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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

चीन द्वारा भूटान को भू-हस्तांतरण का प्रस्ताव

22 July, 2020

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में चीन ने एक बार पुनः वर्ष 1996 के भू-हस्तांतरण के प्रस्ताव की ओर संकेत देते हुए भूटान और चीन के सीमा विवाद को सुलझाने के लिये भूटान को एक समाधान पैकेज का प्रस्ताव दिया है।

प्रमुख बिंदु-

  • चीन ने इस समाधान पैकेज के तहत विवादित पश्चिमी क्षेत्र (डोकलाम सहित) के बदले में उत्तर में स्थित विवादित क्षेत्रों को भूटान को देने का प्रस्ताव किया है ।
  • गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 1996 में चीन ने भूटान को पश्चिम में स्थित 269 वर्ग किमी. की चारागाह भूमि के बदले उत्तर में 495 वर्ग किमी के घाटियों वाले क्षेत्र को बदलने का प्रस्ताव रखा था।
  • इस समझौते से भूटान को दोहरा लाभ प्राप्त हो सकता था। इस समझौते से भूटान को पहले से अधिक भूमि प्राप्त होती और साथ ही चीन के साथ उसके सीमा विवाद का भी अंत हो जाता।
  • परंतु यह समझौता भारत के लिये एक बड़ी चिंता का विषय था, क्योंकि डोकलाम क्षेत्र के चीन के अधिकार में आने के बाद यह चीनी सेना कोसिलीगुड़ी गलियारे’ (Siliguri Corridor) के रणनीतिक रूप से संवेदनशीलचिकन नेक’ (Chicken Neck) तक की सीधी पहुँच प्रदान करेगा

भूटान की पूर्वी सीमा पर अधिकार का दावा-

  • इस प्रस्ताव के अतिरिक्त हाल ही में चीनी विदेश मंत्रालय ने भूटान केसकतेंग’ (Sakteng) शहर के निकट स्थित पूर्वी सीमा पर भी अपने अधिकार के दावे को दोहराया है।
  • चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, चीन और भूटान के बीच सीमा का निर्धारण किया जाना बाकी है तथा वर्तमान में दोनों देशों की सीमा पर मध्य, पूर्वी और पश्चिमी हिस्से विवादित हैं।
  • हालाँकि भूटान ने ‘सकतेंग’ क्षेत्र में चीन के दावे का विरोध किया है। भूटान के अनुसार,  वर्ष 1984 से भूटान और चीन की सीमा वार्ताओं में सिर्फ दो क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
    • पहला उत्तर (जिसे चीन मध्य क्षेत्र बताता है) में पसमलंग (Pasamlung) और जकरलुंग (Jakarlung) घाटी।
    • दूसरा पश्चिम में डोकलाम और अन्य चारागाह।
  • अरुणाचल प्रदेश से लगती हुई भूटान की पूर्वी सीमा पर चीन और भूटान के बीच कोई विवाद नहीं रहा है।
  • वर्ष 1984 से वर्ष 2014 के बीच भूटान और चीन के बीच हुई 24 दौर की सीमा वार्ताओं में भूटान के         पूर्वी क्षेत्र में स्थित ‘सकतेंग’ क्षेत्र के मुद्दे को कभी भी नहीं उठाया गया था।

उद्देश्य-

  • विशेषज्ञों के अनुसार,  चीन द्वारा भूटान की सीमा पर किया गया नया दावा भूटान को चीन द्वारा प्रस्तावित सीमा समझौते को मानने पर विवश करने की एक नई रणनीति हो सकती है।
  • साथ ही चीन ने भूटान को इस बात का भी संकेत देने का प्रयास किया है कि यदि भूटान चीन के प्रस्ताव को नहीं मानता है, तो भविष्य में चीन का दावा बढ़ सकता है।
  • गौरतलब है कि 2-3 जून, 2020 को आयोजित वैश्विक पर्यावरण सुगमता (Global Environment Facility- GEF) की एक ऑनलाइन बैठक में भूटान के सकतेंग क्षेत्र को विवादित क्षेत्र बताते हुए ‘सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य’ (Sakteng Wildlife Sanctuary) के विकास हेतु      आर्थिक सहायता को रोकने का प्रयास किया था।
  • इससे पहले चीन ने अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में भी भारत के समक्ष इसी प्रकार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसके बाद वर्ष 1985 में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के ‘तवांग’ क्षेत्र पर अपना        दावा प्रस्तुत किया।

