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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

कृषि कानूनों में सरकार द्वारा वापस लिए जाने वाले प्रस्तावित विवाद निपटान प्रावधान

G.S. Paper-III

संदर्भ:

  • नए कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर तीन सप्ताह से ज्यादा समय से विरोध कर रहे किसानों को संतुष्ट करने हेतु, इन कानूनों के प्रमुख प्रावधानों को कमजोर करने का प्रस्ताव दिया है।
  • सरकार द्वारा प्रस्तावित परिवर्तनोंमें किसानों और खरीदारों के मध्य होने वाले विवादों को एक सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में लाने की बजाय, इस अद्वितीय विवाद समाधान तंत्र को वापस किये जाना शामिल है।

‘विवाद निपटान तंत्र’ क्या है?

कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020 के तहत, खरीदार के लिए देश भर में कृषि उपज का व्यापार और वाणिज्य करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इसका अर्थ है कि किसान को पारंपरिक बाजार के अलावा राज्य में अथवा राज्य के बाहर, खरीदारों के व्यापार करने की स्वतंत्रता है।

  1. इस कानून एक विवाद समाधान तंत्र का प्रावधान भी किया गया है। किसानों के लिए विवाद समाधान तंत्र का प्रावधान करने वाली अधिनियम की धारा 8 के अनुसार, ‘किसान और व्यापारी के बीच लेनदेन से उत्पन्न किसी विवाद के मामले में, उपमंडल मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त एक सुलह बोर्डविवाद का निपटारा करेगा।
  2. क़ानून के अनुसार, सुलह बोर्ड द्वारा किया गया समाधान दोनों पार्टियों के लिए बाध्यकारीहोगा।

पक्षकारों के मध्य कोई समझौता नहीं होने की स्थिति में:

सुलह बोर्ड में लाए जाने के 30 दिनों के भीतर यदि विवाद का निपटारा नहीं किया जाता है, तो इस विवाद को निपटाने के लिए “सब-डिविजनल अथॉरिटी” के रूप में उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) द्वारा विवाद की सुनवाई की जायेगी।

सब-डिविजनल अथॉरिटी को कानून के तहत तीन प्रकार के आदेश पारित करने का अधिकार है:

  1. किसानों और व्यापारियों के लिए देय राशि की वसूली के लिए आदेश जारी करना।
  2. जुर्माना लगाने का अधिकार।
  3. इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और लेनदेन प्लेटफार्म के परिचालन अधिकार को रद्द करना अथवा अपने हिसाब से एक निश्चित अवधि के लिए निलंबित करना।

विवाद समाधान तंत्र से किसानों के असंतोष का कारण-

  1. अधिनियम की धारा15 में कहा गया है, जिन मामलों की सुनवाई और निपटान इस क़ानून अथवा इसके तहत बनाए गए नियमों के तहत किया जा सकता है, ऐसे मामलों से संबंधित कोई भी सुनवाई अथवा कार्यवाही का अधिकार किसी भी सिविल कोर्ट को नहीं होगा।
  2. इस प्रकार यह क़ानून, मुख्यतःसिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के स्थान पर उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) के अधीन भारीभरकम नौकरशाही प्रक्रिया को प्रतिस्थापित करता है।

क्या कोई कानून, किसी अदालत के अधिकार क्षेत्र को प्रतिबंधित कर सकता है?

  1. सिविल अदालतों का क्षेत्राधिकारसिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 द्वारा प्रशासित होता है। इस प्रावधान में कहा गया है कि दीवानी अदालतों के पास सिविल प्रकृति के सभी मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार है, सिवाय उन मामलों के जिन पर संज्ञान लेने को स्पष्ट रूप से या निहित रूप से वर्जित किया गया है।

अतः, वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र स्थापित करने के लिए, किसी कानून द्वारा सिविल अदालतों का क्षेत्राधिकार को प्रतिबंधित किया जा सकता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

CMS-01 उपग्रह

  • यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा PSLV-C50 के साथ प्रक्षेपित किया जाने वाला एकसंचार उपग्रह है।
  • CMS-01 को फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम के विस्तारित सी बैंड में सेवाएं प्रदान करने के लिए परिकल्पित किया गया है।
  • इसरो के अनुसार, यह भारतीय मुख्य भूमि, और अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह को कवर करेगा।
  • इस उपग्रह की कार्य-आयु सात वर्ष से अधिक होने की उम्मीद है।
  • CMS-01 भारत का 42 वां संचार उपग्रह है और PSLV का 52 वां मिशन है।

 

 

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