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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

दक्षिण चीन सागर

19th October, 2020

G.S. Paper-II International

संदर्भ:

हाल ही में, फिलीपींस सरकार द्वारा अपने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) में तेल की खोज को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून अभिसमय (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS), 1982 के अंतर्गत समुद्र तटीय देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र की सीमा, उसके तट से 320 किमी तक होती है, जिसमे वह देश विशिष्ट रूप से सागरीय संसाधनों का दोहन कर सकता है।

फिलीपींस के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र की सीमा में रीड बैंक (Reed Bank) भी आता है, जिस पर चीन भी अपना दावा करता है। यह क्षेत्र विवादित दक्षिण चीन सागर में स्थित है।

विवाद के बारे में:

चीन के दक्षिणी चीन सागर तथा क्षेत्र में स्थित अन्य देशो से विवादो के केद्र में समुद्री क्षेत्रों में संप्रभुता स्थापित करने संबंधी विवाद है।

  1. इस क्षेत्र में पारसेल द्वीप समूह’ (Paracels Islands) तथा स्प्रैटली द्वीप समूह’ (Spratley Islands) दो श्रंखलाएं अवस्थित है, यह द्वीप समूह कई देशों की समुद्री सीमा में बिखरे हुए है, जोकि इस क्षेत्र में विवाद का एक प्रमुख कारण है।
  2. पूर्ण विकसित द्वीपों के साथ-साथ स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) जैसी, दर्जनों चट्टाने, एटोल, सैंडबैंक तथा रीफ भी विवाद का कारण हैं।

विभिन्न देशों के विवादित क्षेत्र पर दावे-

  1. चीन:

इस क्षेत्र में सबसे बड़े क्षेत्र पर अधिकार का दावा करता है, इसके दावे का आधार ‘नाइन-डैश लाइन’ है, जो चीन के हैनान प्रांत के सबसे दक्षिणी बिंदु से आरंभ होकर सैकड़ों मील दक्षिण और पूर्व में फली हुई है।

  1. वियतनाम:

वियतनाम का चीन के साथ पुराना ऐतिहासिक विवाद है। इसके अनुसार, चीन ने वर्ष 1940 के पूर्व कभी भी द्वीपों पर संप्रभुता का दावा नहीं किया था, तथा 17 वीं शताब्दी के बाद से ‘पारसेल द्वीप समूह’ तथा ‘स्प्रैटली द्वीप समूह’ पर वियतनाम का शासन रहा है – और इसे साबित करने के लिए उसके पास पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं।

  1. फिलीपींस:

फिलीपींस और चीन दोनों स्कारबोरो शोल (इसे चीन में हुआंग्यान द्वीप के रूप में जाना जाता है) पर अपने अधिकार का दावा करते हैं। यह फिलीपींस से 100 मील और चीन से 500 मील की दूरी पर स्थित है।

  1. मलेशिया और ब्रुनेई:

ये देश दक्षिण चीन सागर में अपने अधिकार-क्षेत्र का दावा करते हैं, इनका कहना है कि, संबंधित क्षेत्र यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ लॉ ऑफ सी’ (United Nations Convention on the Law of the Sea– UNCLOS), 1982 द्वारा निर्धारित उनके विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में आता है।

हालांकि, ब्रुनेई किसी भी विवादित द्वीप पर अपने अधिकार-क्षेत्र का दावा नहीं करता है, परन्तु मलेशिया ‘स्प्रैटली द्वीप समूह’ में एक छोटे से हिस्से पर अपना दावा करता है।

खुला बाज़ार परिचालन

G.S. Paper-III (Economy)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि, वह 9 अक्टूबर की घोषणा के अनुसार, राज्य विकास ऋण (State Developments Loans- SDL) की खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operation- OMO) के माध्यम से खरीद करेगा।

रिज़र्व बैंक बहु-प्रतिभूति नीलामी के माध्यम से राज्य विकास ऋण (SDL) को एकाधिक मूल्य नीलामी पद्धति का उपयोग करके खरीदेगा। यहां प्रतिभूति-वार अधिसूचित राशि नहीं है।

‘खुला बाज़ार परिचालन’ क्या होता है?

खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operation- OMO), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या देश के केंद्रीय बैंक द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों की बिक्री और खरीद होती है।

  1. OMO का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को विनियमित करना है।
  2. यह मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक होता है।

क्रियाविधि-

भारतीय रिजर्व बैंक, खुले बाज़ार परिचालन (OMO) का निष्पादन वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से करता है तथा इसके तहत RBI जनता के साथ सीधे व्यापार नहीं करता है।

OMO बनाम तरलता-

  1. जब केंद्रीय बैंक मौद्रिक प्रणाली में तरलता (liquidity) में वृद्धि करना चाहता है, तो वह खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। इस प्रकार केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंकों को तरलता प्रदान करता है।
  2. इसके विपरीत, जब केंद्रीय बैंक मौद्रिक प्रणाली में तरलता को कम करना चाहता है, तो वह सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री करेगा। इस प्रकार केंद्रीय बैंक अप्रत्यक्ष रूप से धन की आपूर्ति को नियंत्रित करता है और अल्पकालिक ब्याज दरों को प्रभावित करता है।

‘खुले बाज़ार परिचालन’ के प्रकार-

भारतीय रिजर्व बैंक दो प्रकार सेखुले बाज़ार परिचालन’ (OMO) का निष्पादन करता है:

  1. एकमुश्त खरीद (Outright Purchase– PEMO) – यह स्थायी प्रक्रिया होती है और इसमें सरकारी प्रतिभूतियों की एकमुश्त बिक्री या खरीद की जाती है।
  2. पुनर्खरीद समझौता (Repurchase Agreement– REPO) – यह अल्पकालिक प्रक्रिया होती है और पुनर्खरीद के अधीन होती है।

‘न्यू स्टार्ट’ संधि

G.S. Paper-II (International)

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा रूस तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य हुए पिछले प्रमुख ‘परमाणु हथियार शस्त्र न्यूनीकरण समझौते- न्यू स्टार्टसंधि (New START treaty) में बिना शर्त एक साल के विस्तार का प्रस्ताव दिया गया है।

न्यू स्टार्ट संधि के बारे में:

यह संयुक्त राज्य अमेरिका और रूसी संघ के बीच एक परमाणु शस्त्र न्यूनीकरण संधि- नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (Strategic Arms Reduction Treaty-START) है, जिसे औपचारिक रूप से न्यू स्टार्टसंधि (New START treaty) भी कहा जाता है।

  1. इस संधि पर 8 अप्रैल 2010 को प्रॉग (Prague) में हस्ताक्षर किए गए थे तथा यह 5 फरवरी 2011 से लागू हुई है।
  2. इस संधि ने दिसंबर 2012 में समाप्त होने वालीमॉस्को की संधि (SORT) को प्रतिस्थापित किया है।
  3. यह नई स्टार्ट संधि शीत युद्ध के अंत में वर्ष 1991 में हुईस्टार्ट संधि– I (START I treaty) की अनुवर्ती है, जो दिसंबर 2009 में समाप्त हो गई थी। इसके पश्चात START II संधि प्रस्तावित की गयी, जो कभी लागू नहीं हो सकी, और एक अन्य START III संधि प्रस्तावित की गयी, जिसके लिए वार्ता कभी पूरी नहीं हो सकी।

न्यू START संधि के प्रमुख लक्ष्य-

  1. इसके तहत सामरिक परमाणु मिसाइल लांचर की संख्या आधी हो जाएगी।
  2. SORT प्रणाली के स्थान पर एक नयानिरीक्षण और सत्यापन तंत्र स्थापित किया जाएगा।
  3. तैनात किये गए सामरिक परमाणु वारहेड की संख्या 1,550 तक सीमित की जाएगी।
  4. तैनात और गैर-तैनात अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) लॉन्चर्स, पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) लॉन्चरों की संख्या, और परमाणु आयुध से लैस भारी बमबर्षक यानों की संख्या 800 तक सीमित की जाएगी।

संधि के अंतर्गत समयसीमा-

  1. संधि के लागू होने के सात वर्ष के भीतर इन दायित्वों को पूरा किया जाना चाहिए।
  2. यह संधि की अवधि दस वर्ष है, जिसमें दोनों पक्षों की सहमति से पांच साल के लिए नवीनीकृत करने का विकल्प होगा।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

राष्ट्रीय आजीविका मिशन

  1. आधिकारिक नाम:दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)।
  2. इसेग्रामीण विकास मंत्रालय कार्यान्वित किया जा रहा है।
  3. मिशन का उद्देश्य: ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित करना, और उनकी आर्थिक गतिविधियों को निरंतर सहयोग प्रदान करना तथा उन्हें प्रेरित करना ताकि वे गरीबी से बाहर निकल सके।

DAY-NRLM के तहत उप-योजनाएं-

  1. ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान(RSETI): एक प्रशिक्षु को बैंक क्रेडिट लेने और अपने स्वयं के सूक्ष्म उद्यम शुरू करने में सक्षम बनाता है।
  2. सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए ग्रामीण निर्धनों की सुविधा हेतुस्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम’ (SVEP)
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं हेतुआजिविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (AGEY) ।

 

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