भारत पर प्रभाव-

  • डोकलाम क्षेत्र में चीन की पहुँच भारत के लिये एक बड़ी चिंता का कारण बन सकती है।
  • वर्ष 2017 के डोकलाम विवाद के समय भी भारतीय सेना की कार्रवाई का उद्देश्य भूटान की  सहायता के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भारत के लिये महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को चीनी हस्तक्षेप  से बचाना था।
  • हालाँकि भूटान ने डोकलाम में चीन द्वारा सड़क निर्माण के प्रयास को भूटान और चीन के बीच 1988 और 1998 की संधि का उल्लंघन बताया था।
  • वर्ष 2007 की भारत-भूटान मैत्री संधि के तहत दोनों ही देशों ने राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर  कार्य करने पर सहमति व्यक्त की है।

भारत-भूटान मैत्री संधि-

  • इस संधि पर 8 अगस्त, 1949 को दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) में हस्ताक्षर किये गए थे। इस संधि के तहत भारत को विदेश मामलों (अनुच्छेद-2) और रक्षा से जुड़े मामलों में भूटान को सलाह देने पर सहमति व्यक्त की गई थी।
  • अगस्त 2007 में इस संधि में सुधार करते हुए दोनों देशों के बीच एक नई संधि पर हस्ताक्षर किये गए।
  • वर्ष 2007 की संधि में भूटान की संप्रभुता जैसे मुद्दों को सम्मान देने की बात कही गई।
  • इस संधि में भारत द्वारा भूटान को अनिवार्य सैन्य सहायता देने का प्रावधान नहीं है, परंतु वास्तव में आज भी भारतीय सेना भूटान को चीन की किसी आक्रामकता से बचाने के लिये प्रतिबद्ध है।

आगे की राह-

  • भूटान के एक अधिकारी के अनुसार, भूटान की सीमा में चीन के किसी नए दावे से जुड़े मुद्दे को दोनों देशों की अगली सीमा वार्ता में उठाया जाएगा।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2017 में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए 90 दिनों के गतिरोध के बाद से भूटान-चीन वार्ता को स्थगित कर दिया गया है।
  • भारत के प्रति चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए डोकलाम क्षेत्र को चीनी हस्तक्षेप से दूर रखना बहुत ही आवश्यक है।

देश का पहला ई चार्जिंग प्लाजा

G.S. Paper-III (S & T)

ऊर्जा दक्षता को बढ़ाने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने हेतु दिल्ली के चेल्म्सफोर्ड क्लब में भारत के पहले सार्वजनिक ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) चार्जिंग प्लाजा का उद्घाटन हुआ. ईवी चार्जिंग प्लाजा की स्थापना एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) ने नई दिल्ली म्यूनिसिपल काउंसिल (NDMC) के सहयोग से की गई थी. ईईएसएल का दावा है कि वह भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग का पता लगाने और ऐसे वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (पीसीएस) संचालित करने के नए व्यापार मॉडल की पहचान करने के काम की अगुवाई कर रही है.

