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Daily Current Affairs – 2020

Topic: For Prelims and Mains

टिड्डियों का हमला

4th July, 2020

(G.S. Paper-III)

पाकिस्तान की सीमा से लगे राजस्थान के कुछ क्षेत्र हर वर्ष टिड्डियों के हमले का ख़ामियाज़ा उठाते हैं परन्तु गत तीन दशकों में ऐसा प्रथम बार हुआ है जब टिड्डियों का हमला इतना व्यापक है और टिड्डियों के ये दल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक में प्रवेश कर चुके हैं.

पिछले कुछ सप्ताहों से पश्चिम और दक्षिण एशिया तथा पूर्व अफ्रीका के कई देशों में टिड्डियों का आक्रमण (locust attacks) देखा जा रहा है.

इनसे कौनसे देश प्रभावित हो रहे हैं?

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने टिड्डियों के प्रकोप के तीन हॉटस्पॉट का पता लगाया है जहाँ परिस्थिति अत्यंत ही खतरनाक बताई जा रही है, ये हैं – हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका, लाल सागर क्षेत्र और दक्षिण-पश्चिम एशिया.

इन हॉटस्पॉट में स्थिति अभी क्या है?

  • इन तीनों में हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका को दुष्प्रभावित क्षेत्र बताया जा रहा है जहाँFAO के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और रोजगार पर अभूतपूर्व खतरा मंडरा रहा है.
  • यूथोपिया और सोमालिया से निकलर ये टिड्डी दल दक्षिण में केन्या और अफ्रीका14 अन्य देशों तक चले गये हैं.
  • लाल सागर क्षेत्र में इन टिड्डियों का प्रकोप सऊदी अरब, ओमान और यमन में देखा जा सकता है.
  • दक्षिण-पश्चिम एशिया में इनसे ईरान, पाकिस्तान और भारत में क्षति की सूचना मिल रही है.
  • पाकिस्तान और सोमालिया ने पिछले दिनों टिड्डियों के प्रकोप को देखते हुए आपातकाल घोषित कर दिया है.

टिड्डी क्या होते हैं?

टिड्डी छोटे श्रृंगों वाले ग्रासहोपर होते हैं जो उत्पाती भीड़ बनाकर लम्बी दूरी तक (1 दिन में 50 किलोमीटर तक) चले जाते हैं और इसी बीच उनकी संख्या तेजी से बढ़ती जाती है.

भारत में चार प्रकार के टिड्डे पाए जाते हैं –

  1. मरुभूमि टिड्डा (Schistocerca gregaria)
  2. प्रव्राजक टिड्डा (Locusta migratoria)
  3. बम्बई टिड्डा (Nomadacris succincta)
  4. पेड़ वाला टिड्डा (Anacridium)

 

टिड्डे कैसे क्षति पहुँचाते हैं?

  • ये हजारों के झुण्ड में आते हैं और पत्ते, फूल, फल, बीज, छाल और फुनगियाँ सभी खा जाते हैं और ये इतनी संख्या में पेड़ों पर बैठते हैं कि उनके भार से ही पेड़ नष्ट हो जाते हैं.
  • भारत औरविश्वभर में सबसे विध्वंसकारी कीट मरुभूमि टिड्डा होता है. इसका एक वर्ग किलोमीटर तक फैला छोटा झुण्ड एक दिन में उतना ही अनाज खा जाता है जितना 35,000 लोग खाते हैं.

टिड्डी नियंत्रण के उपाय-

  • टिड्डियों को नष्ट करने के लिए मुख्य रूप से वाहनों के माध्यम से ओर्गेनोफोस्फेट (organophosphate) रसायन का छिड़काव किया जाता है. यह छिड़काव हाथ से चलने वाले स्प्रेयर से भी किया जाता है और कभी-कभी हेलीकॉप्टर से भी.
  • कभी-कभी कुछ ऐसे जीव और परजीवी भी हैं जो इन टिड्डियों को खाते हैं और वे उनका खात्मा नहीं कर पाते हैं क्योंकि टिड्डी दल एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से चले जाते हैं.
  • टिड्डियों का कम आक्रमण होने पर यांत्रिक विधि से टिड्डियों का नियंत्रण किया जा सकता है. इसमे खाइयां खोद कर या शाखाओं के साथ हॉपरों को गिरा कर या पीट कर नियंत्रित कर सकते है, लेकिन यह बहुत अधिक श्रम का काम है.

जहर युक्त चारे द्वारा: टिड्डियों के नियंत्रण के लिए इस विधि का परयोग 1950 के दशक में बहुत होता है. इस विधि में गेहूँ के भूसे या मक्के के दानों में कीटनाशकों की धूल मिलाकर टिड्डियों के आक्रमण वाली जगह या उनके रास्तों में डाल दिया जाता है.

 

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सूची में 23 अतिरिक्त लघु वन उपज (MFP)

(G.S. Paper-III)

जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सूची में 23 अतिरिक्त लघु वन उपजों (MFP) को सम्मिलित करने की घोषणा की है. विदित हो कि पहले इसके अन्दर 50 वस्तुएँ आती थीं जो अब बढ़कर 73 हो गई हैं. यह निर्णय कोविड–19 महामारी ओर बहुत ही कठिन परिस्थितियों में लिया गया है.

