Online Portal Download Mobile App English ACE +91 9415011892 / 9415011893

डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम –2019, सम्पूर्ण देश में प्रभावी

22nd July, 2020

G.S. Paper-II (National)

20 जुलाई 2020 से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम –2019, सम्पूर्ण देश में प्रभावी हो गया है. इसने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम -1986 को विस्थापित किया है.

उपभोक्ता संरक्षण विधयेक, 2019 के मुख्य तथ्य-

  • अधिनियम मेंउपभोक्ता की परिभाषा देते हुए कहा गया है कि उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो मूल्य देकर कोई वस्तु अथवा सेवा खरीदता है. तात्पर्य यह है कि यदि कोई व्यक्ति फिर से बेचने के लिए अथवा वाणिज्यिक उद्देश्य से कोई वस्तु अथवा सेवा हस्तगत करता है तो वह व्यक्ति उपभोक्ता नहीं कहलायेगा.
  • अधिनियम में सब प्रकार के लेन-देन को शामिल किया गया है, जैसे – ऑफलाइन, ऑनलाइन, टेली शौपिंग, बहुस्तरीय विपणन अथवा प्रत्यक्ष विक्रय.

अधिनियम में उपभोक्ताओं के कुछ मुख्य अधिकार बताये गये हैं-

  1. जीवन एवं संपत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं एवं सेवाओं के विपणन से संरक्षण पाना
  2. वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, कार्य क्षमता, शुद्धता, मानक तथा मूल्य से सम्बंधित सूचना पाना
  3. प्रतिस्पर्धात्मक दामों पर कई प्रकार की वस्तुओं अथवा सेवाओं तक पहुँचना
  4. अन्यायपूर्ण अथवा बंधनकारी व्यापार प्रचलनों का समाधान माँगना.
  5. अधिनियम के अनुसार केंद्र सरकार एककेन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) गठित करेगी जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देना, सुरक्षित करना और लागू करना होगा. यह प्राधिकरण उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अन्यायपूर्ण व्यापारिक प्रचलनों तथा भ्रामक विज्ञापनों से सम्बंधित विषयों के लिए नियामक निकाय होगा. इस प्राधिकरण में एक अन्वेषण शाखा भी होगी जिसका प्रमुख एक महानिदेशक होगा जो इन उल्लंघनों के विषय में जाँच अथवा विवेचना कर सकेगा.
  6. असत्य अथवा भ्रामक विज्ञापन के लिए CCPA निर्माता अथवा प्रचारकर्ता को10 लाख रु. तक का आर्थिक दंड एवं दो वर्षों के कारावास का दंड लगा सकता है. यदि कोई निर्माता अथवा प्रचारकर्ता ऐसा अपराध दुबारा करता है तो उसपर 50 लाख रु. तक का आर्थिक दंड एवं पाँच वर्षों के कारावास का दंड लगाया जा सकता है.

उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग (CDRC)-

  • अधिनियम में एकउपभोक्ता विवाद समाधान आयोगों (Consumer Disputes Redressal Commission – CDRCs) की अभिकल्पना भी है. ये आयोग राष्ट्रीय, राज्यीय तथा जिले के स्तर पर गठित होंगे. इन आयोगों के समक्ष कोई भी उपभोक्ता इन वस्तुओं के लिए शिकायत दायर कर सकता है – अन्यायपूर्ण अथवा बंधनकारी व्यापारिक प्रचलन, दोषयुक्त वस्तु अथवा सेवा, अधिक अथवा छुपा हुआ दाम लगाना, जीवन एवं सम्पत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं अथवा सेवाओं के विक्रय का प्रस्ताव.
  • अधिनियम में विभिन्न CDRCs के लिए अधिकार क्षेत्रों का वर्णन किया गया है. जिला-स्तरीय CDRC उन शिकायतों को देखेगा जिनमें सम्बंधित वस्तु एवं सेवा का मूल्यएक करोड़ रु. के अन्दर हैराज्य-स्तरीय CDRC उन शिकायतों को देखेगा जिनमें वस्तुओं अथवा सेवाओं का मूल्य एक करोड़ रु. से दस करोड़ रु. के बीच होगा. दस करोड़ रु. से अधिक मूल्य वाली वस्तु एवं सेवा की शिकायतें राष्ट्रीय CDRC द्वारा देखी जाएँगी.

CCPA के कार्य-

  1. उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में जाँच एवं विवेचना करना तथा समुचित मंच पर मुकदमा दायर करना.
  2. हानिकारक वस्तुओं या सेवाओं को वापस करने और चुकाए गये मूल्य को लौटाने के विषय में आदेश निर्गत करना एवं अधिनियम में परिभाषित अन्यायपूर्ण व्यापरिक प्रथाओं को बंद करना.
  3. झूठा अथवा भ्रामक विज्ञापन बंद करने अथवा उसमें सुधार करने के लिए सम्बंधित व्यापारी/निर्माता/प्रचारकर्ता/विज्ञापनकर्ता/प्रकाशक को निर्देश निर्गत करना.
  4. दंड लगाना, एवं
  5. उपभोक्ताओं को असुरक्षित वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रति सतर्क करने के लिए सूचनाएँ निर्गत करना.

