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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

खनन क्षेत्र में कार्यरत बाल श्रमिक

समाचार में क्यों?       हाल ही राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights-NCPCR) द्वारा किये गए सर्वे के अनुसार अभ्रक खनन क्षेत्र में 6-14 वर्ष की आयु वर्ग के 5000 से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • सर्वे के अनुसार, झारखंड और बिहार के अभ्रक खनन क्षेत्र (Mica Mining Areas) में कार्यरत 6-14 वर्ष की आयु के 5000 से अधिक बच्चे शिक्षा का त्याग कर चुके हैं। ये बच्चे पारिवारिक आय में सहयोग करने के लिये खनन क्षेत्र में मजदूरी का कार्य कर रहे हैं।
  • यह सर्वे बिहार और झारखंड में स्थित अभ्रक खनन क्षेत्र में कार्यरत बच्चों की शिक्षा और कल्याण को आधार बना कर किया गया।
  • बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने के कारणों में बच्चों को शिक्षित करने के प्रति अभिभावकों की कम रूचि और अभ्रक के स्क्रैप को इकट्ठा करने के कार्य में बच्चों की संलग्नता शामिल है।
  • इस क्षेत्र में अभ्रक के कबाड़ का एकत्रीकरण और बिक्री अनेक परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है। इसलिये कई परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने के स्थान पर उनसे कबाड़ एकत्र करने के कार्य को प्राथमिकता देते हैं।
  • NCPCR ने इन बच्चों में कुपोषण (Malnourishment) की समस्या की भी पहचान की हैI

सर्वे का उद्देश्य:

  • सर्वे का उद्देश्य इस क्षेत्र के बच्चों में शिक्षा की स्थिति, स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या, अभ्रक के स्क्रैप को एकत्र करने के कार्य में संलग्नता, व्यावसायिक प्रशिक्षण तक किशोरों की पहुँच और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की भूमिका की संभावनाओं का पता लगाना था।

NCPCR द्वारा दिये गए सुझाव:

  • अभ्रक खनन और उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला को बाल श्रम (Child Labour) से मुक्त बनाया जाना चाहिये।
  • अभ्रक खनन प्रक्रिया की किसी भी गतिविधि और स्क्रैप इकट्ठा करने के कार्य में बच्चों को नियोजित नहीं किया जाना चाहिये।
  • गैर-सरकारी संगठनों और विकास एजेंसियों को स्थानीय एवं जिला प्रशासन तथा उद्योगों के साथ मिलकर बाल श्रम से मुक्त अभ्रक खनन की आपूर्ति श्रृंखला बनाने की रणनीति तैयार करनी चाहिये।
  • बच्चों द्वारा एकत्रित अभ्रक स्क्रैप के खरीदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
  • झारखंड और बिहार के अभ्रक खनन क्षेत्रों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिये प्रशासन द्वारा एक विशेष अभियान चलाया जाना चाहिये।

 

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Topic:  For prelims and mains:

परिसीमन आयोग:

समाचार में क्यों?        जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर राज्य को संघीय क्षेत्र बनाने तथा लद्दाख एक संघीय क्षेत्र का स्वरूप देने के कारण चुनाव क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन करना अनिवार्य हो गया है। यद्यपि सरकार ने इसके लिए अभी अधिसूचना नहीं निकाली है परन्तु निर्वाचन आयोग ने इस प्रश्न पर आंतरिक विचार-विमर्श किया है।

जम्मू-कश्मीर संविधान में परिसीमन विषयक प्रावधान:

  • जम्मू-कश्मीर में लोक सभा की सीटों से सम्बंधित परिसीमन भारतीय संविधान के अंतर्गत हुआ करता था। परन्तु वहाँ के विधान सभा सीटों के बारे में निर्णय जम्मू-कश्मीर संविधान तथा जम्मू-कश्मीर जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1957 के अनुसार किया जाता था।
  • जहाँ तक लोक सभा सीटों की बात है, 2002 में नियुक्त अंतिम परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) को जम्मू-कश्मीर का काम नहीं सौंपा गया था। इसका अर्थ यह हुआ कि उस राज्य में लोकसभा की सीटों का परिसीमन 1971 की जनगणना पर आधारित था।
  • जहाँ तक विधान सभा सीटों का प्रश्न है, जम्मू-कश्मीर के संविधान में एक अलग परिसीमन आयोग की अभिकल्पना है। परन्तु व्यवहार में इस राज्य की विधान सभाओं के लिए चुनाव क्षेत्रों के लिए केन्द्रीय परिसीमन आयोग की अनुशंसाओं को 1963 और 1973 में अपनाया गया था।
  • 1991 में जम्मू-कश्मीर में जनगणना नहीं हुई थी और वहाँ नए परिसीमन आयोग के गठन पर विधान सभा ने 2026 तक रोक लगा दी थी और इस रोक को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सही घोषित किया गया था।
परिसीमन आवश्यक क्यों?

