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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

ग्राम निर्घनता न्यूनीकरण योजना

15h September, 2020

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ

ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) के समेकन के लिए ग्राम निर्घनता न्यूनीकरण योजना (Village Poverty Reduction Plan: VPRP) के निर्माण के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सक्षम बनाया जा रहा है.

मुख्य बिंदु-

  • वर्ष 2019-19 सेदीनदयाल अंत्योदय योजनाराष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को वार्षिक ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) प्रक्रिया में भाग लेने और ग्राम निर्धनता न्यूनीकरण योजना (VPRP) तैयार करने के लिए अधिदेशित किया गया है.
  • यह निर्धन परिवारों, जो DAY-NRLM के अंतर्गत गठित SHGs के सदस्य हैं, को भागीदारी प्रक्रिया में अपनी मांगों को उठाने और अपनी अंतिम योजना (final plan) को विचार के लिए ग्राम पंचायतों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा.
  • DAY-NRLM का उद्देश्य 10-12 करोड़ ग्रामीण परिवारों को SHGs में संगठित करके ग्रामीण निर्धनता को कम करना है.
  • ग्राम पंचायतों को GPDP के निर्माण के लिए संवैधानिक रूप से अधिदेशित किया गया है, ताकि वे अपने गाँव में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय को सुनिश्चित कर सकें.
  • VPRP को SHGs और उनके संघों द्वारा तैयार किया जाता है, जिन्हें GPDP के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता होती है.

ग्राम निर्धनता न्यूनीकरण योजना (VPRP) क्या हैं?

नागरिक योजना अभियान (PPC) दिशानिर्देशों एवं पंचायती राज मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से जारी परामर्शी ने स्वयं सहायता समूहों एवं दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत उनके संघों को वार्षिक GPDP नियोजन प्रक्रिया में भाग लेने एवं ग्राम निर्धनता न्यूनीकरण योजना (Village Poverty Reduction Plans– VPRP) तैयार करने के लिए अधिदेशित किया है.

  • VPRP स्वयं सहायता समूह (SHG) नेटवर्क एवं उनके संघों द्वारा उनकी मांगों एवं स्थानीय क्षेत्र विकास के लिए एक व्यापक मांग योजना है.
  • VPRPको प्रत्येक वर्ष अक्टूबर से दिसंबर तक ग्राम सभा बैठकों में प्रस्तुत किया जाता है.

ग्राम निर्धनता न्यूनीकरण योजना (VPRP) के घटक-

VPRP के अंतर्गत मांगों को पांच प्रमुख घटकों में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. सामाजिक समावेशन: NRLM के अंतर्गत SHG में निर्बल लोगों/परिवारों के समावेशन के लिए योजना.
  2. हकदारी:MGNREGS, SBM, NSAP, PMAY, उज्जवला, राशन कार्ड आदि जैसी विभिन्न योजनाओं के लिए मांग
  3. आजीविकाएं: कृषि, पशुपालन के विकास, उत्पादन एवं सेवा उद्यमों तथा प्लेसमेंट आदि के लिए कुशलता प्रशिक्षण के जरिये आजीविका बढोतरी के लिए विशिष्ट मांग.
  4. सार्वजनिक वस्तुएं एवं सेवाएं:विद्यमान अवसंरचना के पुनरोत्थान एवं बेहतर सेवा प्रदायगी के लिए आवश्यक मूलभूत अवसंरचना के लिए मांग.
  5. संसाधन विकास: भूमि, जल, वन एवं स्थानीय रूप से उपलब्ध अन्य संसाधनों जैसे प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा एवं विकास के लिए मांग.
  6. सामाजिक विकास: जीपीडीपी के निम्न लागत लागत रहित घटक के अंतर्गत ग्रामों के विशिष्ट सामाजिक विकास पर ध्यान देने के लिए योजनाएँ तैयार की गईं है.

दीन दयाल अन्त्योदय योजना-

  • दीन दयाल अंत्योदय योजना – जून 2011 में ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD), भारत सरकार द्वाराराष्ट्रीय आजीविका मिशन (NRLM) द्वारा शुरू की गई थी.
  • यह मिशन गाँव के गरीब लोगों को आर्थिक रूप से उन्नत होने के लिए एक मंच प्रदान करता है जिससे ग्रामीण व्यक्ति स्वयं सहायता समूह बनाकर विभिन्न प्रकार की आजीविकाएँ चलाते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.
  • इस योजना का उद्देश्य यह भी रहा है कि ऐसे समूह बैंकों से भी जुड़े.
  • इस मिशन के अंतर्गत प्रत्येक जिले में हर वर्षसरस मेला (SARAS MELA) का आयोजन किया जाता है.
  • इस मेले में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किये गये विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया जाता है. यहाँ उनकी बिक्री होती है.
  • आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजनाभी दीन दयाल अन्त्योदय योजना – NRLM के अंतर्गत आती है. इसमें राज्य सरकारें अपने पिछड़े क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक यातायात के सञ्चालन का अवसर प्रदान करती है.
  • इससे यह होगा कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में आपसी संपर्क बढ़ेगा और SHGs की आय में वृद्धि होगी.

