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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

ईरान परमाणु समझौता

14th October, 2020

G.S. Paper-II (International)

संदर्भ:

  • हाल ही में, चीन द्वारा ‘ईरान परमाणु समझौते’ का समर्थन किया गया है तथा एक नए पश्चिमी एशिया फोरम के गठन की आवश्यकता बतायी गयी है।
  • यह फोरम पश्चिम एशिया में ‘वार्ता के माध्यम से आपसी समझ को बढ़ाएगा और सुरक्षा मुद्दों के राजनीतिक और राजनयिक समाधान खोजेगा’।

पृष्ठभूमि:

ईरान, यमन में युद्ध, इराक में ईरानी प्रभाव और तेहरान पर वाशिंगटन द्वारा लगाये गए प्रतिबंधों का सऊदी अरब के समर्थन, मामलों में एक अन्य प्रमुख पश्चिम एशियाई शक्ति ‘सऊदी अरब’ के साथ कटुतापूर्ण संबंधो में उलझ गया है।

ईरान परमाणु समझौता क्या था?

ईरान परमाणु समझौता, 2015 में ईरान तथा विश्व के छह देशों अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के बीच सम्पन्न हुआ था। इस समझौते में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने पर सहमति व्यक्त की।

  • संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत तेहरान ने मध्यम संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडारण को पूर्ण रूप से समाप्त करने, निम्न-संवर्द्धित यूरेनियम के भण्डारण को 98% तक कम करने तथा आगामी 13 वर्षों में अपने गैस सेंट्रीफ्यूजों की संख्या को दो-तिहाई तक कम करने पर सहमति व्यक्त की।
  • इस समझौते के माध्यम से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाये गए प्रतिबंधों की निगरानी के लिए कठोर तंत्रों की स्थापना की गई थी।

अमेरिका इस समझौते से क्यों अलग हो गया?

  • ट्रम्प तथा इस समझौते के विरोधियों का कहना है किईरान परमाणु समझौतादोषपूर्ण है क्योंकि इससे ईरान को अरबों डॉलर की सहायता तक पहुंच प्राप्त होती है, लेकिन यह हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को ईरान द्वारा समर्थन देने पर प्रतिबंध नहीं लगाता है। इन संगठनो को अमेरिका द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।
  • अमेरिका का यह भी कहना है कि, यह समझौता ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर अंकुश नहीं लगाता है तथा यह मात्र 2030 तक लागू होगा।

जीएसटी क्षतिपूर्ति

G.S. Paper-III (Economy)

संदर्भ:

वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax- GST) परिषद, उपकर संग्रह (Cess Collections) में होने वाली कमी को पूरा करने हेतु ऋण संबंधी विवादास्पद मुद्दे पर किसी समझौते तक पहुंचने में फिर से विफल रही है।

  1. उपकर संग्रह का उपयोग, अप्रत्यक्ष कर लागू किये जाने से राज्यों को होने वाली हानि की भरपाई हेतु किया जाता है।
  2. यह क्षतिपूर्ति कमी पर बिना किसी निर्णय के समाप्त होने वाली लगातार तीसरी बैठक थी।

केंद्र और राज्यों के मध्य विवाद का प्रमुख बिंदु-

  • केंद्र का कहना है, कि वह उन राज्यों की मदद करने के लिए तैयार है जिन्होंने उपकर संग्रह में हुई हानि को पूरा करने के लिए ऋण लेने का फैसला किया है।
  • परंतु, कुछ राज्यों की मांग है, कि राज्यों पर ऋण लेने हेतु दबाव डालने के बजाय केंद्र को ऋण लेना चाहिए।

GST हानि की भरपाई हेतु केंद्र द्वारा राज्यों को भुगतान क्यों करना चाहिए?

जीएसटी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 2017 के अनुसार, राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद पहले पांच वर्षो तक, अर्थात वर्ष 2022 तक, होने वाले राजस्व के किसी भी नुकसान की भरपाई, पातक एवं विलासिता वस्तुओं (Sin and Luxury Goods), अर्थात सिगरेट और तंबाकू उत्पादों, पान मसाला, कैफीनयुक्त पेय, कोयला एवं  कुछ लक्ज़री यात्री वाहनों आदि पर लगाये गए ‘उपकरों’ की वसूली से की जाएगी।

  • हालांकि, आर्थिक मंदी के कारणजीएसटी और उपकर, दोनों के संग्रह में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट आयी है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वर्ष भुगतान किए गए मुआवजे तथा संग्रहीत उपकर के मध्य 40% का अंतर हो गया है।
  • COVID-19 के कारण अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से राज्यों को इस वर्षतीन लाख करोड़ के जीएसटी राजस्व अंतर का सामना करना पड़ सकता है। इसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अप्रत्याशित भगवान का कार्य’ (Act of God) करार दिया गया है।

क्षतिपूर्ति उपकर क्या है?

