Online Portal Download Mobile App English ACE +91 9415011892 / 9415011893

डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

चाबहार बंदरगाह

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह के लिए दो मोबाइल हार्बर क्रेन सौंपे हैं। भारत और ईरान के बीच मई 2016 में चाबहार बंदरगाह को विकसित करने हेतु एक द्विपक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गए थे, यह उसी अनुबंध का एक हिस्सा है।

ईरानी अधिकारियों के साथ वार्ता जारी करने के दौरान, भारत का यह कदम बंदरगाह परियोजना को आगे बढाने का संकेत देता है।

महत्व:

बिडेन प्रशासन द्वारा ईरान परमाणु समझौते में फिर से शामिल होने के संबंध में अमेरिका की नीति स्पष्ट किये जाने के बाद, भारत सरकार, आगामी महीनों में, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ ढील की उम्मीद कर रही है।

बंदरगाह परियोजना में दोबारा निवेश करने संबंधी भारत की इस योजना को इसी के संकेतक रूप में देखा जा रहा है।

चाबहार बंदरगाह की अवस्थिति:

चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी पर स्थित है तथा ईरान का एकमात्र समुद्री बंदरगाह है।

भारत के लिए चाबहार बंदरगाह का महत्व:

  1. चाबहार बंदरगाह के माध्यम से भारत, अफगानिस्तान तक माल परिवहन करने में पाकिस्तान से होकर गुजरने वाले मार्ग का उपयोग करने की बाध्यता से मुक्त हो सकता है।
  2. इसके माध्यम से भारत की ईरान तक पहुँच में वृद्धि होगी। ईरान, भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तरदक्षिण परिवहन गलियारे (International North-South Transport Corridor) के लिए प्रवेश मार्ग प्रदान करेगा, जिससे भारत, रूस ईरान, यूरोप तथा मध्य एशिया से समुद्री, रेल और सड़क मार्गों से जुड़ सकेगा।
  3. चाबहार बंदरगाह को भारत द्वारा विकसित और संचालित किए जाने से, ईरान भारत का एक सैन्य सहयोगी भी बन गया है।
  4. इसके माध्यम से भारत को अरब सागर में चीनी मौजूदगी का मुकाबला करने में भी सहायता मिलेगी। चीन, पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अरब सागर में अपनी स्थिति को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है। ग्वादर बंदरगाह, चाबहार से सड़क मार्ग से400 किमी तथा समुद्री मार्ग से 100 किमी से कम दूरी पर स्थित है।
  5. व्यापार लाभ:चाबहार बंदरगाह के कार्यशील होने से भारत में लौह अयस्क, चीनी और चावल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारत की तेल-आयात लागत में भी काफी कमी आएगी।
  6. राजनयिक दृष्टिकोण से, चाबहार बंदरगाह को मानवीय कार्यों (Humanitarian Operations)के समन्वय करने हेतु इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

राष्ट्रीय पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम

  1. भारत में राष्ट्रीय पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम, 31 जनवरी 2021 से शुरू किया गया है।
  2. आमतौर पर राष्ट्रीय प्रतिरक्षण दिवस (NID) को पल्स पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम के रूप में जाना जाता है।
  3. इस कार्यक्रम के तहत, 0 से 5 वर्ष के बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जाती हैं।
  4. पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है।
  5. पल्स पोलियो कार्यक्रम हमेशा रविवार को शुरू होता है, जिसे पोलियो रविवार के रूप में जाना जाता है।

 

नवीनतम समाचार

get in touch with the best IAS Coaching in Lucknow