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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

क्वांटम सुप्रीमेसी

G.S. Paper-III

संदर्भ:

चीन ने, गूगल के प्रोटोटाइप से 10 बिलियन गुना तेज कंप्यूटर का निर्माण कर क्वांटम सुप्रीमेसी (Quantum Supremacy) हासिल करने का दावा किया है।

पिछले वर्ष गूगल ने विश्व का सबसे उन्नत सुपर कंप्यूटर बनाने की घोषणा करते हुए कहा था, कि यह किसी 200 सेकंड में कर सकता है, जिसे सबसे तेज सुपरकंप्यूटर को हल करने में 10,000 वर्ष का समय लगेगा।

‘क्वांटम सुप्रीमेसी’ क्या है?

‘क्वांटम सुप्रीमेसी’ शब्द को सर्वप्रथम कैलिफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर जॉन प्रेस्किल द्वारा वर्ष 2012 में प्रस्तावित किया था।

  1. यह उस स्थिति को व्यक्त करता है, जिसमे क्वांटम कंप्यूटर किसी भी ऐसी गणना कर सकते है जिसे पारंपरिक कंप्यूटर द्वारा नहीं किया जा सकता है।
  2. सुपरपोजिशन (Superposition) और इनटैंगलमेंट (Entanglement), क्वांटम कंप्यूटर्स के लिए अत्याधिक सूचना को अत्याधिक तीव्रता से संशाधित करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

मानक कंप्यूटर और क्वांटम कंप्यूटर के मध्य अंतर-

  1. पारंपरिक कंप्यूटर, गणना करने के लिए बिट्स (Bits) का प्रयोग करते हैं, जिसमे 0 तथा 1 क्रमशः ‘ऑफ़’ और ‘ऑन’ को व्यक्त करते हैं। यह कंप्यूटर बाइनरी भाषा कहे जाने वाले ‘जीरो’ तथा ‘वन’ के संयोजनों के माध्यम से सूचना संसाधित करने के लिए ट्रांजिस्टर का उपयोग करते हैं। इसमें जितने अधिक ट्रांजिस्टर होते है उतनी अधिक प्रसंस्करण क्षमता होती है।
  2. क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम यांत्रिकी के नियमों का उपयोग करते है। यहाँ अणुओं में, इनकेआंतरिक कोणीय आवेग, जिसे ‘स्पिन’ (Spin) कहा जाता है, के कारण विभिन्न स्थितियां हासिल की जा सकती है। 0 तथा 1 की दो स्थितियां को अणुओं के स्पिन से व्यक्त किया जाता है।

पारंपरिक कंप्यूटर में सूचना को एकल नंबर 0 या 1 के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

क्वांटम कंप्यूटर में क्यूबिट्स (Qubits) का उपयोग किया जाता है जिसे एक साथ 0 और 1 के रूप में दर्शाया जाता है, जिससे अधिक प्रसंस्करण क्षमता प्राप्त होती है।

संभावनाएं:

हालांकि, क्वांटम कंप्यूटर अभी अपने प्रारंभिक अवस्था में है, फिर भी इसे कंप्यूटर की क्षमता और प्रोसेसिंग गति में आमूल-चूल सुधार करने की कुंजी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे कंप्यूटर बड़ी प्रणालियों और भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में प्रगति को बढ़ावा देने में सक्षम होंगे।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (GBS)

संदर्भ:

एक दुर्लभ जटिल मामले में, कोविड -19 से संक्रमित कुछ रोगियों को गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (Guillain Barre Syndrome- GBS) से पीड़ित पाया गया है। भारत में अगस्त से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।

गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (GBS) क्या है?

  1. यह एक बहुत ही दुर्लभस्वप्रतिरक्षी विकार (Autoimmune Disorder) है।
  2. इसमें रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली कोरोनोवायरस को नष्ट करने के प्रयास में गलती सेपरिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) पर हमला करना शुरू कर देती है।
  3. परिधीय तंत्रिका तंत्र तंत्रिकाओं का एक नेटवर्क होता है जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी द्वारा शरीर के विभिन्न हिस्सों से संबद्ध होता है। इस पर हमला करने से शरीर के अंगों की कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है।
  4. गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (GBS), बैक्टीरिया या वायरल संक्रमणके कारण होता है।
  5. सिंड्रोम से प्रभावित होने के प्रारम्भिक लक्षणों में त्वचा में झुनझुनी या खुजली की अनुभूति होती है, इसके बाद मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द और सुन्न होने लगती है।

 

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