क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) के विधि-विधान जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) संशोधन विधेयक, 2017 द्वारा निर्दिष्ट किए गए थे।

  • इस अधिनियम में माना गया है कि सभी करों को जीएसटी में समाहित करने के बाद सेप्रत्येक राज्य के जीएसटी राजस्व में, वित्तीय वर्ष 2015-16 में एकत्र की गई राशि से, प्रति वर्ष 14% की दर से वृद्धि होगी
  • राज्य द्वाराकिसी भी वर्ष में इस राशि से कम करसंग्रह किये जाने पर होने वाली हानि की भरपाई की जाएगी। राज्यों को इस राशि का भुगतान प्रति दो महीने में अनंतिम खातों के आधार पर किया जाएगा, तथा प्रति वर्ष राज्य के खातों के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट किए जाने के पश्चात समायोजित किया जाएगा।
  • यह योजनापाँच वर्षोंअर्थात् जून 2022 तक के लिए वैध है।

क्षतिपूर्ति उपकर निधि:

राज्यों को राजस्व हानि होने पर क्षतिपूर्ति प्रदान करने के एक क्षतिपूर्ति उपकर निधि (Compensation cess fund) का गठन किया गया है। कुछ वस्तुओं पर अतिरिक्त उपकर लगाया जाएगा और इस उपकर का उपयोग राज्यों को मुआवजे का भुगतान करने के लिए किया जाएगा।

  1. इन वस्तुओं में पान मसाला, सिगरेट और तम्बाकू उत्पाद, वायवीय पानी, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, कोयला और कुछ यात्री मोटर वाहन सम्मिलित हैं।
  2. जीएसटी अधिनियम में कहा गया है किसंग्रीह्त उपकर तथा जीएसटी परिषद द्वारा निर्धारित की गयी इस ​​तरह की अन्य राशि को क्षतिपूर्ति उपकर निधि में जमा की जायेगी।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ:

  • हाल ही में, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग द्वारा इस वर्ष दिवाली महोत्सव में गाय के गोबर / पंचगव्य उत्पादों के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य सेकामधेनु दीपावली अभियान मनाने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया गया है।
  • राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) का लक्ष्यइस वर्ष दीपावली त्योहार के दौरान 11 करोड़ परिवारों में गाय के गोबर से बने 33 करोड़ दीयों को प्रज्वलित करना है।

अभियान का महत्व:

  • हजारों गाय आधारित उद्यमियों / किसानों / महिला उद्यमियों को व्यवसाय के अवसर पैदा करने के अलावा, गाय के गोबर से बने उत्पादों के उपयोग से स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी बनेगा।
  • चीन निर्मित दीयों का पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करके यह अभियान ‘मेक इन इंडिया’ परिकल्पना को बढ़ावा देगा और पर्यावरणीय क्षति को कम करते हुए स्वदेशी ’आंदोलन को भी प्रोत्साहित करेगा।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के बारे में:

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (Rashtriya Kamdhenu Aayog– RKA) का गठन वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गायों और गौवंश के संरक्षण, सुरक्षा और विकास तथा पशु विकास कार्यक्रम को दिशा प्रदान करने के लिए किया गया था।

  • यह मवेशियों से संबंधित योजनाओं के बारे में नीति बनाने और कार्यान्वयन को दिशा प्रदान करने के लिए एकउच्च स्तरीय स्थायी सलाहकार संस्था है।
  • राष्ट्रीय कामधेनु आयोग, राष्ट्रीय गोकुल मिशनके अभिन्न अंग के रूप में कार्य करेगा।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के कार्य:

  1. मौजूदा कानूनों, नीतियों की समीक्षा करना और साथ ही उन्नत उत्पादन और उत्पादकता हेतु गौ-धन के इष्टतम आर्थिक उपयोग के लिए उपाय सुझाना, ताकि कृषि आय में वृद्धि तथा डेयरी किसानों के लिए बेहतर व गुणवत्तापूर्ण जीवन की प्राप्ति हो सके।
  2. गायों के संरक्षण, संरक्षण, विकास और कल्याण से संबंधित नीतिगत मामलों पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को सलाह देना और मार्गदर्शन करना।
  3. जैविक खाद के उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु योजनाओं को बढ़ावा देना और रासायनिक खादों के उपयोग को कम करने हेतु किसानों द्वारा जैविक खाद में गाय के गोबर व मूत्र के उपयोग के लिए प्रोत्साहन योजनाओं सहित उपयुक्त उपायों की सिफारिश करना।
  4. गौशालाओं और गो-सदनों को तकनीकी जानकारी प्रदान करके देश में परित्यक्त गायों से संबंधित समस्याओं के समाधान संबंधी प्रावधान करना।
  5. चारागाहों और गौशालाओं को विकसित करना तथा इनके विकास हेतु निजी या सार्वजनिक संस्थानों या अन्य निकायों के साथ सहयोग करना।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

SMART Missile

  • ओडिशा तट के एक परीक्षण स्थल से भारत ने SMART नामक एक टोरपीडो का सफल परीक्षण किया है.
  • SMART का पूरा नाम है – Supersonic Missile Assisted Release of Torpedo.
  • स्मार्ट मिसाइल का प्रयोग पनडुब्बियों को ध्वस्त करने में किया जायेगा.

 

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