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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

डेपसांग मैदान

14th August, 2020

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत एवं चीन के मध्य सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण डेपसांग मैदान (Depsang Plains) के मुद्दों पर चर्चा करने के लिये मेजर जनरल-स्तरीय वार्ता संपन्न की गई। वार्ता को दौलत बेग ओल्डी (Daulat Beg Oldie- DBO) में आयोजित किया गया जो दोनों देशों द्वारा प्रस्तुत अलग-अलग दावों के मुद्दों पर चर्चा करने तथा एक-दूसरे द्वारा डेपसांग मैदान में गश्त को रोकने पर केंद्रित थी।

बैठक के बारे में

  • 15 जून 2020 को पोस्ट गैल्वान क्लैश (Post Galwan Clash) पर पहली उच्च स्तरीय वार्ता संपन्न हुई।
  • तब से सैन्य वार्ता कोर कमांडर स्तर तक ही सीमित है।
  • बैठक में केवल सीमा प्रबंधन के हिस्से के रूप में दोनों पक्षों द्वारा नियमित गश्त पैटर्न्स (Routine Patrolling Patterns) पर चर्चा की गई।

डेपसांग मैदान

  • पूर्वी लद्दाख मेंवास्तविक नियंत्रण रेखा ( Line of Actual Control (LAC) पर चल रहे गतिरोध में पैंगोंग एवं डेपसांग मैदान दोनों वर्तमान गतिरोध के प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • डेपसांग मैदानों के सामरिक महत्त्व के बावजूद, अब तक आयोजित सैन्य वार्ताओं का क्रम गलवान (Galwan), गोगरा हॉटस्प्रिंग (Gogra Hotsprings) और पांगोंग झील के फिंगर एरिया में (Finger area of Pangong) में उत्पन्न गतिरोध पर ही केंद्रित है।
  • डेपसांग LAC के उन क्षेत्रों में से एक है जहाँ टैंक युद्धाभ्यास संभव है।
  • वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान, चीनी सैनिकों ने मैदान पर कब्जा कर लिया था। वर्ष 2013 में चीनी सैनिकों द्वारा इसके 19 किमी अंदर आकर टेंटों को उखाड़ दिया गया जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के मध्य 21 दिन तक गतिरोध बना रहा।

 

डेपसांग मैदान में विवाद के मुद्दे

  • डेपसांग मैदान के एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में काफी संख्या में चीनी सेना की उपस्थिति है, जिसे बल्ज (Bulge) कहा जाता है।
  • चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना की टुकड़ियों को विभिन्न गश्त बिंदुओं/क्षेत्रों तक पहुँचने से रोक दिया है।
  • LAC के समीप चीन के द्वारा निर्माण कार्य तथा टैंक एवं बख्तरबंद वाहनों का मौज़ूदगी बढ़ाई गई है।

 

भारत की चिंता

  • इस क्षेत्र में चीन की मौजूदगी भारतीय सीमा में स्थित बर्ट (Burts) और राकी नाला (Raki Nala) क्षेत्र में एक चुनौती/खतरा है इसके अलावा दौलत बेग ओल्डीबी (Daulat Beg Oldieby- DBO) चीनी सेना को 255 किमी लंबी दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (Darbuk-Shyok-Daulat Beg Oldie) सड़क के काफी करीब लाता है।

 

चुनौतियाँ

  • भारतीय उद्योग परिसंघद्वारा आयोजित भारत @ 75 शिखर सम्मेलन(India@75 Summit) को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री द्वारा कहा गया कि चीन के साथ एक समझ विकसित करना चीन-भारतीय संबंधों के समक्ष एक बड़ी चुनौती है।
  • दोनों देश बिलियन-प्लस आबादी (Billion-Plus Populations)  के साथ भौगोलिक रूप से बहुत विशिष्ट हैं।
  • ऐसे समय में दोनों के मध्य एक समानांतर लेकिन अंतर में वृद्धि हो रही है जब दोनों आधुनिक देश एक दूसरे के पड़ोसी भी हैं जहाँ दोनों देशों के मध्य एक संतुलन समझ में बढ़ोतरी हो रही है।

 

आगे की राह

  • भारतीय विदेश नीति के संचालन के लिये संतुलन स्थापित करना एक केंद्रीय एवं महत्त्वपूर्ण बिंदु है।
  • वर्तमान समय में 70 वर्ष पूर्व के राजनयिक संबंध स्थापित करने की मूल आकांक्षा को फिर से जागृत करने, अच्छे पड़ोसी तथा दोस्ती, एकता और सहयोग की भावना को आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
  • भारत और चीन के पास विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जनसांख्यिकी, बाज़ार एवं सेनाएँ विद्यमान हैं इसलिये यह दोनों देशों के हितों में है कि वे अपने लोगों, क्षेत्र और वैश्विक शांति एवं विकास के लिये अपनी ऊर्जा को संरेखित करें।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि)

