Online Portal Download Mobile App English ACE +91 9415011892 / 9415011893

डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

पैंगोंग त्सो क्षेत्र में सेनाओं की समन्वित वापसी

G.S. Paper-II

संदर्भ:

भारत और चीन, दोनों पक्ष, पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से अग्रिम मोर्चे पर तैनात सेनाओं की वापसी हेतु एक समझौते पर पहुंच चुके हैं।

समझौते के अनुसार:

  1. चीनी पक्ष, फिंगर 8 के पूर्व में झील के उत्तरी किनारे पर, अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगा।
  2. बदले में, भारतीय सेना, फिंगर 3 के निकट अपने स्थायी बेस ‘धन सिंह थापा पोस्ट’ पर तैनात रहेगी।
  3. दोनों पक्षों द्वारा, इसी प्रकार की कार्रवाई, झील के दक्षिणी किनारे पर भी की जाएगी।
  4. दोनों पक्षों द्वारा, अप्रैल 2020 के बाद से, इस क्षेत्र में निर्मित किये गए सभी ढांचे को हटा दिया जाएगा और जमीन को पहले जैसा कर दिया जाएगा।
  5. दोनों पक्ष, अपने पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त करने सहित, उत्तरी किनारे पर सैन्य गतिविधियों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित करने पर सहमत हो गए हैं।

इस स्थान पर विवाद का कारण:

वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control- LAC) – सामान्यतः यह रेखा पैंगोंग त्सो झील की चौड़ाई को छोड़कर स्थल से होकर गुजरती है तथा वर्ष 1962 के बाद से भारतीय और चीनी सैनिकों को विभाजित करती है। पैंगोंग त्सो क्षेत्र में यह रेखा पानी से होकर गुजरती है।

  1. दोनों पक्षों ने अपने क्षेत्रों को चिह्नित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र घोषित किए हुए हैं।
  2. भारत का पैंगोंग त्सो क्षेत्र में 45 किमी की दूरी तक नियंत्रणहै, तथा झील के शेष भाग को चीन के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

पैंगोंग त्सो झील का ‘फिंगर्स’ में विभाजन:

पैंगोंग त्सो झील को फिंगर्स (Fingers) के रूप में विभाजित किया गया है। इस क्षेत्र में भारत और चीन के बीच LAC को लेकर मतभेद है, तथा यहाँ पर 8 फिंगर्स विवादित है।

  1. भारत का दावा है, कि LAC फिंगर 8 से होकर गुजरती है, और इसी स्थान पर चीन की अंतिम सेना चौकी है।
  2. भारत इस क्षेत्र में, फिंगर 8 तक, इस क्षेत्र की संरचना के कारण पैदल गश्त करता है। लेकिन भारतीय सेना का नियंत्रण फिंगर 4 तक ही है।
  3. दूसरी ओर, चीन का कहना है कि LAC फिंगर 2 से होकर गुजरती है। चीनी सेना हल्के वाहनों से फिंगर 4 तक तथा कई बार फिंगर 2 तक गश्त करती रहती है।

पैंगोंग त्सो क्षेत्र में चीनी अतिक्रमण का कारण-

  1. पैंगोंग त्सो झील रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चुशूल घाटी (Chushul Valley)के नजदीक है। वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान चीन द्वारा मुख्य हमला चुशूल घाटी से शुरू किया गया था।
  2. चुशूल घाटी का रास्तापैंगोंग त्सो झील से होकर जाता है, यह एक मुख्य मार्ग है, चीन, इसका उपयोग, भारतीय-अधिकृत क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए कर सकता है।
  3. चीन यह भी नहीं चाहता है, कि भारत LAC के आस पास कहीं भी अपने बुनियादी ढांचे को विस्तारित करे। चीन को डर है, कि इससे अक्साई चिन और ल्हासा-काशगर (Lhasa-Kashgar) राजमार्ग पर उसके अधिकार के लिए संकट पैदा हो सकता है।
  4. इस राजमार्ग के लिए कोई खतरा, लद्दाख और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चीनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं के लिए बाधा पहुचा सकता है।

पैंगोंग त्सो के बारे में-

  1. लद्दाखी भाषा में पैंगोंग का अर्थ है, समीपता और तिब्बती भाषा में त्सो का अर्थ झीलहोता है।
  2. पैंगोंग त्सो, लद्दाख में 14,000 फुट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित एक लंबी संकरी, गहरी, स्थलरुद्ध झील है, इसकी लंबाई लगभग 135 किमी है।
  3. इसका निर्माण टेथीज भू-सन्नतिसे हुआ है।
  4. यह एक खारे पानी की झीलहै।
  5. काराकोरम पर्वत श्रेणी, जिसमे K2 विश्व दूसरी सबसे ऊंची चोटी सहित 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली अनेक पहाड़ियां है तथा यह ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन और भारतसे होती हुई पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर समाप्त होती है।
  6. इसके दक्षिणी तट पर भी स्पंगुर झील (Spangur Lake)की ओर ढलान युक्त ऊंचे विखंडित पर्वत हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

वायनाड वन्यजीव अभयारण्य

  1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वायनाड वन्यजीव अभयारण्य के आसपास प्रस्तावित इको-सेंसिटिव ज़ोन (Eco-Sensitive Zone-ESZ) को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है.
  2. वायनाड वन्यजीव अभयारण्य केरल के वायनाड जिले में स्थित है.इसका क्षेत्रफल लगभग 344.44 वर्ग किमी है.
  3. विभिन्न प्रकार के बड़े जंगली जानवर जैसे भारतीय बाइसन, हाथी, हिरण और बाघ यहाँ पाए जाते हैं.
  4. वायनाड वन्यजीव अभयारण्य केरल का दूसरा सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य है.
  5. 1973 में स्थापित, वायनाड वन्यजीव अभयारण्य अब नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का एक अभिन्न अंग है.

 

नवीनतम समाचार

get in touch with the best IAS Coaching in Lucknow