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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

जैविक हथियार

G.S. Paper-III

संदर्भ-

  • उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस के सैनी ने कहा है कि भविष्य में होने वाले युद्ध शून्यलागत वाले युद्धों की ओर अग्रसर हो सकते हैं, जिसमे कोई एक बहुत ही घातकरोगाणु (Pathogen), उच्च तकनीकों युक्त शस्त्रागार को गतिहीन कर सकता है.’
  • उन्होंने कहा है, कि कमजोर सेनाएं किसी अप्रतिबंधित युद्ध क्षेत्रों में अपने-अपने लाभप्रद स्थितियों की तलाश में रहेंगी, और वहींबयानबाजी (Narratives) की लड़ाई के लिए सोशल मीडिया पसंदीदा मार्ग बना रहेगा

जैविक हथियार से तात्पर्य-

  • जैव आतंकवाद के माध्यम से प्रायः विषाणु या जीवाणु के साथ नई तकनीकी की सहायता से हमला किया जाता है जो अन्य हथियारों से और भी ज्यादा खतरनाक होता है. उल्लेखनीय है कि कीटाणुओं, विषाणुओं अथवा फफूंद जैसे संक्रमणकारी तत्वों जिन्हें जैविक हथियार कहा जाता है, का युद्ध में नरसंहार के लिये प्रयोग किया जा सकता है.
  • जैव आतंकवाद के वाहक के रूप में लगभग 200 प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, फंगस पर्यावरण में मौजूद हैं. एंथ्रेक्स, प्लेग, बोटूलिज्म, टूलेरीमिया, ग्लैन्डर, जैसे खतरनाक जीव इसमें शामिल हैं.
  • कई वाहक पाउडर के रूप में होते हैं. इन्हें सरलता से पानी या हवा में छोड़ा जा सकता है या किसी के भोजन में मिलाया जा सकता है. ये 24 घंटे के अंदर प्राणी और अन्य जीवों की जान ले सकते हैं.

रासायनिक हथियार-

  • एक रासायनिक हथियार मानव निर्मित रसायन के उपयोग से बनता है. अर्थात् रासायनिक हथियारों में उन हथियारों का प्रयोग होता है जो घातक रसायनों के उपयोग से बनते हैं और आबादी के लिये जान और माल के नुकसान का कारण बनते हैं.
  • ये हथियार जीवन को नष्ट करने के लिये प्रयोग किये जाते हैं. रासायनिक युद्ध से संपूर्ण मानवीय समुदाय को खत्म किया जा सकता है. रासायनिक हथियारों में ज़हरीला रसायन होता है जो IEDs, Mortars, मिसाइलों और अन्य एजेंटों का उपयोग कर प्रसारित किया जाता है.
  • इन्हीं एजेंटों के कारण विस्फोट होता है और परिणामस्वरूप ज़हरीले रासायनिक हवा में फैल जाते हैं. इस रसायन से किसी भी व्यक्ति की कुछ ही सेकेंड में मौत हो सकती है. इन रासायनिक हथियारों का प्रभाव तब तक रहता है जब तक हवा को साफ नहीं कर दिया जाता है. रासायनिक हथियार के कुछ उदाहरण- मस्टर्ड गैस, सरीन, क्लोरीन, हाइड्रोजन साइनाइड और टीयर गैस के रूप में हैं.

जैविक हथियार अभिसमय (BWC)-

  • जैविक हथियार अभिसमय (Biological Weapons Convention- BWC), सामूहिक विनाश के हथियारों की पूरी श्रेणी के विकास, उत्पादन और भंडार पर प्रतिबंध लगाने वालीपहली बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण संधि है. इस संधि को 10 अप्रैल 1972 को हस्ताक्षर के लिए खोला गया था. जैविक हथियार अभिसमय (BWC) 26 मार्च 1975 को लागू किया गया था.

BWC के तहत प्रतिबंध-

जैविक हथियार अभिसमय (BWC) के तहत निम्नलिखित के विकास, भंडार, अधिग्रहण, प्रतिधारण, और उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया गया है:

  • रोगनिरोधी, सुरक्षात्मक या अन्य शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अतर्कसंगत जैविक एजेंटों और विषाक्त पदार्थों के प्रकार और उनकी मात्रा;
  • शत्रुतापूर्ण उद्देश्यों के लिए या सशस्त्र संघर्ष में जैविक एजेंटों या विषाक्त पदार्थों का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किए गए हथियार, उपकरण और डिलीवरी वाहन;
  • ऊपर वर्णित एजेंटों, विषाक्त पदार्थों, हथियारों, उपकरणों और डिलीवरी वाहनों को हासिल करने अथवा इनका हस्तांतरण.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ग्रीन चारकोल

  • हाल ही में, विद्युत्मंत्रालय द्वारा ग्रीन चारकोल हैकथौन का आयोजन किया गया. इसके उद्देश्य खेत में कृषि अवशेषों के दहन की प्रथा को समाप्त करके वायु को स्वच्छ बनाना, कृषि अवशेषों से नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करना आदि हैं.
  • ग्रीन चारकोल वस्तुतः एक प्रकार का जैव ईंधन है, जिसे स्थानीय और वहनीय रूप में बनाया जा सकता है.
  • इसे बनाने के लिए, मौसम और क्षेत्र के लिए अनुकूल कृषि अपशिष्ट पदार्थों को एक भट्ठी में कार्बनीकृत (एक जैविक पदार्थ को कार्बन या कार्बन युक्त अवशेषों में परिवर्तित करना) किया जाता है. इसका दहन स्वच्छ होता है और धुएं के जोखिम को कम करता है, जो श्वसनीय संक्रमण के लिए उत्तरदायी है.

 

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