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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

कैलिफोर्निया का डेटा गोपनीयता कानून

समाचार में क्यों?

हाल ही में कैलिफोर्निया में कैलिफोर्निया उपभोक्ता गोपनीयता अधिनियम (California Consumer Privacy Act- CCPA) पारित किया गया जो कि इस तरह का पहला गोपनीयता कानून है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु :

  • यह कानून 1 जनवरी, 2020 से प्रभावी हुआ है जो कैलिफोर्निया को कंपनियों द्वारा डेटा के उपयोग को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
  • इन नियंत्रणों के अंतर्गत डेटा तक पहुँचने का अधिकार, डेटा के हटा दिये जाने पर डेटा के बारे में पूछने का अधिकार और तीसरे पक्ष को इसकी बिक्री रोकने का अधिकार शामिल है।
  • इंटरनेट की वैश्विक प्रकृति के कारण यह परिवर्तन दुनिया भर के उपयोगकर्त्ताओं को प्रभावित करेगा।
  • यह कानून उपभोक्ताओं को बड़ी कंपनियों से अपनी जानकारी पर नियंत्रण वापस लेने का अधिकार देता है।

CCPA कैलिफोर्निया के उपयोगकर्त्ताओं को क्या अधिकार देता है?

  • इस कानून के अंतर्गत उपयोगकर्त्ताओं को यह जानने का अधिकार दिया जाता है कि कंपनियाँ उनकी कौन सी व्यक्तिगत जानकारियाँ एकत्र करती हैं। व्यक्तिगत जानकारी किसी भी ऐसी जानकारी को संदर्भित करती है जिसे उपयोगकर्त्ता से वापस जोड़ा जा सकता है।
  • उपभोक्ता यह अनुरोध कर सकते हैं और जानकारी प्राप्त सकते हैं कि कंपनियाँ उनके बारे में क्या निष्कर्ष निकालती हैं तथा किसी तीसरे पक्ष को दी या बेची जा रही उनकी व्यक्तिगत जानकारी के बारे में उन्हें विवरण देखने का अधिकार है।
  • उपभोक्ता कंपनियों से अपना व्यक्तिगत डेटा डिलीट करने को कह सकता है तथा अपने डेटा को किसी तीसरे पक्ष को बेचने से मना कर सकता है।
  • इस कानून में कुछ अपवाद भी हैं, जैसे- लेनदेन को पूरा करने के लिये आवश्यक जानकारी प्राप्त करना, सेवा प्रदान करने हेतु आवश्यक जानकारी प्राप्त करना, उपभोक्ता सुरक्षा हेतु जानकारी प्राप्त करना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने हेतु जानकारी प्राप्त करना।
  • उपभोक्ता मुफ्त में एकत्र की गई व्यक्तिगत जानकारी की एक प्रति प्राप्त कर सकते हैं तथा 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों की जानकारी तीसरे पक्ष को बेचने के लिये कंपनियों को बच्चे के माता-पिता से अनुमति लेनी अनिवार्य है।

यह कानून किन कंपनियों पर लागू होता है?

  • यह कानून केवल 25 मिलियन डॉलर से अधिक के सकल वार्षिक राजस्व वाले व्यवसायों पर लागू होता है।
  • यह कानून कैलिफोर्निया में 50,000 या उससे अधिक उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी खरीदने, प्राप्त करने या बेचने वाले व्यवसायों पर लागू होता है।
  • जो कंपनियाँ उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी को बेचने से उनके वार्षिक राजस्व का आधे से अधिक प्राप्त करते हैं,उन पर भी यह कानून लागू होगा।
  • यह कानून केवल उन कंपनियों पर लागू नहीं होता जो राज्य में काम करते हैं बल्कि कैलिफोर्निया के निवासियों की जानकारी एकत्र करने वाली सभी कंपनियों पर लागू होता है।
  • अनजाने में इस कानून के उल्लंघन पर 2,500 डॉलर का तथा जान-बूझकर कानून के उल्लंघन पर 7,500 डॉलर का जुर्माना लगेगा।
  • कुछ अध्ययनों का अनुमान है कि प्रारंभ में मानकों को पूरा करने के लिये कंपनियों को 55 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा, जिसमें से अगले एक दशक में 16 बिलियन डॉलर खर्च किये जाएंगे।
  • यह कानून हर साल कैलिफोर्निया में विज्ञापन के लिये उपयोग की जाने वाली 12 बिलियन डॉलर की व्यक्तिगत जानकारी की रक्षा करेगा।

इस कानून के बाद व्यावहारिक रूप में क्या परिवर्तन होंगे?

  • 1 जनवरी से यह कानून लागू हो गया, लेकिन कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल ने अभी तक इस अधिनियम को अनुमति नहीं दी है। नियमों को अंतिम रूप देने के बाद या 1 जुलाई तक अटॉर्नी जनरल द्वारा कार्रवाई करने की अनुमति दी जा सकती है।
  • कंपनियों को उपभोक्ताओं के अनुरोध की प्राप्ति के लिये वेब पेज और फोन नंबर को निर्धारित करने की आवश्यकता होगी। वेबसाइटों पर उपभोक्ताओं को एक नया विकल्प “मेरी व्यक्तिगत जानकारी मत बेचो (Do Not Sell My Personal Information)” देखने को मिल सकता है।
  • कई बड़ी कंपनियों ने अनुपालन के लिये नई बुनियादी सुविधाओं की स्थापना की है-
  1. Google ने Google Analytics को डेटा एकत्र करने से रोकने के लिये Chrome एक्सटेंशन लॉन्च किया।
  2. Facebook ने कहा है कि कानून उन पर लागू नहीं होता है क्योंकि वे डेटा की बिक्री नहीं करते हैं और उनके पास पहले से ही ऐसी विशेषताएँ हैं जो कानून का पालन करती हैं) (जैसे कि एक उपकरण जो उपयोगकर्त्ताओं को उनकी जानकारी तक पहुँचने और हटाने की अनुमति देता है

यह कानून गैर-कैलिफोर्निया वासियों को कैसे प्रभावित करता है?

