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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

ऑपरेशन ग्रीन को सफल बनाने की आवश्यकता: एक समग्र अवलोकन

G.S. Paper-III

संदर्भ

ऑपरेशन ग्रीन योजना की गति मूल्य स्थिरीकरण के अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के संदर्भ में बहुत धीमी है, इस गति से योजना के उद्देश्यों को प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

क्या है ऑपरेशन ग्रीन योजना?

कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओज), कृषि लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण सुविधाओं तथा व्यावसायिक प्रबंधन के प्रोत्साहन के लिए केंद्रीय बजट 2018-19 के बजट भाषण में “ऑपरेशन फ्लड” की तर्ज पर 500 करोड़ रुपए के परिव्यय से एक नई स्कीम “ऑपरेशन ग्रीन्स” की घोषणा की गई थी। इसके बाद, मंत्रालय ने टमाटर, प्याज एवं आलू (टॉप) की मूल्य श्रृंखला के एकीकृत विकास के लिए एक स्कीम का निरूपण किया है।

हाल ही में संसद में पारित हुए बजट 2021 में ऑपरेशन ग्रीन योजना का दायरा बढ़ते हुये इसमें 22 नए उत्पादों को शामिल करने की घोषणा की है।

ऑपरेशन ग्रीन योजना के उद्देश्य :

  1. टॉप उत्पादन क्लस्टरों और उनके एफपीओज को सुदृढ़ करने और उन्हें बाजार से जोड़ने के लिए लक्षित हस्तक्षेप द्वारा टॉप का उत्पादन करने वाले किसानों को मिलने वाले मूल्य में वृद्धि।
  2. टॉप क्लस्टरों में यथोचित उत्पादन योजना और दोहरे उपयोग वाली किस्मों को शामिल करते हुए उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के लिए मूल्य स्थिरीकरण।
  3. खेत स्तर पर अवसंरचना का सृजन, उपयुक्त कृषि-लॉजिस्टिक्स के विकास, यथोचित भंडारण क्षमता के सृजन तथा उपभोग केंद्रों से जुड़ान द्वारा फसलोत्तर हानियों में कमी।
  4. उत्पादन क्लस्टरों के साथ सुदृढ़ लिंकेज सहित टॉप की मूल्य श्रृंखला में खाद्य प्रसंस्करण क्षमता एवं मूल्यवर्धन में बढ़ोत्तरी।
  5. मांग और आपूर्ति तथा टॉप फसलों के मूल्य के संबंध में सही आंकड़े इकट्ठा करने और उन्हें समानुक्रमित करने के लिए एक बाजार आसूचना नेटवर्क की स्थापना।

ऑपरेशन ग्रीन में समस्याएँ

  • योजना अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल नहीं हुई है। मूल्य स्थरीकरण की दिशा में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई है।
  • योजना का दूसरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को फसल की कीमत का अधिकतम मूल्य मिले, लेकिन इस दिशा में भी योजना में कोई प्रगति नहीं दिख रही है।
  • आईसीआरआईईआर के शोध से पता चलता है कि कीमत में उतार-चढ़ाव पहले जितना ही बना हुआ है, और किसानों को अंतिम कीमत का आलू के लिए 26.6 प्रतिशत, प्याज के मामले में 29.1 प्रतिशत और टमाटर पर 32.4 प्रतिशत मूल्य ही मिलता है।