मातृ मृत्यु अनुपात में गिरावट

G.S. Paper-II (National)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रजिस्ट्रार जनरल के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Office of the Registrar General’s Sample Registration System-SRS) के कार्यालय ने भारत में वर्ष 2016-18 में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio-MMR) पर एक विशेष बुलेटिन जारी किया है।

मातृ मृत्यु दर  क्या है?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, MMR गर्भावस्था या उसके प्रबंधन से संबंधित किसी भी कारण से (आकस्मिक या अप्रत्याशित कारणों को छोड़कर) प्रति 100,000 जीवित जन्मों में           मातृ मृत्यु की वार्षिक संख्या है।
  • मातृ मृत्यु दर दुनिया के सभी देशों में प्रसव के पूर्व या उसके दौरान या बाद में माताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा में सुधार के प्रयासों के लिये एक प्रमुख प्रदर्शन संकेतक है।

रजिस्ट्रार जनरल का कार्यालय (The Office of the Registrar General)-

  • यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • जनसंख्या की गणना करने और देश में मृत्यु और जन्म के पंजीकरण के कार्यान्वयन के अलावा, यह नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System-SRS) का उपयोग करके प्रजनन      और मृत्यु दर के संबंध में अनुमान प्रस्तुत करता है।
  • SRS देश का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय नमूना सर्वेक्षण है जिसमें अन्य संकेतक राष्ट्रीय प्रतिनिधि नमूने के माध्यम से मातृ मृत्यु दर का प्रत्यक्ष अनुमान प्रदान करते हैं।
  • वर्बल ऑटोप्सी (Verbal Autopsy- VA) उपकरणों को नियमित आधार पर SRS के तहत दर्ज मौतों के लिए प्रबंधित किया जाता है, ताकि देश में एक विशिष्ट कारण से होने वाली मृत्यु दर का          पता लगाया जा सके।

प्रमुख बिंदु-

देश में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio)-

  • MMR वर्ष 2015-17 के 122 और वर्ष 2014-2016 के 130 के स्तर से घटकर वर्ष 2016-18 में 113 रह गई है।

विभिन्न राज्यों का MMR-

  • असम (215), उत्तर प्रदेश (197), मध्य प्रदेश (173), राजस्थान (164), छत्तीसगढ़ (159), ओडिशा (150), बिहार (149), और उत्तराखंड (99)।
  • दक्षिणी राज्यों में निम्न MMR दर्ज की गई हैं- कर्नाटक (92), आंध्र प्रदेश (65), तमिलनाडु (60), तेलंगाना (63) और केरल (43)

MMR में कमी के कारण-

  • पिछले एक दशक में किये गए सुधारों की वजह से MMR में लगातार कमी आई है। इसके अंतर्गत देश के सबसे पिछड़े तथा सीमान्त क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव, आकांक्षी ज़िलों पर विशेष ध्यान तथा अंतर-क्षेत्रक कार्यक्रमों का विशेष योगदान रहा है।

 

भारत में ऊँची मातृत्व मृत्यु दर के कारण-

  • भारत में मातृ मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में असुरक्षित गर्भपात, प्रसव-पूर्व और प्रसवोपरांत रक्त स्राव, अरक्तता, विघ्नकारी प्रसव वेदना, उच्च रक्त चापीय विकार तथा प्रसवोत्तर विषाक्ता आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त
    • बाल विवाह,
    • निर्धनता,
    • अशिक्षा, अज्ञानता तथा रूढ़िवादिता
    • दो संतानों के मध्य कम अंतर होना, अविवेकपूर्ण मातृत्व
    • अस्वास्थ्यकर सामाजिक कुरीतियाँ,
    • देश में चिकित्सालयों तथा मातृत्व केंद्रों की कमी
    • समाज में स्त्रियों की उपेक्षा तथा कल्याणकारी संस्थाओं का अभाव, आदि प्रमुख कारण हैं।

सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय कारकों की भूमिका-

  • संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों के अनुरूप नवजात और मातृ स्वास्थ्य में सुधार के लिये भारत में सामूहिक प्रयास तेज़ हुए हैं।
  • हालाँकि अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, खासकर छोटे और पृथक आबादी, विशेष रूप से महिलाएँ और बच्चों को स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता होती है।

सरकार की पहलें-

  • स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा उसकी व्यापक पहुँच में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी सरकारी योजनाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
    • इसके अंतर्गत लक्ष्य (LaQshya), पोषण अभियान, प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना तथा हाल ही में लॉन्च सुरक्षित मातृत्व आश्वासन इनिशिएटिव (SUMAN) योजना आदि शामिल है।
  • अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा देने के लिये नकद सहायता उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, इसके सफल कार्यान्वयन के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना शुरू की गई।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत ‘प्रत्येक माह की 9 तारीख’ को सभी गर्भवती महिलाओं को सार्वभौमिक तौर पर सुनिश्चित, व्यापक एवं उच्च गुणवत्ता युक्त प्रसव-पूर्व देखभाल प्रदान कराए जाने का प्रावधान है।