मुख्य बिंदु-

  • एनडीएमसी के सहयोग से ईईएसएल ने मध्य दिल्ली में भारत के प्रथम सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्लाजा में पांच विभिन्न स्पेसिफिकेशन्स वाले इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर लगाए गए हैं.
  • कई तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग की सुविधा वाले ये प्लाजा देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का काम करेगा. इससे उपभोक्ताओं के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग परेशानी मुक्त और सुविधाजनक हो जाएगी.
  • केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने ईईएसएल और यूएसएआईडी की संयुक्त पहल – इंडोर एयर क्वालिटी फॉर सेफ्टी एंड एफिशिएंसी में सुधार के लिए एयर कंडीशनिंग व्यवस्था को और सक्षम बनाने की प्रणाली लांच की.
  • काफी समय से भारत में हवा की खराब गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है और विशेष रूप से कोरोना संक्रमण के समय में इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है.
  • ईईएसएल ने पायलट परियोजना के तौर पर नई दिल्ली के स्कोप भवन में स्थित अपने  कार्यालय में एयर कंडीशनिंग और वेंटिलेशन सिस्टम का रेट्रोफिट किया है.
  • ईईएसएल के अनुसार इस पायलट परियोजना के बहुत प्रभावशाली परिणाम दिखे हैं. वायु गुणवत्ता में लगभग 80 प्रतिशत का सुधार दिखा है.

एज कंप्यूटिंग और इसका महत्त्व

G.S. Paper-III (S & T)

संदर्भ-

  • विगत कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) के माध्यम से लाखों कंप्यूटर या अन्य मशीनों से डेटा को संचालित (Handling), प्रोसेसिंग (Processing) तथा डिलीवर (Deliver) किया जा रहा है। एज कंप्यूटिंग का सर्वाधिक प्रयोग इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things- IoT), रियल टाइम कंप्यूटिंग (Real Time Computing) आदि के लिये किया जा रहा है।
  • तेज़ नेटवर्किंग तकनीकी के दौर में एज कंप्यूटिंग का प्रयोग रियलटाइम एप्लीकेशन (Real-Time Application) के निर्माण तथा उनके संचालन के लिये अत्यावश्यक है। इन एप्लीकेशनों में वीडियो प्रोसेसिंग एवं एनालिटिक्स, स्वचालित कार, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) आदि शामिल हैं।

भूमिका-

  • एज कंप्यूटिंग को समझने के लिये हमें क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) को समझना आवश्यक है। वर्तमान में हम क्लाउड कंप्यूटिंग के दौर से गुज़र रहे हैं ।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के तहत जब कोई यूज़र ऑनलाइन कार्यों का संपादन कर रहा होता है तब वह सुदूर स्थित किसी डेटा सेंटर की सूचनाओं को एक्सेस (Access) करता है जिसे क्लाउड कहते हैं। उदाहरण के तौर पर ऑनलाइन वीडियो या फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर, एंटी वायरस एप्लीकेशन, ऑनलाइन फाइल कनवर्टर, ई-कॉमर्स एप्लीकेशन, डेटा बैकअप और रिकवरी आदि क्लाउड कंप्यूटिंग के तहत कार्य करते हैं।
  • ये डेटा सेंटर (क्लाउड) पूरे विश्व में कुछ ही स्थानों पर स्थित हैं जहाँ डेटा को संग्रहीत तथा प्रोसेस किया जाता है। विश्व के अधिकांश डेटा सेंटर गूगल, अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट आदि प्रमुख तकनीकी कंपनियों द्वारा संचालित किये जाते हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग में हमारी सूचनाएँ तथा डेटा किसी स्थानीय हार्डडिस्क (Hard Disk) या मेमोरी कार्ड (Memory Card) आदि में संरक्षित नहीं रहता बल्कि यह ऑनलाइन क्लाउड में संरक्षित रहता है। इस प्रकार के डेटा को एक्सेस करने के लिये हमें केवल इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के तहत क्लाउड स्टोरेज (Cloud Storage) शामिल होता है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी निजी सूचनाएँ व डेटा जैसे- फोटो, वीडियो, म्यूज़िक, डाक्यूमेंट्स आदि सुरक्षित रख सकता है। गूगल ड्राइव (Google Drive), ड्रॉपबॉक्स (Drop Box), आई क्लाउड (iCloud) आदि क्लाउड स्टोरेज की सुविधा प्रदान करने वाले एप्लीकेशन हैं।

