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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

उइगर समुदाय

10th July, 2020

(G.S. Paper-II)

  • निर्वासित उइगरों के एक समूह ने उइगर समुदाय के नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध की जांच कर रहे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत में शी जिनपिंग सहित वरिष्ठ चीनी अधिकारियों के शामिल होने के सबूत पेश किए हैं.
  • उइगर समुदाय के दो संगठनों ने इंटरनेशनल कोर्ट में मामला दाखिल किया है, उनमें ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एक्जाइल (ETGE) और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल अवेकेनिंग मूवमेंट (ETNAM) का नाम शामिल है.

चीन पर क्या आरोप है?

  • सुनने में आता है कि उइगर लोगों को शेष देश के साथ समरस बना रहा है. इसके लिए कहा जाता है कि दस लाख उइगरों, कज्जाखों और दूसरे मुसलमानों को पकड़ कर बंदी शिवरों में डाल दिया गया है जहाँ उनको अपनी पहचान छोड़ने और हान चीनियों के प्रभुत्व वाले साम्यवादी देश चीन में बेहतर ढंग से घुलने-मिलने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
  • पर चीन का कहना है कि ये सारे आरोप असत्य हैं. वस्तुतः वह उनको “अतिवादी” विचारों से मुक्त किया जा रहा है और व्यावसायिक कौशल सिखाया जा रहा है.
  • चीन ने हाल के वर्षों में में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उइगर और अन्य मुस्लिम समूहों के विरुद्ध दमनात्मक कदम उठाये हैं और चीन ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है, ठीक उसी प्रकार वर्तमान मोदी सरकार अपनी हिंदू राष्ट्रवादी नीतियों की आलोचना सह नहीं पाती और इन आरोपों को गलत ठहरा देती है.

उइगर (UIGHURS) कौन हैं?

  • उइगर मुसलमानों की एक नस्ल है जो चीन के Xinjiang प्रांत में रहती है.
  • उइगर लोग उस प्रांत की जनसंख्या के 45% हैं.
  • विदित हो कि तिब्बत की भांति Xinjiang भी चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र घोषित है.

उइगरों के विद्रोह का कारण-

  • कई दशकों से Xinjiang प्रांत में चीन की मूल हान (Han) नस्ल के लोग बसाए जा रहे हैं. आज की तिथि में यहाँ 80 लाख हान रहते हैं जबकि 1949 में इस प्रांत में 220,000 हान रहा करते थे.
  • हान लोग अधिकांश नई नौकरियों को हड़प लेते हैं और उइगर बेरोजगार रह जाते हैं.
  • उइगरों की शिकायत है कि सैनिक उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं जबकि सरकार यह दिखाती है कि उसने सभी को समान अधिकार दिए हुए हैं और विभिन्न समुदायों में समरसता है.

चीन की चिंता-

  • चीन का सोचना है कि उइगरों का अपने पड़ोसी देशों से सांस्कृतिक नाता है और वे पाकिस्तान जैसे देशों में रहने वाले लोगों के समर्थन से Xinjiang प्रांत को चीन से अलग कर एक स्वतंत्र देश बनाना चाहते हैं.
  • विदित हो Xinjiang प्रांत की सीमाएँ मंगोलिया, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिजिस्तान, ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान से मिलती है.
  • हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ा है. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस महामारी के लिए लगातार चीन को जिम्मेदार ठहराते आए हैं. वहीं अब इस बिल के कारण भी अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है.

उत्तरी चीन के एक शहर में बुबोनिक प्लेग का मामला

(G.S. Paper-III)

हाल ही में उत्तरी चीन के एक शहर में बुबोनिक प्लेग का एक संदिग्ध मामला सामने आया है. बुबोनिक प्लेग को लेकर बेन्नूर, (आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र) ने प्लेग की रोकथाम और नियंत्रण के स्तर III की चेतावनी की घोषणा की गयी है.

क्या है ब्यूबोनिक प्लेग?

  • घातक बीमारीब्यूबोनिक प्लेग (bubonic plague) को मध्य काल में ब्लैक डेथ (Black Death) के रूप में जाना जाता था.
  • बुबोनिक प्लेग बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस के कारण होता है. यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया, आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सू में पाए जाने वाले एक जूनोटिक जीवाणु होते हैं.
  • इस रोग में मरीजों को बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, कमजोरी, सूजन, लिम्फ नोड्स (जिन्हें बुबोस कहा जाता है) की अचानक शुरुआत होती है. यह रूप आमतौर पर एक संक्रमित पिस्सू के काटने से होता है. बैक्टीरिया लिम्फ नोड को बढ़ा देते हैं जहां से और अधिक बैक्टीरिया मानव शरीर में प्रवेश करते हैं. यदि रोगी को उचित एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज नहीं किया जाता है, तो बैक्टीरिया शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है.
  • इस रोग के लक्षणों में लिम्फ नोड्स में सूजन सम्मिलित हैं एवं इसका प्रभाव कमर, बगल या गर्दन में दिखता है .
  • बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में दर्द इसके अन्य लक्षण है.
  • बुबोनिक प्लेग की स्थिति में हैवी डोज के एंटीबायोटिक दवाओं के साथ तत्काल अस्पताल उपचार की आवश्यकता होती है.

एफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्पलेक्सेज़

(G.S. Paper-II)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing & Urban Affairs- MoHUA) द्वारा प्रधान मंत्री आवास योजनाशहरी (PMAY-U) के अंतर्गत एक उप-योजना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिये ‘एफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्पलेक्सेज़’ (Affordable Rental Housing Complexes- ARHC) अर्थात ‘कम किराये वाले आवासीय परिसरों’ के निर्माण को  मंज़ूरी प्रदान की गई है।

प्रमुख बिंदु

  • इस योजना के तहत वर्तमान खाली पड़े सरकारी वित्त पोषित आवासीय परिसरों को 25 वर्षों के समझौतों के माध्यम से में एफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्पलेक्सेज़ (Affordable Rental Housing       Complexes- ARHC) अर्थात किफायती किराये के आवासीय परिसरों में परिवर्तित किया जाएगा।
  • इन सरकारी परिसरों की मरम्मत, पानी, निकासी/सेप्टेज, स्वच्छता, सड़क इत्यादि आधारभूत ढाँचे से जुड़ी कमियों को दूर करके इन्हें रहने लायक बनाया जाएगा ।
  • राज्य/संघ शासित क्षेत्रों को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से इन आवासीय परिसरों का चयन करना होगा।
  • योजना के शुरुआती चरण में लगभग 3 लाख लोगों को शामिल किया जाएगा।
  • तकनीक नवाचार अनुदान के रूप में इस योजना पर 600 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च होने का अनुमान है।

लाभान्वित समूह

  • इस योज़ना के अंतर्गत विनिर्माण उद्योग, आतिथ्य सेवा, स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्ति, घरेलू/व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा निर्माण या अन्य क्षेत्रों में लगे अधिकांश लोग,     कामगार, विद्यार्थी आदि लक्षित समूह को शामिल किया गया है जो बेहतर अवसरों की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों से आते हैं।

पृष्ठभूमि

  • COVID-19 महामारी के परिणामस्वरूप देश में बड़े स्तर पर कामगारों/शहरी गरीबों का पलायन देखने को मिला है, जो बेहतर रोज़गार के अवसरों की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों से          शहरी क्षेत्रों में आए थे।
  • सामान्यत ये प्रवासी किराया बचाने के लिये झुग्गी बस्तियों, अनौपचारिक/ अनाधिकृत        कॉलोनियों या अल्प विकसित शहरी क्षेत्रों में रहते हैं।
  • ये लोग कार्यस्थलों पर जाने के लिये अपना काफी समय सड़कों पर चलकर/साइकिल चलाकर बिताते है और खर्च बचाने के लिये अपने जीवन को ज़ोखिम में डालते रहे हैं।
  • इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए 14 मई, 2020 को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एक उप-योज़ना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिये कम किराये वाले आवासीय       परिसरों (ARHC) योजना की शुरुआत की गई है।

योज़ना का महत्त्व

  • ARHC के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में कार्यस्थल के नज़दीक सस्ते किराये वाले आवासों की उपलब्धता हो सकेगी।
  • ARHC के अंतर्गत निवेश से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • ARHC द्वारा लोगों के अनावश्यक यात्रा वहन तथा प्रदूषण में कमी आएगी।
  • सरकार द्वारा वित्तपोषित खाली पड़े आवासों को किफायती उपयोग के लिये ARHC में कवर किया जाएगा।
  • इस योज़ना के तहत सरकार की खाली पड़ी ज़मीन पर ARHC का निर्माण करने से विकास करने की दिशाओं में निर्माण इकाइयों के लिये अनुकूल माहौल तैयार होगा।
  • यह योज़नाआत्मनिर्भर भारतके विज़न को पूरा करेगी

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

गोल्डन बर्डविंग नामक हिमालयी तितली की खोज

हाल ही में 88 साल बाद गोल्डन बर्डविंग नामक हिमालयी तितली की एक प्रजाति की खोज की गई है जो अपने आकार के संदर्भ में भारत की सबसे बड़ी तितली बन गई है. गोल्डन बर्डविंग नाम की यह मादा तितली के पंखों का आकार 194 मिलीमीटर है जोकि 1932 में ब्रिगेडियर विलियम हैरी इवांस द्वारा खोजे गए दक्षिणी बर्डविंग प्रजाति की तितली (190 मिलीमीटर) से बड़ा है.

बर्डविंग तितलियाँ के विषय में जानकारी-

  • बर्डविंग्स तितलियां स्वालोटेल (swallowtail) परिवार का भाग है जोकि ट्रोगोनोप्टेरा, टॉराइड्स और ओरनिथोप्टेरा कुल से संबंधित है. अभी तक संबंधित संस्थाओं के द्वारा इसके 36 प्रजातियां को मान्यता दी गई है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस कुल में और भी प्रजातियां भी शामिल हैं.
  • बर्डविंग्स तितलियां ही कुछ अनूठी विशेषताएँ होती है जिसमें उनका असाधारण आकार, कोणीय पंख और पक्षियों की तरह उड़ान शामिल है.
  • अपने आकर्षक चमकीले रंग के कारण नर तितली, तितलियों के संग्राहकों में काफी लोकप्रिय हैं.
  • इस प्रजाति में सबसे छोटी तितली क्वेकर (Neopithecops zalmora) है जिसका पंख का आकार 18 मिमी और अग्रभाग की लंबाई 8 मिमी है. इस प्रजाति में सबसे बड़ी आकार की मादा गोल्डन बर्डविंग होती हैं जिसकी अग्रभाग की लंबाई 90 मिमी है.
  • बर्डविंग्स तितलियां एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र, दक्षिण पूर्व एशिया (मुख्य भूमि समेत द्वीप समूह) और ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं.
  • सभी बर्डविंग्स तितलियांCITES (संकटग्रस्त जीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय) के परिशिष्ट II में सूचीबद्ध हैं जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार सीमित/प्रतिबंधित है. इसके साथ ही बर्डविंग्स तितलियाँ IUCN के संकटमुक्त (Least Concern) श्रेणी में आती हैं.

 

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