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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

दो बच्चों की नीति

G.S. Paper-II

संदर्भ:

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -5 (NFHS-5) के नवीनतम आंकड़ों से ज्ञात होता है कि भारत में दो बच्चों की नीति (Two-child policy) लागू किए जाने की आवश्यकता नहीं है: विशेषज्ञ

समर्थक निष्कर्ष:

  1. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आधुनिक गर्भ निरोधकों का उपयोग।
  2. परिवार नियोजन मांगों में सुधार किया जा रहा है।
  3. महिला द्वारा पैदा किए जाने वाले बच्चों की औसत संख्या में गिरावट।

उपरोक्त निष्कर्ष साबित करते हैं कि देश की आबादी स्थिर स्थिति में है।

प्रमुख आंकड़े:

  1. देश के 17 राज्यों में से 14 राज्यों की कुल प्रजनन दर (प्रति महिला जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या) में कमी आयी है और इन राज्यों में कुल प्रजनन दर प्रति महिला1 बच्चे अथवा इससे कम है।
  2. इसका तात्पर्य यह भी है कि अधिकांश राज्य, प्रजनन के प्रतिस्थापन स्तर को प्राप्त कर चुके हैं, अर्थात, प्रति महिला जन्म लेने वाले बच्चों की औसत संख्या, जिसके द्वारा आबादी खुद से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में परिवर्तित हो जाती है।

दो बच्चों की नीति से संबंधित आलोचनाएँ:

  1. आलोचकों का तर्क है कि देश के समृद्ध और अधिक शिक्षित होने परभारत की जनसंख्या वृद्धि स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाएगी।
  2. चीन की एकबच्चे की नीति से जुडी हुई समस्याएंपहले से ही अच्छी तरह से स्पष्ट हो चुकी हैं, जैसे कि, लड़कों को अत्यधिक वरीयता दिए जाने की प्रवृत्ति से उत्पन्न लैंगिक असंतुलन और माता-पिताओं के पहले से ही एक संतान होने के बाद दूसरी संतान होने पर उसके कागजात नहीं बनने से बिना दस्तावेजों के लाखों बच्चों की समस्या।
  3. जन्म दर में हस्तक्षेप करने पर, भारत को भविष्य में गंभीर नकारात्मक जनसंख्या वृद्धि का सामना करना पड़ सकताहै, यह एक ऐसी समस्या है, जिससे अधिकांश विकसित देश उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
  4. नकारात्मक जनसंख्या वृद्धि होने पर, सामाजिक सेवाएँ प्राप्त करने वाले उम्रदराज लोगों की संख्या में वृद्धि हो जाती है, जबकि सामाजिक सेवाओं के लिए भुगतान करने हेतु कर-चुकाने वाली युवा आबादी में कमी आती है।
  5. दो बच्चों की नीति से संबंधित संबंधित कानून महिला विरोधी भी हो सकते हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि, ये कानून, न केवल जन्म से ही महिलाओं के खिलाफ भेदभाव (गर्भपात, कन्या भ्रूण और शिशुओं के गर्भपात के माध्यम से) करता है, बल्कि इससे तलाक और पारिवार द्वारा परित्याग करने का खतरा भी बढ़ जाता है।
  6. दो बच्चों का कानूनी प्रतिबंध, युगल को लिंग-चयनात्मक गर्भपात कराने के लिए विवश कर सकता है

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद

  1. वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद का गठन दिसम्बर, 2010 में हुआ था.
  2. इसका उद्देश्य है – वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के तन्त्र को सुदृढ़ करना एवं उसे संस्थागत बनाना.
  3. विभिन्न नियामक संस्थाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देना तथा वित्तीय प्रक्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करना.
  4. इस परिषद के अध्यक्ष केन्द्रीयवित्त मंत्री होते हैं.

 

 

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