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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

पांच सूत्रीय कार्ययोजना पर भारत तथा चीन में सहमति

04 November 2020

G.S. Paper-II

संदर्भ:

लद्दाख में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच पाँच बिंदुओं पर सहमति बन गई है।

सहमति के पांच बिंदु:

  1. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तथा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई आम सहमति के बाद ‘असहमतियों को तनाव का रूप अख्तियार नहीं करने देना’ पर दोनों देश सहमत हुए हैं।
  2. सीमा पर तनाव कम करने के लिए शीघ्रता से सैनिकों की वापसी।
  3. भारत-चीन सीमा के इलाक़ों में शांति और सौहार्द्य बनाए रखने और सीमा मामलों को लेकर दोनों पक्ष सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करेंगे और तनाव बढ़ाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी।
  4. भारत-चीन मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच विशेष प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और श्री वांग के साथ-साथ अन्य तंत्रों के मध्य बातचीत जारी रखी जायेगी।
  5. नए विश्वास-बहाली उपायों (Confidence-Building Measures (CBMs) की दिशा में काम किया जाएगा।

तात्कालिक चुनौतियां-

  1. दोनों देशों के मध्य अप्रैल में हुए गतिरोध (stand-off) से पूर्व की स्थिति’ (status quo) की बहाली अथवा पहले के मोर्चों पर लौटने के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।
  2. भारत नेचीन से पोंगोंग त्सोडेपसांग और LAC के अन्य भागों पर अतिक्रमण करने की जगहों से पीछे हटने के लिए भी नहीं कहा है।

भारत और चीन दोनों के लिए क्या करने की आवश्यकता है?

  1. दोनों देशों के लिए तात्कालिक रूप से सभी विवादित क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी को सुनिश्चित करना चाहिए। भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए यह आवश्यक है।
  2. सैन्य अधिकारियों द्वारा चरणबद्ध तरीके से सैन्य टुकड़ियों को स्थाई मोर्चो पर तैनात करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

मुठभेड़ों के कारण-

  1. मुख्य रूप, दोनों देशों के मध्य मुठभेड़ें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) क्षेत्रों में होती हैं। LAC का कभी भी सीमांकन नहीं किया गया है।
  2. भारत-चीन सीमा के पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), सिक्किम और पूर्वी (अरुणाचल प्रदेश) क्षेत्रों मेंलगभग दो दर्जन स्थानों पर सीमा संबंधी अवधारणाओं में विशेष रूप से भिन्नता है।
  3. अधिकतर मुठभेड़ेंसीमा पर अतिव्यापी दावा करने वाले क्षेत्रों में गश्त करने के दौरान होती हैं।
  4. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिएवर्ष 2005 और 2013 में दोनों देशों द्वारा विस्तृत प्रोटोकॉल पर सहमति व्यक्त की गयी थी, लेकिन इन नियमों का पालन हमेशा नहीं किया जाता है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को स्पष्ट क्यों नहीं किया गया है?

भारत द्वारा काफी समय से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए LAC के संबंध में भिन्न अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए एक अभ्यास प्रस्तावित की जाती रही है। इसी क्रम में मध्य क्षेत्र में मानचित्रों का आदान-प्रदान किया गया था, लेकिन पश्चिमी क्षेत्र में अभ्यास विफल हो गया। पश्चिमी क्षेत्र में LAC संबंधी दावों को लेकर दोनों देशो के मध्य भिन्नता काफी अधिक है।

  1. चीन ने इस अभ्यास को खारिज कर दिया है, तथा वह इसे पहले से जारी सीमा वार्ताओं में जटिलता उत्पन्न करने वाला समझता है।
  2. भारत का तर्क है कि, इस अभ्यास से, एक LAC पर सहमत होने के बजाय, दोनों पक्षों को दूसरे के दावों को समझने में मदद मिल सकती है, जिससे सीमा विवाद का अंतिम निपटारा होने तक विवादित क्षेत्रों में गतिविधियों को विनियमित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV)

G.S. Paper-III

संदर्भ:

हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय ने केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा वन्य क्षेत्रों में पूर्वेक्षण तथा अन्वेषण हेतु शुद्ध वर्तमान मूल्य’ (Net Present Value- NVP) शुल्क को माफ किये जाने की मांग को खारिज कर दिया है।

पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है, कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, इस तरह की छूट देना ‘अनुचित’ होगा।

छूट मांग का कारण-

  • अन्वेषण के लिये चुने गए सभी क्षेत्रों को खदानों में परिवर्तित नहीं किया गया है, बल्कि इनमें से मात्र 1% पर ही खनन के लिए परिवर्तित किया गया है। इसे देखते हुए NPV को एक परिहार्य व्यय (avoidable expenditure) के रूप में देखा जाता है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिये।
  • खनन कंपनियों को अन्वेषण के लिये पट्टे/लीज़ पर दी गई वन भूमि पर NVP का 2-5% राशि जमा करना एक मुख्य चुनौती है, जो कि अन्वेषण / संभावित गतिविधियों में डेरी का कारण बनती है।

शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) क्या है?

