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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

गोधन न्याय योजना

(G.S. Paper-II)

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पशुपालन को व्यावसायिक रूप से लाभदायक बनाने, मवेशियों द्वारा खुले में चराई को रोकने, सड़कों पर आवारा पशुओं की समस्या को हल करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य में ‘गोधन न्याय योजना’ शुरू करने की घोषणा की है.

पृष्ठभूमि-

  • भारत के सभी राज्यों समेत छत्तीसगढ़ में खुले में पशुओं के चरने की परंपरा रही है, जो मवेशियों     और फसलों दोनों को ही क्षति पहुँचाती है.
  • शहरों की सड़कों पर आवारा जानवरों के चलते सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती हैं.
  • प्रायः जानवरों से दूध निकालने के पश्चात् उन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है, जो अन्य विभिन्न     समस्याओं का कारण बनता है.

गोधन न्याय योजना के विषय में-

  • गोधन न्याय योजना के अंतर्गत पशु पालकों को लाभ पहुँचाने के राज्य सरकार किसानों से गाय     का गोबर खरीदेगी. गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम     के लिए किसानों से गाय का गोबर खरीद कर उससे वर्मी कंपोस्ट खाद बनाएगी. इसके बाद प्राप्त     वर्मी कंपोस्ट खाद को बाद में किसानों, वन विभाग और उद्यानिकी विभाग को प्रदान किया     जाएगा.
  • गोधन न्याय योजना का प्रारम्भ 21 जुलाई को हरेली त्योहार के दिन होगा. विदित हो कि     छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा जो गोबर की खरीद करेगा.
  • इस योजना के अंतर्गत गोबर की खरीदी निर्धारित दर पर होगी वहीं सहकारी समितियों से वर्मी     कम्पोस्ट की‍ बिक्री होगी. गोबर के क्रय की दर तय करने हेतु पाँच सदस्यीय मंत्री मण्डल की उप-    समिति का गठन किया गया.

गोधन न्याय योजना के लाभ-

  • गोधन न्याय योजना से गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर में वृद्धि होगी.
  • इस योजना से जैविक कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा.
  • पशुओं के अतिचारण से मृदा का संरक्षण किया जाना संभव हो पायेगा.

इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा बल्कि इससे जुड़े अन्य विभिन्न     समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ग्लोब्बा एंडरसोनी

लगभग 136 वर्षों के अंतराल के बाद पुणे एवं केरल के शोधकर्त्ताओं की टीम ने तीस्ता नदी घाटी क्षेत्र के पास सिक्किम हिमालय में ग्लोब्बा एंडरसोनी (Globba Andersonii) नामक एक दुर्लभ व गंभीर रूप से लुप्तप्राय पौधे की प्रजाति को पुनः खोजा है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस पौधे को आमतौर पर ‘डांसिंग लेडीज़’ (Dancing Ladies)’ या ‘स्वान फ्लावर्स’ (Swan     Flowers) के रूप में जाना जाता है।
  • इस पौधे को इससे पहले वर्ष 1875 में देखा गया था। इसके बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था।
  • इस प्रजाति के संग्रह के शुरुआती रिकॉर्ड वर्ष 1862-70 की अवधि के बीच के थे जब इसे स्कॉटिश     वनस्पतिशास्त्री थॉमस एंडरसन (Thomas Anderson) ने सिक्किम एवं दार्जिलिंग से एकत्र किया     था। इसके बाद वर्ष 1875 में ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री सर जॉर्ज किंग (Sir George King) ने     सिक्किम हिमालय से इसे एकत्र किया था।

ग्लोब्बा एंडरसोनी (Globba Andersonii) की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

  • सफेद फूल
  • गैर-अनुबंध परागकोष (एक पुंकेसर का भाग जिसमें पराग होता है)
  • पीला अधर
  • इस प्रजाति को ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) और ‘संकीर्ण रूप से स्थानिक’     (Narrowly Endemic) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह प्रजाति मुख्य रूप से तीस्ता नदी घाटी (Teesta River Valley) क्षेत्र तक ही सीमित है जिसमें     सिक्किम हिमालय एवं दार्जिलिंग पर्वत श्रृंखला शामिल हैं।
  • यह पौधा आमतौर पर सदाबहार वनों के उपांत में चट्टानी ढलानों पर लिथोफाइट (चट्टान या पत्थर     पर उगने वाला पौधा) के रूप में घने क्षेत्रों में उगता है।

जी4 वायरस

चीन में वैज्ञानिकों द्वारा एक नए वायरस जी4 (G4) की खोज की गई है जो वर्ष 2009 के स्वाइन फ्लू से काफी मिलता-जुलता है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस जी4 वायरस का पूरा नाम जी4 ईए एच1 एन1 (G4 EA H1N1) है। इसमें मनुष्यों में महामारी     फैलाने की क्षमता है।
  • चीन में सुअरों के लिये निगरानी कार्यक्रम के दौरान वहाँ के नेशनल इन्फ्लुएंज़ा सेंटर (National     Influenza Centre) सहित कई संस्थानों में वैज्ञानिकों द्वारा G4 वायरस का पता लगाया गया था।
  • यह निगरानी कार्यक्रम वर्ष 2011-18 के बीच चीन के 10 प्रांतों में सूअरों के 30,000 से अधिक स्वाब     (Swab) नमूनों को एकत्र करके शुरू किया गया था।
  • इन नमूनों में से शोधकर्त्ताओं ने 179 स्वाइन फ्लू वायरस को अलग किया था जिनमें से अधिकांश     नए पहचाने गए जी4 वायरस के थे।
  • परीक्षणों में पाया गया कि यह वायरस ज़ूनोटिक संक्रमण (पशु से मानव में) उत्पन्न कर सकता है     किंतु अभी तक वायरस के व्यक्ति-से-व्यक्ति में संचरण के कोई सबूत नहीं हैं।

वैज्ञानिकों का मानना हैं कि नया G4 वायरस, H1N1 वायरस का ही एक परंपरागत रूप है जो वर्ष     2009 की स्वाइन फ्लू महामारी के लिये ज़िम्मेदार था।

 

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