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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

पी-नोट्स के माध्यम से निवेश में वृद्धि

24th August, 2020

G.S. Paper-III (Economy)

 चर्चा में क्यों?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय पूंजी बाज़ारों में पीनोट्स (P-Notes) के माध्यम से निवेश बढ़कर जुलाई, 2020 के अंत तक 63288 करोड़ रुपए हो गया है। पी-नोट्स के माध्यम से निवेश में यह लगातार चौथी मासिक वृद्धि है।

प्रमुख बिंदु

निवेश से संबंधित आँकड़े

  • पी-नोट्स (P-Notes) के माध्यम से जुलाई 2020 के अंत तक 63288 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। जिसके अंतर्गत इक्विटी में 52,356 करोड़ रुपए का, ऋणों में 10,429 करोड़ रुपए का, हाइब्रिड प्रतिभूतियों में 250 करोड़ रुपए का, डेरीवेटिव्समें 190 करोड़ रुपए का निवेश किया गया।
  • डेरीवेटिव (Derivative) एक वित्तीय साधन है जो अंतर्निहित परिसंपत्तियों से इसका मूल्य प्राप्त करता है।
  • जून 2020 के अंत में पी-नोट्स के माध्यम से निवेश 62138 करोड़ रुपए था।
  • इससे पहले मई एवं अप्रैल के अंत में निवेश क्रमशः 60027 करोड़ रुपए और 57100 करोड़ रुपए था।
  • मार्च 2020 के अंत में निवेश 15 वर्ष के निचले स्तर 48,006 करोड़ रुपए पर आ गया था।
    मार्च 2020 के अंत में यह आंकड़ा अक्तूबर 2004 के बाद से निवेश के सबसे निचले स्तर पर था जब भारतीय बाज़ारों में पी-नोट्स के माध्यम से निवेश का कुल मूल्य 44,586 करोड़ रुपए था।

पी-नोट्स (P-Notes)-

  • पीनोट्सया ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स (ODIs), पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPIs) द्वारा विदेशी निवेशकों, हेज़ फंड और विदेशी संस्थानों को जारी किये जाते हैं, जो सेबी में पंजीकृत हुए बिना भारतीय शेयर बाज़ार में निवेश करना चाहते हैं।
  • यद्यपि सेबी ने विदेशी निवेशकों द्वारा जारी किये जाने वाले प्रत्येक पी-नोट्स (Participatory Notes) के लिये 1,000 डॉलर का नियामक शुल्क लगाया है ताकि सट्टे (Speculation) के लिये पी-नोट्स का प्रयोग न किया जा सके है। अब, यह शुल्क प्रत्येक पी-नोट्स जारी करने वाले सभी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर लगाया जाता है।
  • सेबी, पी-नोट्स जारी करने वाले पर प्रत्येक तीन वर्ष में 1,000 डॉलर का शुल्क लगाता है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई FPI पाँच अलग-अलग निवेशकों को पी-नोट्स जारी करता है, तो उसे 5,000 डॉलर का भुगतान शुल्क के रूप में जमा करना पड़ता है।

वित्तीय बाज़ार (Financial Markets)-

  • वित्तीय बाज़ारों को उनमें कारोबार किये गए वित्तीय साधनों की परिपक्वता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
  • मुद्रा बाज़ार(Money Market) में एक वर्ष से कम की परिपक्वता वाले वित्तीय उपकरणों का कारोबार किया जाता है। जैसे- ट्रेजरी बिल, वाणिज्यिक पत्र आदि।
  • पूंजी बाज़ार(Capital Market) में अधिक समय की परिपक्वता वाले उपकरणों का कारोबार होता है। जैसे- शेयर, डिबेंचर आदि।

निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति

 G.S. Paper-II (National)

संदर्भ

हाल ही में, संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राजीव कुमार (सेवानिवृत्त आईएएस) को चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है।

भारत निर्वाचन आयोग के बारे में-

  • भारत के संविधान केअनुच्छेद 324 के अंतर्गत संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन के लिए संचालन, निर्देशन व नियंत्रण तथा निर्वाचन हेतु मतदाता सूची तैयार कराने के लिए निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है।

भारत निर्वाचन आयोग की संरचना-

संविधान में चुनाव आयोग की संरचना के संबंध में निम्नलिखित उपबंध किये गए हैं:

  1. निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य आयुक्तों से मिलकर बना होता है
  2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी
  3. जब कोई अन्य निर्वाचन आयुक्त इस प्रकार नियुक्त किया जाता है तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा।
  4. राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए आवश्यक समझने पर, निर्वाचन आयोग की सलाह से प्रादेशिक आयुक्तों की नियुक्ति कर सकता है।
  5. निर्वाचन आयुक्तों और प्रादेशिक आयुक्तों की सेवा शर्तें तथा पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जायेंगी।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त-

  • यद्यपि मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष होते हैं,फिर भी उनकी शक्तियाँ अन्य निर्वाचन आयुक्तों के सामान होती हैं।आयोग के सभी मामले सदस्यों के मध्य बहुमत के द्वारा तय किए जाते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों को वेतन, भत्ते व अन्य अनुलाभ एक-सामान प्राप्त होते हैं।

पदावधि-

मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, तक होता है। वे राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए किसी भी समय त्यागपत्र दे सकते हैं।

निष्कासन-

  • वे किसी भी समय त्यागपत्र दे सकते हैं या उन्हें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से व उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाया जाता है।

फ्लाई ऐश का सुंदरबन की पारिस्थितिकी पर प्रभाव

 G.S. Paper-III (Environment & Ecology)

चर्चा में क्यों?