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (PM Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi- PM SVANidhi) योजना के तहत 02 जुलाई से ऋण देने की प्रक्रिया के शुरू होने के 41 दिनों के भीतर ही मंजूर किए गए ऋणों की संख्या और इस योजना के तहत प्राप्त आवेदनों की संख्या क्रमश:1 लाख और 5 लाख को पार कर चुकी है।

क्रियान्वयन एजेंसी

  • पिछले माह, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना को लागू करने के लिएकार्यान्वयन एजेंसी के रूप में सिडबी (SIDBI) को सम्मिलित करने हेतु ‘आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of India- SIDBI) के मध्य एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
  • सिडबी (SIDBI), ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट’ (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises- CGTMSE) के माध्यम से ऋण प्रदाता संस्थानों को क्रेडिट गारंटी का प्रबंधन भी करेगा।

योजना का विवरण

  1. यह 50 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को 10,000 रु. तक का सस्ता ऋण प्रदान करने हेतु एक विशेष माइक्रो-क्रेडिट सुविधा योजना है। इसके अंतर्गत24 मार्च को या उससे पहले कारोबार करने वाले रेहड़ीपटरी वालों को ऋण प्रदान किया जायेगा।
  2. यह योजना मार्च 2022 तक वैध है।
  3. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक(SIDBI) इस योजना के कार्यान्वयन हेतु तकनीकी भागीदार है।
  4. सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट(CGTMSE) के माध्यम से ऋण प्रदाता संस्थानों को क्रेडिट गारंटी का प्रबंधन करेगा।

योजना के अंतर्गत ऋण

  1. इस योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स 10 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण ले सकते हैं जिसे एक वर्ष की अवधि में मासिक किश्तों में चुकाने होंगे।
  2. समय पर / जल्दी ऋण चुकाने पर 7 प्रतिशत की सालाना ब्याज सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में त्रिमासिक आधार पर जमा कर दी जाएगी।
  3. ऋण के शीघ्र पुनर्भुगतान पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

पात्रता-

इस योजना के अंतर्गत शहरी / ग्रामीण क्षेत्रों के आस-पास सड़क पर माल बेचने वाले विक्रेताओं,सड़क किनारे ठेले या रेहड़ी-पटरी पर दुकान चलाने वाले, फल-सब्जी, लॉन्ड्री, सैलून, पान की दुकान तथा वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करने वालों को ऋण प्रदान किया जायेगा।

योजना की आवश्यकता

  1. लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों तथा सड़क किनारे ठेले या रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वालों का जीवन तथा उनकी आजीविका विशेष रूप से प्रभावित हुई है।
  2. स्ट्रीट वेंडर आमतौर पर अनौपचारिक स्रोतों से काफी अधिक ब्याज दरों पर ऋण लेकर छोटी पूंजी लगाकर काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, इनके सामने लॉकडाउन के दौरान अपनी बचत तथा लागत पूंजी के समाप्त हो जाने से पुनः रोजगार शुरू करने का संकट है।
  3. इसीलिये, स्ट्रीट वेंडर्स को फिर से व्यापार शुरू करने में मदद करने हेतु औपचारिक बैंकिंग स्रोतों के माध्यम से कार्यशील पूंजी के लिए तत्काल सस्ता ऋण प्रदान किये जाने की आवश्यकता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

पापुम रिजर्व फॉरेस्ट

  • पापुम रिज़र्व फॉरेस्ट (Papum Reserve Forest) अरुणाचल प्रदेश में स्थित एकमहत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र (Important Bird and Biodiversity Areas– IBAs) है।
  • यह पूर्व में ईटानगर वन्यजीव अभयारण्य तथा पश्चिम में पक्के वन्यजीव अभयारण्य के मध्य स्थित है। यह दोनों अभ्यारण्य भी महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र (IBA) घोषित है।
  • यह संरक्षित वन क्षेत्रपूर्वी हिमालय स्थानिक पक्षी क्षेत्र (Eastern Himalayas Endemic Bird Area) का हिस्सा है।

चर्चा का कारण

  • उपग्रह डेटा पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में वनों की कटाई की उच्च दर के कारण हॉर्नबिल पक्षी का वास स्थान संकट में पड़ चुका हैं।
  • पापुम रिज़र्व फॉरेस्ट बड़ी, रंगीन और फल खाने वाली हॉर्नबिल की तीन प्रजातियोंग्रेट, पुष्पांजलि और ओरिएंटल चितकबरा (Great, Wreathed and Oriental Pied) का निवास स्थान है।

 

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