इजराइल और बहरीन शांति समझौता

G.S. Paper-II (International)

 चर्चा में क्यों?

हाल ही में इजराइल और खाड़ी देश बहरीन अपने संबंधों को पूरी तरह से सामान्य बनाने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते करने पर सहमत हुए हैं।

पृष्ठभूमि-

  • कई दशक से अरब देश, इजराइल का बहिष्कार कर रहे थे । उनका कहना था कि वे फिलिस्तीन विवाद के निपटारे के बाद ही अपने संबंधों को इजराइल से सामान्य करेंगे।
  • किन्तु पिछले कुछ दिनों में दो अरब देश ( संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ) इजराइल के साथ शांति समझौता करने पर सहमत हो गए हैं। इजराइल और बहरीन शांति समझौता के बारे में बताया जा रहा है कि इस समझौते की एक शर्त के रूप में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक के एनेक्स सेक्शन के लिए अभी से योजना बनाने पर सहमति व्यक्त की है
  • इस समझौते को करवाने में अमेरिका की प्रमुख भूमिका रही है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, यह शांति समझौता मिडिल ईस्ट के लिए एक ऐतिहासिक समझौता है। अच्छी अर्थव्यवस्था और डायनेमिक सोसाइटी वाले इन दोनों देशों (बहरीन और इजराइल) के बीच खुली बातचीत से क्षेत्र में एक अच्छा बदलाव आएगा। स्थिरता और सुरक्षा बढ़ेगी और समृद्धि आएगी।
  • 1948 में आजादी मिलने के बाद इजराइल का किसी अरब देश के साथ यह चौथा समझौता है। बहरीन के अतिरिक्त, इजराइल ऐसा समझौता यूएई, जॉर्डन और मिस्र के साथ कर चुका है

बहरीन-

  • बहरीन, फारस की खाड़ी में स्थित एक संप्रभु द्वीपीय राष्ट्र है। इस देश में लगभग 40 प्राकृतिक द्वीप और 51 कृत्रिम द्वीप हैं।
  • बहरीन, मध्य पूर्व के फारस की खाड़ी में सऊदी अरब के पूर्व में स्थित है।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से बहरीन, मालदीव और सिंगापुर के बाद एशिया का तीसरा सबसे छोटा देश है।
  • बहरीन की राजधानी मनामा है और यह इस देश का सबसे बड़ा शहर है।
  • बहरीन का राज्य धर्म इस्लाम है। यहाँ बहुसंख्यक आबादी शिया लोगों की है।
  • बहरीन वर्ष 1971 में स्वतंत्र हुआ था और यहाँ संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हुई है।

तालिबान को लेकर भारत की बदलती रणनीति

G.S. Paper-III (International)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत ने अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच कतर (दोहा) में होने वाली अंतर-अफगान वार्ता (Intra-Afghan Talks) के शुरुआती समारोह में भाग लेकर तालिबान पर अपनी बदलती रणनीति का संकेत दिया है।

प्रमुख बिंदु-

  • अंतर-अफगान शांति वार्ता में भारत की उपस्थिति यह इंगित करती है कि भारत ने अफगानिस्तान में ज़मीनी हकीकत एवं बदलते सत्ता ढाँचे को देखते हुए अपनी रणनीति बदल दी है।
  • अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी निकटता के कारण एक अहम बढ़त दिलाई है।
  • हालाँकि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने एक पक्ष के रूप में अफगान सरकार की उपस्थिति के कारण इस समारोह में भाग लिया। जबकि भारत अभी भी तालिबान को मान्यता नहीं देता है।

