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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

क्वाड समूह के नेताओं का ‘खुले एवं मुक्त’ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए समर्थन

G.S. Paper-II

संदर्भ:

हाल ही में, क्वाड समूह के नेताओं का पहला शिखर सम्मेलन वर्चुअल प्रारूप में आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मलेन में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भाग लिया।

सम्मेलन के परिणाम:

  1. क्वाड समूह के सदस्य देशों द्वारा वैक्सीन की ‘न्यायसंगत’ पहुंच सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की गई।
  2. इन नेताओं ने कहा कि, भारत-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific region) के लिए मानवाधिकारों के अनुरूप प्रशासित किया जाना चाहिए।
  3. नेताओं ने चीन द्वारा पेश की जा रही चुनौतियों पर भी चर्चा की।

‘क्वाड समूह’ क्या है?

यह, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देशों का एक चतुष्पक्षीय संगठन है।

  1. इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी हित साझा करते हैं।

क्वाड समूह की उत्पत्ति:

क्वाड समूह की उत्पत्ति के सूत्र, वर्ष 2004 में आयी सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए चारो देशों द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों में खोजे जा सकते हैं।

  1. इसके बाद, इन चारो देशों के मध्य वर्ष 2007 में हुए आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पहली बार बैठक हुई।
  2. इसका उद्देश्य, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, चारो देशों के मध्य समुद्री सहयोग बढ़ाना था।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

‘क्वाड समूह’ के प्रति चीन का दृष्टिकोण:

  1. यह एक सामान्य समझ है, कि क्वाड किसी भी देश के खिलाफ सैन्य रूप से मुकबला नहीं करेगा। फिर भी, चीन के रणनीतिक समुदाय द्वारा, इसे एक उभरता हुआ “एशियाई नाटो” ब्रांड बताया जाता है।
  2. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की विश्व में स्थिति

  1. विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत, रूस को पीछे छोड़ते हुए विश्व का चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है।
  2. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, लगभग 18 महीने के आयात हेतु पर्याप्त है, और इसमें दुर्लभ चालू-खाता अधिशेष, स्थानीय शेयर बाजार और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि से जबरदस्त उछाल आया है।
  3. भारत की विदेशी मुद्रा होल्डिंग्स 5 मार्च को 3 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 580.3 अरब डॉलर पर पहुंच गई।
  4. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सूची में विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में चीन शीर्ष स्थान पर है, इसके बाद जापान और स्विट्जरलैंड का स्थान है।

 

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