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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड

14th July, 2020

G.S. Paper-III

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (National Intelligence Grid- NATGRID) द्वारा  ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau- NCRB) के साथ प्रथम सूचना रिपोर्ट (First Information Reports-FIR) तथा चोरी के वाहनों पर केंद्रीकृत ऑनलाइन डेटाबेस तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गए हैं।

प्रमुख बिंदु

  • NATGRID  ‘वन-स्टॉप डेस्टिनेशन’ (One-Stop Destination)  के माध्यम से सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों से डेटाबेस/सूचनाओं को एकत्र कर उनका उपयोग करने तथा बैंकिंग और     टेलीफोन विवरण से संबंधित डेटाबेस/सूचनाओं तक पहुँचने सुनिश्चित करने के लिये एक     सुरक्षित प्लेटफॉर्म  विकसित करने में मदद करेगा।
  • यह समझौता NATGRID को ‘अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम’(Crime           and Criminal Tracking Network and Systems- CCTNS) के माध्यम से डेटाबेस/सूचना   तक पहुँच प्रदान करने वाला एक ऐसा मंच है जो लगभग 14,000 पुलिस स्टेशनों को आपस में           जोड़ता है।
  • सभी राज्य पुलिस स्टेशनों को ‘अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम’(Crime           and Criminal Tracking Networks and Systems- CCTNS) में प्रथम सूचना रिपोर्ट        (First Information Reports-FIR) दर्ज करना अनिवार्य होगा।
  • इस समझौते के माध्यम से NATGRID द्वारा संदिग्ध के विवरण के बारे में जानकारी जैसे-पिता का नाम, टेलीफोन नंबर और अन्य विवरण को प्राप्त किया जा सकेगा।
  • NATGRID खुफिया और जांच एजेंसियों के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करेगा।
  • इस परियोजना को 31 दिसंबर,2020 तक क्रियान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड

  • NATGRID आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिये एक कार्यक्रम है
  • भारत में 26/11 के आतंकवादी हमले के दौरान सूचनाओं के संग्रहण के अभाव की बात सामने आई।
  • इस हमले का मास्टरमाइंड डेविड हेडली वर्ष 2006 से 2009 के बीच हमले की योजनाओं को मूर्तरूप प्रदान करने हेतु कई बार भारत आया लेकिन उसके आवागमन की किसी भी सूचना का विश्लेषण नहीं किया जा सका।
  • 26/11 के बाद इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर NATGRID की स्थापना की गई।
  • यह संदिग्ध आतंकवादियों को ट्रैक करने और आतंकवादी हमलों को रोकने में विभिन्न खुफिया एवं प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करता है।
  • NATGRID द्वारा बिग डेटा और एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग करते हुए डेटा का बड़ी मात्रा में अध्ययन एवं विश्लेषण किया जाता है।
  • यह विभिन्न चरणों में डेटा प्रदान करने वाले संगठनों और उपयोगकर्त्ताओं के समन्वय के साथ ही एक कानूनी संरचना विकसित करता है
  • NATGRID द्वारा प्राप्त सूचनाओं के माध्यम से कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ संदिग्ध गतिविधियों की जाँच करती हैं।

वर्तमान समय में NATGRID का महत्त्व

  • वर्तमान समय में, एयरलाइन या टेलीफोन कंपनी में किसी संदिग्ध सूचना को जानने के लिये सुरक्षा एजेंसियाँ सीधे  एयरलाइन या टेलीफोन कंपनियों से संपर्क स्थापित करती हैं।
  • डेटा को अंतर्राष्ट्रीय सर्वरों जैसे- गूगल (Google) आदि के माध्यम से साझा किया जाता है।
  • NATGRID यह सुनिश्चित करेगा कि इस तरह की जानकारी एक सुरक्षित मंच के माध्यम से साझा की जाए ताकि डाटा की गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके।

‘आत्मानिर्भर कुशल कर्मचारी-नियोक्ता मानचित्रण (असीम)’ पोर्टल

G.S. Paper-II

चर्चा में क्यों?

  • कुशल कार्यबल को आजीविका के अवसर खोजने, कुशल कार्यबल के बाजार में मांग-आपूर्ति के अंतर को पाटने और नियोक्ताओं को कुशल कार्यबल की खोज में सहायता करने के मामले में सूचना की उपलब्धि एवं प्रवाह की स्थिति को बेहतर बनाने के प्रयास के अंतर्गतकौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के द्वारा आत्मानिर्भर कुशल कर्मचारीनियोक्ता मानचित्रण (असीम)’ पोर्टल का अनावरण किया गया है.

असीम (ASEEM) पोर्टल क्या है?

