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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

उत्तर प्रदेश में ’’प्राचीन नदी’ की खुदाई

1st October 2019

समाचार में क्यों?         

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने प्रयागराज (इलाहाबाद) में एक पुरानी, सूख चुकी नदी की खुदाई शुरू की है। सूख चुकी यह नदी गंगा और यमुना नदियों को जोड़ती थी।

 

  • केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत आने वाले निकाय नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) के अधिकारियों के अनुसार, इस नदी को संभावित भूजल पुनर्भरण स्रोत के रूप में विकसित करना है
  • इस नदी का भूभौतिकीय सर्वेक्षण कार्य राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (National Geophysical Research Institute- NGRI) और केंद्रीय भू-जल बोर्ड (Central Groundwater Board)के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किया गया था।
केंद्रीय भू-जल (Central Groundwater Board)

  • भारत के भूजल संसाधनों के आर्थिक एवं पारिस्थितिकी कुशलता विकसित करना।
  • साम्यता के सिद्धांतों के आधार पर वैज्ञानिक और सतत विकास प्रबंधन।
  •  भूजल संसाधनों के प्रबंधन हेतु अन्वेषण, आकलन, संरक्षण, संवर्धन, प्रदूषण से सुरक्षा तथा वितरण सहित प्रौद्योगिकी का विकास एवं प्रचार-पसार करना।
  • राष्ट्रीय नीतियों की मॉनीटरिंग एवं कार्यान्वयन करना।

भविष्यि दृष्टिः  देश के भूजल संसाधनों का स्थायी विकास और प्रबंधन।

स्थापनाः वर्ष 1970 में कृषि मंत्रालय के तहत समन्वेषी नलकूप संगठन को पुनरूनामित कर केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की स्थापना की गई थी। वर्ष 1972 के दौरान इसका समामेलन भूविज्ञान सर्वेक्षण के भूजल विभाग के साथ कर दिया गया था। वर्तमान में यह जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है।

मुख्यालयः  फरीदाबाद (हरियाणा)

 

राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान

  • राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (CSIR) की एक संघटक अनुसंधान प्रयोगशाला है।
  • इसकी स्थापना पृथ्वी तंत्र की अत्यधिक जटिल संरचना एवं प्रक्रियाओं के बहुविषयी क्षेत्रों और उसके व्यापक रूप से आपस में जुड़े उपतंत्रों में अनुसंधान करने के उद्देश्य से वर्ष 1961 में की गई थी।
  • अनुसंधान गतिविधियाँ मुख्य रूप से तीन विषयों भूगतिकी, भूकंप जोखिम और प्राकृतिक संसाधन के अंतर्गत होती हैं।
  • NGRI उन प्राथमिक भू-संसाधनों की पहचान करने के लिये तकनीकों के कार्यान्वयन को समाविष्ट करता है, जो मानवीय सभ्यता के स्तम्भ हैं और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों एवं खनिजों के साथ-साथ भूजल, हाइड्रोकार्बन जैसे आर्थिक वृद्धि के स्रोत हैं।

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सौभाग्य योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में सभी घरों में बिजली 

समाचार में क्यों? 

जम्मू-कश्मीर में सौभाग्य योजना के तहत सभी घरों में बिजली पहुँचाकर महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है।

  • राज्य में यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया गया है।
  • यह उपलब्धि कठिन भौगोलिक भूभाग, बर्फीले इलाकों, दूर दूर बने मकानों, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से निकटता और सीमित कार्य मौसम के बावजूद हासिल की गई है।
  • जम्मू-कश्मीर बिजली विकास विभाग की टीमों ने अन्य विभागों, ग्रामसेवकों, राजस्व अधिकारियों, सार्वजनिक प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये काम किया।
  • इसके अलावा विभाग ने ग्राम ज्योति दूत और ऊर्जा विस्तार जैसे मोबाइल ऐप भी तैयार किये।

क्या है सौभाग्य योजना?

  • प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर, 2017 को की थी। इसका उद्देश्य देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सभी घरों का विद्युतीकरण सुनिश्चित करना है।
  • यह योजना मार्च, 2019 तक ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी प्रदान करके सार्वभौमिक आवासीय बिजलीकरण का लक्ष्य प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
  • आजादी के 70 वर्ष बाद भी भी 18000 गांवों का विद्युतीकरण नहीं हो पाया था, जिन्हें इस योजना के तहत विद्युतीकृत किया गया।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र में मणिपुर के लीसांग गांव का 28 अप्रैल, 2018 को अंतिम गांव के तौर पर विद्युतीकरण किया गया।
  • इन 18000 गांवों का विद्युतीकरण करना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि इनमें से अधिकांश गांव दूर-दराज के इलाकों, पहाड़ी क्षेत्रों और खराब संपर्क वाले क्षेत्रों में थे।
  • अब पूर्वी भारत में स्थिति बदल गई है, इस क्षेत्र में 18,000 गांवों में से 14,582 गांव गैर-विद्युतीकृत थे जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 4,590 गांवों में बिजली नहीं थीं। विद्युतीकृत होने के बाद अब भारत का पूर्वी क्षेत्र भारत की विकास यात्रा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
  • अब तक इस योजना के माध्यम से 86 लाख से अधिक परिवारों को विद्युतीकृत किया जा चुका है। योजना मिशन मोड पर है और यह चार करोड़ परिवारों के लिये बिजली कनेक्शन सुनिश्चित करेगी।

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प्रीलिम्स के लिए तथ्य :

बथुकम्मा:

  • बथुकम्मा, तेलंगाना राज्य का त्यौहार है और यह त्योहार राज्य की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
  • यह ‘फूलों का त्यौहार (Festival Of Flowers) है। जिसे पारंपरिक रूप से राज्य की महिलाओं द्वारा मनाया जाता है।
  • इस त्यौहार में ’’गुनुका पूलू और ’’तांगेदु पूलूजैसे फूलों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त बांटी, केमंती और नंदी-वर्द्धनम जैसे अन्य फूलों का भी प्रयोग किया जाता है।
  • यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष हिंदू कैलेंडर के तेलुगु संस्करण के अनुसार भाद्रपद अमावस्या को शुरू होता है जो नवरात्रि के नौ दिनों तक चलता है।
  • बथुकम्मा तेलंगाना का राज्य त्यौहार है।
  • तेलुगु में बथुकम्मा का अर्थ साक्षात् मातृ देवी को बुलाना है।

 

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