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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

दिशा रवि मामला

G.S. Paper-III

संदर्भ:

कायकर्ता दिशा रवि, एक टूलकिट (toolkit) को संपादित करने और वैश्विक स्तर पर चर्चित जलवायु परिवर्तन-विरोधी एक किशोर प्रचारक ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) के साथ साझा करने के आरोप में दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं।

इसके अलावा, कुछ अन्य लोगों को भी, नए कृषि कानूनों पर किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में खालिस्तान समर्थक एक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीएफजे) के साथ समन्वय करने के लिए आरोपित किया गया है।

‘टूलकिट’ क्या होती है?

टूलकिट (toolkit), सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के समय में किसी आंदोलन या अभियान को जारी रखने के लिए एक उपयोगी उपकरण बन गया है।

  1. यह किसी मुद्दे के बारे में समझाने वाला एक दस्तावेज होता है, और यह, अभियान से जुड़े हुए व्यक्तियों अथवा अभियान को तेज करने के लिए अन्य लोगों को जोड़ने हेतु एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है।
  2. इसमें, अभियान या आंदोलन को आगे बढ़ाने हेतु, “क्या कब और कैसे किया जाना चाहिए”, इस बारे में रोडमैप उपलब्ध रहता है।

वर्तमान प्रकरण:

वर्तमान मामले में, 5 फरवरी को ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में एक गूगल दस्तावेज़ ‘टूलकिट’ को साझा कर दिया था, जिससे इस ‘टूलकिट’ का आकस्मिक खुलासा हो गया। हालांकि, ग्रेटा ने बाद में इस ट्वीट को डिलीट कर दिया था, लेकिन तब तक यह सुर्ख़ियों में आ चुका था।

  1. इस ‘टूलकिट’ में संसद द्वारा वर्ष 2020 में पारित कृषि कानूनों पर, मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर जारी “किसानों के विरोध को समझाने” का प्रयास किया गया था।
  2. जांच के उपरांत, दिल्ली पुलिस ने पाया कि कुछ खालिस्तानी-समर्थक तत्व देश के खिलाफ असहमति का माहौल पैदा करने में शामिल थे।
  3. दिशा रवि को दस्तावेज तैयार करने और साझा करने के लिए एक “प्रमुख साजिशकर्ता” होने का आरोप लगाया गया है।

‘खालिस्तान-आंदोलन’ क्या है?

खालिस्तान आंदोलन, 1980 के दशक के दौरान मुख्य रूप से पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने हेतु  पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक अलगाववादी अभियान था। हाल के दिनों में, भारत में बगैर किसी व्यावहारिक मांग अथवा आकर्षण के, पाकिस्तान और कनाडा स्थित समूहों द्वारा इस अभियान को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

कार्लपट अभयारण्य, ओडिशा

  1. ओडिशा के कार्लपेट अभयारण्य में एक पखवाड़े के दौरान छह हाथियों की रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया से मृत्यु हो गई।
  2. रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया (Haemorrhagic septicaemia),एक संक्रामक जीवाणु रोग होता है, जो संदूषित जल या मिट्टी के संपर्क में आने वाले जानवरों को संक्रमित करता है।
  3. इसके संक्रमण से जानवरों के श्वसन तंत्र और फेफड़े प्रभावित होते हैं, जिसके कारण गंभीर निमोनिया होता है।
  4. यह बीमारी, आम तौर पर मानसून के ठीक पहले और बाद की अवधि में फैलती है। इससे गाय-बैल, भैंस और अन्य जानवरों को प्रभावित हो सकते है।

 

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