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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

एथनॉल मिश्रित पेट्रोल – बायो-उत्प्रेरक

समाचार में क्यों?    आर्थिक मामलों के मंत्रिपरिषदीय समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs – CCEAने 2019-20 आपूर्ति वर्ष के अन्दर दिसम्बर 1 से सार्वजनिक उपक्रम की तेल विपणन कम्पनियों के द्वारा चीनी मिलों से पेट्रोल में मिश्रित करने के लिए खरीदे गये एथनोल के दाम को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। साथ ही उसने पुरानी चीनी ¼old sugar½ को एथनोल में बदलने की अनुमति भी दे दी है।

एथनोल क्या है?

  • एथनोल मूलतः 99% से अधिक शुद्धता वाला अल्कोहल ही होता है जिसका प्रयोग पेट्रोल में मिलाने के लिए होता है। एथनोल मुख्य रूप से चीनी मिलों के सह-उत्पाद खांड (molasses) से तैयार होता है।

तेल में एथनोल मिलाने के लाभ:

  • आजकल एथनोल के उत्पादन को बहुत प्रोत्साहन मिला हुआ है। सरकार ने भी ऊपर से निर्देश दे दिया है कि पेट्रोल में 10% एथनोल मिलाया जा सकता है। यह सच है कि जितना एथनोल बनेगा चीनी का उत्पादन उतना ही कम हो जाएगा।
  • यह भी सच है कि भारत में चीनी का उत्पादन अत्यधिक है और हमें खनिज तेल आयात करना पड़ता है। अतः एथनोल को पेट्रोल में मिश्रित करने का कार्यक्रम मिलों के लिए भी लाभकारी है और देश की आर्थिक स्थिति के लिए भी। विदित हो कि चीन और अमेरिका के बाद ऊर्जा की सबसे अधिक खपत भारत में ही होती है। वस्तुतः यह देश अपनी आवश्यकता का 1% कच्चा तेल आयात से प्राप्त करता है तथा 44.4% प्राकृतिक गैस के लिए भी आयात पर निर्भर रहता है।
  • भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक पेट्रोल में एथनोल का मिश्रण 20% तक कर दिया जाए. परन्तु वर्तमान में प्रत्येक वर्ष 1.55 बिलियन लीटर एथनोल उत्पादित होता है।
  • 2030 के लक्ष्य को पाने के लिए एथनोल का वार्षिक उत्पादन बढ़ाकर 10 बिलियन लीटर करना होगा।
  • एथनोल मिश्रण से कृषि क्षेत्र को सहारा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ेगीI साथ ही एथनोल-मिश्रित पेट्रोल पर्यावरण की दृष्टि भी अनुकूल रहेगा।

एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम:

  • एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को कार्यान्वित करने के लिए भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों के द्वारा होने वालीएथनॉल की खरीद की प्रक्रिया निर्धारित की है।
  • इस योजना के तहत एथनॉल की खरीद अच्छे दामों पर की जायेगी जिससे सम्बंधित मिल गन्ना किसानों के बकायों का भुगतान करने में सक्षम हो जायेंगे।
  • Bheavy खांड़ (गुड़ का एक रूप) से बनने वाले एथनॉल का दाम ऊँचा होने तथा Bheavy खांड़ एवं गन्ने के रस से उत्पन्न एथनॉल की खरीद की सुविधा के कारण EBP कार्यक्रम के तहत एथेनॉल की उपलब्धता बहुत बढ़ने की संभावना है।

विभिन्न प्रकार के जैव ईंधन:

  • बायो ऐथनॉल – यह कार्बोहाइड्रेट और फसलों एवं अन्य पौधों व घासों के रेशेदार cellulosic½ सामग्री के किण्वन से उत्पादित अल्कोहल है। सामान्यतः ईंधन की ऑक्टेन संख्या बढ़ाने के लिए इसका योजक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • जैव डीजल – यह पौधों और पशुओं से प्राप्त तेलों और वसा के ट्रांस एस्टरीफिकेशन द्वारा उत्पादित फैटी एसिड का मिथाइल या मिथाइल एस्टर है। इसका प्रत्यक्ष रूप से ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
  • बायो गैस – बायो गैस अवायवीय जीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों के अवायवीय पाचन के माध्यम से उत्पादित मीथेन है. इसे पूरक गैस प्राप्ति करने के लिए एनारोबिक डाइजेस्टर में या तो जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ डालकर अथवा ऊर्जा फसलों का उपयोग करके उत्पादन किया जा सकता है।

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति – 2018 से संभावित लाभ

  • आयत पर निर्भरता कम करती है – बड़े पैमाने पर जैव ईंधन के उत्पादन से कच्चे तेल पर आयात निर्भरता में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • स्वच्छ पर्यावरण – फसलों को जलाने में कमी लाने और कृषि अवशेषों/अपशिष्ट के जैव ईंधन में रूपांतरण में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन और अन्य कणिकीय पदार्थों में कमी आएगी।
  • नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन – एक अनुमान के अनुसार, प्रतिवर्ष भारत में 62 MMT नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (Municipal Solid Waste : MSW) उत्पन्न होता हैI यह नीति अपशिष्ट/प्लास्टिक, MSW का ड्राप इन फ्यूल (ठोस अपशिष्ट से हाइड्रोकार्बन ईंधन) में रूपांतरण को बढ़ावा देती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में अवसंरचना संबंधी निवेश पूरे देश में दूसरी पीढ़ी की जैव रिफाइनरियों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में अवसंरचना सम्बन्धी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
  • रोजगार सृजन – जैव रिफाइनरियों की स्थापना से संयंत्र परिचालनों, ग्रामीण स्तर के उद्यमों और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • किसानों के लिए अतिरिक्त आय – किसान कृषि अवशेषों/अपशिष्ट का लाभ उठा सकते हैं जिन्हें अक्सर उनके द्वारा जला कर नष्ट कर दिया जाता है। कीमत गिरने पर वे अपने अधिशेष उत्पाद उचित दाम में इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों को बेच सकते हैं।

 

Topic:  For prelims and mains:

बायो-उत्प्रेरक :

समाचार में क्यों?    चेन्नई स्थित केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (Central Leather Research Institute (CSIR-CLRI) के षोधकर्ताओं ने एमाइलेज-आधारित जैव उत्प्रेरक (Biocatalyst) विकसित किया है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • जेनेटिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) के माध्यम से एमाइलेज के एंजाइमी गुणों में सुधार किया गया।
  • इस प्रक्रिया में किसी भी रसायन का उपयोग नहीं किया जाएगा जिससे जल की रासायनिक ऑक्सीजन की मांग (Chemical Oxygen Demand) लगभग 35% कम हो जाएगी।
  • यह जैव-उत्प्रेरक चमड़े के प्रसंस्करण को पर्यावरण अनुकूल बनाने तथा इसके पूर्व-शोधन के चरण में लगने वाले समय में भी कटौती करने में सहायक होगा।
  • चमड़े के प्रसंस्करण के दौरान पूर्व-शोधन (Pre-Tanning) की प्रक्रिया कुल प्रदूषण का 60-70% उत्पन्न करती है।
  • इस जैव-उत्प्रेरक के प्रयोग से चमड़े के प्रसंस्करण के दौरान उपयोग की मात्रा में तिगुना तक कमी आएगी जिससे अपशिष्ट प्रवाह में भी कमी होगी।
  • जैव-उत्प्रेरक के प्रयोग से पर्यावरण में क्रोमियम (Chromium) की कम मात्रा का निर्वाह होगा। क्रोमियम का उपयोग कोलेजन ¼Collagen½ की स्थिरता को बढ़ाने के लिये किया जाता है।

यह कैसे कार्य करेगा?

