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Daily Current Affairs – 2020

Topic: For Prelims and Mains

खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि

15th July, 2020

G.S. Paper-III

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics & Programme Implementation- MoSPI) द्वारा जारी किये गए नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति’ (Retail Inflation) वृद्धि दर जून के महीने में 6.09% के स्तर पर पहुँच गई है।

प्रमुख बिंदु-

  • भारत में खुदरा मुद्रास्फीति दर को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index-CPI) के आधार पर मापा जाता है।
    • यह खरीदार के दृष्टिकोण से मूल्य परिवर्तन की माप करता है।
    • यह चयनित वस्तुओं एवं सेवाओं के खुदरा मूल्यों के स्तर में समय के साथ बदलाव को मापता है,                     जिस पर उपभोक्ता अपनी आय खर्च करते हैं।
    • CPI का आधार वर्ष 2012 है।
  • सरकार द्वारा कोरोना महामारी की रोकथाम के चलते देशव्यापी ‘लॉकडाउन’ के कारण अप्रैल और मई माह के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दर के आंकड़ें जारी      नहीं किये गए हैं।
  • हालांकि, अप्रैल में CPI आँकड़ों को मार्च महीने के आँकड़ों के आधार पर संशोधित कर84% कर दिया गया था।
  • मई माह में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (Consumer Food Price Index-CFPI)का स्तर 20 % था।
  • सरकार द्वाराभारतीय रिज़र्व बैंक को मुद्रास्फीति (Inflation) की दर को 4% (2% ऊपर या नीचे)     पर रखने का निश्चित किया गया है।
  • CPI के महँगाई दर के आँकड़े रिज़र्व बैंक के मध्यम अवधि लक्ष्य 4% के ऊपर अर्थात खुदरा मुद्रास्फीति दर भारतीय रिज़र्व बैंक के मार्जिन से 6% अधिक हो गई है।

खुदरा मुद्रास्फीति दर-

  • एक निश्चित अवधि में चुनिंदा वस्तुओं या सेवाओं के मूल्य में वृद्धि या गिरावट दर्ज़ की जाती है तो उसे मुद्रास्फीति कहते हैं।
  • मुद्रास्फीति को जब प्रतिशत में व्यक्त करते हैं तो यह महंगाई दर या खुदरा मुद्रास्फीति दर कहलाती है।
  • सरल शब्दों में कहें तो यह कीमतों में उतार-चढ़ाव की रफ्तार को दर्शाती है।

खुदरा मुद्रास्फीति दर में वृद्धि के कारण-

  • खाद्यान पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण खुदरा मुद्रास्फीति दर में वृद्धि देखी गई है ।
  • मुख्य रूप से दालों तथा अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई है जो जून में68 प्रतिशत बढ गई है।
  • मांस और मछली उत्पादों पर22 %की वृद्धि, तेल एवं वसा उत्पादों पर 12.27 %की वृद्धि तथा मसालों की कीमतों पर 11.74 % की वृद्धि देखी गई है।

संभावित प्रयास-

अर्थव्यवस्था में मुद्रा के प्रवाह को कम करके, उत्पादन में वृद्धि दर को बढ़कर, उत्पादों का आयात करके तथा उत्पादन तकनीक में सुधार कर उत्पादों की लागत कम करके कुछ ऐसे प्रयास हैं जिनके माध्यम से खुदरा मुद्रास्फीति दर को नियंत्रित किया जा सकता है ।

चाबहार रेल परियोजना

G.S. Paper-II

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ईरान द्वारा चाबहार रेल परियोजना’ (Chabahar Rail Project) से भारत को अलग कर दिया गया है। इस परियोजना को ईरान में भारत के सहयोग से पूरा किया जाना था।

प्रमुख बिंदु-

  • ईरान द्वारा इस परियोजना से भारत को बाहर करने की वजह भारत द्वारा समय पर फंडिंग का न होना बताया गया है।
  • ईरान द्वारा कहा गया है कि ईरान रेलवे अब बिना भारत की मदद से इस परियोजना को पूरा करेगा इसके लिये ईरान के ‘नेशनल डवलपमेंट फंड’ से 40 करोड़ डॉलर की धनराशि का प्रयोग        परियोजना को पूर्ण करने के लिये ईरानी सरकार द्वारा किया जाएगा।
  • इससे पहले इस परियोजना को भारत की सरकारी रेलवे कंपनी इरकान (IRCON) पूरा करने वाली थी।
  • यह रेल परियोजना चाबहार पोर्ट (Chabahar port) से ज़हेदान (Zahedan) के बीच तक प्रस्तावित है जिसे बाद में अफगानिस्‍तान सीमा तक बढ़ाया जाना है।
  • इस परियोजना को मार्च 2022 तक पूर्ण किया जाना है।
  • हाल के समय में ईरान सरकार द्वारा 628 किलोमीटर चाबहार-ज़ाहेदान लाइन के लिये ट्रैक/पटरी बिछाने की प्रक्रिया का उद्घाटन किया गया है , जिसे अफगानिस्तान में सीमा पार ज़ारंज     (Zaranj) तक बढ़ाया जाएगा।