पृष्ठभूमि-

सरकार ने वंचित वनवासियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने और उनके सशक्तिकरण में सहायता के लिये लघु वन उपजों की मूल्य श्रृंखला विकसित करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित व्यवस्था के तहत लघु वन उपजों के विपणन की व्यवस्था तैयार करने का 2011 में निर्णय लिया था. इस योजना के तहत 1,126 वन धन केंद्र बनाये गये हैं. इन केंद्रों से 3.6 लाख से अधिक जनजातीय लोग लाभान्वित होते हैं. सरकार ने इस महीने के प्रारम्भ में पहले से सूचीबद्ध 50 लघु वन उपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया था.

आवश्कयता-

लम्बे समय से 23 फसलों के अतिरिक्त अन्य फसलों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य में सम्मिलित करने कि माँग कृषकों द्वारा उठाई जा रही हैं. वन क्षेत्रों में उत्पादन होने वाले उपार्जन पर उस क्षेत्र के जनजातीय तथा आदिवासी समाज की निर्भरता रहती है जिनके लिए बाजार मिल पाना और भी कठिन हो जाता है.

गौण वन ऊपज के विभिन्न मदों में 16 से 66 प्रतिशत तक की वृद्धि

26 मई, 2020 को अतिरिक्त मदों की यह अनुशंसा 1 मई 2020 को जारी पहले की अधिसूचना के अतिरिक्त है, जिसमें विधमान 50 एमएफपी के लिए एमएसपी संशोधनों की घोषणा की गई थी. गौण वन ऊपज के विभिन्न मदों में यह वृद्धि 16 से 66% तक की गई (कुछ मामलों जैसे कि गिलोय में यह वृद्धि 190% तक की गई) थी. इस वृद्धि से सभी राज्यों में गौण वन ऊपज की खरीद में भी तत्काल और आवश्यक गति मिलने की आशा है.

न्यूनतन समर्थन मूल्य सूची में सम्मिलित फसलों के नाम-

  • नये जोड़े गए 14 मद, जो वैसे तो कृषि उपज हैं, भारत के पूर्वात्तर हिस्से में वाणिज्यिक रूप से नहीं उगाए जाते हैं, लेकिन वनों में जंगली क्षेत्रों में उगते पाए जाते हैं. इसलिए मंत्रालय ने पूर्वोत्तर के लिए एमएफपी मदों के रूप में इन विशिष्ट मदों को शामिल करने पर अनुकूल तरीके से विचार किया है.
  • इसके अतिरिक्त भारत भर में वन्य क्षेत्रों में उपलब्ध निम्नलिखित 9 मदों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ इस अधिसूचना में शामिल किया गया है –
  1. वन तुलसी बीज
  2. वन जीरा
  3. इमली बीज
  4. बाँस झाड़ू
  5. सूखा आँवला
  6. कचरी बहेड़ा
  7. कचरी हर्रा
  8. लाख के बीज
  9. कटहल के बीज

लघु वन उपज का महत्त्व-

  • लघु वन उपज (Minor Forest Produce : MFP) वन क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों के लिए आजीविका का प्रमुख स्रोत है.
  • वन में निवास करने वाले लगभग 100 मिलियन लोग भोजन, आश्रय, औषधि एवं नकदी आय के लिए MFP पर निर्भर करते हैं.
  • जनजातीय लोग अपनी वार्षिक आय का लगभग 20-40% MFP एवं सम्बद्ध गतिविधियों द्वारा प्राप्त करते हैं तथा इसका महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से भी सुदृढ़ संबंध है क्योंकि अधिकांश MFP का संग्रहण, उपयोग और बिक्री महिलाओं द्वारा ही की जाती है.
  • MFP क्षेत्र में देश में वार्षिक रूप से लगभग 10 मिलियन कार्य दिवस के सृजन की क्षमता है.
  • अनुसूचित जनजाति एवं परम्परागत निवासी (वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम), 2006, लघु वन उपज (MFP) कोपादपों से उत्पन्न होने वाले सभी गैरलकड़ी वन उत्पादों के रूप में परिभाषित करता है. इसके अंतर्गत बाँस, ब्रशवुड, स्टम्प, केन, ट्यूसर, कोकून, शहद, मोम, लाख, तेंदु/केंडू पत्तियाँ, औषधीय पौधे, जड़ी-बूटी, जड़ें, कंद इत्यादि सम्मिलित हैं.
  • सरकार ने पहले भी आदिवासी जनसंख्या की आय की सुरक्षा हेतुलघु वन उपज (MFP) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price – MSP)” नामक योजना आरम्भ की थी.”

