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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

ईरान परमाणु समझौता

G.S. Paper-II

संदर्भ:

ईरान परमाणु समझौते को पुनः लागू किए जाने के लिए बिडेन द्वारा नई मांगें रखीं गयी हैं।

क्या हैं मांगें?

ईरान को प्रॉक्सी (proxies) रूप से लेबनान, इराक, सीरिया और यमन में जारी ‘उग्र’ क्षेत्रीय गतिविधियों को वार्ता के माध्यम से हल करना होगा और इसमें सऊदी अरब जैसे अरब पड़ोसियों को शामिल करना होगा।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को इस समझौते एकतरफा रूप से अलग कर लिया और अमेरिका के कट्टर दुश्मनों के खिलाफ ‘अधिकतम दबाव’ अभियान के रूप में ईरान पर पंगु कर देने वाले प्रतिबंध लगा दिए।

संयुक्त व्यापक कार्य योजना ((Joint Comprehensive Plan of Action- JCPOA) के बारे में:

वर्ष 2015 में ईरान ने अमेरिकाब्रिटेनरूसचीनफ्रांस और जर्मनी के साथ एक समझौते में अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने पर सहमति व्यक्त की थी।

2015 के परमाणु समझौते से ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने के बदले में प्रतिबंधों से राहत प्रदान की गयी।

समझौते के तहत:

  1. अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी के साथ 2015 के समझौते में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने पर सहमत हुआ।
  2. तेहरान ने सेंट्रीफ्यूज, समृद्ध यूरेनियम और भारी पानी, परमाणु हथियारों के सभी प्रमुख घटकों के अपने भंडारों में महत्वपूर्ण कटौती करने पर सहमति व्यक्त की।
  3. समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए, सभी वार्ताकारों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त आयोग की स्थापना की गई थी।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सुमदोरोंग चू

  • वर्ष 1986–87 में, भारत और चीन के मध्यतवांग जिलेअरुणाचल प्रदेश और कोना काउंटीतिब्बत की सीमा पर स्थित सुमदोरोंग चू (Sumdorong Chu) घाटी में एक सैन्य गतिरोध हुआ था।
  • वर्ष 1962 में हुए युद्ध के बाद से, विवादितमैकमोहन रेखा पर होने वाला, यह पहला सैन्य टकराव था और इसके तीव्र होने की आशंकाएं व्यक्त की गयी थीं।

 

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