  • भारतीय कंपनियाँ जिनके ग्राहक कैलिफोर्निया में हैं, को भी इस कानून का पालन करना पड़ेगा।
  • कंपनियों के लिये ग्राहक बदलने से ज़्यादा आसान इस कानून का पालन करना है। माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और मोज़िला [मोज़िला (Mozilla) जो Firefox Browser का मालिक है, अपने ग्राहकों हेतु कानून के अनुसार परिवर्तन के लिये तैयार हैं।
  • यूरोपीय संघ के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (General Data Protection Regulation- GDPR) ने केवल यूरोपियन यूनियन को ही नहीं बल्कि पूरी यूरोपीय अर्थव्यवस्था को बदल दिया है।
  • कैलिफोर्निया का यह कानून विश्व के लिये एक नवाचार की भाँति है, जो अन्य राज्यों और देशों को समान नियमों को अपनाने के लिये प्रेरित करेगा।

उपर्युक्त कानून की आलोचना के बिंदु :

  • यह कानून उपभोक्ताओं को अपने डेटा की बिक्री रोकने का अधिकार देता है, लेकिन उनके डेटा के संग्रह को रोकने का नहीं। इस प्रकार यह कानून Google और Facebook जैसी कंपनियों पर अत्यधिक नियंत्रण नहीं रख सकता क्योंकि ये कंपनियाँ डेटा को एकत्रित करके अधिक लाभ प्राप्त करती हैं, न कि डेटा को बेच कर।
  • विज्ञापन देने वाली कंपनियाँ Facebook जैसी कंपनियों को उनके द्वारा एकत्रित डेटा के आधार पर अपने ग्राहकों को लक्षित करने के लिये उन्हें पैसा देती हैं न कि उनसे डेटा खरीदने के लिये।
  • कुछ आलोचकों का मानना है कि यह अधिनियम उपभोक्ताओं पर इस जटिल अर्थव्यवस्था को नेविगेट करने का बोझ डालता है।
  • साथ ही कुछ आलोचकों का मानना है कि इस कानून में कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं जैसे कि तीसरे पक्ष को डेटा साझाकरण या डेटा की बिक्री से संबंधित प्रावधान अस्पष्ट है।
  • CCPA के अनुपालन में GDPR की तुलना में अधिक चुनौतियाँ होंगी।

कैलिफोर्निया उपभोक्ता गोपनीयता अधिनियम V/S प्रस्तावित डेटा संरक्षण विधेयक :

  • इनमें से कई अधिकार जैसे- डेटा की एक कॉपी एक्सेस करने का अधिकार और डिलीट करने का अधिकार भारत के व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक में भी हैं।
  • भारत का बिल सुधार का अधिकार (Right to Correction) सहित कुछ अन्य बिंदुओं को भी समाहित किये हुए है।
  • भारत का प्रस्तावित डेटा संरक्षण कानून डेटा के एकत्रीकरण से संबंधित उपभोक्ता अधिकारों पर बल देता है, जबकि कैलिफोर्निया का कानून डेटा के तीसरे पक्ष से साझाकरण या बेचे जाने से संबंधित उपभोक्ता अधिकारों पर ध्यान देता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

Iron Snow :

  • जेजीआर सॉलिड अर्थ (JGR Solid Earth) पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी का आंतरिक कोर छोटे लौह कणों से निर्मित बर्फ से बना है जिसका घनत्व पृथ्वी की सतह पर मौजूद बर्फ की तुलना में अधिक है।

मुख्य बिंदु:

  • पृथ्वी के बाह्य कोर (Outer Core) से लौह बर्फ पिघलकर आतंरिक कोर (Inner Core) में जमा हो जाती है, जिसकी मोटाई 320 मीटर है।
  • यह खोज भूकंपीय तरंगों के विश्लेषण के आधार पर की गई है। भूकंपीय तरंगें भूकंप, विस्फोट या इसी तरह के ऊर्जायुक्त स्रोत (Similar Energetic Source) से उत्पन्न कंपन होती हैं जिनका प्रसार पृथ्वी के भीतर या इसकी सतह पर होता है। जब भूकंपीय तरंगें बाह्य कोर से गुज़रती हैं तो इनकी गति धीमी हो जाती है।
  • पहले के अध्ययनों में बताया गया है कि आंतरिक और बाह्य कोर के बीच लौह बर्फ की परत मौजूद है। अतः नवीनतम जानकारी पृथ्वी के कोर से जुटाए गए पहले की सूचना को प्रमाणित करती है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार यहाँ पर क्रिस्टलीकरण संभव है और निचली बाह्य कोर का लगभग 15% हिस्सा लौह आधारित क्रिस्टल (बर्फ) से बना हो सकता है।

 

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