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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

उत्सर्जन कटौती की दिशा में अग्रसर भारत

G.S. Paper-III

संदर्भ:

  • हाल ही में, पर्यावरण मंत्री ने कहा है कि, भारत जी-20 राष्ट्रों में एकमात्र प्रमुख देश है, जो भूमंडलीय तापन (Global Warming) में वृद्धि को रोकने के लिए अपनीराष्ट्रीय निर्धारित प्रतिबद्धताओं (Nationally Determined Commitments) को पूरा करने की राह में अग्रसर है।
  • भारत द्वारा अपने सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में उत्सर्जन कटौती लक्ष्य के 21 प्रतिशत को पूरा कर लिया गया है। ज्ञात हो, भारत नेवर्ष 2030 तक उत्सर्जन में 33-35% कटौती की प्रतिबद्धता निर्धारित की गयी थी।

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, पेरिस समझौते की पांचवीं वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्रयूनाइटेड किंगडम और फ्रांस द्वारा चिली और इटली की साझेदारी में संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय जलवायु महत्वाकांक्षी शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन से भारत के पर्यावरण मंत्री द्वारा उपरोक्त टिप्पणियां की गयी थी।

‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC)-

वर्ष 2015 में, पेरिस में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र के महत्वपूर्ण जलवायु सम्मेलन से पूर्व, भारत द्वारा ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (Nationally Determined Contribution- NDC) के  रूप में तीन प्रमुख स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं की घोषणा की गयी थी:

  1. वर्ष 2030 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के मुकाबले 33-35 फीसदी तक कम करना।
  2. वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत् की हिस्सेदारी में 40% तक की वृद्धि करना।
  3. 5 से 3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने हेतु वन आवरण में वृद्धि करना।

पेरिस समझौता:

यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसे 12 दिसंबर, 2015 को पेरिस में आयोजित COP 21 में अपनाया गया था।

  1. पेरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस के अंदर सीमित रखने और तापमान वृद्धि को 5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  2. यह समझौता 4 नवंबर, 2016 को लागू किया गया और वर्तमान में, इसमें 188 सदस्य शामिल हैं।
  3. सभी पक्षकारों से, समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु महत्वाकांक्षी प्रयास किये जाने और ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) के रूप में, प्रत्येक पांच वर्ष में, अपनी प्रतिबद्धताएं जाहिर करने की अपेक्षा की जाती है।
  4. समझौते के पहले दौर में, 186 सदस्य देशों द्वारा अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) को प्रस्तुत किया गया था।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ग्रीन चारकोल

  • हाल ही में, विद्युत्मंत्रालय द्वारा ग्रीन चारकोल हैकथौन का आयोजन किया गया. इसके उद्देश्य खेत में कृषि अवशेषों के दहन की प्रथा को समाप्त करके वायु को स्वच्छ बनाना, कृषि अवशेषों से नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करना आदि हैं.
  • ग्रीन चारकोल वस्तुतः एक प्रकार का जैव ईंधन है, जिसे स्थानीय और वहनीय रूप में बनाया जा सकता है.
  • इसे बनाने के लिए, मौसम और क्षेत्र के लिए अनुकूल कृषि अपशिष्ट पदार्थों को एक भट्ठी में कार्बनीकृत (एक जैविक पदार्थ को कार्बन या कार्बन युक्त अवशेषों में परिवर्तित करना) किया जाता है. इसका दहन स्वच्छ होता है और धुएं के जोखिम को कम करता है, जो श्वसनीय संक्रमण के लिए उत्तरदायी है.

 

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