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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

डिजिटल जवाबदेही और पारदर्शिता अधिनियम

28th July, 2020

G.S. Paper-II

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General-CAG) ने  डिजिटल जवाबदेही और पारदर्शिता अधिनियम’ (Digital Accountability and Transparency Act-DATA) नामक एक प्रस्तावित परियोजना एवं कानून के तहत  केंद्र सरकार के लिये अनिवार्य डिजिटल भुगतान, लेखांकन एवं लेन देन हेतु डिजिटलीकरण के माध्यम से तीन चरण के  ट्रांज़िशन (Three-Phase Transition) का सुझाव दिया है।

प्रमुख बिंदु-

  • तीन चरण के ट्रांज़िशन (Three-Phase Transition) के सुझाव में डिजिटल सार्वजनिक उपयोगिताओं की आवश्यकता को चिह्नित किया गया हैं।
  • इन सुझावों में न केवल ई-सेवाएँ शामिल हैं, बल्कि सभी सरकारी राजस्व एवं व्यय आँकड़ों को    इलेक्ट्रॉनिक, मशीनी माध्यम से पढ़ने योग्य, गैर-प्रतिकारक, विश्वसनीय, सुलभ और खोजने       योग्य बनाया गया है।
  • डिजिटलीकरण के लिये 100% एंडटूएंड इलेक्ट्रॉनिक डेटा कैप्चरअर्थात् डेटा तक शुरु से लेकर         अंत तक  इलेक्ट्रॉनिक पहुँच आवश्यक है।
  • इसमें सभी रसीदें एवं व्यय का लेन देन शामिल हैं। एंड-टू-एंड इलेक्ट्रॉनिक डेटा कैप्चर में  माँगों, मूल्यांकन और चालान की  प्राप्ति (Received), संसाधित (Processed) एवं भुगतान (Paid) इत्यदि को  इलेक्ट्रॉनिक रूप से  शामिल किया जाना है।
  • सभी सरकारी संस्थाओं में डेटा गवर्नेंस के लिये निर्धारित मानक ज़रुरी है।
  • डेटा मानक का अर्थ है डेटा के घटकों का वर्णन एवं रिकॉर्डिंग करने के नियम जो डेटा के एकीकरण (Integration), साझाकरण (Sharing) और अंतर-सक्षमता (Interoperability) के लिये आवश्यक हैं।

प्रौद्योगिकी वस्तुसंरचना

  • इसके तहत मजबूत सुरक्षा के साथ-साथ गोपनीयता को सुनिश्चित करते हुए सभी आईटी सरकारी प्रणालियों को एक निर्धारित स्वतंत्र  वस्तुसंरचना ढाँचे के अनुरूप विकसित किया  जाएगा।

डिजिटलीकरण के लाभ-

  • डिजिटलीकरण के माध्यम से बजट के अलावा किये गए लेनदेन, व्यावसायिक निरंतरता (जैसे  फ़ाइलों या पेपर रिकॉर्ड की तरह इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड खो नहीं सकते हैं) एवं असंगत  लेखापरीक्षण की पहचान की जा सकती है।
  • यह संसद और विधान सभाओं को यह आश्वासन देने में सक्षम बनाएगा कि सरकार के द्वारा  एकत्र किया गया प्रत्येक रुपया/धनराशि उसी उद्देश्य के लिये खर्च की गई है जिसके लिये    इसे आवंटित किया गया था।
  • डिजिटलीकरण द्वारा लेन-देन में  डेटा मानकीकरण के निर्धारण से डेटा की अस्पष्टता दूर होगी        साथ ही अनावश्यक डेटा को कम किया जा सकेगा जिससे विभिन्न डेटाबेस के एकीकरण के लिये       प्रोटोकॉल बनाने में आसानी होगी।
  • यह संज्ञानात्मक बुद्धिमत्ता उपकरणों जैसे एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग के उपयोग को सक्षम बनाएगा जिसका उपयोग बजट आधार स्थापित करने में , त्रुटियों का पता लगाने में, डेटा-संचालित योजना के क्रियान्वयन में तथा विभागों एवं  एजेंसियों के           तुलनात्मक प्रदर्शन हेतु मानक स्थापित करने में किया जा सकता है ।

इस्तांबुल अभिसमय

G.S. Paper-II

संदर्भ-

हाल ही में, पोलैंड द्वारा, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को रोकने से संबंधित इस्तांबुल कन्वेंशन से अलग होने का निर्णय लिया गया है।

चर्चा का विषय-

पोलैंड के इस सन्धि से अलग होने का कारण संधि के प्रति इसका नया दृष्टिकोण है, इसके अनुसार पोलैंड यह मानता है, कि यह संधि हानिकारक है, क्योंकि इसके अंतर्गत स्कूलों में लैंगिक विषमता के बारे पढ़ने को अनिवार्य किया गया है।

इसके अतिरिक्त पोलैंड का कहना है कि, यह संधि, ‘जैविक लैंगिकता के विपरीत सामजिकसांस्कृतिक लैंगिकताके निर्माण का प्रयास करती है।

उदाहरण के लिए, इस कन्वेंशन के कुछ प्रावधानों के तहत बच्चों तथा किशोरों को समलैंगिक परिवारों के निर्माण करने संबंधी शिक्षा देने की बात कही गयी है।

इस्तांबुल कन्वेंशन क्या है?

