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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

ड्रैगनफ्लाई में दुर्लभ जैविक घटना

2nd July, 2020

(G.S. Paper-III)

चर्चा में क्यों?

जर्नल ऑफ थ्रेटेंड टैक्सा (Journal of Threatened Taxa) में प्रकाशित शोध के अनुसार, ‘सोसाइटी फॉर ओडोनेट स्टडीज़’ (Society for Odonate Studies) केरल, के वैज्ञानिकों ने ड्रैगनफ्लाई में जिनैन्ड्रमोर्फिज़्म (Gyanandromorphism) नामक एक बहुत ही दुर्लभ जैविक घटना को दर्ज किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस दुर्लभ परिघटना का अवलोकन त्रिशूर में कोल वेटलैंड्स (Kole wetlands) में किया गया है।
  • कोले वेटलैंड्स में प्राप्त ड्रैगनफ्लाई के शरीर का आधा हिस्सा लाल और आधा हिस्सा पीले रंग का पाया गया।

ड्रैगनफ्लाई (Dragonfly):

  • §   एक ड्रैगनफ्लाई, ओडोनाटा (Odonata) गण (order) तथा कीट वर्ग (Class) से संबंधित है।
  • §   ये पारिस्थितिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि ये जैव संकेतक (Bioindicators) के रूप में कार्य करते हैं।
  • §   सामान्यत: नर ड्रैगनफ्लाई के सिर, वक्ष, पेट, पैरों सहित शरीर के लगभग सभी हिस्सों के रक्त में लाल रंग का   कोलोरैटन (Colouraton) पाया जाता है, जबकि मादा ड्रैगनफ्लाई गहरे भूरे रंग के वक्ष तथा पैरों के साथ हल्के पीले  रंग की होती है।

जिनैन्ड्रमोर्फिज़्म (Gynandromorphism):

  • यह जीवों में पाई जाने वाली विशेषता है, जिसमें एक ही जीव में नर और मादा दोनों के ऊतक तथा अन्य विशेषताएँ पाई जाती हैं। इस तरह के जीवों को स्त्री रोग (Gynandromorphs) भी कहा जाता है।
  • यह शब्द ग्रीक शब्दों (Gyne = मादा; Aner = नर और Morphe = रूप) से लिया गया है।
  • ऐसा सामान्यत: आनुवंशिक त्रुटि के कारण होता है। आनुवंशिक परिवर्तन गुणसूत्र संबंधी विकार या उत्परिवर्तन के कारण उत्पन्न होते हैं। ऐसा गुणसूत्री DNA की कमी, अतिरिक्त गुणसूत्र या अनियमित गुणसूत्र के कारण हो सकता है।

अध्ययन का महत्त्व:

  • जीवों पर पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव को समझने में मदद करेगा;
  • पारिस्थितिक उद्विकास (Ecological Evolutions) के माध्यम से विशिष्ट प्रजातियों की उत्पति समझने में मदद करेगा;
  • प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता को खोजने में मदद करेगा;

कोल आर्द्रभूमि (Kole Wetlands):

  • यह केरल के त्रिशूर ज़िले में स्थित है।
  • इस क्षेत्र में चावल का अच्छा उत्पादन होता है तथा यह आर्द्रभूमि प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
  • यह वेम्बनाडकोल आर्द्रभूमि (Vembanad-Kole wetlands) का एक हिस्सा है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता प्राप्त है।

यहाँ अनेक प्रकार की आक्रामक प्रजातियाँ (Invasive Species) पाई जाती है।

COVID-19 दवा के मानवीय परीक्षण को मंज़ूरी

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘भारत बायोटेक’ द्वारा भारत में विकसित की जा रही पहली COVID-19 वैक्सीन ‘कोवाक्सिन’ (COVAXIN), के मानव क्लीनिकल परीक्षण के लिये ‘ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ (Drug Controller General of India- DCGI) द्वारा अनुमति दे दी गई है।

प्रमुख बिंदु:

  • भारत बायोटेक कंपनी द्वारा इस वैक्सीन को ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Medical Research- ICMR) तथा ‘राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान’ (National Institute of Virology- NIV) के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ तथा ‘स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय’ द्वारा इस वैक्सीन के फेज़-1 एवं फेज़-2 के लिये मानव क्लीनिकल परीक्षण की मंज़ूरी प्रदान की है।
  • अगले महीने अर्थात जुलाई से इस वैक्‍सीन का इंसानों पर परीक्षण शुरू किया जाएगा।
  • इस वैक्सीन को हैदराबाद जीनोम वैली में स्थित भारत बायोटेक कंपनी की बीएसएल-3 (बायो-सेफ्टी लेवल 3) हाई कंटेनमेंट फैसिलिटी के माध्यम से कोरोना वायरस स्ट्रेन से अलग किया गया है जिसे बाद में भारत बायोटेक कंपनी को भेजा गया जहाँ इस स्वदेशी वैक्सीन को विकसित किया गया है।

