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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

कृषि अवसंरचना निधि

11th August, 2020

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ-

हाल ही में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा एक लाख करोड़ रूपये की कृषि अवसंरचना निधि के तहत वित् पोषण सुविधा की एक नई योजना आरंभ की गयी है।

इस योजना का आरंभ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु सरकार द्वारा चलाये जा रहे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के एक भाग रूप में किया गया है।

कृषि अवसंरचना निधि के बारे में

यह एक अखिल भारतीय केंद्रीय क्षेत्रक योजना (Central Sector Scheme) है।

  1. कृषि अवसंरचना निधिब्याज माफी तथा ऋण गारंटी के जरिये फसल उपरांत प्रबंधन अवसंरचना एवं सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के लिए व्यावहार्य परियोजनाओं में निवेश के लिए एक मध्यमदीर्धकालिक कर्ज वित्तपोषण सुविधा है।
  2. इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2020 से 2029 (10 वर्ष) होगी।

पात्रता

इस योजना के अंतर्गत, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के द्वारा एक लाख करोड़ रुपये ऋण के रूप में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PAC), विपणन सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसानों, संयुक्त देयता समूहों (Joint Liability Groups- JLG), बहुउद्देशीय सहकारी समितियों, कृषि उद्यमियों, स्टार्टअपों, आदि को उपलब्ध कराये जायेंगे।

ब्याज में छूट

इस वित्तपोषण सुविधा के अंतर्गत, सभी प्रकार के ऋणों में प्रति वर्ष 2 करोड़ रुपये की सीमा तक ब्याज में 3% की छूट प्रदान की जाएगी। यह छूट अधिकतम 7 वर्षों के लिए उपलब्ध होगी।

क्रेडिट गारंटी

  1. 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिएक्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) योजना के अंतर्गत इस वित्तपोषण सुविधा के माध्यम से पात्र उधारकर्ताओं के लिए क्रेडिट गारंटी कवरेज भी उपलब्ध होगा।
  2. इस कवरेज के लिए सरकार द्वारा शुल्क का भुगतान किया जाएगा।
  3. FPOs के मामले में, कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग (DACFW) के FPO संवर्धन योजना के अंतर्गत बनाई गई इस सुविधा से क्रेडिट गारंटी का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

कृषि अवसंरचना कोष का प्रबंधन

  1. कृषि अवसंरचना कोष का प्रबंधन और निगरानी ऑनलाइन प्रबन्धन सूचना प्रणाली (MIS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी।
  2. सही समय पर मॉनिटरिंग और प्रभावी फीडबैक की प्राप्ति को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर मॉनिटरिंग कमिटियों का गठन किया जाएगा।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)

(Comptroller and Auditor General of India)

G.S. Paper-II (National)

चर्चा में क्यों-

हाल ही में  जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू को भारत के नए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के रूप में नियुक्त किया गया है।

CAG के बारे में

  1. भारत के संविधान केभाग V के अंतर्गत अध्याय V में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के एक स्वतंत्र पद का प्रावधान किया गया है।
  2. भारत के संविधान में CAG का उल्लेखअनुच्छेद 148 – 151 के तहत किया गया है।
  3. यह भारतीयलेखा परीक्षण तथा लेखा विभाग के प्रमुख होते हैं।
  4. यहलोक वित्त के संरक्षक तथा देश की संपूर्ण वित्तीय व्यवस्था के नियंत्रक होते हैं। इसका नियंत्रण राज्य एवं केंद्र दोनों स्तरों पर होता है।
  5. इसका कर्तव्य भारत के संविधान एवं संसद की विधियों के तहतवित्तीय प्रशासन को बनाए रखना है।

नियुक्ति एवं कार्यकाल

  1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है।
  2. CAG का कार्यकाल 6 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।

कर्तव्य

  1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, भारत की संचित निधि, प्रत्येक राज्य की संचित निधि तथा प्रत्येक संघ शासित प्रदेश, जहाँ विधान सभा हो, से सभी व्यय संबंधी लेखाओं की लेखा परीक्षा करता है।
  2. वह भारत की संचित निधि और भारत के लोक लेखा सहितप्रत्येक राज्य की आकस्मिक निधि तथा लोक लेखा से सभी व्यय की लेखा परीक्षा करता है।
  3. वह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के किसी भी विभाग द्वारा सभीट्रेडिंगविनिर्माणलाभ और हानि खातोंबैलेंस शीट और अन्य अनुषंगी लेखाओं की लेखा परीक्षा करता है।
  4. वह केंद्र और प्रत्येक राज्य द्वाराअनुदान प्राप्त सभी निकायों और प्राधिकरणों की प्राप्तियों और व्यय की लेखा परीक्षा करता है, इसके साथ ही संबध नियमों द्वारा आवश्यक होने पर सरकारी कंपनियों, अन्य निगमों एवं निकायों का भी लेखा परीक्षण करता है।
  5. वहकिसी कर अथवा शुल्क की शुद्ध आगमों का निर्धारण एवं प्रमाणन करता है और इन मामलों में उसका प्रमाणपत्र अंतिम होता है

प्रतिवेदन

  1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, केंद्र और राज्य के खातों से संबंधित अपनी लेखा प्रतिवेदन राष्ट्रपति और राज्यपाल को सौंपते है, जिसे वे क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं।
  2. CAG राष्ट्रपति को तीन लेखा प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है:विनियोग लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट, वित्त लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट तथा सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट।

CAG और लोक लेखा समिति (PAC)

