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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

नागरिकता संशोधन अधिनियम

समाचार में क्यों?

हाल ही में केरल सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act) की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह याचिका संविधान के अनुच्छेद- 131 के प्रावधानों को आधार बनाकर दायर की गई है।
  • केरल सरकार द्वारा दायर की गई इस याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद- 14 (विधि के समक्ष समता), अनुच्छेद- 21 (प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद- 25 (अंतःकरण और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रसार करने की स्वतंत्रता) के सिद्धांतो का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए।
  • केरल ने याचिका दायर करते हुए कहा कि CAA का अनुपालन करने के लिये अनुच्छेद- 256 के तहत राज्यों को बाध्य किया जाएगा, जो स्पष्ट रूप से एकपक्षीय, अनुचित, तर्कहीन और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला कृत्य होगा।

क्या हैं अनुच्छेद- 131 के प्रावधान?

इस अनुच्छेद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को भारत के संघीय ढाँचे की विभिन्न इकाइयों के बीच किसी विवाद पर आरंभिक अधिकारिता की शक्ति प्राप्त है। ये विवाद निम्नलिखित हैं-

  • केंद्र व एक या अधिक राज्यों के बीच, या
  • केंद्र और कोई राज्य या राज्यों का एक ओर होना एवं एक या अधिक राज्यों का दूसरी ओर होना, या
  • दो या अधिक राज्यों के बीच।

किसी विवाद में, यदि और जहाँ तक उस विवाद में (विधि का या तथ्य का ) ऐसा कोई प्रश्न निहित है जिस पर किसी विधिक अधिकार का अस्तित्व या विस्तार निर्भर है तो वहाँ अन्य न्यायालयों का अपवर्जन करके सर्वोच्च न्यायालय को आरंभिक अधिकारिता होगी।परंतु उक्त अधिकारिता का विस्तार उस विवाद पर नहीं होगा जो किसी ऐसी संधि, करार, प्रसंविदा, वचनबंध, सनद या वैसी ही अन्य लिखत से उत्त्पन्न हुआ है जो इस संविधान के प्रारंभ से पहले की गई थी या निष्पादित की गई थी और ऐसे प्रारंभ के पश्चात प्रवर्तन में है या जो यह उपबंध करती है की उक्त अधिकारिता का विस्तार ऐसे विवाद पर नहीं होगा।

अनुच्छेद- 256 के अंतर्गत प्रावधान :

  • प्रत्येक राज्य की कार्यपालिका शक्ति का इस प्रकार प्रयोग किया जाएगा जिससे संसद द्वारा बनाई गई विधियों का और ऐसी विद्यमान विधियों का, जो उस राज्य में लागू हैं, अनुपालन सुनिश्चित रहे और संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी राज्य को ऐसे निदेश देने तक होगा जो भारत सरकार को उस प्रयोजन के लिये आवश्यक प्रतीत हो।

अनुच्छेद- 131 के प्रयोग से संबंधित पूर्ववर्ती निर्णय:

  • वर्ष 2012 में अनुच्छेद- 131 के प्रयोग से संबंधित मध्य प्रदेश राज्य बनाम भारत संघ वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि राज्य अनुच्छेद- 131 के अंतर्गत उपबंधित प्रावधानों का प्रयोग करते हुए केंद्र द्वारा निर्मित विधि की संवैधानिकता को चुनौती नहीं दे सकता।
  • वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ ने झारखंड राज्य बनाम बिहार राज्य वाद में निर्णय देते हुए अपने पूर्ववर्ती निर्णय से असहमति व्यक्त की और विधि के सारवान प्रश्न से संबंधित इस वाद को सर्वोच्च न्यायालय की एक बड़ी पीठ को स्थानांतरित कर दिया।
  • केरल ने यह याचिका वर्ष 2013 के झारखंड राज्य बनाम बिहार राज्य वाद पर आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को आधार बनाते हुए दायर की है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

रोज़गार संगी एप :

  • छत्तीसगढ़ सरकार ने कुशल एवं प्रशिक्षित उम्मीदवारों को नौकरी खोजने में मदद करने के उद्देश्य से रोज़गार संगी एप (Rojgaar Sangi app) लान्च किया।

मुख्य बिंदु:

  • इस एप को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (National Informatics Centre) की मदद से विकसित किया गया है।
  • यह एप छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण (Chhattisgarh State Skill Development Authority- CSSDA) द्वारा प्रस्तावित 705 पाठ्यक्रमों के तहत प्रशिक्षित 7 लाख छात्रों को लाभ पहुँचाएगा।

द्वीप विकास एजेंसी :

  • हाल ही में द्वीप विकास एजेंसी (Island Development Agency) की छठी बैठक का आयोजन नई दिल्ली में किया गया। इस बैठक में ‘द्वीपों का समग्र विकास (Holistic Development of Islands) कार्यक्रम के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई।

द्वीप विकास एजेंसी के बारे में

  • केंद्र सरकार ने भारतीय द्वीपों के विकास के लिये 1 जून, 2017 को द्वीप विकास एजेंसी का गठन किया था।
  • इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा की जाती है।

‘द्वीपों का समग्र विकास’ कार्यक्रम :

  • देश में पहली बार द्वीपों के सतत् विकास की पहल द्वीप विकास एजेंसी के मार्गदर्शन में की जा रही है। इन द्वीपों की पहचान वैज्ञानिक मूल्यांकन के परिप्रेक्ष्य में वहनीय क्षमता के आधार पर की गई है।
  • पहले चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के चार द्वीपों और लक्षद्वीप समूह के पाँच द्वीपों का चयन किया गया है।
  • इन द्वीपों पर द्वीपवासियों के लिए रोज़गार सृजन करने के उद्देश्य से पर्यटन को बढ़ावा देना तथा द्वीपों पर निर्मित समुद्री भोजन और नारियल आधारित उत्पादों के निर्यात को ध्यान में रखकर विकास योजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है।
  • दूसरे चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अन्य 12 द्वीपों और लक्षद्वीप समूह के अन्य 5 द्वीपों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

 

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