भारत बायोटेकका राष्ट्रीय महत्त्व

  • भारत बायोटेक कंपनी देश में महामारियों से निपटने के लिये राष्ट्रीय महत्त्व के विषय के रूप में टीका विकास को आगे बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध है।
  • भारत बायोटेक अपने सेल कल्चर प्लेटफॉर्म (Cell Culture Platform) प्रौद्योगिकी द्वारा पोलियो, रेबीज़, रोटावायरस, जापानी एन्सेफलाइटिस, चिकनगुनिया और ज़ीका रोगों के लिये भी टीका विकसित करने के लिये भी प्रतिबद्ध है।
  • भारत में COVID-19 वैक्सीन का निर्माण करने वाली भारत बायोटेक कंपनी ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ तथा ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ के सहयोग से कॉवोफ्लू टीका तैयार करने के प्रयासों में लगी है।

यूनेस्को ग्लोबल एजुकेशन मोनेटरिंग रिपोर्ट 2020

(G.S. Paper-II)

 चर्चा में क्यों :

  • हाल ही में यूनेस्को द्वारा ग्लोबल एजुकेशन मोनेटरिंग रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है। ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट (जीईएम रिपोर्ट) एक स्वतंत्र टीम तैयार करती है और इसे यूनेस्को ने प्रकाशित किया है। इसे शिक्षा पर सतत विकास लक्ष्य पूरा करने में हुई प्रगति की निगरानी का आधिकारिक आदेश प्राप्त है।

रिपोर्ट के विषय में :

  • यह रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य 4 : समावेशन तथा शिक्षा पर संदर्भित रहती है। इस वर्ष की रिपोर्ट मुख्यतः कोरोना वायरस के कारण बढ़ी हुई वैश्विक शिक्षा असमानता पर केंद्रित है।

रिपोर्ट की मुख्य प्राप्तियां

  • जहाँ पूर्व कोरोना विश्व में माइग्रेशन, आतंकवाद, गरीबी इत्यादि कारणों से 5 में से 1 बलात विद्यालय छोड़ने पर विवस होता था वहीँ कोरोना के कारण स्कूल बंदी से लगभग 90% लोग शिक्षा की पहुंच से बाहर हो गए।
  • लगभग 40% लोअर मिडिल आय वाले देश कोरोना से उत्पन्न शिक्षा जोखिम से बचाव में सफल नहीं हो पाए। सामाजिक व डिजिटल वंचना ने समाज के वंचित वर्ग से शिक्षा को दूर कर दिया।
  • यद्यपि रेडियो, टेलीविज़न तथा ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स के माध्यम से शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है परन्तु इसकी क्षमता क्लासरूम से कम है।
  • यहाँ भी वैश्विक तकनीकी विभाजन स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है क्योंकि जहाँ अधिक आय वाले देश लगभग पूर्ण रूप से ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे वहीँ निम्न तथा मध्य आय वर्ग में ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स का उपयोग 55 % से 70 % है तथा गरीब देश शिक्षा विस्तार हेतु रेडियो तथा टेलीविज़न पर निर्भर है।
  • कई निम्न मध्य आयवर्ग के देशों द्वारा नवीन शिक्षक भर्ती तथा रेमेडियल क्लासेज पर विचार किया जा रहा है
  • इबोला क्राइसिस के उपरांत कई लड़कियां दोबारा विद्यालय न जा सकीं अतः इस प्रकार के स्वास्थ्य संकट भविष्य पर भी संकट उत्पन्न करते हैं।
  • भारत ने अपनी शिक्षा को समानता हेतु ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स रेडियो तथा टेलीविज़न तीनो का प्रयोग किया है। क्योंकि भारत की असमानता भी अधिक है

प्रमुख अनुशंसा-

  • एजुकेशन फॉर आल के सिद्धांत हेतु राष्ट्र राज्य की सीमाओं से परे साझा मानवता के सिद्धांत पर विचार करना आवश्यक है।
  • सभी राष्ट्रों को अपनी क्षमता के अनुसार डिजिटल बुनियादी ढांचा तथा डिजिटल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

यूनेस्को-

  • संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) संयुक्त राष्ट्र का एक घटक निकाय है। इसका कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र की इस विशेष संस्था का गठन 16 नवम्बर 1945 को हुआ था। इसका उद्देश्य शिक्षा एवं संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है,
  • यूनेस्को के 193 सदस्य देश हैं और 11 सहयोगी सदस्य देश और दो पर्यवेक्षक सदस्य देश हैं। । इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है।
  • भारत 1946 से यूनेस्को का सदस्य देश है।

क्या है सतत विकास लक्ष्य 4 :

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा. समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा सबके लिए आजीवन सीखने के अवसरों का निर्माण

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

“टोनोशीरो सेनकाकू” – जापान ने हाल ही में सेनकोकु द्वीप का नाम बदलकर  टोनोशीरो सेनकाकू रखा है। सेनकाकू द्वीप जापान, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और चीन गणराज्य (ताइवान) के बीच पूर्वी चीन सागर में स्थित हैं। द्वीपसमूह में पांच निर्जन द्वीप और तीन बंजर चट्टानें हैं.

 

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