  1. CAG, संसद कीलोक लेखा समिति (Public Accounts Committee– PAC) के मार्गदर्शकमित्र और दार्शनिक के रूप में कार्य करता है।
  2. CAG अपने अधिदेशित विनियामक और लेखा परीक्षा दायित्वों के अतिरिक्त कार्यकारिणी द्वारा लोक वित्त के समुचित व्यय किये जाने की भी निगरानी करता है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा हेतु संवैधानिक प्रावधान

  1. CAG को कार्यकाल की सुरक्षा प्रदान की गई है। इसे केवल राष्ट्रपति द्वारा संविधान में उल्लिखित कार्यवाही के जरिये हटाया जा सकता है। इस प्रकार, वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर नहीं रहता है, यद्यपि इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की होती है।
  2. यह अपना पद त्याग करने के पश्चात किसी अन्य पद, चाहे वह केंद्र सरकार का हो अथवा राज्य सरकार का, ग्रहण नहीं कर सकता।
  3. इसका वेतन एवं अन्य सेवा शर्तें संसद द्वारा निर्धारित की जाती हैं। वेतन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर होता है।
  4. इसके वेतन में तथा अनुपस्थिति, छुट्टी, पेंशन या सेवानिवृत्ति की आयु के संबंध में और उसके अधिकारों में उसकी नियुक्ति के बाद कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
  5. भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में कार्य करने वाले लोगों की सेवा शर्तें तथा CAG की प्रशासनिक शक्तियों को राष्ट्रपति द्वारा CAG के परामर्श के बाद निर्धारित किया जाता है।
  6. CAG के कार्यालय के प्रशासनिक व्यय, जिसके अंतर्गत उस कार्यालय में सेवारत व्यक्तियों के सभी वेतन, भत्ते और पेंशन आते है, भारत की संचित निधि पर भारित होंगे। अतः इन पर संसद में मतदान नहीं हो सकता।
  7. इसके अलावा, कोई भी मंत्री संसद के दोनों सदनों में CAG का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है और किसी भी मंत्री को उसके द्वारा किए गए कार्यों के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं ले सकता है।

एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान

Eravikulam National Park

चर्चा में क्यों

6 अगस्त, 2020 को केरल के इडुक्की ज़िले में नायमक्कड़ टी एस्टेट (Nayamakkad Tea Estate) में हुए भूस्खलन में कई लोगों की मौत हो गई।

गौरतलब है कि नायमक्कड़ टी एस्टेट (Nayamakkad Tea Estate), मुन्नार (केरल) से लगभग 30 किमी. दूर स्थित है जो एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (Eravikulam National Park- ENP) से सटा हुआ है।

एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (Eravikulam National Park- ENP)

  • यह केरल के इडुक्की ज़िले के देवीकुलम तालुका में दक्षिणी पश्चिमी घाटों के हाई रेंज (कन्नन देवन हिल्स- Kannan Devan Hills) में अवस्थित है।
  • यह 97 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है और अपने दक्षिणी क्षेत्र में दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2695 मीटर) से संबद्ध है।
  • इस उद्यान का राजामलाई (Rajamalai) क्षेत्र पर्यटन के लिये प्रसिद्ध है।
  • केरल सरकार ने कन्नन देवन हिल प्रोड्यूस (Resumption of Lands) अधिनियम, 1971 [Kannan Devan Hill Produce (Resumption of lands) Act 1971] के तहत ‘कन्नन देवन हिल्स प्रोड्यूस कंपनी’ से इस क्षेत्र का अधिग्रहण किया था।
  • इसे वर्ष 1975 में एराविकुलम राजमाला वन्यजीव अभयारण्य (Eravikulam Rajamala Wildlife Sanctuary) के रूप में घोषित किया गया था और वर्ष 1978 में एक राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था।
  • इस उद्यान में पाए जाने वाले तीन प्रमुख प्रकार के पादप समुदाय हैं-
  • घास के मैदान या ग्रासलैंड्स (Grasslands)
  • क्षुप भूमि या चारागाह (Shrub Land)
  • शोला वन(Shola Forests)
  • यह उद्यान पश्चिमी घाट में अद्वितीय मोंटेन शोला-ग्रासलैंड वनस्पति (Montane Shola-Grassland vegetation) का प्रतिनिधित्त्व करता है।
  • इस उद्यान मेंनीलाकुरिंजी (Neelakurinji) (स्ट्रोबिलैंथेस कुंठिआनम – Strobilanthes Kunthianam) नामक विशेष फूल पाए जाते हैं जो प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार खिलते हैं।
  • इसके अलावा इस उद्यान में दुर्लभ स्थलीय एवंएपिफाइटिक (Epiphytic) ऑर्किड, जंगली बालसम आदि वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
  • एक एपिफाइट (Epiphyte) सूक्ष्म जीव होता है जो पौधे की सतह पर बढ़ता है और हवा, बारिश या इसके आसपास जमा होने वाले मलबे से नमी एवं पोषक तत्वों को प्राप्त करता है।
  • यह उद्यान लुप्तप्राय नीलगिरि तहर की सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

राष्ट्रीय कम्पनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण

National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT)

  • राष्ट्रीय कम्पनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) का गठन (1 जून, 2016 से प्रभावी) कम्पनी अधिनियम, 2013 के अनुभाग 410 के अंतर्गत किया गया था.
  • इसका कार्य राष्ट्रीय कम्पनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपील सुनना है.
  • यह संस्था NCLT द्वारा ऋणशोधन एवं दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC), 2016 के विभिन्न अनुभागों के अंतर्गत पारित आदेशों पर भी अपील सुनती है.
  • इसके अतिरिक्त यह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध भी अपील की सुनवाई करती है.

 

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