निष्कर्ष-

यद्यपि पिछले दो दशकों में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिये भारत ने वैश्विक औसत से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन MMR के नज़रिये से अभी लंबा सफर तय करना होगा। इस दिशा में भारत सरकार ने बहुत सी महत्त्वपूर्ण योजनाएँ और पहलें शुरू की हैं तथापि इस दिशा में समाज को भी संवेदनशील तरीके से सोचना होगा। मातृ मृत्यु के अभिशाप को खत्म करना और मातृत्व हक का सम्मान करना हमारी व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक संरचना का भी प्रमुख उत्तरदायित्व है।

PASSEX नौसैनिक मार्ग अभ्यास

G.S. Paper-III (Defence)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय नौसेना के जहाज़ों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास अमेरिकी नौसेना के ‘USS निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ के साथ एक मार्ग अभ्यास (PASSEX) का आयोजन किया। जब भी अवसर मिलता है, पूर्व नियोजित समुद्री ड्रिल के विपरीत, एक पैसेज अभ्यास का आयोजन किया जाता है। हाल ही में भारतीय नौसेना ने जापानी नौसेना और फ्राँसीसी नौसेना के साथ एक ऐसे ही PASSEX का संचालन किया था।

प्रमुख बिंदु-

PASSEX-

  • चार फ्रंटलाइन भारतीय नौसैनिक जहाज़ों मेंINS शिवालिक, INS सह्याद्री, INS कामोर्ता और INS राणा शामिल थे, जिन्होंने अभ्यास का संचालन करने के लिये ‘कैरियर USS निमित्ज’ और तीन अन्य अमेरिकी जहाज़ों के साथ मिलकर काम किया।
  • USS निमित्ज अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा विमान वाहक है।

लक्ष्य-

  • अमेरिकी और भारतीय समुद्री बलों के बीच सहयोग को बेहतर बनाना, एवं प्रशिक्षण तथा अंतर्समन्वयता को बढ़ावा देना, जिसमें वायु रक्षा भी शामिल है।

प्रभाव-

  • यह समुद्री डकैती से लेकर हिंसक अतिवाद तक, समुद्री क्षेत्र में मौजूद संकट का सामना करने के लियेदोनों पक्षों की क्षमता को बढ़ाएगा।
  • एक स्वतंत्र और खुला समुद्री क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय नियमों पर आधारित आदेश को बढ़ावा देता है जिसमें प्रत्येक देश राष्ट्रीय संप्रभुता का त्याग किये बिना अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग करने में सक्षम होता है।
  • यह संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच पहले से मौजूदमज़बूत संबंधों को और दृढ़ बनाएगा और दोनों देशों को एक-दूसरे से सीखने के अवसर भी देगा।

चीनी संदर्भ-

  • वर्तमान में भारत लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ सीमाई गतिरोध का सामना कर रहा है, ऐसे में हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना द्वारा PASSEX का आयोजन काफी अहम् है।
  • इस अभ्यास का आयोजन ऐसे समय पर किया गया है जब दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ता जा रहा है, और अमेरिकी नौसेना ने USS निमित्ज और USS रोनाल्ड रीगन को शामिल करते हुए एक प्रमुख अभ्यास का भी आयोजन किया है।
  • भारतीय नौसेना IOR में चीनी नौसैनिक जहाज़ों की आवाजाही पर कड़ी नज़र रख रही है, एंटी-पायरेसी गश्ती के नाम पर पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में चीन की गतिविधियों में काफी वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2017 में चीन ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका में जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा खोला था।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि

संदर्भ-

केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन के प्रयोजन से आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुसार, किसी व्यक्ति अथवा संस्था से राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (National Disaster Response Fund – NDRF) में अंशदान / अनुदान प्राप्‍त करने की प्रक्रिया निर्धारित की है. जिसके अनुसार, किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि में अंशदान / अनुदान दिया जा सकता हैं.

NDRF क्या है?

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुभाग46 में प्रावधान किया गया NDRF केंद्र सरकार द्वारा प्रबंधित एक ऐसा कोष है जिससे आपदा होने पर राहत एवं पुनर्वास के कार्य के लिए धनराशि खर्च की जाती है.
  • पहले इस कोष का नाम राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक कोष (NCCF) हुआ करता था. ज्ञातव्य है कि राज्यों कोराज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष अलग से उपलब्ध होता है. पैसा कम पड़ जाने पर NDRF उन्हें अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराता है.

NDRF को पैसा कहाँ से आता है?

  • NDRF के लिए धन की व्यवस्था बजट में कुछ वस्तुओं पर लगने वाले उत्पाद एवं सीमा शुल्क पर सेस लगाकर की जाती है.
  • वर्तमान में एक राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (National Calamity Contingency Duty – NCCD) भी लगाया जा रहा है जिसका पैसा NDRF को जाता है.
  • इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन अधिनियम में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था NDRF को वित्तीय योगदान कर सकता है.
  • NDRF के लेखा की जाँच भारत कानियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) करता है.

 

नवीनतम समाचार

get in touch with the best IAS Coaching in Lucknow