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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

चीन द्वारा अपने प्रभुत्त्व विस्तार हेतु गैर- सैन्य रणनीति का प्रयोग

4th September, 2020

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस के रक्षा विभाग से प्रकाशित एक वार्षिक रिपोर्ट में चीन द्वारा अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और अपने प्रभुत्त्व विस्तार हेतु सैन्य अड्डों के विस्तार तथा गैर सैन्य रणनीतियों के प्रयोग की बात कही गई है।

प्रमुख बिंदु:

  • अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी डीओडी चीन सैन्य शक्ति रिपोर्ट-2020’ (DOD China Military Power Report-2020) के अनुसार, चीनी नेताओं द्वारा चीन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिये सशस्त्र संघर्ष जैसी रणनीति का उपयोग किया जाता है।रिपोर्ट में इस संदर्भ में  भारत और भूटान सीमा पर चीन के विवाद का उदाहरण दिया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपनी सैन्य शक्ति के प्रभाव को अधिक दूरी तक स्थापित करने के लिये देश के बाहर मज़बूत सैन्य अड्डों को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
  • इस रिपोर्ट में कई सैन्य आधुनिकीकरण क्षेत्रों में चीनी सेना को अमेरिकी सेना के बराबर (कम-से-कम) ही उन्नत बताया गया है, जिसमें जहाज़ निर्माण (Shipbuilding), भूमि आधारित पारंपरिक बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइल तथा एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली आदि शामिल हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपनी पहल/उपक्रमों की आलोचनाओं को नियंत्रित करने के लिये बहुपक्षीय संगठनों का भी उपयोग करता है।

गैर-युद्ध सैन्य गतिविधियों का प्रयोग:

  • इस रिपोर्ट में गैर-युद्ध सैन्य गतिविधियों (Non War Military Activities- NWMA) को चीनी सेना द्वारा प्रयोग किये जाने वाले दो प्रकार (दूसरा युद्ध) के सैन्य अभियानों का हिस्सा बताया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार,  NWMA के तहत विशेष तौर पर ऐसी गतिविधियों/ऑपरेशन को शामिल किया जा सकता है जिसमें चीनी सेना अपने देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा हेतु दूसरे देशों या इकाइयों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष से नीचे रहते हुए धमकियों या हिंसा का प्रयोग करती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों तथा अन्य देशों के साथ ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है।
  • चीन द्वारा ऐसी रणनीति के प्रयोग का उदाहरण दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में अपने क्षेत्रीय और समुद्री दावों के साथसाथ भारत और भूटान के साथ चीन की सीमा पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
  • रिपोर्ट में वर्ष 2009 में अमेरिका के निगरानी जहाज़ ‘यूएसएनएस इंपेकेबल’ (USNS Impeccable) के साथ गतिरोध और वर्ष 2012 के ‘स्कारबोरो रीफ गतिरोध’ (Scarborough Reef standoff) में ‘पीपुल्स आर्म्ड फोर्सेस मैरीटाइम मिलिशिया’ (People’s Armed Forces Maritime Militia- PAFMM)  की भूमिका को रेखांकित किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीनी सेना का विस्तार:

  • रिपोर्ट में इस बात की भी संभावना व्यक्त की गई है कि चीन अपनी थल , वायु और नौसैनिक सेनाओं को अतिरिक्त सैन्य रसद सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये जिबूती’ (Djibouti) के अतिरिक्त अन्य नये विदेशी सैन्य अड्डों की स्थापना की योजना बना रहा है।
  • चीन द्वारा सैन्य अड्डे की स्थापना हेतु म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, सेशेल्स, तंजानिया, अंगोला और ताजिकिस्तान जैसे देशों के चुनाव की संभावना व्यक्त की गई है।

विकास योजनाओं और आर्थिक प्रभाव का प्रयोग:

  • रिपोर्ट के अनुसार, ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना’ (Belt and Road’ initiative- BRI) के माध्यम से अन्य देशों में भी (चीन के अतिरिक्त) चीन की सैन्य पहुँच का विस्तार होगा।रिपोर्ट के अनुसार, चीन कई अन्य मामलों में दूसरे देशों का समर्थन प्राप्त करने के लिये BRI और अन्य परियोजनाओं से उन देशों पर प्राप्त अपने आर्थिक प्रभाव का उपयोग करता है। उदाहरण के लिये-उइगर मुस्लिमों (Uighur Muslim) के संदर्भ में कई मुस्लिम और गैर-मुस्लिम देशों ने चीन सरकार की हिंसक कार्रवाई को अनदेखा किया है।
  • साथ ही चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल देशों में भी अपने घरेलू नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम ‘बाइडू’ (BeiDou) के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है

