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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा

G.S. Paper-II

चर्चा में क्यों?

हाल ही में पाकिस्तान की संसद ने चीनपाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China Pakistan Economic Corridor-CPEC) से संबन्धित एक विधेयक को पारित किया है। यह विधेयक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर सेना का नियंत्रण अपेक्षाकृत अधिक बढ़ाएगा।

पृष्ठभूमि-

  • कुछ दिन पूर्व पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2020 को मंजूरी दी थी। अब इस विधेयक को पाकिस्तान की संसद ने भी पारित कर दिया है।
  • इस विधेयक के पारित होने से अब चीनपाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China Pakistan Economic Corridor-CPEC) पर पाकिस्तानी सेना का नियंत्रण अपेक्षाकृत अधिक बढ़ जाएगा।
  • वर्ष 2019 में पाकिस्तान में इमरान सरकार ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा(सीपीईसी) के समय पर निष्पादन के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा प्राधिकरण (CPECA) स्थापित करने के लिए एक अध्यादेश पारित किया था। चीन ने सीपीईसी के संबंध में धीमी प्रगति पर निराशा व्यक्त की थी जिसके कारण यह अध्यादेश गया था।
  • चीन की मंशा थी कि सीपीईसी पर पाकिस्तानी सेना का नियंत्रण ज्यादा बढ़े इसीलिए प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा (सेवानिवृत्त) प्राधिकरण के पहले अध्यक्ष बने थे।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2020 के विरोध का कारण-

  • पाकिस्तान के विभिन्न विपक्षी दल चीनपाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China Pakistan Economic Corridor-CPEC) में पाकिस्तानी सेना के बढ़ते हस्तक्षेप से चिंतित हैं।
  • उन्हें लगता है कि इससे लोगों द्वारा चुनी हुई नागरिक सरकार की शक्ति कमजोर होगी और सेना का नियंत्रण अपेक्षाकृत अधिक स्थापित होगा।
  • इसके अतिरिक्त, विपक्षी दलों के सदस्यों का कहना है कि सीपीईसी प्राधिकरण के गठन को लेकर उनकी आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया है और नए प्राधिकरण के गठन से सीपीईसी परियोजनाओं पर काम तेज होने के बजाय इन पर प्रभाव पड़ेगा।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China Pakistan Economic Corridor-CPEC)-

  • चीनपाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China Pakistan Economic Corridor-CPEC), चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना OBOR(ONE BELT ONE ROAD) का हिस्सा है।
  • साल 2014 में चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की आधिकारिक रूप से घोषणा की थी। जिसके बाद साल 2017 में चीन और पाकिस्तान नें इस आर्थिक गलियारे की योजना को 2023 तक पूरा करने योजना को मंजूरी दी थी।
  • मुख्य तौर पर यह एक हाइवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जो चीन के काशगर प्रांत को पाकिस्तान के ग्वारदर पोर्ट से जोड़ेगा।
  • इस परियोजना में पाकिस्तान में बंदरगाह, सड़कों, पाइपलाइन्स, दर्जनों फैक्ट्रियों और एयरपोर्ट जैसे कई अवसंरचनात्मक निर्माण शामिल है।
  • इसके जरिए चीन अरब सागर के ग्वादर बंदरगाह तक अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

क्या है OBOR परियोजना?

  • वन बेल्ट वन रोड (ONE BELT ONE ROAD) परियोजना के माध्यम से चीन प्राचीन सिल्क मार्ग को पुनः विकसित कर रहा है।
  • इसके महत्वपूर्ण परियोजना के जरिए चीन सड़कों, रेल, बंदरगाह, पाइपलाइनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से मध्य एशिया से लेकर यूरोप और फिर अफ्रीका तक स्थलीय व समुद्री मार्ग तैयार कर रहा है।
  • चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना का हिस्सा है, जिस पर भारत की हमेशा से आपत्ति रही रही है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पर भारत की चिंताएँ-

  • गौरतलब है कि चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर भारत के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है, जोकि संवैधानिक रूप से भारत का हिस्सा है। चीन ने इस गलियारे के विकास के लिए भारत से कोई इजाज़त नहीं ली।
  • विवादित पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर केवल पाकिस्तान इजाजत से किसी अंतराष्ट्रीय परियोजना का संचालन PoK पर पाकिस्तान के स्वामित्व और कश्मीर मुद्दे के अंतर्राष्ट्रीयकरण का कारण बन सकता है जो भारत नहीं चाहता है।
  • CPEC और ग्वादर के विकास के पीछे अपनी आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित और छोटा करने के साथसाथ हिंदमहासागर में उपस्थिती को मजबूत करने की चीनी योजना है। यह व्यापक रूप चीनी उपस्थिति को बढाकर हिंद महासागर में भारत के प्रभाव को कम कर सकती है।
  • CPEC रणनीतिक रूप से भारत को घेरने की योजना हो सकती है, क्योकि CPEC चीन के लिए पूर्णतः मुक्त यातायात की सुविधा उपलब्ध करवाता है और किसी विषम परिस्थिति में भारत की पश्चिमी पर चीन अपने हथियारों और सेना के साथ पहुँच कर पंजाब और राजस्थान के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है।
  • हालांकि चीन और पाकिस्तान दोनों की ओर से यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि ग्वादर बंदरगाह का उपयोग केवल आर्थिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। लेकिन भारत को यह चिंता है कि हिंद महासागर में अपना आधिपत्य सुनिश्चित करने के लिए चीन ग्वादर में एक नौसेना बेस स्थापित कर सकता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

हिमालयन सीरो

  1. इसे हिमालय के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश) में पहली बार देखा गया।
  2. हिमालयन सीरो एक बकरी, एक गधा, एक गाय और एक सुअर के बीच एक संकर प्रजाति जैसा दिखता है।
  3. यह एक बड़े सिर, मोटी गर्दन, खच्चर जैसे कान, और काले बालों वाला मध्यम आकार का स्तनपायी है।
  4. IUCN की रेड लिस्टमेंअसुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध है।
  5. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची– I के तहत सूचीबद्ध है।

 

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