  • दुग्ध क्षेत्र में बागवानी क्षेत्र के विपरीत स्थिति है। अमूल जैसी सहकारी समितियों में उपभोक्ताओं के द्वारा किए गए भुगतान का किसानों को लगभग 75-80 प्रतिशत हिस्सा मिलता है।
  • यद्यपि ऑपरेशन ग्रीन, ऑपरेशन फ़्लड से अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योकि – ऑपरेशन ग्रीन के तहत प्रत्येक कमोडिटी की अपनी विशिष्टता, उत्पादन और खपत चक्र है।
  • ऑपरेशन ग्रीन योजना को सफल बनाने के सुझाव
  • किसी भी योजना के अच्छे परिणाम तत्काल दिखाई नहीं पड़ते है, ‘ऑपरेशन फ़्लड’ के के माध्यम से लगभग 20 वर्षों बाद दुग्ध मूल्य श्रंखला में दक्षता और समावेशीकरण को प्राप्त किया जा सका।
  • हालांकि ऑपरेशन ग्रीन, ऑपरेशन फ़्लड मे कोमोडिटी के रूप में एक ही वस्तु दूध की समरूपता के विपरीत है, बावजूद इसके ऑपरेशन फ़्लड की सफलता के अनुकरण से ऑपरेशन ग्रीन को सफल बनाया जा सकता है।
  • जिस प्रकार से ऑपरेशन फ़्लड के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना की गयी थी उसी प्रकार ऑपरेशन ग्रीन के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र विकास बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए।
  • इस नए बोर्ड का नेतृत्व करने के लिए वर्गीज कुरियन की तरह किसी ही बागवानी क्षेत्र में मूल्य श्रृंखलाओं को एक अलग आकार देने के लिए प्रतिबद्धता और क्षमता रखने वाले तकनीकी विशेषज्ञ को नियुक्त किया जाना चाहिए, जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके और उसके राजनीतिक दबाव से मुक्त हो।
  • उस व्यक्ति के लिए कम से कम पांच वर्ष के कार्यकाल के साथ साथ पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराये जाए ताकि वास्तविक परिणामों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
  • वर्तमान मे इस योजना के क्रियान्वयन और विनियमन के लिए खाद्य प्रसंस्करण ही नोडल एजेंसी है। इस मंत्रालय के संयुक्त सचिव द्वारा ही इस योजना का नेतृत्व किया जा रहा है, जिसका कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता है और समय-समय पर अलग-अलग मंत्रालयों में इनका स्थानांतरण भी होता रहता है। इसलिए उसकी जवाबदेही तय नहीं हो पाती है।
  • इस योजना के लिए उत्पादों के अनुसार क्लस्टर बनाए जाते हैं, लेकिन ऐसा देखा गया है कि इस क्लस्टरों के चयन में कोई परदर्शिता नहीं है। जिससे कुछ महत्वपूर्ण जिलों को क्लस्टरों की सूची से शामिल नहीं किया जाता है, जबकि कम महत्वपूर्ण जिलों को शामिल कर लिया जाता है। जैसे:
  • टमाटर के मामले में नासिक जोकि एक प्रसिद्ध टमाटर उत्पादक क्षेत्र होने साथ ही यहाँ पिंपलगाँव में सबसे बड़ी टमाटर की मंडी भी है, को क्लस्टर में शामिल नहीं गया है, जबकि ओडिशा (केंदुझार और मयूरभंज), गुजरात (आनंद और खेड़ा) और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से कम महत्वपूर्ण जलों को शामिल किया गया है।
  • बिहार में नालंदा को प्याज क्लस्टर में शामिल किया गया है, जबकि महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिला (जो सफेद प्याज के लिए उत्पादन करने वाला क्षेत्र है) को छोड़ दिया गया है।
  • महत्वपूर्ण आलू उत्पादन क्षेत्र पंजाब को वहाँ के मुख्यमंत्री के अनुरोध करने के बाद शामिल किया गया।
  • इस वर्ष में बजट में इस योजना में अन्य वस्तुओं को शामिल किया गया है। अतः वस्तुओं को शामिल करने और क्लस्टर चयन में मात्रात्मक और पारदर्शी मापदंड अपनाने और राजनीतिक समूहों के दबाव को दरकिनार किए जाने की आवश्यकता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

एशिया आर्थिक वार्ता

(Asia Economic Dialogue – AED)

यह भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) का प्रमुख भू-अर्थनीति सम्मेलन है।

  1. एशिया आर्थिक वार्ता (AED) 2021 का आयोजन को MEA और पुणे इंटरनेशनल सेंटर (PIC) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
  2. यह एशिया आर्थिक वार्ता का पांचवा संस्करण है, तथा पुणे इंटरनेशनल सेंटर द्वारा दूसरी बार इसका आयोजन किया जा रहा है।
  3. इस वर्ष के सम्मेलन का विषय: ‘कोविद -19 के बाद वैश्विक व्यापार एवं वित्त गतिकी’ (ग्लोबल ट्रेड एंड फाइनेंस डायनेमिक्स) है।
  4. यह एक अंतरराष्ट्रीय जियोइकोनॉमिक्स / भू-अर्थनीति सम्मेलन है, इसमें एशिया और इसके विस्तारित पड़ोस में व्यापार और वित्त गतिशीलता पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

 

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