्दों के समाधान के लिये खरीद प्रक्रिया को उन्नत करने के साथ ही मंत्रालय को ठेकेदारों को समय पर भुगतान भी सुनिश्चित करना चाहिये ताकि श्रमिकों को समय पर भुगतान किया जा सके।

इंटरनेशनल कोस्टल क्लीन-अप डे और ब्लू फ्लैग प्रमाण-पत्र

G.S. Paper-III (Environment & Ecology)

चर्चा में क्यों?

इंटरनेशनल कोस्टल क्लीनअप डे(International Coastal Clean-Up Day) के मौके पर भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने कहा कि देश के आठ समुद्री तटों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रमाणनब्लू फ्लैग‘(Blue Flag) के लिए अनुशंसित किया गया है।

इंटरनेशनल कोस्टल क्लीन-अप डे-

  • हर वर्ष सितंबर माह के तीसरे शनिवार कोइंटरनेशनल कोस्टल क्लीनअप डे’ (अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस) के रूप में चिह्नित किया जाता है। इसे 1986 से मनाया जा रहा है।
  • इस वर्ष 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
  • यह दिवस लोगों को समुद्र तटों को साफ करने, कचरे को हटाने आदि के लिए प्रोत्साहित करता है।

क्या होता है ‘ब्लू फ्लैग'(Blue Flag) प्रमाण-पत्र?

  • ‘ब्लू फ्लैग’ किसी भी समुद्री तट यानी बीच को दिया जाने वाला एक ख़ास क़िस्म का प्रमाणपत्र होता है जो फ़ाउंडेशन फॉर इनवॉयरमेंटल एजुकेशन नाम के एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन द्वारा दिया जाता है। इस संगठन का मक़सद पर्यावरणीय जागरुकता के ज़रिए सतत विकास को बढ़ावा देना है। डेनमार्क के कोपनहेगन शहर स्थित इस संगठन द्वारा ब्लू फ्लैगसर्टिफ़िकेट की शुरुआत साल 1985 में की गई थी।
  • ब्लू फ्लैग मानकों के तहत समुद्र तट को पर्यावरण और पर्यटन से जुड़े 33 शर्तों को पूरा करना होता है।

इन शर्तों को चार व्यापक वर्गों में बाँटा गया है-

  1. पर्यावरण शिक्षा और सूचना
  2. नहाने वाले पानी की गुणवत्ता
  3. पर्यावरण प्रबंधन
  4. सुरक्षा समेत अन्य सेवाएं

अगर किसी समुद्री तट को ब्लू फ्लैग का सर्टिफिकेट मिल जाता है तो इसका मतलब वो समुद्री तट या बीच प्लास्टिक मुक्त, गंदगी मुक्त और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाओं से लैस है। साथ ही, वहां आने वाले सैलानियों के लिए साफ पानी की मौजूदगी, अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक पर्यटन सुविधाएँ और समुद्र तट के आसपास पर्यावरणीय प्रभावों की जानकारी जैसी सुविधाएँ भी चुस्त-दुरुस्त होनी चाहिए।

भारत के आठ समुद्री तट-

  1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा देश के जिन आठ समुद्री तटों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन ‘ब्लू फ्लैग'(Blue Flag) के लिए अनुशंसित किया गया है, वे निम्नलिखित हैं-
  2. गुजरात का शिवराजपुर
  3. ओडिशा का गोल्डन तट
  4. केरल का कप्पड़
  5. आंध्र प्रदेश का रुशीकोंडा
  6. कर्नाटक का पदुबिद्री और कासरकोड़ (Padubidri and Kasarkod)
  7. अंडमान एवं निकोबार का राधानगर एक तट
  8. दमन-दीव का घोघला (Ghoghla)

भारत सरकार के प्रयास-

  • भारत ने ‘ब्लू फ्लैग’ मानकों के मुताबिक अपने समुद्र तटों को विकसित करने का पायलट प्रोजेक्ट दिसंबर 2017 में शुरु किया था।
  • इस परियोजना के दो मूल मक़सद हैं। पहला, भारत में लगातार गंदगी और प्रदूषण के शिकार होते समुद्र तटों को इस समस्या से निजात दिलाकर इनका पर्यावास दुरुस्त करना और दूसरा, सतत विकास और पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाकर भारत में इको फ्रेंडली पर्यटन विकसित करना है।
  • भारत में, समुद्री तटों को ‘ब्लू फ्लैग’ के मानकों के मुताबिक विकसित करने का काम सोसायटी फॉर इंटीग्रेटेड कोस्टल मैनेजमेंट (SICM) नाम की संस्था कर रही है। यह संस्था पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है।
  • भारत ने एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (ICZM- Integrated Coastal Zone Management) के तहत अपना इको-लेबल “BEAMS” (Beach Environment & Aesthetics Management Services) को भी लांच किया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

(National Human Resource Commission- NHRC)

G.S. Paper-II (National)

चर्चा का कारण-

हाल ही में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने असम सरकार को बिश्वनाथ जिले में 48 वर्षीय व्यक्ति को 1 लाख रु. का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस व्यक्ति को एक साप्ताहिक बाजार में अपनी चाय की दुकान में पका हुआ गोमांस बेचने के आरोप में भीड़ ने पीटा था।

