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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

प्रत्यर्पण’ क्या होता है?

4th November, 2020

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या के वकील की उसे मामले से बरी करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया और केंद्र सरकार से छह हफ्ते के अंदर विजय माल्या को यूनाइटेड किंगडम से भारत को प्रत्यर्पित किए जाने संबंधी प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को कहा है।

पृष्ठभूमि-

भारत, मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोपों की मामले में सुनवाई करने हेतु विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए यूनाइटेड किंगडम पर दबाव बना रहा है। मई माह में, विजय माल्या, ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट में भारत को प्रत्यर्पण किये जाने के विरुद्ध दायर अपील में हार गया था।

हालाँकि, ब्रिटिश सरकार से प्राप्त संकेतों के अनुसार, माल्या को जल्दी ही प्रत्यर्पित किए जाने की संभावना नहीं है। ब्रिटिश सरकार का कहना है, कि उसके प्रत्यर्पण से पहले एक कानूनी मुद्दा हल किया जाना बाकी है।

‘प्रत्यर्पण’ क्या होता है?

भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गयी परिभाषा के अनुसार  ‘प्रत्यर्पण, एक देश द्वारा दूसरे देश में किये गए किसी अपराध में अभियुक्त अथवा दोषी ठहराए गए व्यक्तियो को संबंधित देश के लिए सौपना है, बशर्ते वह अपराध उस देश की अदालत द्वारा न्यायोचित हो।

प्रत्यर्पण कार्यवाही की प्रक्रिया-

किसी अभियुक्त के लिए प्रत्यर्पण संबंधी कार्यवाही को जांच अथवा सुनवाई के दौरान तथा सजायाफ्ता अपराधियों के मामले में शुरू किया जा सकता है।

  1. मामले में जांच के दौरान अभियुक्त के प्रत्यर्पण के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अत्याधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
  2. कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास विदेशी अदालत में अभियुक्त के खिलाफ आरोपों को साबित करने वाले प्रथम दृष्टया अकाट्य सबूत होना आवश्यक हैं।

भारत में प्रत्यर्पण के लिए विधायी आधार-

भारतीय प्रत्यर्पण अधिनियम (Extradition Act),1962, भारत में प्रत्यर्पण हेतु विधायी आधार प्रदान करता है। इस अधिनियम में भारत से विदेशी राज्यों में आपराधिक भगोड़ों के प्रत्यर्पण से संबंधित कानूनों को समेकित किया गया है। वर्ष 1993 में भारतीय प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 को अधिनियम 66 द्वारा संशोधित किया गया था।

भारत में प्रत्यर्पण का नोडल प्राधिकरण-

कॉन्सुलर, पासपोर्ट और वीज़ा (CPV) प्रभाग, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, प्रत्यर्पण अधिनियम का प्रवर्तन करने के लिए केंद्रीय / नोडल प्राधिकरण है। यह निवर्तमान प्रत्यर्पण अनुरोधों को संसाधित करता है।

प्रत्यर्पण के लिए प्रतिबंध-

किसी अभियुक्त को निम्नलिखित मामलों में अनुरोध करने वाले राष्‍ट्र को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता है:

  1. कोई संधि नहीं होने पर (No treaty) – संधि के अभाव में, देश, एलियंस/नागरिकों के प्रत्यर्पण के लिए बाध्य नहीं होते हैं।
  2. संधि में शामिल अपराध नहीं होने पर (No treaty crime) – आम तौर पर, प्रत्यर्पण संधि में चिह्नित अपराधों तक ही सीमित होते है, तथा यह संधि में भागीदार देशों के परस्पर संबंधो के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
  3. सैन्य और राजनीतिक अपराध विशुद्ध रूप से सैन्य और राजनीतिक अपराधों के संबंध में प्रत्यर्पण से इंकार किया जा सकता है। आतंकवादी अपराधों और हिंसक अपराधों को प्रत्यर्पण संधियों के प्रयोजनों हेतु राजनीतिक अपराधों की परिभाषा से बाहर रखा गया है।
  4. दोहरी आपराधिकता का अभियुक्त होने पर (Want of Dual Criminality) – जब कोई अभियुक्त किसी अपराध के भारत और अन्य देश, दोनों में वांछित होता है।
  5. प्रक्रियात्मक विचार (Procedural considerations) – प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर प्रत्यर्पण से इंकार किया जा सकता है।

यमुना में अमोनिया के स्तर में वृद्धि

G.S. Paper-III

संदर्भ:

हरियाणा से होकर दिल्ली में बहने वाली यमुना नदी में अमोनिया का स्तर 3 पार्ट पर मिलियन (3 PPM) तक पहुँच गया है, जो कि अधिकतम स्वीकार्य सीमा 0.5 PPM से लगभग छह गुना अधिक है।