  • असीम पोर्टल का पूरा नाम है – Aatamanirbhar Skilled Employee Employer Mapping
  • यह मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध है और यह बेंगलुरु स्थित कंपनी बेटरप्लेस के सहयोग से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा विकसित और प्रबंधित किया गया है.
  • असीम पोर्टल का उद्देश्य है प्रोग्रामेटिक उद्देश्यों के लिए सिस्टम द्वारा उत्पन्न रुझानों और विश्लेषणों के माध्यम से समर्थन और नीति निर्धारण में सहयोग प्रदान करना है.
  • असीम पोर्टल एनएसडीसी और इससे जुड़े क्षेत्र कौशल परिषद् को वास्तविक समय डेटा एनालिटिक्स प्रदान करने में सहायता करेगा, जिसमें उद्योग आवश्यकताओं, कौशल अंतर विश्लेषण, मांग प्रति जिला/राज्य/क्लस्टर, प्रमुख कार्यबल आपूर्तिकर्ता, प्रमुख उपभोक्ता, माइग्रेशन पैटर्न सहित आपूर्ति और पैटर्न जैसी बातें शामिल होंगी. इसके जरिए उम्मीदवारों के लिए कैरियर की कई संभावनाएं बनेंगी.

पोर्टल में तीन आईटी आधारित इंटरफेस हैं

  1. नियोक्ता पोर्टल– नियोक्ता ऑनबोर्डिंग, डिमांड एग्रीगेशन, उम्मीदवार का चयन-
  2. डैशबोर्डरिपोर्ट, रुझान, विश्लेषण और अंतर को प्रमुखता से दिखाना-
  3. उम्मीदवार आवेदन– उम्मीदवार का प्रोफ़ाइल बनाना और ट्रैक करना, नौकरी का सुझाव देना.

असीम पोर्टल ASEEM की विशेषताएँ एवं लाभ-

  • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित इस पोर्टल के माध्यम से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कहां-कहां, किस-किस फिल्ड के कुशल कामगारों की आवश्यकता अधिक है और रोजगार के कौन-कौन से नए क्षेत्र उभर रहे हैं. सरकार इसके अनुरूप कौशल विकास की योजनाओं को नए स्वरूप में ढाल सकती है, ताकि उद्योगों की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सके.
  • पोर्टल और ऐप में नौकरी की भूमिकाओं, क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए पंजीकरण और डेटा अपलोड का प्रावधान होगा.
  • कुशल कार्यबल इस ऐप पर अपनी प्रोफाइल पंजीकृत कर सकते हैं और अपने पड़ोस में रोजगार के अवसरों की तलाश कर सकते हैं. असीम के जरिये, विशिष्ट क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की तलाश करने वाले नियोक्ताओं, एजेंसियों और जॉब एग्रीगेटर्स के पास सभी आवश्यक विवरण एक ही स्थान पर मिल जायेंगे.
  • यह नीति निर्माताओं को विभिन्न क्षेत्रों में अधिक उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण रखने में सक्षम बनाएगा.
  • यह पोर्टल विभिन्न क्षेत्रों में कुशल कार्यबल के लिए माँग-आपूर्ति की खाई को पाटने के हमारे निर्बाध प्रयासों को गति देने के लिए परिकल्पित किया गया है. इसके माध्यम से देश के युवाओं के लिए असीम अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है.
  • इस पहल का उद्देश्य कोविड महामारी के बाद के समय में कुशल कार्यबल की पहचान करके कार्यबल तंत्र की दिशा में देश की प्रगति को गति देना है और कुशल कार्यबल को स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक आजीविका के अवसरों से जोड़ना है.
  • इस पोर्टल के जरिये मांग को संचालित करने और परिणाम-आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों को चलाने के लिए सहायक रही प्रौद्योगिकी और ई-प्रबंधन प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के साथ कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओ को एक साथ लाने का काम किया गया है.

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम) योजना

G.S. Paper-II

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के द्वारा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्रीकुसुम) योजना के तहत पंजीकरण का दावा करने वाले फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ नए परामर्श जारी किया गया.

पृष्ठभूमि-

हाल में देखा गया है कि दो नई वेबसाइटों ने अवैध रूप से पीएम-कुसुम योजना के लिए पंजीकरण पोर्टल होने का दावा किया है. इन वेबसाइटों के पीछे शरारती लोग आम जनता को धोखा दे रहे हैं और इन फर्जी पोर्टल्स के माध्यम से आम लोगों के डेटा का दुरुपयोग कर रहे हैं. एमएनआरई इन वेबसाइटों को संचालित करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है. मंत्रालय द्वारा सभी संभावित लाभार्थियों और आम जनता को सूचित किया जाता है कि इन वेबसाइटों पर पैसा जमा करने या डेटा देने से बचें.