Ø  जनसंख्या में परिवर्तन को देखते हुए समय-समय पर लोक सभा और विधान सभा की सीटों के लिए चुनाव क्षेत्र का परिसीमन नए सिरे से करने का प्रावधान है। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप इन सदनों की सदस्य संख्या में भी बदलाव होता है।

Ø  परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के अलग-अलग भागों को समान प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना होता है। इसका एक उद्देश्य यह भी होता है कि चुनाव क्षेत्रों के लिए भौगोलिक क्षेत्रों को इस प्रकार न्यायपूर्ण ढंग से बाँटा जाए जिससे किसी एक राजनीतिक दल को अन्य दलों पर बढ़त न प्राप्त हो।

 

परिसीमन आयोग और उसके कार्य:

  • संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार संसद प्रत्येक जनगणना के पश्चात् एक सीमाकंन अधिनियम पारित करता है और उसके आधार पर केंद्र सरकार एक परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन करती है।
  • इस आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक सेवा-निवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त सदस्य होते हैं।
  • इस आयोग का काम चुनाव क्षेत्रों की संख्या और सीमाओं का इस प्रकार निर्धारण करना है कि यथासम्भव सभी चुनाव क्षेत्रों की जनसंख्या एक जैसी हो।
  • आयोग का यह भी काम है कि वह उन सीटों की पहचान करे जो अजा/अजजा के लिए आरक्षित होंगे. विदित हो कि अजा/अजजा के लिए आरक्षण तब होता है जब सम्बंधित चुनाव-क्षेत्र में उनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है।
  • सीटों की संख्या और आकार के बारे में निर्णय नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जाता है।
  • यदि आयोग के सदस्यों में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो बहुत के मत को स्वीकार किया जाता है।
  • संविधान के अनुसार, परिसीमन आयोग का कोई भी आदेश अंतिम होता है और इसको किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
  • प्रारम्भ में आयोग भारतीय राज्य पत्र में अपने प्रस्तावों का प्रारूप प्रकाशित करता है और पुनः उसके विषय में जनता के बीच जाकर सुनवाई करते हुए आपत्ति, सुझाव आदि लेता है। तत्पश्चात् अंतिम आदेश भारतीय राजपत्र और राज्यों के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाता है।

चुनाव क्षेत्र परिसीमन का काम कब-कब हुआ है?

  • चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का काम सबसे पहले 1950-51 में हुआ था I संविधान में उस समय यह निर्दिष्ट नहीं हुआ था कि यह काम कौन करेगा I इसलिए उस समय यह काम राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के सहयोग से किया था।
  • संविधान के निर्देशानुसार चुनाव क्षेत्रों का मानचित्र प्रत्येक जनगणना के उपरान्त फिर से बनाना आवश्यक है। अतः 1951 की जनगणना के पश्चात् 1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम पारित हुआ। तब से लेकर 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन का काम हुआ।
  • उल्लेखनीय है कि 1976 में आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी ने संविधान में संशोधन करते हुए परिसीमन का कार्य 2001 तक रोक दिया था। इसके पीछे यह तर्क दिया था गया कि दक्षिण के राज्यों को शिकायत थी कि वे परिवार नियोजन के मोर्चे पर अच्छा काम कर रहे हैं और जनसंख्या को नियंत्रण करने में सहयोग कर रहे हैं जिसका फल उन्हें यह मिल रहा है कि उनके चुनाव क्षेत्रों की संख्या उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में कम होती है। अतः1981 और 1991 की जनगणनाओं के बाद परिसीमन का काम नहीं हुआ।
  • 2001 की जनगणना के पश्चात् परिसीमन पर लगी हुई इस रोक को हट जाना चाहिए था। परन्तु फिर से एक संशोधन लाया गया और इस रोक को इस आधार पर 2026 तक बढ़ा दिया कि तब तक पूरे भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर एक जैसी हो जायेगी। इसी कारण 2001 की जनगणना के आधार पर किये गये परिसीमन कार्य (जुलाई 2002 – मई 31, 2018) में कोई खास काम नहीं हुआ था। केवल लोकसभा और विधान सभाओं की वर्तमान चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को थोड़ा-बहुत इधर-उधर किया गया था और आरक्षित सीटों की संख्या में बदलाव लाया गया था।

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प्रीलिम्स के लिए तथ्य:

  • बहरीन टेम्पल प्रोजेक्ट:
  • हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने बहरीन में 200 साल पुराने श्रीकृष्ण मंदिर हेतु 4.2 मिलियन डॉलर की पुनर्विकास परियोजना का शुभारंभ किया।
  • प्रमुख खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र के सबसे पुराने मंदिर श्रीनाथजी (मनामा) के दर्शन किये और RuPay कार्ड लॉन्च करने के बाद इसी से प्रसाद भी खरीदा।
  • मनामा में श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य इस साल के अंत में शुरू होगा।
  • मंदिर के पुनर्विकास में इसकी 200 साल पुरानी विरासत को उजागर किया जाएगा और नए प्रतिष्ठित परिसर में गर्भगृह और प्रार्थना हॉल होंगे।
  • पारंपरिक हिंदू विवाह समारोहों और अन्य अनुष्ठानों के लिये भी यहाँ सुविधाएँ होंगी, जिसका उद्देश्य बहरीन को शादी के गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना तथा पर्यटन को विकसित करना है।

 

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