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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

उपचारात्मक याचिका

G.S. Paper-II

संदर्भ-

निर्भया वाद में दण्डित अभियुक्तों में से दो ने सर्वोच्च न्यायालय में उपचारात्मक याचिकाएँ (Curative petition) समर्पित की हैं. दिल्ली सत्र न्यायालय ने इस मामले से जुड़े चार अभियुक्तों को जनवरी 22 को तिहाड़ जेल में फाँसी देने का आदेश दे रखा है.

उपचारात्मक याचिका क्या है?

  1. उपचारात्मक याचिका दायर करना वहअंतिम न्यायिक उपाय है जिसका कोई व्यक्ति सहारा ले सकता है. यह उपाय तब लगाया जाता है तब किसी व्यक्ति को यह लगे कि उसे सर्वोच्च न्यायालय से भी वास्तविक न्याय नहीं मिला हो और उस व्यक्ति को यह लगता हो कि सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय में न्यायालय से कोई चूक हुई है. यह उपचार अति विरल मामलों में ही उपलब्ध होता है. इसमें जज द्वारा चैम्बर के अंदर बैठकर परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाता है. किसी-किसी विरल मामले में ऐसी याचिका पर खुले न्यायालय में भी सुनवाई होती है. यदि यह याचिका भी खारिज कर दी जाती है तब दोषी के पास राष्ट्रपति के पास क्षमादान याचिका दायर करने का अंतिम विकल्प बचता है.
  2. उपचारात्मक याचिका की अवधारणा सबसे पहले तब सामने आई थी जब सर्वोच्च न्यायालय नेरूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा एक अन्य (2002) / Rupa Ashok Hurra vs. Ashok Hurra and Anr. (2002) के अंतर्गत यह व्यवस्था दी थी कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग रोकने और न्याय की अस्पष्ट अवहेलना के निराकरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय चाहे तो अपने न्याय-निर्देशों पर अपनी मूलभूत शक्तियों का प्रयोग करते हुए फिर से विचार कर सकता है. यही आगे चलकर उपचारात्मक याचिका (curative petition) कहलाई.

उपचारात्मक याचिका (Curative Petition) स्वीकारने के लिए आवश्यक शर्तें-

  1. याचिकाकर्ता को यह सिद्ध करना होगा कि उसके मामले में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की वास्तविक अवेहलना हुई है और न्यायाधीश के द्वारा पक्षपात बरता गया है.
  2. याचिकाकर्ता को बतलाना होगा कि उसके द्वारा उल्लिखित आधार समीक्षा याचिका में वर्णित हुए थे, परन्तु इन्हें बिना पूर्ण विचार के निरस्त कर दिया था.
  3. उपचारात्मक याचिका (curative petition) उस बेंच के तीन वरिष्ठतम न्यायाधीशों को भेजी जाती है जिसने आदेश पारित किया था.
  4. यदि जजों में से अधिकांश सहमत हों कि उपचारात्मक याचिका सुनवाई के योग्य है तब उसे उसी बेंच को यथासंभव भेज दिया जाता है. यदि याचिका तथ्यहीन हो तो न्यायालय याचिकाकर्ता पर कोस्ट (cost) भी लगा सकता है.

समीक्षा की शक्ति-

संविधान के अनुच्छेद 137 में यह प्रावधान है कि संसद‌ द्वारा बनाई गई किसी विधि के या अनुच्छेद 145 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश का पुनर्विलोकन करने की शक्ति होती है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

वैनेडियम

संदर्भ:

अरुणाचल प्रदेश में पापुम पारे जिले के डेपो और तमांग क्षेत्रों में पैलियोप्रोटरोज़ोइक कार्बोसाइट फ़ाइलाइट चट्टानों में वैनेडियम की उच्च मात्रा पायी गयी है। यह भारत में वैनेडियम के प्राथमिक निक्षेप संबंधी पहली रिपोर्ट है।

प्रमुख बिंदु:

  1. वैनेडियम एक काफी महंगी धातु है जिसका उपयोग स्टील और टाइटेनियम को मजबूत करने में किया जाता है।
  2. वर्ष 2017 के दौरान समूचे विश्व में उत्पादित लगभग 84,000 टन वैनेडियम का उत्पादन किया गया, जिसमे कुल 4% का भारत में उपयोग किया गया।
  3. चीन, विश्व के 57% वैनेडियम का उत्पादन करता है। इसके द्वारा 44% धातु का उपभोग किया गया।
  4. वैनेडियम के सर्वाधिक निक्षेप चीन में हैं, उसके बाद रूस और दक्षिण अफ्रीका का स्थान है।

 

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