UPSC परीक्षा के लिए इस लेख की प्रासंगिकता:

इस लेख से, हम NHRC के पास मुआवजे के भुगतान की सिफारिश करने की शक्तियों के बारे में समझ सकते हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बारे में-

  • यह, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (Protection of Human Rights Act– PHRA), 1993 के अंतर्गत स्थापित एक स्वतंत्रवैधानिक निकाय (Statutory Body) है। इसकी स्थापना 12 अक्टूबर, 1993 को की गयी थी।
  • इस अधिनियम मेंराज्य मानवाधिकार आयोग’ के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठनपेरिस सिद्धांतों के अनुरूप किया गया है।
  • पेरिस सिद्धांतों को अक्तूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसम्बर, 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा समर्थित किया गया था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की संरचना-

  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठनएक अध्यक्षचार पूर्ण कालिक सदस्यों तथा चार मानद सदस्यों से होता है।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथसाथ उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश भी नियुक्त किये जा सकते हैं।
  • इसके अध्यक्ष और सदस्यों कीनियुक्ति एक छह सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इस समिति के सदस्यों में निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है:
  1. प्रधान मंत्री (प्रमुख)
  2. लोकसभा के अध्यक्ष
  3. राज्य सभा के उपाध्यक्ष
  4. संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता
  5. केंद्रीय गृह मंत्री।

कार्यकाल तथा पदत्याग-

  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकालतीन वर्ष अथवा 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित है।
  • विशेष परिस्थितियों में, इन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है।

आयोग के कार्य-

  1. आयोग स्वतः संज्ञान लेकर अथवा किसी पीड़ित या उनकी ओर से अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई याचिका पर, मानव अधिकारों का हनन करने अथवा लोक सेवक द्वारा इस प्रकार के हनन की रोकथाम में लापरवाही की जांच करेगा।
  2. न्यायालय के समक्ष लंबित मानव अधिकारों के हनन के किसी आरोप से संबंधित किसी कार्यवाही में उस न्यायालय की मंजूरी के साथ हस्तक्षेप करना।
  3. राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन किसी जेल अथवा किसी अन्य संस्थान, वहां के संवासियों के जीवनयापन की दशाओं का अध्ययन करने तथा उनके संबंध में संस्तुतियाँ करने के लिए राज्य सरकार को सूचित करते हुए, दौरा करना।
  4. मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए इसके द्वारा अथवा संविधान के अंतर्गत अथवा कुछ समय के लिए लागू किसी कानून के सुरक्षोपायों की समीक्षा करना।
  5. उन तथ्यों की समीक्षा करना, जिसमें आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं जो मानव अधिकारों के उपयोग को रोकती हैं तथा उचित उपचारी उपायों की संस्तुति करना।
  6. मानव अधिकारों से संबंधित संधियां एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेजों का अध्ययन करना तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संस्तुतियां करना।
  7. मानव अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करना तथा उनको बढ़ावा देना।
  8. समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मानव अधिकार शिक्षा का प्रसार करना तथा प्रकाशनों, मीडिया, सेमिनार तथा अन्य उपलब्ध साधनों से इन अधिकारों के संरक्षण हेतु उपलब्ध सुरक्षोपायों की जागरूकता को बढ़ाना।
  9. गैर सरकारी संगठनों एवं मानव अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों के प्रयास को बढ़ावा देना।
  10. मानव अधिकारों के संवर्धन हेतु आवश्यक समझे जाने वाले इसी प्रकार के अन्य कार्य।

आयोग की शक्तियां-

आयोग के लिए अधिनियम के अंतर्गत शिकायतों पर जांच करते समय नागरिक दंड संहिता प्रक्रिया 1908 के अंतर्गत वे सभी शक्तियां प्राप्त हैं जो सिविल कोर्ट किसी वाद के विचारण के समय प्राप्त होती है।

प्रमुख शक्तियां–

  1. गवाहों की उपस्थिति हेतु समन करना तथा हाजिर करना तथा शपथ पर उनकी जांच करना।
  2. किसी दस्तावेज को ढूंढना एवं प्रस्तुत करना।
  3. हलफनामे पर साक्ष्य प्राप्त करना।
  4. किसी पब्लिक रिकॉर्ड को मांगना अथवा किसी न्यायालय अथवा कार्यालय से उनकी प्रति मांगना।
  5. गवाहों अथवा दस्तावेजों की जांच के लिए शासन पत्र जारी करना।
  6. निर्धारित किया गया कोई अन्य मामला।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

एयर बबल

(Air Bubble)

एयर बबल, COVID-19 के कारण नियमित रूप से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें निलंबित होने के पश्चात अनिवार्य रूप से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए दो देशों के बीच एक अस्थायी व्यवस्था है।

इस व्यवस्था के तहत, दोनों देशों की एयरलाइनों को उड़ाने शुरू करने की अनुमति दी गयी है। यह व्यवस्था वंदे भारत मिशन के भिन्न है, जिसमे केवल भारतीय वायु वाहकों को ही उड़ानें संचालित करने की अनुमति थी।

चर्चा का कारण-

भारत ने 13 सितम्बर 2020 तक कुल 10 देशों—अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, मालदीव, यूएई, कतर, अफगानिस्तान और बहरीन के साथ एयर बबल समझौता किया है।

 

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