इसे, महिलाओं और घरेलू हिंसा के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम तथा उससे निपटने हेतु यूरोपीय समझौता परिषद (Council of Europe Convention on preventing and combating violence against women and domestic violence) भी कहा जाता है।

  • यह संधिमहिलाओं के खिलाफ हिंसा की रोकथाम करने और निपटने के लिए विश्व का पहला बाध्यकारी उपकरण है।
  • इस व्यापक वैधानिक ढाँचे मेंमहिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, महिला जननांग अंगभंग (female genital mutilation- FGM), तथा सम्मान-आधारित हिंसा (honour-based violence) और बलात विवाह को रोकने के लिए प्रावधान किये गए है।
  • इस अभिसमय में, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने हेतुसरकारों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित किये गए है।
  • किसी देश की सरकार के द्वारा अभिसमय के पुष्टि किये जाने के पश्चात वहइस संधि का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होते हैं।
  • मार्च 2019 तक, इस संधि पर45 देशों तथा यूरोपीय संघ द्वारा हस्ताक्षर किये गए है।
  • इस अभिसमय कोअप्रैल 2011 को यूरोपीय परिषद कीकमेटी ऑफ़ मिनिस्टर्सद्वारा अपनाया गया था।

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (FRA)

G.S. Paper-III (Environment)

संदर्भ-

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization– FAO) द्वारा वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (Global Forest Resources Assessment– FRA) रिपोर्ट 2020 जारी की गयी।

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (FRA) के बारे में-

  • FAO, वर्ष 1990 के बाद से प्रत्येक पाँच वर्ष मेंयह व्यापक आकलन करता है।
  • इस रिपोर्ट मेंसभी सदस्य देशों के वनों का स्तरउनकी स्थितियों एवं प्रबंधन का आकलन किया जाता है।

FRA 2020 के अनुसार, 2010-2020 के दौरान वन क्षेत्रों से सर्वाधिक औसत वार्षिक शुद्ध लाभ (Average Annual Net Gains) दर्ज करने वाले शीर्ष 10 देश निम्नलिखित हैं:

  1. चीन
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. भारत
  4. चिली
  5. वियतनाम
  6. तुर्की
  7. संयुक्त राज्य अमेरिका
  8. फ्रांस
  9. इटली
  10. रोमानिया

FRA 2020 के मुख्य निष्कर्ष-

  • वर्ष 2010-2020 की अवधि मेंएशियाई महाद्वीप ने वन क्षेत्र में सर्वाधिक शुद्ध वृद्धि दर्ज की है। एशियाई महाद्वीप में पिछले एक दशक के दौरान वनों में प्रति वर्ष17 मिलियन हेक्टेयर की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई है।
  • दक्षिणएशियाई उपक्षेत्र में वर्ष 1990-2020 के दौरान शुद्ध वन हानिदर्ज की गई है।

भारत से संबंधित निष्कर्ष-

  • वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन के एक दशक के दौरानभारत ने औसतन प्रत्येक वर्ष38 प्रतिशत वन लाभ अथवा 2,66,000 हेक्टेयर क्षेत्र की वन वृद्धि दर्ज की है।
  • रिपोर्ट में एशियाई महाद्वीप के अंर्तगतसामुदायिक प्रबंधित वन क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि के लिये सरकारों के संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम को श्रेय दिया है।
  • भारत में स्थानीय, आदिवासी एवं देशज़ समुदायों द्वारा प्रबंधित वन क्षेत्रवर्ष 1990 में शून्य से बढ़कर वर्ष 2015 में लगभग 25 मिलियन हेक्टेयर हो गया है।
  • हालाँकिआकलन के अनुसार, प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित वन दर (Naturally Regenerating Forest Rate) निराशाजनक है। 2010-20 के दौरान, प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित वन में वृद्धि की दर केवल38 प्रतिशत थी।
  • भारत द्वारा विश्व में वानिकी क्षेत्र में अधिकतम रोज़गार उत्पन्न किये गए हैं।विश्व स्तर पर, 12.5 मिलियन लोग वानिकी क्षेत्र में कार्यरत थे। इसमें से23 मिलियन अर्थात् लगभग 50% सिर्फ भारत में कार्यरत हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

नाग नदी

(Nag river)

  • नाग नदी महाराष्ट्र के नागपुर शहर से होकर बहने वाली नदी है।
  • इसके नाम पर ही शहर का नाम नागपुर पड़ा था।
  • नाग नदी का उद्गम वाडी के पास लावा पहाड़ियों से होता है, तथा यह कन्हानपेंच नदी तंत्र का भाग है।

चर्चा का कारण-

हाल ही में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने नाग नदी की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, औद्योगीकरण ने नाग नदी को शापग्रस्त महिला में परिवर्तित कर दिया है।

 

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