  • यह जैव-उत्प्रेरक त्वचा में मुख्य रूप से उपस्थित ग्लाइकन शुगर (Glycosaminoglycan) के साथ 120 गुना अधिक बंधकारी ¼Binding½ होता है। एक बार जब उत्प्रेरक ग्लाइकन शुगर से बंध बनाता है तो हाइड्रोलिसिस (Hydrolysis) प्रक्रिया से ग्लाइकन शुगर चमड़े के फाइबर को मुक्त करती है।
  • इस जैव-उत्प्रेरक के प्रयोग से बंध बनाने और हाइड्रोलिसिस की प्रक्रिया त्वरित गति से होगी जबकि पारंपरिक एंजाइम फाइबर को मुक्त करने में 3 से 4 घंटे का समय लेते हैं।

लाभ:

  • यह चमड़े से फाइबर को मुक्त करने की प्रक्रिया को तीव्र करेगा फलस्वरूप चमड़े के उत्पादन की प्रक्रिया में लगने वाले समय में कमी आएगी।
  • यह चमड़े में भीतर तक समाएगा जिसके दो लाभ होंगे-
  • यह कोलेजन (Collagen) की स्थिरता को बढ़ाने के लिये क्रोमियम के उपयोग को कम करेगा।
  • यह तैयार चमड़े की गुणवत्ता में वृद्धि करेगा।
  • जैव-उत्प्रेरक 90 डिग्री सेल्सियस के उच्च तापमान एवं pH10 तक स्थिर रहेगा, इसलिये 90%एंजाइम को एकल प्रक्रिया के द्वारा पुनः प्राप्त कर चमड़े का पुनः उपयोग किया जा सकेगा।

जैव-उत्प्रेरक:

  • यह एक एंजाइम या प्रोटीन (Enzyme or Protein) होता है जो जैव रासायनिक प्रतिक्रिया (Biochemical Reaction) की दर को बढ़ाता है या उत्प्रेरित करता है।
  • एमाइलेज-आधारित जैव-उत्प्रेरक एक प्रोटीन की तरह होता है जो स्टार्च को सरल शुगर अणुओं में तोड़कर जैव रासायनिक प्रतिक्रिया की दर को बढ़ाता है।

रासायनिक ऑक्सीजन मांग (Chemical Oxygen Demand-COD):

  • यह जल में ऑक्सीजन की वह मात्रा है जो उपस्थित कुल कार्बनिक पदार्थो (घुलनशील अथवा अघुलनशील) के ऑक्सीकरण के लिये आवश्यक होती है।
  • यह जल प्रदूषण के मापन के लिये बेहतर विकल्प है।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद- केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान:

  • इसकी स्थापना वर्ष 1948 में हुई थी।
  • इसकी स्थापना का उद्देश्य चमड़ा उद्योग के लिये प्रौद्योगिकियों को विकसित करने, उन्हें आत्मसात करना और नवाचार के लिये देश को सक्षम बनाना था।
  • यह चमड़े से संबंधित क्षेत्रों में शिक्षा और प्रशिक्षण में प्रत्यक्ष भूमिका के माध्यम से मानव संसाधन का विकास तथा अनुसंधान में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिये अधिदेश प्राप्त है।

 

प्रीलिम्स के लिए तथ्य :

  • Mt- Kun
  • भारतीय सेना ने पिछले दिनों लद्दाख के जन्सकार और कारगिल क्षेत्रों के मध्य स्थित दूसरी सबसे ऊँची चोटी कुन पर्वत का पर्वतारोहण किया।
  • विदित हो कि इस पर्वत की ऊँचाई 7,135 मीटर है।

Exercise Yudh Abhyas 2019 :

  • अमेरिका और भारत की सेनाओं का एक संयुक्त अभ्यास – युद्ध अभ्यास 2019 – अमेरिका के वाशिंगटन में स्थित लेविस मैक-कॉर्ड संयुक्त अड्डे (JBLM) पर हो रहा है।

 

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