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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act), 1960 के तहत वर्ष 2017 में जारी किए गए नियमों नियमों के बारे में सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया है, और एक याचिका का जवाब देते हुए कहा है, कि नियमों के तहत जानवरों को जब्त करने (Seizure) और अधिहरण करने (Confiscation) में अंतर है।

पिछले सप्ताह, अदालत ने केंद्र सरकार से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, क़ानून के तहत किसी अभियुक्त के अपराधी साबित होने से पहले ही उसके पशुओं के अधिहरण से संबंधित नियमों में संशोधन करने के लिए कहा था। केंद्र द्वारा इसी निर्देश के तहत अपना प्रत्युत्तर दाखिल किया गया।

संबंधित प्रकरण:

कुछ समय पूर्व शीर्ष अदालत में बफ़ेलो ट्रेडर्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन द्वारा एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें अधिकारियों द्वारा मवेशी परिवहन में प्रयुक्त वाहनों को जब्त करने और जानवरों को आश्रय स्थलों (Shelters) पर भेजने जाने संबंधी नियमों की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया कि नियम अधिसूचित किए जाने के बाद से ट्रांसपोर्टरों, किसानों और पशु व्यापारियों को धमकी दी जा रही है।

केंद्र सरकार का पक्ष:

केंद्र सरकार ने जब्त करने (Seizure) और अधिहरण करने (Confiscation) में अंतर स्पष्ट करते हुए कहा है, कि ‘जब्ती’ (Seizure) अस्थायी प्रकृति की होती है, जिसमे परिसंपत्ति पर कब्जा मात्र किया जाता है, जबकि अधिहरण (Confiscation), परिसंपत्ति के स्वामित्व-हस्तांतरण के तुल्य होती है और किसी मामले में परिसंपत्ति पर पक्षकारों के अधिकार संबंधी अंतिम निर्णय के बाद ही अधिहरण प्रक्रिया की जाती है।

पृष्ठभूमि:

पशु क्रूरता निवारण (केस विषयक पशुओं देखरेख एवं भरणपोषण) नियम, 2017:

( Prevention of Cruelty to Animals (Care and Maintenance of Case Property Animals) Rules, 2017):

  1. इन नियमों कोपशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत निर्मित किया गया था।
  2. 2017 के नियमों के अनुसार, मजिस्ट्रेट को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे में अभियुक्त व्यक्ति के मवेशियों को जब्त करने का अधिकार प्राप्त है।
  3. जब्त किये गए जानवरों को फिर ‘चिकित्सालयों’, ‘गौशालाओं,’ आदि में भेजा जा सकता है।
  4. इसके बाद में संबंधित अधिकारी इन जानवरों को ‘पालने के लिए’ किसी अन्य व्यक्ति को दे सकते हैं।

व्यापारियों की चिंताएं:

  1. व्यापारियों ने दावा किया है कि इनके पशुओं को गौशालाओं जबरन भेजकर इन्हें अपने मवेशियों से वंचित किया जा रहा है।
  2. इस प्रकार की लगातार लूटपाट से कानून के शासन को भी खतरा उत्पन्न हो रहा है और आम तौर दुस्साहसी व्यक्तियों के समूहों द्वारा कानून अपने हाथों में लिया जा है।
  3. इसके अलावा, इस प्रकार की घटनाएं समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को भड़काने का काम कर रही हैं।

आगे की राह:

यदि इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी ढंग से और तत्काल रोक नहीं लगाई गयी, तो देश के सामाजिक ताने-बाने पर विनाशकारी परिणाम पड़ेगा।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के बारे में:

  1. इस अधिनियम का उद्देश्य ‘जानवरों को अनावश्यक यंत्रणा अथवा पीड़ा दिए जाने’ को रोकना है।
  2. अधिनियम की धारा 4 के तहत, वर्ष 1962 में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) की स्थापना की गई थी।
  3. इस अधिनियम में ‘जानवरों को अनावश्यक यंत्रणा अथवा पीड़ा पहुचाने के लिए सजा का प्रावधान किया गया है। अधिनियम में जानवरों और इनके विभिन्न प्रकारों को परिभाषित करता है।
  4. इसके अंतर्गत, वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए जानवरों पर प्रयोग से संबंधित दिशानिर्देश प्रदान भी प्रदान किए गए हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ज़ुकोऊ घाटी

चर्चा का कारण:

मणिपुर और नागालैंड की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध जुकोउ घाटी में भीषण आग दो सप्ताह तक भड़कने के बाद बझाई जा सकी है, जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ।

ज़ुकोऊ घाटी के बारे में:

  1. यह नागालैंड और मणिपुर राज्यों की सीमाओं पर अवस्थित है।
  2. यह ज़ुकोऊलिली (Dzüko Lily) फूलों के लिए प्रसिद्ध है और यह फूल केवल इस घाटी में पाए जाते है।
  3. एशियाई राजमार्ग-1 (NH-1) और राजमार्ग-2 (NH-2) भी इसकी तलहटी से होकर गुजरते है।

 

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