इसके अलावा क्लाउड कंप्यूटिंग में कई तरह की समस्याएँ भी हैं जो कि इस प्रकार हैं-

  • लेटेंसी (Latency):दूर स्थित किसी डेटा सेंटर या क्लाउड से वास्तविक समय में संपर्क कर पाने में हुई देरी को लेटेंसी कहते हैं।
  • अपर्याप्त बैंडविड्थ (Bandwidth):उन कंपनियों में जहाँ एक साथ कई डिवाइसेज़ द्वारा किसी क्लाउड स्टोरेज में डेटा प्रेषित किया जाता है, वहाँ निर्धारित बैंडविड्थ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और इस वजह से उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग की मुख्य समस्या हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन (High Speed Internet Connection) पर इसकी निर्भरता है। सुदूर स्थित क्लाउड से डेटा एक्सेस करने के लिये हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता आवश्यक होती है।

एज कंप्यूटिंग क्या है?

  • एज कंप्यूटिंग दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें एज (Edge) अर्थात् किनारा तथा कंप्यूटिंग (Computing) अर्थात् संगणना। क्लाउड कंप्यूटिंग के विपरीत एज कंप्यूटिंग के अंतर्गत संगणना संबंधी कार्यों के लिये डेटा का संग्रह डिवाइसेज़ के निकट ही किया जाता है।
  • दूसरे शब्दों में कहें तो यह एक नई नेटवर्किंग प्रणाली है जिसके तहत डेटा स्रोत/सर्वर तथा डेटा प्रोसेसिंग को कंप्यूटिंग प्रक्रिया के निकट लाया जाता है ताकि लेटेंसी और बैंडविड्थ की समस्या को कम किया जा सके और किसी एप्लीकेशन की क्षमता में वृद्धि की जा सके।
  • इसके विपरीत क्लाउड कंप्यूटिंग में डेटा का स्रोत मशीन से हज़ारों किलोमीटर दूर स्थित हो सकता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

मनोदर्पण

MANODARPAN

21 जुलाई, 2020 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने COVID-19 के मद्देनज़र छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु मनोसामाजिक सहायता (Psychosocial Support) प्रदान करने के लिये केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मनोदर्पण (MANODARPAN) पहल शुरू की।

 

प्रमुख बिंदु

  • इस पहल के एक भाग के रूप में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पोर्टल पर मनोदर्पण (MANODARPAN) का एक विशेष वेब पेज तथा मनोदर्पण पर एक हैंडबुक और एक राष्ट्रीय   टोलफ्री हेल्पलाइन नं. (8448440632) भी लॉन्च किया गया।

उद्देश्य

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस पहल का उद्देश्य छात्रों को उनके मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिये मनोसामाजिक सहायता प्रदान करना है।

  • गौरतलब है कि मानव पूंजी को सशक्त करने एवं उसकी उत्पादकता बढ़ाने हेतु एक भाग के रूप मेंमनोदर्पणपहल कोआत्मनिर्भर भारत अभियानमें शामिल किया गया है।

मनोदर्पण (MANODARPAN) पहल में निम्नलिखित घटकों को शामिल किया गया है

  • सलाहकारी दिशा-निर्देश।
  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर एक वेब पेज।
  • राष्ट्रीय स्तर का डेटाबेस एवं काउंसलरों की निर्देशिका।
  • राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर।
  • मनोसामाजिक सहायता पर एक पुस्तिका।
  • ऑनलाइन चैट प्लेटफॉर्म।
  • वेबिनार, वीडियो, पोस्टर, फ्लायर्स, कॉमिक्स और लघु फिल्मों सहित ऑडियो-विज़ुअल संसाधन।

 

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