भारत का मत-

  • भारत का मानना ​​है कि कोई भी शांति प्रक्रिया अफगान सरकार के नेतृत्त्व वाली, अफगान सरकार के स्वामित्त्व वाली और अफगान सरकार द्वारा नियंत्रित होनी चाहिये। अर्थात्इसमें अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिये और मानव अधिकारों एवं लोकतंत्र को बढ़ावा दिये जाने का प्रयास किया जाना चाहिये।
  • इस शांति वार्ता में अफगानिस्तान में एक लोकतांत्रिक इस्लामी गणराज्य की स्थापना में हुई प्रगति को संरक्षित करने की भी आवश्यकता है।
  • अल्पसंख्यकों, महिलाओं एवं समाज के कमज़ोर वर्गों के हितों को संरक्षित किया जाना चाहिये और अफगानिस्तान एवं उसके पड़ोस में हिंसा के मुद्दे को प्रभावी ढंग से संबोधित किया जाना चाहिये।
  • भारतीय हितों जिसमें अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास एवं भारतीय कंपनियाँ व श्रमिक शामिल हैं, को भी संरक्षित किया जाना चाहिये।
  • भारत एक‘स्वतंत्र एवं संप्रभु’ अफगानिस्तान का समर्थन करता है। ‘स्वतंत्र एवं संप्रभु’ शब्दों का उपयोग यह स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान एवं आईएसआई द्वारा अफगानिस्तान को नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिये।

पृष्ठभूमि-

  • उल्लेखनीय है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने तालिबान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया जिसने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी का मार्ग प्रशस्त किया और अफगानिस्तान में 18 वर्ष के युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक मार्ग प्रशस्त किया।
  • इस शांति समझौते से दो प्रक्रियाओं के शुरू होने की उम्मीद बनी थी-
  1. अमेरिकी सैनिकों की चरणबद्ध वापसी
  2. अंतर-अफगान वार्ता
  • यह समझौता अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया के लिये व्यापक और स्थायी युद्ध विराम तथा भविष्य के लिये एक राजनीतिक रोडमैप देने का एक बुनियादी कदम था।

अफगानिस्तान में भारत के हित-

  • अफगानिस्तान में स्थिरता बनाए रखने में भारत की बड़ी हिस्सेदारी है। भारत द्वारा अफगानिस्तान के विकास में काफी संसाधन लगाए गए हैं। जैसे-अफगान संसद (Afghan Parliament), ज़रीन-डेलारम राजमार्ग (Zaranj-Delaram Highway), अफगानिस्तान-भारत मैत्री बांध (सलमा बांध) Afghanistan-India Friendship Dam (Salma Dam) इत्यादि का निर्माण अफगानिस्तान में भारत के सहयोग से किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है।

उभरते मुद्दे-

  • भारत, तालिबान के पाकिस्तान की आईएसआई के साथ संबंध और अफगानिस्तान में भारत के हितों को लक्षित करने वालेहक्कानी नेटवर्क के प्रयासों से चिंतित है।
  • पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भारत की किसी भी सुरक्षा भूमिका का विरोध करता है और भारत की मौजूदगी को अपने हितों के लिये हानिकारक मानता है।
  • तालिबान काजैश-ए-मुहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तोइबा (LeT) से भी संबंध है जो भारत के खिलाफ विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
  • भारत ने अभी भी तालिबान को मान्यता नहीं दी है। हालाँकि यदि भारत, तालिबान के साथ प्रत्यक्ष बातचीत करने के विकल्प पर विचार करता है तो यह केवल मान्यता प्राप्त सरकारों के साथ कार्य करने की अपनी सुसंगत नीति से अलग कदम होगा।

आगे की राह-

  • भारत को अफगानिस्तान के भविष्य के लिये केंद्रित सभी शक्तियों से निपटने के लिये अपने निर्णयों का पुनर्मूल्यांकन करने और अपने दृष्टिकोण में अधिक सर्वव्यापी होने की आवश्यकता है।
  • बदलती राजनीतिक एवं सुरक्षा स्थिति के लिये भारत को अपने हितों को ध्यान में रखते हुए तालिबान के साथ बातचीत शुरू करने के लिये खुलेपन की नीति को अपनाना चाहिये।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

व्हाइट ग्रब

White grub (Holotrichia serrata insect larvae)

  • व्हाइट ग्रब (श्वेत गिडार) एक कृषि कीट है, जो गन्ने की फसल को क्षति पहुँचाता है.
  • यह गन्ने की जड़ों का भक्षण करता है जिसके चलते पौधे के लिए नमी और पोषक तत्त्वों की आपूर्ति बाधित हो जाती है.
  • इससे पत्तियों में पीलापन आ जाता है और वे गिरने लगती हैं.
  • शुरुआत में इन कीटों ने गन्ने एवं मूंगफली की फसलों को क्षति पहुँचाई थी, पर अब ये कीट सोयाबीन, कपास और हल्दी की फसलों को भी क्षति पहुँचा रहे हैं.
  • हालांकि इसके संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए रासायनिक कीटनाशक उपलब्ध है.

 

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