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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

क्वांटम तकनीक और उसके अनुप्रयोग पर राष्ट्रीय मिशन

समाचार में क्यों?    

हाल ही में केंद्र सरकार ने बजट 2020-21 में क्वांटम तकनीक और उसके अनुप्रयोग पर राष्ट्रीय मिशन (National Mission on Quantum Technologies & Applications- NMQTA) की घोषणा की है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु :

  • इस मिशन के अंतर्गत क्वांटम प्रौद्योगिकी के विकास हेतु 5 वर्षों के लिये 8000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
  • इस मिशन का क्रियान्वयन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science & Technology) द्वारा किया जाएगा।
  • चूँकि नई अर्थव्यवस्था नवाचार पर आधारित है तथा वर्तमान आर्थिक व्यवस्था को बाधित करती है क्योंकि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स, 3 डी प्रिंटिंग, ड्रोन, डीएनए डेटा स्टोरेज, क्वांटम कंप्यूटिंग आदि द्वारा दुनिया के आर्थिक विकास का पुनः निर्धारण किया जा रहा है इसलिये क्वांटम तकनीक के विकास एवं विस्तार की दिशा में उठाया गया यह कदम महत्त्वपूर्ण है।
  • यदि भारत इस प्रौद्योगिकी (क्वांटम) में सफल रहता है तो भारत इस तकनीक में कामयाब होने वाला विश्व का तीसरा देश होगा।

मिशन का उद्देश्य :

  • इस मिशन का उद्देश्य भारत में क्वांटम तकनीक को विकसित कर देश के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देकर प्रगतिशील बनाना है।
  • क्वांटम तकनीक के विकास से कंप्यूटिंग, संचार, साइबर सुरक्षा क्षेत्र में नए आयाम सृजित किये जा सकते हैं।

मिशन के फोकस क्षेत्र

  1. आधारभूत विज्ञान से संबंधित क्षेत्र
  2. अनुवाद संबंधी अनुसंधान
  3. तकनीक का विकास

राष्ट्रीय महत्त्व के अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में उच्च कौशल युक्त नौकरियों, मानव संसाधन का विकास, स्टार्ट-अप और उद्यमिता के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो तकनीकी विकास का नेतृत्व करता है।

मिशन का महत्त्व :

  • यह मिशन अगली पीढ़ी के लिये कौशल युक्त जनशक्ति तैयार करने, अनुवाद संबंधी अनुसंधान को बढ़ावा देने और उद्यमिता एवं स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को प्रोत्साहित करने में सहायता करेगा।
  • क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी विकास और उच्च शिक्षा विज्ञान तथा इंजीनियरिंग विषयों में उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा देकर भारत को अन्य उन्नत देशों के समकक्ष लाया जा सकता है और कई प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ तेज़ी से एक बड़ी विघटनकारी क्षमता के साथ विश्व स्तर पर विकसित हो रही हैं। अगली पीढ़ी की परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों जैसे- क्वांटम कंप्यूटर और कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम कुंजी वितरण, एन्क्रिप्शन, क्रिप्ट विश्लेषण, क्वांटम डिवाइस, क्वांटम सेंसिंग, क्वांटम सामग्री, क्वांटम घड़ी आदि को इस मिशन के तहत प्रेरित किया जा सकता है।
  • क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विस्तार एयरो-स्पेस इंजीनियरिंग, न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन (Numerical Weather Prediction), सिमुलेशन, संचार और वित्तीय लेनदेन, साइबर सुरक्षा, उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा इत्यादि क्षेत्र को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।
  • यह मिशन समाज की बढ़ती तकनीकी आवश्यकताओं को संबोधित करने में सक्षम होगा और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रमुख देशों के अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी रुझानों और सड़कों के मानचित्रण को ध्यान में रखेगा।
  • इस मिशन के कार्यान्वयन से क्वांटम कंप्यूटर, अवरोध मुक्त सुरक्षित संचार व्यवस्था, क्वांटम एन्क्रिप्शन, क्रिप्ट-विश्लेषण और इससे संबंधित तकनीकें विकसित होंगी जिससे देश में विशिष्ट राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान में सहायता प्राप्त होगी।
  • क्वांटम प्रौद्योगिकियों की सीमा एक प्रमुख प्रौद्योगिकी व्यवधान है, जो गणना, संचार और एन्क्रिप्शन के संपूर्ण प्रतिमान को बदल देगी। किंतु यह माना जाता है कि इस प्रौद्योगिकी से उभरते हुए क्षेत्र में बढ़त हासिल करने वाले देशों को बहुपक्षीय आर्थिक विकास और नेतृत्व की भूमिका निभाने से अधिक लाभ प्राप्त होगा।