पर्यावरण विशेषज्ञों एवं मत्स्य संगठनों ने हुगली नदी में फ्लाई ऐश से भरे बर्गों (एक प्रकार की नौका) के डूबने जैसी घटनाओं को सुंदरवन की पारिस्थितिकी के लिये एक गंभीर खतरे के रूप में चिह्नित किया है।

प्रमुख बिंदु-

  • फ्लाई ऐश से भरी नौकाओं के डूबने की घटनाओं में से एक हुगली नदी पर तथा दूसरी मुरी गंगा (Muri Ganga) नदी; जो सागर द्वीप के पास हुगली से मिलती है, पर हुई है।
  • लगभग 100 बांग्लादेशी नौकाएँ जिनमें प्रत्येक का वज़न 600-800 टन होता है, नियमित रूप से भारतीय जल-मार्गों से गुजरते हैं।
  • इन नौकाओं के माध्यम से भारत के तापीय ऊर्जा संयत्रों से उत्पन्न फ्लाई ऐश को बांग्लादेश में ले जाया जाता है जहाँ फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट उत्पादन में किया जाता है।

मुरी गंगा (Muri Ganga)-

मुरी गंगा हुगली नदी की एक सहायक नदी है जो पश्चिम बंगाल के बहती है। यह सागर द्वीप (Sagar Island) को काकद्वीप (Kakdwip) से जोड़ती है।

हुगली नदी (Hugli River)-

हुगली, गंगा नदी की एक वितरिका है। हुगली नदी कलकत्ता से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर में गंगा से निकलती है तथा बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

सागर द्वीप (Sagar Island)-

हुगली नदी और मुरी गंगा तथा बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है। यह द्वीप उच्च ज्वार के समय समुद्री लहरों से प्रभावित रहता है।

फ्लाई ऐश (Fly Ash)-

फ्लाई ऐश (Fly Ash) प्राय: कोयला संचालित विद्युत संयंत्रों से उत्पन्न प्रदूषक है, जिसका वर्तमान में कई आर्थिक गतिविधियों जैसे- सीमेंट निर्माण, ईंट निर्माण, सड़क निर्माण आदि में प्रयोग किया जाता हैं।

फ्लाई ऐश का पारिस्थितिकी पर प्रभाव-

  • फ्लाई एश में मौजूद विभिन्न विषैले तत्त्वों के मिश्रण के कारण नदी प्रदूषित हो रही है तथा ये प्रदूषक मत्स्य उत्पादन तथा उपभोग को प्रभावित कर सकता है।
  • फ्लाई ऐश के कारण न केवल मत्स्यन अपितु मैंग्रोव क्षेत्र की पारिस्थितिकी भी प्रभावित हो सकती हैं।
  • जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने पर फ्लाई ऐश धीरे-धीरे बाहर निकलकर नदी के तल में जमा हो जाती है।
  • फ्लाई ऐश मे उपस्थित प्रदूषक जैसे- सीसा, क्रोमियम, मैग्नीशियम, जस्ता, आर्सेनिक आदि पानी में मिल जाते हैं। ये प्रदूषक जलीय वनस्पतियों एवं जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं।

परिवहन का नियमन-

‘भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण’ (Inland Waterways Authority of India- IWAI) सीमा-पार जलयानों की आवाजाही को नियंत्रित करता है।

आगे की राह-

बांग्लादेश में फ्लाई ऐश ले जाने वाले अधिकांश जहाज काफी पुराने हैं तथा इतनी लंबी यात्रा के लिये उपयुक्त नहीं है। अत: सरकार को सुंदरवन से गुजरने वाले इन जहाज़ों पर रोक लगाई जानी चाहिये।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI)-

  • अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास और विनियमन हेतु भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की स्थापना 27 अक्तूबर, 1986 को की गई।
  • IWAI जहाज़रानी मंत्रालय (Ministry of Shipping) के अधीन एक सांविधिक निकाय है।
  • यह जहाज़रानी मंत्रालय से प्राप्त अनुदान के माध्यम से राष्ट्रीय जलमार्गों पर अंतर्देशीय जल परिवहन अवसंरचना के विकास और अनुरक्षण का कार्य करता है।
  • वर्ष 2018 में IWAI ने कार्गो मालिकों एवं लॉजिस्टिक्स संचालकों को जोड़ने हेतु समर्पित पोर्टल ‘फोकल’ (Forum of Cargo Owners and Logistics Operators-FOCAL) लॉन्च किया था जो जहाज़ों की उपलब्धता के बारे में रियल टाइम डेटा उपलब्ध कराता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारतीय गौर

Indian Gaur

हाल ही में उत्तर बंगाल में जलपाईगुड़ी ज़िले में गोरूमारा नेशनल पार्क (Gorumara National Park) में भारतीय बाइसन (Indian Bison) या भारतीय गौर (Indian Gaur) का शव मिला।

भारतीय गौर (Indian Gaur)-

  • इसका वैज्ञानिक नामबोस गोरस (Bos Gaurus) है जबकि स्थानिक नाम ‘गौर है।
  • मूल रूप से यह दक्षिण एशिया तथा दक्षिण पूर्व एशिया मे पाया जाने वाला एक बड़ा, काले लोम (बालों का आवरण) से ढका गोजातीय पशु है।
  • वर्तमान समय में इसकी सबसे अधिक आबादी भारत में पाई जाती है।
  • वर्ष 1986 से यहअंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की रेड लिस्ट में सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध है।

 

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