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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

तीन राज्यों के तीन धर्मांतरण-रोधी क़ानून: समानताएं एवं भिन्नताएं

G.S. Paper-II

संदर्भ:

  1. मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा ‘धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक’ 2020 को अध्यादेश के रूप में सहमति प्रदान कर दी गयी है।
  2. इससे पहले, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश द्वारा इसी प्रकार के कानून पारित किए जा चुके हैं।

समानताएं:

तीनों कानूनों में, इस प्रकार के विवाह को ‘अमान्य’ घोषित किया गया है और राज्य की पूर्व स्वीकृति के बिना धर्मांतरण के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।

भिन्नताएं:

तीनों कानूनों में, निर्धारित सजा की मात्रा भिन्न है तथा धर्मांतरण को वैध साबित करने का दायित्व अलग-अलग पक्षकारों पर सौंपा गया है।

‘पूर्व सूचना’ के संबंध में प्रावधान:

  1. मध्यप्रदेशके कानून में धर्मांतरण की वैधता के लिए ‘धर्मांतरण करने के इरादे’ संबंधी सूचना जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पूर्व देनी आवश्यक है, इसके बाद ही विभिन्न धर्मों के व्यक्ति कानूनी रूप से परस्पर विवाह कर सकते हैं।
  2. उत्तर प्रदेशविधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 के तहत भी 60 दिनों के नोटिस को अनिवार्य किया गया है और साथ ही मजिस्ट्रेट द्वारा धर्मांतरण के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस जांच की जानी आवश्यक है।
  3. हाल ही में लागू किये गए ‘हिमाचल प्रदेशधार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 में ‘धर्मांतरण करने के इरादे’ संबंधी सूचना 30 दिन पहले देने को अनिवार्य किया गया है।

जांच करने की शक्ति:

  1. मध्यप्रदेशकानून: अध्यादेश की धारा 4 के अनुसार, धर्मांतरण के मामले में केवल धर्मांतरित व्यक्ति या उसके माता-पिता / भाई-बहन की लिखित शिकायत पर ही किसी पुलिस अधिकारी द्वारा जांच की सकती है। इस क़ानून के तहत सब-इंस्पेक्टर के रैंक से नीचे का कोई पुलिस अधिकारी अपराध की जांच नहीं कर सकता है।
  2. हिमाचल प्रदेश कानून के अनुसार, सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट अथवा इससे ऊपर के पदाधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना अभियोजन की कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है।
  3. जांच करने की शक्ति के संबंध मेंउत्तरप्रदेश के क़ानून में मध्यप्रदेश के समान प्रावधान किये गए हैं।

वैधता साबित करने का दायित्व (Burden of proof):

  1. मध्यप्रदेशके कानून में, धर्मांतरण को कानूनी तरीके से और गैर-जबरदस्ती किए जाने को साबित करने का दायित्व धर्मांतरित व्यक्ति पर निर्धारित किया गया है।
  2. हिमाचल प्रदेशके कानून में भी इसी प्रकार का प्रावधान है।
  3. उत्तरप्रदेशके क़ानून में धर्मांतरण की वैधता साबित करने का दायित्व, धर्मांतरित व्यक्ति पर नहीं बल्कि धर्मांतरण के लिए जिम्मेवार अथवा धर्मांतरण कराने वाले लोगों पर निर्धारित किया गया है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

नई ‘स्कूल बैग नीति, 2020′

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा जारी किया गया।

  1. नई ‘स्कूल बैग नीति’ के अनुसार, कक्षा I और II के छात्रों के लिए6 से 2.2 किलोग्राम, कक्षा III, IV और V के लिए 1.7 से 2.5 किलोग्राम, कक्षा VI और VII के लिए 2 से 3 किलोग्राम होना चाहिए।
  2. कक्षा VIII के लिए5 से 4 किग्रा, IX और X के लिए 2.5 से 4.5 किग्रा और कक्षा XI और XII के लिए 3.5 से 5 किग्रा होना चाहिए।

 

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