ईरान-अफगानिस्तान-भारत त्रिपक्षीय समझौता-

  • वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान भारत एवं ईरान के मध्य ‘चाबहार समझौते’ (Chabahar agreement) पर हस्ताक्षर किये गए।
  • इस समझौते के तहत ईरानी रेलवे तथा इंडियन रेलवेज़ कंस्ट्रक्शन लि. (इरकॉन) द्वारा चाबहार- ज़ाहेदान रेलवे के निर्माण के लिये भारत, ईरान एवं अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता      संपन्न हुआ।
  • इस रेल परियोजना में भारत की रेलवे कंपनी इरकान द्वारा लगभग6 अरब डॉलर का निवेश किया जाना था।
  • भारत द्वारा इस परियोजना में सहयोग अफगानिस्‍तान और अन्‍य मध्‍य एशियाई देशों तक भारत के लिये एक वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराने की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखकर किया जा रहा    था।

भारत पर असर-

  • ईरान द्वारा यह कदम उस समय उठाया गया है जब भारत और चीन के बीच सैन्य एवं आर्थिक तनाव जारी है।
  • ईरान द्वारा भारत को रेल प्रोजेक्ट से बाहर करने के साथ ही ईरान द्वारा चीन के साथ 25 वर्षों के लिये आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी के एक बड़े समझौते पर सहमति बनी है।
  • ईरान एवं चीन के इस 25 वर्षों के समझौते के तहत, चीन अगले 25 वर्षों में ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करेगा तो दूसरी तरफ ईरान द्वारा सस्ती दरों पर तेल एवं गैस की आपूर्ति चीन    को की जाएगी।
  • ईरान के इस कदम से भारत के सामरिक एवं आर्थिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि पश्चिम एशिया में चीन की उपस्थित हमेशा ही विवादों का हिस्सा रही है।
  • परंतु यह ज़रूरी भी नहीं है क्योकि ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar port) के निर्माण में भारत की खासी भूमिका रही है, जिसका अपना सामरिक एवं आर्थिक महत्त्व भारत के पक्ष में है।

आगे की राह-

निकट भविष्य में भारत ईरान के इस कदम को प्रतिसंतुलित करने तथा अपने आर्थिक एवं सामरिक हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ रणनीतिक एवं सामरिक कदम भी उठा सकता है। जिसके चलते भारत द्वारा पश्चिम एशिया के अन्य देश जैसे इराक, सऊदी अरब, इज़रायल इत्यादि से नज़दीकी देखने को मिल सकती है।

भारत और यूरोपीय संघ ने असैन्य परमाणु करार को अंतिम रूप दिया

G.S. Paper-II

  • भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने 15 जुलाई 2020 को होने वाले डिजिटल शिखर सम्मेलन से पहले असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग के लिए एक मसौदा समझौते को अंतिम रूप दिया है. भारत और यूरोपीय संघ ने 13 साल से हो रही बातचीत के बाद इसे अंतिम रूप दिया है. दोनों पक्षों ने उम्मीद जताई कि शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष संबंधों को व्यापक बनाने, समुद्री सुरक्षा पर अलग से बातचीत शुरू करने और व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने के अतिरिक्त सीबीआई और यूरोपोल के बीच प्रभावी सहयोग के लिए एक प्रक्रिया की शुरुआत की खातिर पांच साल का रोडमैप जारी करेंगे.

यूरोपीय संघ भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र-

  • यूरोपीय संघ भारत के लिए रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यूरोपीय संघ 2018 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था. वित्त वर्ष 2018-19 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार6 अरब अमेरिकी डॉलर था जिसमें निर्यात 57.67 अरब अमेरिकी डॉलर का था जबकि आयात 58.42 अरब अमेरिकी डॉलर का था.

