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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

परिसीमन

16th July, 2020

G.S. Paper-II

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और असम सरकार से एक याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें असम में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया पर सवाल उठाये गए हैं. इस याचिका में इस आधार पर परिसीमन प्रक्रिया का विरोध किया गया है कि परिसीमन का आधार 2001 कि जनगणना को बनाया जा रहा है जबकि सरकार के पास 2011 की जनगणना के आंकड़े भी है और वर्तमान में 2021 की जनगणना का कार्य भी चल रहा है.

परिसीमन क्या है?

परिसीमन का शाब्दिक अर्थ विधान सभा से युक्त किसी राज्य के अन्दर चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निधारण होता है.

परिसीमन का कार्य कौन करता है?

  • परिसीमन का काम एक अति सशक्त आयोग करता है जिसका औपचारिक नामपरिसीमन आयोग है.
  • यह आयोग इतना सशक्त होता है कि इसके आदेशों को कानून माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • आयोग के आदेशराष्ट्रपतिद्वारा निर्धारित तिथि से लागू हो जाते हैं. इन आदेशों की प्रतियाँलोक सभा में अथवा सम्बंधित विधान सभा में उपस्थापित होती हैं. इनमें किसी संशोधन की अनुमति नहीं होती.

परिसीमन आयोग और उसके कार्य-

  • संविधान के अनुच्छेद82 के अनुसार संसद प्रत्येक जनगणना के पश्चात् एक सीमाकंन अधिनियम पारित करता है और उसके आधार पर केंद्र सरकार एक परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन करती है.
  • इस आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक सेवा-निवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त सदस्य होते हैं.
  • इस आयोग का काम चुनाव क्षेत्रों की संख्या और सीमाओं का इस प्रकार निर्धारण करना है कि यथासम्भव सभी चुनाव क्षेत्रों की जनसंख्या एक जैसी हो.
  • आयोग का यह भी काम है कि वह उन सीटों की पहचान करे जो अजा/अजजा के लिए आरक्षित होंगे. विदित हो कि अजा/अजजा के लिए आरक्षण तब होता है जब सम्बंधित चुनाव-क्षेत्र में उनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है.
  • सीटों की संख्या और आकार के बारे में निर्णय नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जाता है.
  • यदि आयोग के सदस्यों में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो बहुत के मत को स्वीकार किया जाता है.
  • संविधान के अनुसार, परिसीमन आयोग का कोई भीआदेश अंतिम होता है और इसको किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • प्रारम्भ में आयोग भारतीय राज्य पत्र में अपने प्रस्तावों का प्रारूप प्रकाशित करता है और पुनः उसके विषय में जनता के बीच जाकर सुनवाई करते हुए आपत्ति, सुझाव आदि लेता है. तत्पश्चात् अंतिम आदेश भारतीय राजपत्र और राज्यों के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाता है.

परिसीमन आवश्यक क्यों?

जनसंख्या में परिवर्तन को देखते हुए समय-समय पर लोक सभा और विधान सभा की सीटों के लिए चुनाव क्षेत्र का परिसीमन नए सिरे से करने का प्रावधान है. इस प्रक्रिया के फलस्वरूप इन सदनों की सदस्य संख्या में भी बदलाव होता है.

परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के अलग-अलग भागों को समान प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना होता है. इसका एक उद्देश्य यह भी होता है कि चुनाव क्षेत्रों के लिए भौगोलिक क्षेत्रों को इस प्रकार न्यायपूर्ण ढंग से बाँटा जाए जिससे किसी एक राजनीतिक दल को अन्य दलों पर बढ़त न प्राप्त हो.

चुनाव क्षेत्र परिसीमन का काम कब-कब हुआ है?

  • चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का काम सबसे पहले 1950-51 में हुआ था. संविधान में उस समय यह निर्दिष्ट नहीं हुआ था कि यह काम कौन करेगा. इसलिए उस समय यह काम राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के सहयोग से किया था.
  • संविधान के निर्देशानुसार चुनाव क्षेत्रों का मानचित्र प्रत्येक जनगणना के उपरान्त फिर से बनाना आवश्यक है. अतः 1951 की जनगणना के पश्चात्1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम पारित हुआ. तब से लेकर 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन का काम हुआ. उल्लेखनीय है कि 1976 में आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी ने संविधान में संशोधन करते हुए परिसीमन का कार्य 2001 तक रोक दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया था गया कि दक्षिण के राज्यों को शिकायत थी कि वे परिवार नियोजन के मोर्चे पर अच्छा काम कर रहे हैं और जनसंख्या को नियंत्रण करने में सहयोग कर रहे हैं जिसका फल उन्हें यह मिल रहा है कि उनके चुनाव क्षेत्रों की संख्या उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में कम होती है. अतः1981 और 1991 की जनगणनाओं के बाद परिसीमन का काम नहीं हुआ.
  • 2001 की जनगणना के पश्चात् परिसीमन पर लगी हुई इस रोक को हट जाना चाहिए था. परन्तु फिर से एकसंशोधन लाया गया और इस रोक को इस आधार पर 2026 तक बढ़ा दिया कि तब तक पूरे भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर एक जैसी हो जायेगी. इसी कारण 2001 की जनगणना के आधार पर किये गये परिसीमन कार्य (जुलाई 2002 – मई 31, 2018) में कोई ख़ास काम नहीं हुआ था. केवल लोकसभा और विधान सभाओं की वर्तमान चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को थोड़ा-बहुत इधर-उधर किया गया था और आरक्षित सीटों की संख्या में बदलाव लाया गया था.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

पद्मनाभस्वामी मंदिर

  • पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थितभगवान श्री विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है. भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल यह ऐतिहासिक मंदिर तिरुवनंतपुरम के अनेक पर्यटन स्थलों में से एक है.
  • मान्यता है कि तिरुवनंतपुरम नाम भगवान विष्णु के ‘अनंत’ नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है. यहाँ पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को ‘पद्मनाभ’ कहा जाता है और इस रूप में विराजित भगवान यहाँ पर पद्मनाभस्वामी के नाम से विख्यात हैं

स्थापत्य-

  • पद्मनाभस्वामी मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का जबरदस्त उदाहरण है. इसका निर्माण राजा मार्तण्ड द्वारा करवाया गया था.
  • मंदिर के निर्माण में द्रविड़ एवं केरल शैली का मिलाजुला प्रयोग देखा जा सकता है.
  • इस मंदिर का गोपुरमद्रविड़ शैली में बना हुआ है. गोपुरम को कलाकृतियों से सुसज्जित किया गया है.
  • इसका परिसर बहुत विशाल है, जो कि सात मंजिला ऊँचा है.
  • मंदिर के गर्भगृह में भगवान् विष्णु की विशाल मूर्ति बनी हुई है. इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं.
  • मंदिर के पास ही एक सरोवर भी है, जोपद्मतीर्थ कुलम के नाम से जाना जाता है.

उद्घाटन-

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक परियोजना का उद्घाटन किया है जिसके अन्दर केकेरल के तीन प्रमुख तीर्थस्थलों के लिए एक आध्यात्मिक परिपथ (spiritual circuit) बनाया जाएगा. ये तीर्थस्थल हैंश्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर, अरणमूल और सबरीमला.
  • इनमें श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर विशेष महत्त्व है क्योंकि यह भगवान् विष्णु के 108 दिव्यदेशमों में एक माना जाता है.
  • यह परियोजना पर्यटन मंत्रालय कीस्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत कार्यान्वित की जायेगी.

भासन चार द्वीप

  • बांग्लादेश में बंगाल की खाड़ी में 40 किलोमीटर के विस्तार वाला एक द्वीप है जिसे भासन चार अर्थात्चार पिया नाम से जाना जाता है.
  • इसका निर्माण 2006 में हिमालय से आने वाली गाद से हुआ था.
  • इस पर आज कल रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं. पिछले दिनों बांग्लादेश ने आदेश दिया है कि रोहिंग्याओं को यहाँ से तभी निकलने दिया जाएगा जब वे सीधे अपने घर लौटेंगे.
  • विदित हो कि यह स्थलमेघना नदीके मुहाने पर स्थित है जहाँ बाढ़, भूक्षरण और चक्रवात जैसी घटनाएँ होती रहती हैं.

 

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