क्वांटम प्रौद्योगिकी के बारे में :

  • क्वांटम प्रौद्योगिकी क्वांटम सिद्धांत पर आधारित है, जो परमाणु और उप-परमाणु स्तर पर ऊर्जा और पदार्थ की प्रकृति की व्याख्या करती है।
  • इस तकनीक की सहायता से डेटा और इन्फॉर्मेशन को कम-से-कम समय में प्रोसेस किया जा सकता है।
  • क्वांटम कंप्यूटर की मदद से कंप्यूटिंग से जुड़े टास्क कम-से-कम समय में किए जा सकते हैं।
  • क्वांटम कंप्यूटर्स क्वांटम टू लेवल सिस्टम (क्वांटम बिट्स या क्यूबिट्स) का उपयोग करके जानकारी संग्रहीत करते हैं और जो क्लासिकल बिट्स के विपरीत सुपर स्पेशल स्टेट्स में तैयार किये जा सकते हैं।
  • यह महत्त्वपूर्ण क्षमता क्वांटम कंप्यूटरों को पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में बेहद शक्तिशाली बनाती है।

आगे की राह :

  • सरकार और उद्योग दोनों के लिये यह अनिवार्य हो गया है कि वे इन उभरती और विघटनकारी तकनीकों को विकसित करने के लिये तत्पर रहें जिससे कि संचार, वित्तीय लेन-देन, प्रतिस्पर्द्धी सामाजिक प्रगति, रोज़गार, आर्थिक विकास और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
  • सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम अत्यंत प्रगतिशील है किंतु अब सरकार को इस मिशन की सफलता की दिशा में व्यापक कदम उठाने की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

औद्योगिक पार्क:

  • भारत की पहली हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) द्वारा भारत में स्थापित कुल औद्योगिक पार्कों की संख्या के बारे में जानकारी साझा की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • वर्ष 2014 के बाद देश में बनाए गए औद्योगिक पार्कों की संख्या राज्य / संघ राज्य क्षेत्रों के स्तर पर सही ढंग से व्यवस्थित नहीं है।
  • हालाँकि उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade- DPIIT) द्वारा औद्योगिक पार्कों की सूचना से संबंधित एक केंद्रीकृत सिस्टम विकसित किया गया है जो औद्योगिक सूचना प्रणाली (Industrial Information System- IIS) पर उपलब्ध है और इस विवरण को संबंधित राज्यों द्वारा नियमित अंतराल पर अपडेट किया जाता है।
  • संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्‍चित करने और विनिर्माण क्षेत्र की दक्षता बढ़ाने के लिये DIPP ने मई 2017 में औद्योगिक सूचना प्रणाली (Industrial Information System- IIS) लॉन्च की थी, जो देश भर में फैले औद्योगिक क्षेत्रों और क्‍लस्‍टरों के लिये GIS आधारित डेटाबेस है।
  • यह पोर्टल कच्‍चे माल यथा- कृषि, बागवानी, खनिजों एवं प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्‍धता, महत्त्वपूर्ण लॉजिस्‍टिक्स केंद्रों से दूरी, भू-भाग की परतों और शहरी बुनियादी अवसंरचना सहित समस्‍त औद्योगिक सूचनाओं की नि:शुल्‍क एवं आसान पहुँच प्रदान करने वाला एकल स्‍थल केंद्र है।

औद्योगिक पार्क योजना-2002

  • यह योजना ऐसे किसी भी उपक्रम पर लागू होती है जिसने 1 अप्रैल, 1997 से 31 मार्च, 2006 की अवधि तक औद्योगिक पार्क का विकास, संचालन तथा रखरखाव किया।
  • कुछ अन्य मामलों में जहाँ एक उपक्रम 1 अप्रैल, 1999 को या उसके बाद एक औद्योगिक पार्क विकसित करता है और ऐसे औद्योगिक पार्क के संचालन एवं रखरखाव को किसी अन्य उपक्रम को स्थानांतरित कर देता है, इस तरह के स्थानांतरित उपक्रम को लगातार दस वर्षों तक शेष अवधि के लिये लाभ लेने की अनुमति दी जाएगी जबकि ऑपरेशन और रखरखाव का काम स्थानांतरित उपक्रम को नहीं दिया गया था।

भारत में कुछ प्रमुख औद्योगिक पार्क: महाराष्ट्र (447), कर्नाटक (370), राजस्थान (364), गुजरात (351), उत्तर प्रदेश (342), आंध्र प्रदेश (330)

 

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