अमोनिया की पानी में स्वीकार्य सीमा-

भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards– BIS) के अनुसार, पीने के पानी में अमोनिया की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 0.5 पार्ट पर मिलियन (Parts Per Million-PPM) है।

अमोनिया के बारे में प्रमुख तथ्य-

अमोनिया एक रंगहीन गैस है और इसका उपयोग उर्वरक, प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, रंजक और अन्य उत्पादों के उत्पादन में औद्योगिक रसायन के रूप में किया जाता है।

  • यह हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन से मिलकर बनती है। द्रव अवस्था में इसेअमोनियम हाइड्रॉक्साइड कहा जाता है।
  • यहतीक्ष्ण गंधयुक्त एक अकार्बनिक यौगिक है।
  • अमोनिया, प्राकृतिक रूप से वातावरण में जैविक अपशिष्ट पदार्थ के विघटन से निर्मित होती है।
  • यह हवा की तुलना में काफी हल्की होती है।

संदूषण (Contamination):

  • यह औद्योगिक अपशिष्टों अथवा सीवेज संदूषण के माध्यम से मृदा अथवा सतही जल स्रोतों में पहुँच जाती है।
  • जल में अमोनिया की मात्रा 1 PPM से अधिक होने पर, जल मछलियों के लिए विषाक्तहो जाता है।
  • मनुष्यों द्वारा1 PPM या उससे अधिक के अमोनिया युक्त जल का लंबे समय तक सेवन करने से उसके आंतरिक अंगों को नुकसान हो सकता है।

यमुना में अमोनिया के बढ़ते स्तर का कारण-

यमुना नदी में अमोनिया की अधिक मात्रा के लिए, हरियाणा के पानीपत और सोनीपत जिलों में डाई यूनिट (Dye Units), डिस्टिलरी से निकले अपशिष्ट व संदूषित पदार्थों तथा नदी के इस भाग में बिना सीवर वाली कालोनियों द्वारा अशोधित गंदे पानी का प्रवाह को मुख्य कारण माना जाता है।

समय की मांग-

  • यमुना नदी में हानिकारक अपशिष्टों को डालने अथवा प्रवाहित करने के खिलाफदिशानिर्देशों का सख्ती से कार्यान्वयन किया जाना आवश्यक है।
  • अशोधित गंदे पानी के यमुना में प्रवाह पर रोकसुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • सतत न्यूनतम प्रवाह, जिसेपारिस्थितिक प्रवाह भी कहा जाता है, को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पानी की इस न्यूनतम मात्रा को नदी के पूरे विस्तार में जलीय तथा ज्वारनदमुखीय परितंत्रो एवं मानव-आजीविका के वहन हेतु सदैव प्रवाहित होना चाहिए।

चुनौतियां:

  1. दिल्ली, पानी संबंधित 70 प्रतिशत आवश्यकताओं के लिए हरियाणा पर निर्भर है।
  2. हरियाणामें बड़ी संख्या में लोग कृषिकार्यों में सलंग्न हैं तथा इस कारण हरियाणा के पास पानी की अपनी समस्या है।
  3. दोनों राज्यों के मध्ययमुना में सदैव 10 क्यूमेक्स (क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड) प्रवाह बनाए रखने के पीछे अक्सर विवाद रहता है।
  4. पिछले एक दशक में दोनों राज्य, जल-बटवारे के लिए कई बार अदालतों में निर्णय के लिए अपील कर चुके है।
  5. नदी में न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह की कमी होने से अन्य प्रदूषकों का संचय होता है।यमुना के अशोधित पानी को उत्तरी पूर्वी दिल्ली में शोधित किया जाता है, इस क्षेत्र से काफी मात्रा में अनुपचारित सीवेज तथा घरों से निकाला गंदा पानी, गंदे नाले तथा गैर-कानूनी कारखानों से संदूषित पदार्थ युमना में प्रवाहित होते है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

मिशन सागर- II

मिशन सागर-II के एक अंग के रूप में, भारतीय नौसेना जहाज ऐरावत सूडान, दक्षिण सूडान, जिबूती और इरिट्रिया को खाद्यान्न सहायता पहुंचाएगा।

  1. मिशन सागर-II, मई-जून 2020 में संपन्न किए गए प्रथम ‘मिशन सागर’ का अनुसरण करता है।
  2. प्रथम ‘मिशन सागर’ के तहत भारत ने मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स, मेडागास्कर और कोमोरोस को खाद्य सहायता और दवाइयां प्रदान की थी।

 

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