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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

कोहला जलविद्युत् परियोजना

(G.S. Paper-II)

  • यह जलवविद्युत् परियोजना PoK में बहने वाली झेलम नदी के ऊपर बनाई जायेगी.
  • इस परियोजना का उद्देश्य पाकिस्तान के लोगों को पांच अरब से ज्यादा साफ और कम लागत वाली     बिजली की यूनिट उपलब्ध करानी है.
  • पाकिस्तान में स्वतंत्र पावर प्रोड्यूसर के रूप में होने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश है.

दियामर बाशा परियोजना क्या है?

  • 2010 से पाकिस्तान POK के गिलगित-बाल्टिस्तान में सिंधु नदी पर दियामर बाशा बांध बनाने     की कोशिश कर रहा है लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव हो नहीं पा रहा था. कुछ समय     पहले पाकिस्तानी सेना की कमर्शियल विंग ने इस बांध के निर्माण हेतु CPEC के अंतर्गत चीनी     कंपनी चाइना पावर के साथ समझौता किया है जिसके कारण इस परियोजना में तेजी आने की     संभावना बढ़ गई है.

CPEC-

  • CPEC चीन के One Belt One Road (OBOR) कार्यक्रम का एक अंग है.
  • CPEC 51 अरब डॉलर की कई परियोजनाओं का समूह है.
  • प्रस्तावित परियोजना के लिए पाकिस्तान सरकार को जिन संस्थाओं द्वारा धन मुहैया कराया     जाएगा, वे हैं – EXIM बैंक ऑफ़ चाइना, चाइना डेवलपमेंट बैंक और इंडस्ट्रियल & कमर्शियल बैंक     ऑफ़ चाइना.
  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का उद्देश्य पाकिस्तान के बुनियादी ढांचों को तेजी से विस्तार     करना और उन्नत करना है जिससे चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हो जाएँ.
  • CPEC अंततोगत्वा दक्षिणी-पश्चिमी पाकिस्तान के ग्वादर शहर को चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र     Xinjiang को राजमार्गों और रेलमार्गों से जोड़ेगा.
  • CPEC की लम्बाई 3,000 km है जिसमें राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन बिछेगी.

क्या है OBOR परियोजना?

यह चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना है जो 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरू की गई थी. इसे ‘सिल्क रोड इकॉनमिक बेल्ट’ और 21वीं सदी के ‘समुद्री सिल्क रोड’ के रूप में भी जाना जाता है। यह एक विकास रणनीति है जो कनेक्टिविटी पर केंद्रित है. इसके माध्यम से सड़कों, रेल, बंदरगाह, पाइपलाइनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को ज़मीन और समुद्र होते हुए एशिया, यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने का विचार है. इसका एक उद्देश्य यह भी है कि इसके द्वारा चीन अपना वैश्विक स्तर पर प्रभुत्व बनाना चाहता है.

क्या भारत के लिए यह चिंता की बात है?

गलियारा का हिस्सा PoK से होकर गुजरेगा जिसे भारत अपना अभिन्न अंग मानता है. भारत का कहना है कि यह गलियारा उसकी क्षेत्रीय अखंडता को आहत करता है. CPEC के कारण हिन्द महासागर में चीन का दबदबा बढ़ सकता है जिससे भारतीय हितों को क्षति पहुँच सकती है. अगर हम चीन द्वारा संचालित नीतियों जैसे स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स, BCIM (बांग्लादेश-चीन-म्यांमार-भारत) कारीडोर और CPEC को समन्वित रूप से देखें तो चीन चारों ओर से भारत को घेर लेगा जो कि भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ग्लोब्बा एंडरसोनी

लगभग 136 वर्षों के अंतराल के बाद पुणे एवं केरल के शोधकर्त्ताओं की टीम ने तीस्ता नदी घाटी क्षेत्र के पास सिक्किम हिमालय में ग्लोब्बा एंडरसोनी (Globba Andersonii) नामक एक दुर्लभ व गंभीर रूप से लुप्तप्राय पौधे की प्रजाति को पुनः खोजा है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस पौधे को आमतौर पर ‘डांसिंग लेडीज़’ (Dancing Ladies)’ या ‘स्वान फ्लावर्स’ (Swan     Flowers) के रूप में जाना जाता है।
  • इस पौधे को इससे पहले वर्ष 1875 में देखा गया था। इसके बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था।
  • इस प्रजाति के संग्रह के शुरुआती रिकॉर्ड वर्ष 1862-70 की अवधि के बीच के थे जब इसे स्कॉटिश     वनस्पतिशास्त्री थॉमस एंडरसन (Thomas Anderson) ने सिक्किम एवं दार्जिलिंग से एकत्र किया     था। इसके बाद वर्ष 1875 में ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री सर जॉर्ज किंग (Sir George King) ने     सिक्किम हिमालय से इसे एकत्र किया था।

ग्लोब्बा एंडरसोनी (Globba Andersonii) की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

  • सफेद फूल
  • गैर-अनुबंध परागकोष (एक पुंकेसर का भाग जिसमें पराग होता है)
  • पीला अधर
  • इस प्रजाति को ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) और ‘संकीर्ण रूप से स्थानिक’     (Narrowly Endemic) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह प्रजाति मुख्य रूप से तीस्ता नदी घाटी (Teesta River Valley) क्षेत्र तक ही सीमित है जिसमें     सिक्किम हिमालय एवं दार्जिलिंग पर्वत श्रृंखला शामिल हैं।
  • यह पौधा आमतौर पर सदाबहार वनों के उपांत में चट्टानी ढलानों पर लिथोफाइट (चट्टान या पत्थर     पर उगने वाला पौधा) के रूप में घने क्षेत्रों में उगता है।

जी4 वायरस

चीन में वैज्ञानिकों द्वारा एक नए वायरस जी4 (G4) की खोज की गई है जो वर्ष 2009 के स्वाइन फ्लू से काफी मिलता-जुलता है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस जी4 वायरस का पूरा नाम जी4 ईए एच1 एन1 (G4 EA H1N1) है। इसमें मनुष्यों में महामारी     फैलाने की क्षमता है।
  • चीन में सुअरों के लिये निगरानी कार्यक्रम के दौरान वहाँ के नेशनल इन्फ्लुएंज़ा सेंटर (National     Influenza Centre) सहित कई संस्थानों में वैज्ञानिकों द्वारा G4 वायरस का पता लगाया गया था।
  • यह निगरानी कार्यक्रम वर्ष 2011-18 के बीच चीन के 10 प्रांतों में सूअरों के 30,000 से अधिक स्वाब     (Swab) नमूनों को एकत्र करके शुरू किया गया था।
  • इन नमूनों में से शोधकर्त्ताओं ने 179 स्वाइन फ्लू वायरस को अलग किया था जिनमें से अधिकांश     नए पहचाने गए जी4 वायरस के थे।
  • परीक्षणों में पाया गया कि यह वायरस ज़ूनोटिक संक्रमण (पशु से मानव में) उत्पन्न कर सकता है     किंतु अभी तक वायरस के व्यक्ति-से-व्यक्ति में संचरण के कोई सबूत नहीं हैं।

वैज्ञानिकों का मानना हैं कि नया G4 वायरस, H1N1 वायरस का ही एक परंपरागत रूप है जो वर्ष     2009 की स्वाइन फ्लू महामारी के लिये ज़िम्मेदार था।

 

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