बहुपक्षीय संगठनों का प्रयोग:

  • रिपोर्ट के अनुसार, चीन बहुपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का प्रयोग अपने राजनीतिक प्रभाव को मज़बूत और नए अवसरों को उत्पन्न करने, अपने विकास के हितों को आगे करने तथा ऐसे रणनीतिक संदेशों को बढ़ावा देने के लिये करता है जो इसे एक जिम्मेदार विश्व स्तरीय राष्ट्र के रूप में चित्रित करते हैं।
  • इस संदर्भ में रिपोर्ट में ब्रिक्स(BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन( Shanghai Cooperation Organization- SCO) का उदाहरण दिया गया है।

भारत चीन विवाद:

  • इस रिपोर्ट में वर्ष 2019 के दौरान भारत-चीन सीमा पर विवादित क्षेत्र में द्विपक्षीय सैन्य गतिविधियों का जिक्र है जिसमें दोनों देशों ने तनाव को बढ़ने से रोके रखा।
  • गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में वर्ष 2019 की गतिवधियों की चर्चा की गई है अतः इसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के हालिया तनाव को शामिल नहीं किया गया है।

निष्कर्ष:

  • यह रिपोर्ट हाल के वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में चीन की बढ़ती आक्रामकता से जुड़े तथ्य प्रस्तुत करती है
  • पिछले कुछ वर्षों में चीन की गैर-सैन्य गतिविधियों के तहत दक्षिण चीन सागर मेंइंडोनेशिया और फिलीपींस सहित अन्य आसियान (ASEAN) देशों की समुद्री सीमा के साथ प्रशांत महासागर में इक्वाडोर के समुद्री क्षेत्र में चीनी मछुआरों की सक्रियता में वृद्धि देखने को मिली है।
  • इसके साथ ही चीन BRI परियोजना के साथ अन्य विकास योजनाओं के लिये भी कई देशों को ऋण उपलब्ध करा कर वहाँ की स्थानीय राजनीति में अपने हस्तक्षेप को बढ़ाया है या कई मामलों में परियोजनाओं को अपने नियंत्रण में ले लिया है, श्रीलंका केहंबनटोटा बंदरगाह पर चीन का कब्जा इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन विवाद के साथभूटान सीमा पर चीन का हस्तक्षेप क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को दर्शाता है।

आगे की राह:

  • हिंद-महासागर क्षेत्र के साथ ही विश्व के अन्य हिस्सों में चीन की बढ़ती सैन्य और गैर-सैन्य गतिविधियाँ क्षेत्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति एवं स्थिरता की स्थापना के संदर्भ में एक बड़ी चिंता का विषय है।
  • दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिये क्षेत्र के देशों को साथ मिलकर सहयोग बढ़ाना चाहिये तथासंयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UN Convention on the Law of the Sea-UNCLOS), 1982 के तहत सभी देशों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिये।
  • हिंद महासागर में चीन के हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिये भारत को अमेरिका, रूस ऑस्ट्रेलिया आदि देशों के सहयोग से अपनी नौसैनिक गतिविधियों में वृद्धि करनी चाहिये।
  • भारत द्वारामालाबार नौसैनिक अभ्यास,  भारत और जापान की नौ-सेनाओं द्वारा संयुक्त युद्धाभ्यास तथा भारत एवं रूस की नौसेनाओं के साथ  द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास इंद्र-2020 (Indra-2020) आदि का आयोजन इस दिशा में लिये गए सकारात्मक निर्णय हैं।

हाल के वर्षों में चीन द्वारा सैन्य हथियारों के विकास को नियंत्रित करने के लिये चीन को ‘नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि’ (Strategic Arms Reduction Treaty-START) जैसी शस्त्र नियंत्रण संधि में शामिल किया जाना चाहिये, साथ ही वैश्विक शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिये चीन को भी इस पहल में अपना सहयोग देना चाहिये।

वैश्विक नवाचार सूचकांक-2020

(Global Innovation Index)

G.S. Paper-II (International)

चर्चा में क्यों?

वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) में भारत पहली बार शीर्ष 50 देशों में शामिल हुआ है।

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII)

  • वैश्विक नवाचार सूचकांक विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO), कॉर्नेल विश्वविद्यालय और इनसीड बिजनेस स्कूल द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है।
  • WIPO द्वारा तैयार किए गए इस सूचकांक में 131 देशों से जुड़े ताजा वैश्विक रूख और वार्षिक नवाचार रैंकिंग दर्शाए गए हैं।
  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII)-2020 का केंद्रीय विषय हैनवाचार को वित्त कौन देगा? (who will finance the innovation?)
  • इस सूचकांक में भारत की सकल रैंकिंग में चार पायदान का सुधार हुआ है और 2019 में 52वें स्थान से 2020 में 48वें स्थान पर आ गया है।
  • मध्य और दक्षिण एशियाई देशों में भारत इस सूचकांक में शीर्ष पर बना हुआ है।
  • आईसीटी सेवाओं के निर्यात, सरकारी ऑनलाइन सेवाओं, विज्ञान और इंजीनियरिंग के स्नातकों और अनुसंधान और विकास पर केंद्रित वैश्विक कंपनियों जैसे सूचकों में भारत का स्थान उच्च 15 देशों में शामिल हुआ है।
  • इस सूचकांक में, भारत ने तीन आधार पर अपनी रैंकिंग में सबसे अधिक वृद्धि की। संस्थानों के आधार पर इसकी रैंकिंग 2019 के 77वें पायदान से 2020 में 61वें पायदान पर आ गई। वहीं कारोबारी विशेषज्ञता के आधार पर यह 65 से 55वें पायदान पर और रचनात्मक नतीजों के आधार पर इसकी रैंकिंग 78वें पायदान से सुधरकर 64वें स्थान पर आ गई।
  • इस सूचकांक के शीर्ष पाँच देश है- स्विट्जरलैंड, स्वीडन, यूएसए, यूके और नीदरलैंड हैं।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO)

  • विश्व बौद्धिक संपदा संगठन वर्ष 1967 में गठित की गयी संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषीकृत एजेंसी है।
  • WIPO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।
  • भारत वर्ष 1975 में WIPO का सदस्य बना था।
  • हर साल 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस मनाया जाता है।

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स

(Special Frontier Force – SFF)

G.S. Paper-II (National)

चर्चा का कारण-

  • कुछ ख़बरों के अनुसार, विकास बटालियनके रूप जानी जाने वाली एक स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (Special Frontier Force – SFF) यूनिट, ने हाल ही में चीनी अतिक्रमण को रोकने के लिए लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control– LAC) पर कुछ प्रमुख पहाड़ियों पर कब्जा ज़माने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) क्या है?

SFF का गठन वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के तत्काल बाद किया गया था।

यह एक खुफिया फोर्स है, जिसमें तिब्बतियों (वर्तमान में तिब्बतियों और गोरखाओं) को भर्ती किया गया था तथा इसे शुरू में इस्टैब्लिश्मन्ट 22 (टूटू) (Establishment 22) के नाम से जाना जाता था।

  1. ‘स्पेशल फ्रंटियर फोर्स’ (SFF) सीधे कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से कंट्रोल होती है।इसका नेतृत्व एक महानिरीक्षक करता है जो मेजर जनरल के रैंक का एक सेना अधिकारी होता है।
  2. ‘स्पेशल फ्रंटियर फोर्स’ कीयूनिट्स को विकास बटालियन के रूप में जाना जाता है।
  3. स्पष्ट शब्दों में, SFF यूनिट्स सेना का हिस्सा नहीं होतीहैं, किंतु वे सेना के परिचालन नियंत्रण में कार्य करती हैं।
  4. SFF यूनिट्समें महिला सैनिक भी होती है, जो विशेष कार्यो में दक्ष होती हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

चर्चित स्थल: चुशूल

(Chushul)

  • यह भारत मेंलद्दाख के लेह जिले में स्थित एक गाँव है।
  • यहदरबुक (Durbuk) तहसील में स्थित है, जिसे ’चुशुल घाटी’ के रूप में जाना जाता है।
  • चुशूल घाटी 4,360 मीटर की ऊंचाई पररेज़ांग ला और पांगोंग त्सो झील के पास स्थित है।
  • चुशुल, भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच नियमित परामर्श और वार्ता के लिए बैठक हेतु आधिकारिक तौर पर तय किये गए पांच बिंदुओं में से एक है।
  • वर्ष1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहाँ से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था। भारतीय सेना ने चुशूल घाटी के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेज़ांग ला से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था।

 

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