विशेष तरलता योजना

(G.S. Paper-III)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सरकार द्वारा  स्पेशल पर्पज़ व्हीकल’ ( Special Purpose Vehicle- SPV) के माध्यम से ‘गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों’ (Non-Banking Finance Companies- NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (Housing Finance Companies- HFCs) के लिये एक विशेष तरलता योजना’ (Special Liquidity Scheme ) की शुरुआत की गई है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस योजना को वित्तीय क्षेत्र में तरलता की स्थिति में सुधार करने तथा किसी भी संभावित प्रणालीगत जोखिम से बचने के उद्देश्य से शुरु किया गया है।
  • सरकार द्वारा मई, 2020 मेंगैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों के लिये 3000 करोड़ रुपए की ‘विशेष तरलता योजना’ की घोषणा की गई थी।
  • इस योजना के क्रियान्वयन के लिये भारतीय स्टेट बैंक की सहायक कंपनी ‘भारतीय स्टेट बैंक कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड’ (SBICAP) द्वारा ‘SLS ट्रस्ट’ नाम से ‘स्पेशल पर्पज़ व्हीकल’ को स्थापित किया गया है।
  • इस ‘स्पेशल पर्पज़ व्हीकल’ के माध्यम से ही गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को विशेष तरलता योजना से जोड़ने का कार्य किया जाएगा।

स्पेशल पर्पज़ व्हीकल’:

  • ‘स्पेशल पर्पज़ व्हीकल’ पात्र NBFCs और HFCs  से अल्पकालिक दस्तावज़ों/कागज़ों की खरीदेगा जिनमें  केवल ‘गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर’ (Non-convertible debentures- NCDs) तथा ‘वाणिज्यिक पत्र’ (Commercial paper- CP) को ही खरीदा जाएगा।
  • ‘स्पेशल पर्पज़ व्हीकल’ के द्वारा खरीदे गए दस्तावज़ों की शर्त यह होगी कि इनकी परिपक्वता अवधि तीन माह से अधिक न हो तथा इनकी रेटिंग इन्वेस्टमेंट ग्रेड की होनी चाहिये।
  • 30 सितंबर, 2020 के बाद जारी किये गए किसी भी दस्तावेज़ के लिये यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी क्योंकि ‘स्पेशल पर्पज़ व्हीकल’ 30 सितंबर, 2020 के बाद नई खरीद करने के लिये बंद हो जाएगा।

NBFCs एवं HFCs के लिये निर्धारित मानदंड:

  • इस योजना का लाभ केवल NBFCs और HFCs को ही मिलेगा। कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों (Core Investment Companies)  तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों Non-Banking Financial Companies-NBFC) को इस योजना से बाहर रखा गया है।
  • इस योजना के माध्यम से केवल वे ही कंपनियाँ धन जुटाने की पात्र है जो निम्नलिखित व्यापक शर्तों को पूरा करती हैं-
    • पिछले दो वित्तीय वर्षों (2017-2018 और 2018-2019) में कंपनी किसी एक वर्ष में मुनाफे में रही हो।
    • रेटिंग एजेंसी ( Rating Agency) द्वारा इन्वेस्टमेंट ग्रेड की रेटिंग मिली हो।
    • 31 मार्च, 2021 तक गैर-निष्पादित परिसंपत्ति 6 ​​प्रतिशत से अधिक न हो।
    • 1 अगस्त, 2018 से पिछले एक वर्ष के दौरान किसी भी बैंक द्वारा उसके उधार के लिये एसएमए -1 या एसएमए -2 श्रेणी के तहत रिपोर्ट नहीं की गई हो।

योजना का महत्त्व:

  • इसके माध्यम से NBFCs, HFCs तथा म्युचुअल फंड में चल रही तरलता की कमी को दूर किया जा सकेगा।
  • तरलता की कमी दूर होने पर निवेशकों का बाज़ार की तरफ रुझान बढ़ेगा।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल / Udyam Registration Portal

1 जुलाई, 2020 को भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (Union Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises) ने उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल’ (Udyam Registration Portal) का शुभारंभ और संचालन किया।

  • उल्लेखनीय है कि नई पंजीकरण प्रक्रिया से‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ को बढ़ावा देने तथा समय एवं लागत के कम होने के उम्मीद जताई गई है।          

प्रमुख बिंदु:

  • MSME उद्यमों के वर्गीकरण एवं पंजीकरण की एक नई प्रक्रिया 1 जुलाई, 2020 को ‘उद्यम रजिस्ट्रेशन’ के नाम से शुरू की गई।
  • MSME मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ‘आधार’ के अतिरिक्त अन्य किसी प्रमाण पत्र के बिना स्व-घोषणा के आधार पर ‘उद्यम पंजीकरण’ ऑनलाइन दायर किया जा सकता है।
  • पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उद्यमी को एकउद्यम रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
    • ‘उद्यम रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र’ में एकक्यूआर कोड होगा जिससे पोर्टल के वेब पेज पर उद्यम से संबंधित विवरण को प्राप्त किया जा सकता है। इससे पंजीकरण के पुनर्नवीनीकरण की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
  • उद्यमों के निवेश एवं टर्नओवर से संबंधित पैन (PAN) एवंजीएसटी (GST) आधारित विवरण सरकारी डेटाबेस से स्वचालित रूप से प्राप्त किया जाएगा।

 

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