कुसुम योजना के बारे में-

  • यह भारत सरकार की 4 लाख करोड़ की एक योजना है जिसके अंतर्गत किसानों की सहायता के लिए 28,250 MW तक सौर ऊर्जा के विकेंद्रीकृत उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • KUSUM योजना के अनुसार बंजर भूमियों पर स्थापित सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली में से surplus अंश को किसान ग्रिडों को आपूर्ति कर सकेंगे जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा.
  • इसके लिए, बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को किसानों से पाँच वर्षों तक बिजली खरीदने के लिए 50 पैसे प्रति इकाई की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन राशि दी जायेगी.
  • सरकार किसानों कोखेतों के लिएलाख ऑफ़ग्रिड (ग्रिड रहित) सौर पम्प खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी. केंद्र और राज्य प्रत्येक सौर पम्प पर 30% सब्सिडी प्रदान करेंगे. अन्य 30% ऋण के माध्यम से प्राप्त होगा, जबकि 10% लागत किसान द्वारा वहन की जायेगी.
  • 7,250 MW क्षमता केग्रिड से सम्बद्ध (ग्रिडकनेक्टेड) खेतों के पम्पों का सौरीकरण (Solarisation) किया जाएगा.
  • सरकारी विभागों के ग्रिड से सम्बद्ध जल पम्पों का सौरीकरण किया जाएगा.

कुसुम योजना के कुछ अन्य प्रावधान-

  • ग्रामीण क्षेत्र में 500KW से लेकर 2MW तक के नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र लगाये जाएँगे जो ग्रिड से जुड़े हुए होंगे.
  • कुछ ऐसे सौर जलपम्प लगाये जाएँगे जो किसानों की सिंचाई की आवश्यकता को पूरी करेंगे परन्तु वे ग्रिड से सम्बद्ध नहीं होंगे.
  • वर्तमान में जो किसान ग्रिड से जुड़े सिंचाई पम्पों के स्वामी हैं उन्हें ग्रिड की आपूर्ति से मुक्त किया जाए और उन्हें अधिकाई सौर ऊर्जा को DISCOMs को देकर अतिरिक्त आय कमाने का अवसर दिया जाए.

योजना के अपेक्षित लाभ-

  • यहकृषि क्षेत्र को डीजलरहित बनाने में सहायता करेगी.
  • यह कृषि क्षेत्र मेंसब्सिडी का बोझ कम कर DISCOMs की वित्तीय स्थिति में सुधार करने में सहायता करेगी.
  • विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा उत्पादनको प्रोत्साहन मिलेगा.
  • ऑफ-ग्रिड और ग्रिड कनेक्टेड, दोनों प्रकार के सौर जल पम्पों द्वारा सुनिश्चित जल स्रोतों के प्रावधान के माध्यम से किसानों को जल-सुरक्षा.
  • नवीकरणीय खरीद दायित्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए राज्यों का समर्थन करना.
  • छतों के ऊपर और बड़े पार्कों के बीच इंटरमीडिइट रेंज में सौर ऊर्जा उत्पादन की रीक्तियों को भरना.
  • ऑफ-ग्रिड व्यवस्था के माध्यम से पारेषण क्षति (transmission loss) को कम करना.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

बाढ़ प्रतिरोधी धान (Flood Resistant Paddy)

हाल ही में असम के गोलाघाट ज़िले के किसानों ने धान की खेती करने के लिये पारंपरिक किस्मों के बजाय नई बाढ़ प्रतिरोधी धान (Flood Resistant Paddy) की किस्मों का उपयोग करना शुरू किया।

प्रमुख बिंदु:

  • बाढ़ प्रतिरोधी धान की प्रजातियों [रंजित सब1(Ranjit Sub1), स्वर्ण सब1 (Swarna Sub1) एवं बहादुर सब1 (Bahadur Sub1)] का उपयोग असम में ब्रह्मपुत्र नदी के पश्चिम क्षेत्र के लगभग 60% किसानों द्वारा किया गया है।
  • असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसान वर्ष 2009 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) और मनीला (फिलीपींस) स्थित अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (International Rice Research Institute) द्वारा विकसित जल प्रतिरोधी धान की प्रजातिस्वर्ण सब1 की कटाई कर रहे हैं।
    • किंतु किसानों द्वारा धान की पारंपरिक किस्मों के बजाय नई बाढ़ प्रतिरोधी धान की किस्मों को अपनाने की प्रक्रिया काफी धीमी रही है।
    • उल्लेखनीय है कि रंजित सब-1 (Ranjit Sub1) सहित अन्य बाढ़ प्रतिरोधी धान की किस्मों का प्रयोग वर्ष 2018 में फिर से शुरू किया गया था।

बाढ़ प्रतिरोधी धान की प्रजातियों के लाभ-

  • नई चावल की किस्मों में दो सप्ताह तक जलमग्नता के बावजूद पुनः पनपने की क्षमता होती है और ये भारी बाढ़ में भी क्षतिग्रस्त नहीं होती हैं जबकि पारंपरिक किस्में भारी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
  • इन प्रजातियों में औसतन पाँच टन प्रति हेक्टेयर तक की उपज की क्षमता होती हैं।
  • असम में लगभग 1500 किसान फसल-उपज वाले क्षेत्रों में लगभग 950 हेक्टेयर पर खेती करते हैं जो नियमित रूप से बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। इसलिये चावल की ये किस्में बाढ़ से होने वाली फसल हानि को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
  • ये किस्में बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने पर पुनः जीवित हो सकती हैं इसलिये इनमें अधिकतम उत्पादकता की क्षमता होती है।

 

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