शुद्ध वर्तमान मूल्य से आशय उस मूल्य के मौद्रिक सन्निकटन (monetary approximation) से है जो वन भूमि के किसी भाग को नष्ट किये जाने के कारण खो दिया जाता है। यह किसी वन और उसके पारिस्थितिक तंत्र को अवसंरचना परियोजनाओं के कारण होने वाली क्षति की भरपाई और इसके संरक्षण के प्रयासों हेतु किया जाने वाला अग्रिम भुगतान होता है।

  • NPV की गणना सेवाओं और पारिस्थितिक मूल्य के आधार पर की जाती है और इसके लिए निर्धारित सूत्र हैं, जो वन भूमि के स्थान और प्रकृति तथा इसे खनन में परिवर्तित करने वाले औद्योगिक उद्यम के प्रकार पर निर्भर करता है।
  • NPV को आर्थिक विकास संस्थान के प्रोफेसर कंचन गुप्ता के नेतृत्व में एक समिति द्वारा विकसित किया गया था।

इसे कब लागू किया गया था?

उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2002 में गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिये वन भूमि के उपयोग परिवर्तन को विनियमित करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने भूमि परिवर्तन पर उच्च शुद्ध वर्तमान मूल्य’ (NPV) शुल्क लागू किया था और इसमें बहुत ही सीमित छूट की अनुमति है।

जम्मू-कश्मीर एकीकृत शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल द्वारा प्रशासनिक अमले को बेहतर और उनके काम करने की गुणवत्ता सुधारने के क्रम में जम्मू-कश्मीर एकीकृत शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (JK-IGRAMS) का शुभारंभ किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • JK-IGRAMS को अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर परजम्मूश्रीनगर और रियासी जिले में शुरू किया जा रहा है
  • यह प्रणाली वर्ष 2018 में सरकार द्वारा शुरू किए गएमौजूदा शिकायत निवारण तंत्र को प्रतिस्थापित करेगी
  • यहकेंद्र सरकार के ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली/पोर्टल– CPGRAMS से जुड़ने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश होगा।

क्रियाविधि-

  • जम्मू-कश्मीर प्रशासन संबंधी शिकायतों के निपटान और निगरानी हेतुप्राथमिक स्तर परउपायुक्तों’ (Deputy Commissioners) को तैनात किया गया है।
  • सप्ताह में पांच दिन निर्धारित समय पर सभी जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक शिकायतों के निपटान हेतु उपलब्ध रहेंगे।इनके कार्यालयों में कोई भी व्यक्ति उनसे जाकर मिल सकता है।

महत्व:

जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल द्वारा यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब लोगों में, विशेष रूप से कश्मीर घाटी में, असंबद्धता और अलगाव की भावना बढ़ रही है। विदित हो कि, पिछले साल J & K की विशेष स्थिति को रद्द कर देने के बाद से घाटी में उद्विग्नता की स्थिति व्याप्त है।

केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) क्या है?

केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System- CPGRAMS) को लोक शिकायत निदेशालय (Directorate of Public Grievances– DPG) और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances– DARPG) के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (National Informatics Centre) द्वारा विकसित किया गया है।

  • इसका उद्देश्य, जनता की शिकायतों को प्राप्त करना, उनका निवारण तथा निगरानी करना था।
  • इसेकार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा शुरू किया गया है।

प्रमुख विशेषताऐं:

CPGRAMS, देश के किसी भी भौगोलिक हिस्से से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है।

यह नागरिकों को संबंधित विभागों के साथ की जा रही शिकायत को ऑनलाइन ट्रैक करने में सक्षम बनाता है और साथ ही DARPG  के लिए शिकायत मॉनिटर करने के लिए सक्षम बनाता है।

इस प्रक्रिया के अंतर्गत प्रत्येक कार्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी को शिकायत अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जायेगा। जिससे इस प्रणाली में सार्वजनिक शिकायतों और कर्मचारियों से संबंधित कार्यों को सुलभ, सरल, त्वरित, निष्पक्ष और उत्तरदायी तरीके से तय समय सीमा में निपटान को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

टाइफून हैशेन

  • हाल ही में, जापान एवं इसके आसपास के क्षेत्र में शक्तिशाली टाइफून हैशेन ने काफी क्षति पहुँचाई है।
  • टाइफून हैशेन को श्रेणी-4 के तूफ़ान के रूप में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि इस तूफान में हवाओं की गति लगभग 230 किमी./घंटा थी।
  • टाइफून ‘हैशेन’ का नामकरण चीन द्वारा किया गया था। हैशेनको चीनी भाषा मेंसमुद्री देवता के रूप में जाना जाता है।

 

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