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता-

  • लंबे समय से लंबित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बारे में अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच के मौजूदा व्यापारिक संबंध इसकी क्षमता से कम हैं और संगठन की अपेक्षा से काफी कम है. लंबित समझौते को यूरोपीय संघ-भारत स्थित व्यापार एवं निवेश समझौते (बीटीआईए) के रूप में जाना जाता है.

वर्ष 2007 में शुरू हुई बातचीत: पृष्ठभूमि-

  • प्रस्तावित समझौते के लिए साल 2007 में शुरू हुयी बातचीत में कई बाधाएं आयीं क्योंकि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद उभर कर सामने आए. ईयू ऑटोमोबाइल में महत्वपूर्ण शुल्क कटौती के अतिरिक्त शराब, स्पिरिट, डेयरी उत्पादों पर करों में कटौती और मजबूत बौद्धिक संपदा व्यवस्था चाहता है. दूसरी ओर, भारत चाहता है कि यूरोपीय संघ उसे डेटा सुरक्षित राष्ट्र का दर्जा दे. भारत उन देशों में से है जिन्हें यूरोपीय संघ सुरक्षित डेटा वाला देश नहीं मानता है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

अटल नवाचार मिशन

चर्चा में क्यों?

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) ने देश भर में स्कूली छात्रों के लिए एटीएल ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल लॉन्च किया. इसे भारतीय स्टार्टअप प्लेज़्मो के सहयोग से लॉन्च किया गया है. इसका उद्देश्य AIM के प्रमुख कार्यक्रम अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) के तहत आने वाले समय में स्कूली छात्रों के कौशल में सुधार करना है और उन्हें ऐप उपयोगकर्ता से ऐप का निर्माण करने वाला बनाना है. एटीएल ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल एक ऑनलाइन कोर्स है जो पूरी तरह निःशुल्क है.

अटल नवाचार मिशन क्या है?

  • यह मिशन भारत सरकार की प्रमुख पहल है जिसका प्रयोजन देश में नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना है.
  • इस मिशन का कार्य देश के अन्दर नवाचार के वातावरण पर दृष्टि रखने के लिए एक बहुआयामी अवसरंचना का निर्माण करना है जिससे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार पारिस्थितिकी तन्त्र में क्रान्ति लाई जा सके.

अटल नवाचार मिशन के दो प्रमुख कार्य-

स्वरोजगार और प्रतिभा के उपयोग के द्वारा उद्यमिता को बढ़ावा देना. इसके लिए नवाचार करने वाले को सफल उद्यमी बनाने के निमित्त सहायता और मन्त्रणा दोनों दी जायेगी. इसका उद्देश्य विश्व-स्तरीय नवाचार नाभिक केन्द्रों की स्थापना करना है. इसके अतिरिक्त इसका लक्ष्य ग्रैंड चैलेन्जों, स्टार्ट-अप व्यवसायों और अन्य स्व-रोजगार गतिविधियों के माध्यम से मुख्य रूप से तकनीक पर आधारित क्षेत्रों के लिए एक मंच प्रदान करना है.

प्रभाव-

  • इस मिशन ने कई बड़े-बड़े और प्रगतिशील पहलें शुरू की हैं, जैसे – अटल टिकरिंग लैब (ATL) और अटल इनक्यूबेशन सेंटर (AIC).
  • अटल नवाचार मिशन की तकनीकी सहायता से भारत सरकार के कई मंत्रालयों और विभागों ने नवाचार से सम्बद्ध गतिविधियाँ आरम्भ की हैं.
  • अटल टिकरिंग लैब कार्यक्रम के अंतर्गत 2020 तक 10,000 से अधिक विद्यालय ऐसी प्रयोगशालाएँ स्थापित करने जा रहे हैं.
  • देश-भर में 100 से अधिक अटल इनक्यूबेशन सेंटर भी बन रहे हैं जिनके माध्यम से पहले पाँच वर्षों में कम से कम 50-60 स्टार्ट-अपों को सहारा दिया जाएगा.
  • अपने आविष्कारों को उत्पाद में बदलने के लिए 100 से अधिक नवाचारियों को इस मिशन के अंतर्गत कुछ न कुछ सहयोग मिलने की सम्भावना है.
  • प्रत्येक चौथे वर्ष एक-एक इनक्यूबेटर तकनीकी नवाचार पर आधारित 50-60 स्टार्ट-अपों को सम्पोषित करेगा.
  • नवाचार पर आधारित नए-नए स्टार्ट-अप खुलने से रोजगार में व्यापक वृद्धि होने की संभावना है.

 

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